Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mrs Tajinder Kaur v. PATEL ADVANCE JV Registered Office
Complaint No. NCR144/06/76228/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2022-04-13
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Hearing Bench-3 | Sr. No. | Complaint No. | Complainant's Name | |---|---|---| | 4 | WARSI 44/06/76228/2024 | Tajinder Kaur | | 2... | vaefiene44/08/58374/2020 | Krishna Kumar Raghuvanshi | | 3 | WARS 44/08/58735/2020 | Maharaj Krishna Pandita | | 4 | NCR 44/08/79904/2024 | Ratna Aadhya | | 5 | WAAR 44/07/78560/2024 | Kanchan Agarwal | | 6 | NCR44/09/64629/2020 | Mohit Singla | | 7 | TARTS 44/02/70847/2024 | Pawan Kumar Pandey | Patel Advance JV Address: S-406, Greater Kailash 2, New [?] Respondent Presiding: Bhanu Pratap Singh (Member) Representation: For the complainant: Shri Gaurav Kumar, Advocate For the respondent: Ms. Sangita Mishra, Representative **Complaint:** Complainant Tajinder Kaur, along with 06 other complainants, has filed these cases against the respondent under Section 34 of the RERA Act. The facts of these cases are identical and there is common evidence. These cases relate to the respondent's project "Neotown Phase-I". Therefore, they are being disposed of by a single decision. Case No. [?] warhenei4a/06/76228/2024, Tajinder Kaur, will remain the lead case. **Documentary evidence:** The complainants have produced the following documentary evidence: 1. Application form 2. Allotment letter dated 26.03.2044 3. Assignment and endorsement 4. Payment details 5. Floor plan 6. Specifications 7. Receipts of the amounts deposited 8. Written statement dated 44.44.2024
The respondent has produced the following documentary evidence: 1. Written reply 2. Letter dated 34.05.2044 sent by the Greater Noida Industrial Development Authority **Statement of the parties:** | Sr. No. | Complaint No. | Complainant's Name | Provisional allotment letter / date for possession | Unit No. | Amount paid | |---|---|---|---|---|---| | 4 | Wariami44/06/76228/202 | Tajinder Kaur | 76.02 / 24+6 Month / 26.,03.2074 | E-4 / 003 | Rs. 4973,877 /— | | 2 | VaRitene44/08/58374/2020 | Krishna Kumar Raghuvanshi | 44.40.207 / 3 Month / 44.44.2048 | F-4 / 4806 | Rs. 26,9,405/- | | 3 | vrtieneiaa/08/58735/2020 | Maharaj Krishna Pandita | 04.32.206 | [?] T63 / 502 | Rs. 36,34,949 /— | | 4 | Vareiiemi44/08/79904/2024 | Ratna Aadhya | 6.07.2043 / 40+6 Month / 6.05.207 | F-3 / 4203 | Rs. 47,45,565 /- | | 5 | vaeieneiaa/07/78560/2024 | Kanchan Agarwal | 44.06.203 / 40+6 Month / 34.04,2047 | F-3 / 502 | Rs. 49,23,367 /— | | 6 | qaviignei44/09/64629/2020 | Mohit Singla | 46.92095 | D3 / 402 | Rs. 32,8,587 /— | | 7 | Vaetenei44/02/70847/202 | Pawan Kumar Pandey | 32.09 [?] / 40+6 Month / 2.2.2029 | E4 / 4404 | Rs. 77,59,555 /— | (a) In brief, the complainant submits that in the project NEOTOWN (Phase 4), Gautam Buddh Nagar, run by the respondent, she booked unit no. E-4/4003, against which she paid Rs. 49,73,877 /-- to the respondent. The complainant has requested that the deposited amount be returned with interest.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय गौतमबुद्धनगर सुनवाई पीठ-3 Ea परिवाद संख्या परिवादनी का नाम सं. 4 WARSI 44 / 06 / 76228 / 2024 ताजिन्दर कौर 2... | vaefiene44 / 08 / 58374 / 2020 कृष्णा कुमार रघुवंशी 3 WARS 44 / 08 / 58735 / 2020 महाराज कृष्ण पंडिता 4 एनसीआर। 44/08 / 79904 / 2024 ROT आध्या |5 | WAAR 44 / 07 / 78560 / 2024 कंचन अग्रवाल [6 | एनसीआर44 / 09 / 64629 / 2020 | a =—li(at |] सिंगला | 7 TARTS 44 / 02 / 70847 / 2024 पवन GAR पाण् पटेल एडवांस जेवी पता- एस-406 ग्रेटर कैलाश 2, नई eee प्रतिवादी पीठासीन : भानु प्रताप सिंह (सदस्य) प्रतिनिधित्व परिवादनी की ओर से : श्री गौरव कुमार, अधिवक्ता प्रतिवादी की ओर से : सुश्री संगीता मिश्रा, प्रतिनिधि परिवाद : परिवादनी ताजिन्दर कौर के साथ 06 अन्य परिवादीगण द्वारा प्रतिवादी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन वादों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह वाद प्रतिवादी की परियोजना "Neotown Phase-I" से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। वाद Wo warhenei4a ,/ 06 ,/ 76228 / 2024 ताजिन्दर कौर अग्रणी वाद रहेगा | OEE >> ?०8९ अभिलेखीय साक्ष्य:- परिवादनी परिवादनी द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किये गये
है- 4. आवेदन फार्म 2. आवंटन पत्र दिनांक 26.03.2044 3. असाईमेंट एंड इन्ड्रोसमेंट 4. भुगतान विवरण 5. मंजिल की योजना (Floor Plan) 6. विशेष विवरण (Specfications) 7. जमा धनराशि की रसीदें 8. लिखित अभिकथन दिनांक 44.44.2024 प्रतिवादी द्वारा अपने निम्नलिखित अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत किये गये है- 4. प्रतिवाद-पत्र 2. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा प्रेषित पत्र दिनांक 34.05.2044 पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत विवरण:- क. | परिवाद संख्या परिवादी का | अस्थाई आवंटन | अधिपत्य दिये | यूनिट | भुगतान की गयी “| ¥. नाम पत्र जाने की तिथि | संख्या | धनराशि wo 4 | Wariami44 / 06 /76228 /202 | ताजिन्दर कौर | 76.02 24+6 Month/ E-4 रु0 4973,877 /— 26.,03.2074 003 2 | VaRitene44 / 08 /58374 /2020 | कृष्णा कुमार | 44.40.207 3 Month/ F-4 रु0 26,9,405/- रघुवंशी 44.44.2048 4806 __| 3 | vrtieneiaa /08 /58735 /2020 | महाराज कृष्ण | 04.32.206 Fo ~~ T63 रु0 36,34,949 /— पंडिता 502 4 = (न 4 | Vareiiemi44 / 08 / 79904 / 2024 | रत्ना आध्या 6.07.2043 40+6 Month F-3 WO 47,45,565 /- | 6.05.207 4203 5 | vaeieneiaa / 07 /78560 /2024 | कंचन 44.06.203 40+6 Month F-3 रू0 49,23,367 /— अग्रवाल 34.04,2047 502 | qaviignei44 /09 /64629 / 2020 | मोहित सिंगला | 46.92095 D3 रू0 32,8,587 /— 402 7 | Vaetenei44 /02/70847 /202 | पवन कुमार | 32.09 उठ 40+6 Month E4 WO 77,59,555 /— पाण्डे 2.2.2029 4404 Page 2
(क) संक्षेप में परिवादनी का कहना है कि प्रतिवादी द्वारा संचालित परियोजना NEOTOWN (Phase 4) गौतमबुद्धनगर में इकाई संख्या ई-4,/4003 बुक कराया जिसके एवज में परिवादनी ने प्रतिवादी को रू0 49,73,877 /-- भुगतान किया था। परिवादनी ने जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया है। (ख) प्रतिवादी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवादपत्र में यह अंकित किया गया है कि परियोजना विभिन्न कारणों से विलम्बित रही जिसमें एनजीटी द्वारा पारित आदेश दिनांक 08.44.20I6 एवं दिनांक 044 4.2048 से 26. 72208 तक परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा एवं पुनः दिनांक 26.40.2049 से 06.2.2049 तक निर्माण कार्य में बाधा बनी रही। प्रतिवादी का यह भी कथन है कि कोविड-49 के दौरान i85 दिन जो कि दिनांक 25.03.2020 से 25.09.2020 तक परियोजना के निर्माण कार्य बन्द रहे। प्रतिवादी का यह भी कहना है कि वह परिवादनी को किसी अन्य परियोजना में जिसका निर्माण कार्य पूर्ण है उनकी सहमति से दिनांक 34.03.2022 तक अधिपत्य प्रदान कर देंगे। इसके अतिरिक्त यदि परिवादनी अपनी बुक की गयी इकाई प्राप्त करना चाहती है तो उसका अधिपत्य दिनांक 34.:2.2022 तक परियोजना को पूर्ण कर दे दिया जायेगा। प्रतिवादी द्वारा मा० सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशानुसार निर्माण कार्य पर रोक होने के कारण दिनांक 08.40. 2040 से 26.4.20:5 तक विलम्बित अवधि का ब्याज न दिये जाने अनुरोध किया है। प्रतिवादी द्वारा प्रतिवाद पत्र में संलग्न प्रति दाखिल करते हुए यह भी कहा गया है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 34.05.2044 को Ao Page 3
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का संज्ञान लेते हुए आवंटित भूमि पर यथास्थिति बनायी गयी जिस कारण परियोजना का निर्माण कार्य विलम्बित रहा एवं जिसके उपरान्त दिनांक 26.44.2045 को मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थगन हटाया गया। अतः प्रतिवादी का यह कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य चल रहा है जिसे भविष्य में जल्द ही पूर्ण कर लिया जायेगा एवं प्रतिवादी की इकाई का अधिपत्य दिसम्बर 2022 तक दे दिया जायेगा। (ग) परिवादनी द्वारा लिखित अभिकथन दिनांक 44.44.2024 प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि प्रतिवादी द्वारा दिये गये प्रतिवाद पत्र के प्रस्तर-6 के अनुसार Ao Wadler न्यायालय द्वारा wr आदेश दिनांक 08.0.20I0 को पारित किये गये, परन्तु प्रतिवादी द्वारा स्थगन आदेश के दौरान परिवादनी से इकाई के सापेक्ष भुगतान हेतु मांग की गयी। अतः प्रतिवादी द्वारा परिवादनी से इकाई के सापेक्ष 90 प्रतिशत धनराशि प्राप्त कर ली गयी है। परिवादनी का यह भी कहना है कि प्रतिवादी द्वारा प्रतिवाद पत्र के माध्यम से किये गये कथन झूठे एवं बेबुनियाद है एवं प्रतिवादी द्वारा परियोजना में हुए विलम्ब के लिए फोर्स मैज्योर का आधार लिया गया है, परन्तु इस सम्बंध में प्रतिवादी द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिससे परियोजना विलम्बित होने का मूल कारण ज्ञात हो। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु । विरचित किये गये :- बिन्दु Ges: क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित है? Page 4 बिन्दु संख्या 2: क्या परियोजना विलम्बित है ? बिन्दु संख्या 3: क्या परिवादनी को जमा धनराशि वापस कराया जाना उचित है?
बिन्दु संख्या 4 : क्या परिवादनी इकाई के अधिपत्य के समय विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं0 4 प्रतितदी की ओर से प्रतिवादपत्र में उल्लिखित किया गया कि एन.जी.टी के आदेश द्वारा भू-जल निकासी पर प्रतिबन्ध लगाना, नोट बंदी एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित स्थगन आदेश के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। प्रतिवादी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है जिससे की विदित हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 ,/ 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में अभिनिर्धारित किया war 7747. On behalf of Amrapali group, learned senior counsel submitted that there were force majeure conditions in completing the projects. There were legal impediments in the completion of projects within the period given in the Alat-buyers agreement during the period from 2077-75, The submission is baseless. It is apparent that the Full Bench of the High Court though held that the land acquisition was vitiated but still it was upheld. The High Court did not quash it for the reason that development has taken place. Higher compensation was ordered to be paid. That order was affirmed by =a, Page 5
this Court in 2075 in Savitri Devi v. State of U.P. (205) 7 SCC 27. There was no interim stay &ranted by the High Court on construction work, is made clear by the Noida and Greater Noida authorities. There was no room to entertain any doubt as to the fact whether for a particular village the acquisition had been quashed. There was no quashing of land acquisition and moreover, there was no stay. Only higher compensation was ordered to be paid. There was no force majeure condition or any legal impediment as such the period from 2077 to 2075 cannot be treated as a moratorium period vis-a-vis the dues of Noida and Greater Noida authorities. The submission made as to the farmers’ agitation etc. is too vague and 30% of the projects have come up; whereas 70% have not yet come up, out of the projects in Noida and Greater Noida alone." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि वर्ष 20:: से वर्ष 20i5 के मध्य निर्माण कार्य पर कोई ere आदेश नहीं थे, जो कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दर्शित किया गया और इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 204 से वर्ष 20i5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर कारण या विधिक रूप से रोक नहीं था। जहाँ तक किसानों का उग्र ude की बात है, वह Prem है। चूंकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्ष 207 से वर्ष 205 के बीच कोई फोर्स मैज्योर नहीं था।
