Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Alok Kumar Srivastava v. Eco Green Buildtech Private Limited
Complaint No. NCR144/06/110265/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-03-06
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
ee भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 पूर्व (पीठ-4) उपस्थिति :- श्री टी० वेंकटेश, सदस्य क्रम सं0 शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण Ea एटारा44/06/0265/2023 आलोक कामार श्रीवास्तव | 2. इटारा 44/05/94554/2022 [Merete | बरिय 3. पटारा44/05/08499/2023 सुनील भदौरिया | 4+ | NCRI44/08/I208/2023 पंकज मिश्रा बनाम इको ग्रीन बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता आलोक कुमार श्रीवास्तव के साथ 03 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक r परियोजना Sikka Kaamya Greens से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- एटा२44/06/0265/2023 आलोक कामार श्रीवास्तव अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Sikka Kaamya Greens में यूनिट संख्या- Pearl 803 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 30,08,500 /- रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 27,62,024/— रूपये का भुगतान किया गया था। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना विलम्बित है तथा परियोजना में निर्माण कार्य धीमी गति से हो रहा है। विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार शिकायतकर्ता को दिनांक 04.06.2049 तक कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। (0
हि द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 05.06.20i5 की प्रति, खाता विवरण, त्रिपक्षीय अनुबन्ध पत्र, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि परियोजना प्रश्नगत परियोजना स्वामी फण्ड द्वारा वित्तीय पोषित है, जिसके आधार पर विपक्षी द्वारा यह अनुरोध किया गया है कि वह शीघ्र ही शिकायतकर्ता की प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा देंगे। उपरोक्त कथन के आधार पर प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- 4. aa शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-॥ बिन्दु संख्या-4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना विलम्बित है तथा परियोजना में निर्माण कार्य धीमी गति से हो रहा है। विपक्षी द्वारा = शिकायतकर्ता को दिनांक 07.06.20i9 तक कब्जा उपलब्ध कराया जाना al अतः शिकायतकर्ता द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज सहित कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल आवंटन पत्र दिनांक 05.06.2045 के कब्जे वाले प्रस्तर से विदित है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा 36 माह एवं 06 की अनुग्रह के साथ 42 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। ऐसे में clang कब्जे की तिथि 05.42.2048 होती है।
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 /20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as 2 — $x“ late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार as. / Mx. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 05.42.2048 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the = in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sor के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को |४८,२+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना नन््यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2७)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तद्नुसार बिन्दु wea निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश
t. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण की यूनिद्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र /अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2, विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 05.42.2048 से ओ.सी.,//सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता' द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन पत्र/ अनुबच्ध पत्र के अनुरूप उपरोकतानुसार गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(2०)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय | | होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। | 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस | आदेश में प्रतिपादित सिद्वान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। a यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। (८2488 (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण