Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sunil Bhati v. S. J. P. Hotels & Resorts Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/06/110058/2023
- Decision date
- 2026-04-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--0-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: ]४८7२44/06/0058/2023 सुनील भाटी एवं रश्मि भाटी बनाम एस.जे.पी. होटल्स एण्ड रिजॉर्ट्स प्रा.लि. = शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक 40-40-2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री आशु चौधरी उपस्थित हुईं। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के तर्कों को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 40-40-2025 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल डीड निष्पादित कराये जाने की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20I6 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायत योजित की गई है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 23--05-2048 को विपक्षी की परियोजना "Migsun Wynn" गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: Sun-8, 204 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.39,46,809,//- है और शिकायतकर्ता द्वारा रू.39,46,809,/- की धनराशि का भुगतान किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा विस्तृत लिखित शिकायत-पत्र, दिनांक 45-09-2023 दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सांपेक्ष एन.ओ.सी. जारी नहीं किया जा रहा है, जबकि उनके द्वारा अविधिक शुल्क की माँग की जा रही है। विपक्षी को 42 प्रतिशत की दर से जी.एस.टी. का भुगतान किया है। विपक्षी Page | of 0 E-Court = ई-मेल, दिनांक 02-08-2024 के माध्यम से ओ.सी. प्राप्त किए जाने के सम्बन्ध में सूचना दी गई। शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार 85 प्रतिशत का भुगतान विपक्षी द्वारा माँग किए जाने पर नहीं किया जा सका, क्योंकि वह विदेश गए हुए थे। शिकायतकर्ता द्वारा 02 वर्ष के रख-रखाव शुल्क का भुगतान दिनांक 05-02-2022 को तथा पंजीकारण धनराशि का भुगतान, दिनांक 24-03-2022 को किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 25-04-2022 को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा लिया गया है, जो कि आवंटन-पत्र निष्पादित किए जाने की तिथि से 04 वर्ष बाद की तिथि है। शिकायतकर्ता से विक्रय विलेख पंजीकरण में विलम्ब के आधार पर “Watch and Ward Charges” के मद मे रू.00 /- प्रतिदिन की धनराशि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा माँगी जा रही है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र के विरुद्ध अपना प्रत्युत्तर तिथि रहित एवं लिखित बहस तिथि रहित दाखिल कर, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों एवं अभिकथनों की पुनरावृत्ति करते हुए, विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र में किये गये समस्त तथ्यों /“ अभिकथमनों का पूर्ण रूप से खण्डन किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि रू.28,00,000/- की धनराशि के सम्बन्ध में एच.डी.एफ.सी. बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण की धनराशि को निरस्त कर दिया गया है, जिसके उपरान्त शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा पूर्ण धनराशि प्राप्त किये जाने के बाद भी अक्टूबर, 2022 में विलम्ब ब्याज वसूले जाने हेतु माँग की गयी। इन आधारों पर शिकयतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष नो-डयूज सर्टिफिकेट जारी कर, पंजीकृत सेल डीड रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा जी.एस.टी. के सम्बन्ध में जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में कस्टमर लेजर की प्रति, ई-मेल की प्रतियाँ, माँग-पत्र, दिनांक-28-40-2020 की प्रति, कब्जा प्रस्ताव पत्र, दिनांक 28-0-2020 की प्रति, ऋण स्वीकृति पत्र, दिनांक 23-07-2024 की प्रति, विपक्षी द्वारा अधिरोपित विलम्ब ब्याज की सारणी दिनांक t0-08—2022, रसीदों की प्रति, ओ.