इसके अतिरिक्त इसी आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,/2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर HI0 3 फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. Page 6 उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। dager बिन्दु der निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या 2 पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से विदित हुआ कि परिवादनी व प्रतिवादी के मध्य दिनांक 26. 03.2044 को उक्त इकाई हेतु आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित होने की तिथि से 30 माह तथा 6 माह अतिरिक्त अवधि के साथ अर्थात दिनांक 27.03.2004 तक इकाई का अधिपत्य दिया जाना था परन्तु परिवादगी को अभी तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिवादी द्वारा प्रतिवादपत्र में दिसम्बर 2022 तक परिवादनी को इकाई का अधिपत्य दिये जाने का तथ्य अंकित है जबकि परिवादनी को दिनांक 27.03.204 तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त हो जाना चाहिए था। इससे स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 2 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या 3: प्रतिवादी की ओर प्रतिवादपत्र में दिसम्बर
2022 तक इकाई का अधिपत्य उपलब्ध कराये जाने का तथ्य अंकित किया गया है। यदि ऐसी स्थिति में परिवादनी को शीघ्र जमा धनराशि वापस कर दी जाती है तो उससे परियोजना के अन्य निर्माण. कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जिससे जो आवंटी इकाई का अधिपत्य चाहते उनके हितों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। रेरा अधिनियम 20I6 का उद्देश्य होम बायर्स के हितों की रक्षा तथा रियल wee सेक्टर के विनियमन व प्रोत्साहन करने का भी है जिसे दृष्टिग्त रखते हुये परिवादनी को शीघ्र धनराशि वापस किया जाना उचित नहीं होगा। ES Page 7 इस सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 744 ,/207 चित्रा शर्मा आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आदि में किया गया आब्जरवेशन महत्वपूर्ण है कि :-
"40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ............... Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त
eS Page 8 तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “eda लाईन", प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य ‘ep होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को-विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 3 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या 4 : परिवादनी व प्रतिवादी के मध्य दिनांक 26.03. 204 को उक्त इकाई हेतु आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित होने की तिथि से 30 माह तथा 6 माह अतिरिक्त अवधि के साथ अर्थात दिनांक 27.03.2004 तक इकाई का अधिपत्य दिया जाना था परन्तु परिवादनी को अभी तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिवादी द्वारा प्रतिवादपत्र में दिसम्बर 2022 तक परिवादनी को इकाई का अधिपत्य दिये जाने का तथ्य अंकित किया गया है। इस प्रकार परिवादनी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बाम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि — "Section 75(7) (0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on
demand to the allottees, in case the allottee wishes to Page 9 withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. Tf the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि wow रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। इस सम्बंध में सिविल अपील do 6649-50 ,// 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "The period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in
handing over possession. The Respondent — Purchaser —_—_—_—_—_—_— ििक Page 0 ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व अधिपत्य ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ.सी.»सी. सी अथवा अधिपत्य किये जाने की तिथि तक, जो भी बाद में हो के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 7.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (fea ,पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wee 92 (ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7 १2 unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, Page 2