सी., दिनांक 29-07-202 की प्रति, रेरा के समक्ष हुये समझौतानामा, दिनांक 24-04--2049 की प्रति, आवंटन-पत्र, दिनांक 23--05-2048 की प्रति, जी.एस.टी. के सम्बन्ध में लेख, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 27-44-2023 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैक्सी पेमेन्ट प्लान के आधार पर बेयरसेल यूनिट का चुनाव किया था। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी समस्त धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, परन्तु उनके द्वारा उक्त धनराशि का भुगतान विलम्ब से किया गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा विलम्ब से भौतिक कब्जा लिया गया है, जिस कारण उन पर विलम्बित अवधि का ब्याज अधिरोपित किया गया है। उक्त की माँग शिकायतकर्ता से की गयी है, परन्तु उनके द्वारा उक्त धनराशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उभय पक्षों द्वारा Page 2 of 0 E-Court ) | 5) a पद) )> a7 Ay pS BN KES ae 9 % *
हस्ताक्षरित एवं निष्पादित आवंटन-पत्र, दिनांक 23-05-208 के प्रस्तर-4(७) के अनुसार शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक 22-03-2022 (06 माह ग्रेस अवधि अतिरिक्त) तक दिया जाना था। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत टॉवर / परियोजना का कार्य पूर्ण कर, ओ.सी. दिनांक 29-07-2024 को प्राप्त किया गया, जिसकी प्रति संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा wend यूनिट का भौतिक कब्जा, दिनांक 25-04-2022 को इस शर्त पर दिया गया कि उनके द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज का भुगतान किया जाने के उपरान्त ही उन्हें एन.डी.सी. जारी किया जायेगा। विपक्षी द्वारा अपने विधिक दायित्वों का पूर्ण रूप से निर्वहन करते हुये परियोजना को कब्जे की प्रस्तावित तिथि से पूर्व ही पूर्ण कर शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान किया जा चुका है, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा लिए जाने मे हुए विलम्ब के सापेक्ष अधिरोपित ब्याज का भुगतान नहीं किया गया। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, रजिस्ट्री की कार्यवाही पूर्ण किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन-पत्र, दिनांक 23-05-2048 की प्रति ओ.सी., दिनांक 29-07-2024 की प्रति दाखिल की गयी हैं। मैंने उभय पक्षों के तर्कों को विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु पर विचार किया:- क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में पंजीकृत सेल डीड रजिस्ट्री निष्पादित करायी जा सकती है ? निस्तारण बिन्दु:
यह बिन्दु इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के पक्ष में पंजीकृत सेल डीड /रजिस्ट्री निष्पादित करायी जा सकती है? यह बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा शिकायतकर्ता द्वारा विस्तृत लिखित शिकायत-पत्र, दिनांक 45--09--2023 दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष एन.ओ.सी. जारी नहीं किया जा रहा है, जबकि उनके द्वारा अविधिक शुल्क की माँग की जा रही S| विपक्षी को 42 प्रतिशत की दर से जी.एस.टी. का भुगतान किया है। विपक्षी द्वारा ई-मेल, दिनांक 02-08-2024 के माध्यम से ओ.सी. प्राप्त किए जाने के सम्बन्ध में सूचना दी गई | शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार 85 प्रतिशत का भुगतान विपक्षी द्वारा माँग किए जाने पर नहीं किया जा सका, क्योंकि वह विदेश गए हुए थे। शिकायतकर्ता द्वारा 02 वर्ष के रख-रखाव शुल्क का भुगतान दिनांक 05-02-2022 को तथा पंजीकारण धनराशि का भुगतान, दिनांक 24-03-2022 को किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा Page 3 of 0 E-Court दिनांक 25-04-2022 को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा लिया गया है, जो कि आवंटन-पत्र निष्पादित किए जाने की तिथि से 04 वर्ष बाद की तिथि है। शिकायतकर्ता से विक्रय विलेख पंजीकरण में flora के आधार पर “watch and Ward Charges” के मद मे रू.॥