he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due. यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी gear 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+] प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। सूच्य है कि भारत सरकार के कार्यालय-ज्ञाप संख्या: 0- 7024/230/20। 8-प०पञआए-72/878-9056405, दिनांक 43 मई, 2020 के प्रस्तर-6 में कोविड-49 (Corona Virus Disease) को प्राकृतिक आपदा ,/ महामारी मानते हुये इसे (Force Majeure) घोषित किया गया है। विदित है कि भू सम्पदा विनियामक प्राधिकरण की धारा-6 में (Force Majeure) को परिभाषित करते हुये प्राकृतिक आपदा को एक आधार माना गया है। इन परिस्थितियों में चूँकि wate / विकासकर्ता अपनी परियोजनाओं को समय से पूर्ण करने में असमर्थ है। अतः दिनांक 25.03.2020 से 25.09.2020 तक के निर्माण कार्य पूर्ण करने,/पंजीकरण अवधि को 6 माह बढाये जाने की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस व्यवस्था के अन्तर्गत संप्रवर्तक / विकासकर्ता आवंटी से Sat अवधि अर्थात 25.03.2020 से 25.09.2020 तक का कोई विलम्ब ब्याज नही प्राप्त करेगा और न ही आवंटियों को कोई ब्याज दिया जायेगा। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 4 निर्णीत की जाती है। Page 2
विश्लेषण :- पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों से स्पष्ट है कि Paria इकाई के सम्बंध में परिवादनी व प्रतिवादी के मध्य दिनांक 26.03.2044 को उक्त इकाई हेतु आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके प्रस्तर-24ए के अनुसार अनुबंध पत्र निष्पादित होने की तिथि से 30 माह तथा 6 माह अतिरिक्त अवधि के साथ अर्थात् दिनांक 27.03.2044 तक इकाई का अधिपत्य दिया जाना था परन्तु परिवादनी को अभी तक इकाई का अधिपत्य प्राप्त नहीं हुआ। प्रतिवादी की ओर प्रतिवादपत्र में दिसम्बर 2022 तक इकाई का अधिपत्य उपलब्ध कराये जाने का तथ्य अंकित किया गया है। यदि ऐसी स्थिति में परिवादनी को शीघ्र जमा धनराशि वापस कर दी जाती है तो उससे परियोजना के अन्य निर्माण कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जिससे जो आवंटी इकाई का अधिपत्य चाहते उनके हितों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। प्रतिवादी द्वारा प्रतिवादपत्र में दिसम्बर 2022 तक परिवादनी को इकाई का अधिपत्य दिये जाने का तथ्य अंकित किया गया है। इस प्रकार परिवादनी विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। नैसर्गिक न्याय के सिद्धान्तों के अनुसार एवं प्रस्तुत साक्ष्य एवं तर्को के नीर क्षीर विवेक पर आधारित परिशीलन एवं विश्लेषण से पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंचती है परिवादनी को इकाई कां अधिपत्य व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। आदेश (क) प्रतिवादी परिवादीगण को आवंटित मूल इकाई का अधिपत्य ओ. सी/सी.सी के साथ दिसम्बर 2022 तक उपलब्ध कराना ॥ सुनिश्चित करें। Page 3 (ख) प्रतिवादी विलम्बित अवधि के सम्बंध में ब्याज दिनांक 27.03.2044 (ग) (घ) [(«
से 30.04.2046 तक अनुबंध,/ आवंटन पत्र में अंकित ब्याज दर देय होगा तत्पश्चात् दिनांक 04.05.2046 से ओ.सी सीसी प्राप्त होने या ऑफर ऑफ पोजेशन जो बाद में हो की तिथि तक MCLR +% की दर से प्रमोटर द्वारा दण्ड ब्याज / penal. interest परिवादनी को भुगतान किया जाएगा। प्रतिवादी द्वारा ब्याज / दण्ड की इस धनराशि को अधिपत्य दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित करते हुये अवशेष बची धनराशि प्रतिवादी द्वारा परिवादनी को भुगतान की जाएगी। परिवादीगण द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो परिवादनी बकाया धनराशि प्रतिवादी को भुगतान करें। परिवादनी द्वारा जो धनराशि विलम्ब से भुगतान की गयी है तो उस स्थिति में रेरा अधिनियम की धारा 2(Za)(i) के अधीन प्रतिवादी विलम्बित अवधि का व्याज प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु परिवादनी द्वारा ब्याज ४८७+१% की दर से अधिक देय नहीं होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन »अनुबन्ध के अनुरूप CREAT गणना की जायेगी। कोविडं-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुये लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुये दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.09, 2020 तक परिवादनी की ओर से समय से भुगतान न किये ज़ाने तथा प्रतिवादी द्वारा परियोजना पूर्ण करने में किये गये Ror के सम्बंध में विलम्ब ब्याज की TH उक्त अवधि में नहीं को जाएगी | प्रतिवादी द्वारा परिवादीगण को दिसम्बर 2022 तक इकाई का अधिपत्य न दिये जाने की स्थिति में परिवादनी $$$ EE sere जमा धनराशि धनराशि Page 4 वापसी हेतु रेरा के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने हेतु स्वतंत्र होगा।
इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित Remy के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लंघन उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:- 0 | ॥| है Iw ( भानु प्रताप सिंह ) सदस्य उ0ग्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 75 कऊ