00 /- प्रतिदिन की धनराशि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा माँगी जा रही है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र के विरूद्ध अपना प्रत्युत्तर तिथि रहित एवं लिखित बहस तिथि रहित दाखिल कर, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों एवं अभिकथनों की पुनरावृत्ति करते हुए, विपक्षी द्वारा अपने आपत्ति-पत्र में किये गये समस्त तथ्यों / अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि रू.28,00,000 //- की धनराशि के सम्बन्ध में एच.डी.एफ.सी. बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण की धनराशि को निरस्त कर दिया गया है, जिसके उपरान्त शिकायतकर्ता द्वारा पूर्ण धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा पूर्ण धनराशि प्राप्त किये जाने के बाद भी अक्टूबर, 2022 में विलम्ब ब्याज वसूले जाने हेतु माँग की गयी। इन आधारों पर शिकयतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष नो-डयूज सर्टिफिकेट जारी कर, पंजीकृत सेल Ue »रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा जी.एस.टी. के सम्बन्ध में जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 27-44-2023 दाखिल करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैक्सी पेमेन्ट प्लान के आधार पर बेयर शेल (Bare shell) यूनिट का चुनाव किया था। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी समस्त धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, परन्तु उनके द्वारा उक्त धनराशि का भुगतान विलम्ब से किया गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा विलम्ब से भौतिक कब्जा लिया गया है, जिस कारण उन पर विलम्बित अवधि का ब्याज अधिरोपित किया गया है। उक्त की माँग शिकायतकर्ता से की गयी है, परन्तु उनके द्वारा उक्त धनराशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उभय पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित एवं निष्पादित आवंटन-पत्र, दिनांक 23-05-2048 के प्रस्तर-4(0) के अनुसार शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक 22-03-2022 (06 माह ग्रेस अवधि अतिरिक्त) तक दिया जाना था। विपक्षी द्वारा प्रश्गगत टॉवर ,/ परियोजना का कार्य पूर्ण कर, ओ.सी., दिनांक 29-07-2024 को प्राप्त किया गया, जिसकी प्रति संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा vera यूनिट का भौतिक कब्जा, दिनांक 25-04-2022 को इस शर्त पर दिया गया कि उनके द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज का भुगतान किया जाने के उपरान्त ही उन्हें एन.डी.सी. जारी किया जायेगा। विपक्षी द्वारा अपने विधिक दायित्वों का पूर्ण रूप से निर्वहन करते हुये परियोजना को कब्जे की प्रस्तावित तिथि से पूर्व ही पूर्ण कर शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान किया जा चुका है, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा लिए जाने मे हुए विलम्ब के सापेक्ष अधिरोपित ब्याज का भुगतान नहीं किया गया। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, रजिस्ट्री की कार्यवाही पूर्ण किये जाने का अनुरोध किया गया है।
Page 4 of 0 E-Court = प्रकरण में शिकायतकर्ता का मुख्य अनुतोष प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में शीघ्र पंजीकृत सेल डीड /रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का है। प्रकरण में विपक्षी द्वारा wea टॉवर / परियोजना का कार्य पूर्ण कर, ओ.सी., दिनांक 29-07-202 को प्राप्त किया गया, जिसकी प्रति विपक्षी द्वारा संलग्न की गई है तथा शिकायतकर्ता द्वारा यह स्वीकार किया गया है कि उन्हे ओ.सी. की प्रति ई-मेल के माध्यम से दिनांक 02--08-2024 को प्रेषित की गई | शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा, दिनांक 25-04-2022 को इस शर्त पर दिया गया कि उनके द्वारा विलम्बित अवधि के ब्याज का भुगतान किया जाने के उपरान्त ही उन्हें एन.डी.सी. जारी किया जायेगा। उभय पक्षों द्वारा हस्ताक्षरित एवं निष्पादित आवंटन-पत्र, दिनांक 23-05-2048 के प्रस्तर-4(0) के अनुसार शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, दिनांक 22-03-2022 (06 Are te अवधि अतिरिक्त) अर्थात् दिनांक 22-09-2022 तक दिया जाना था। विपक्षी द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए, समय पर एवं विधिपूर्ण रूप से शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल रेरा के समक्ष निष्पादित समझौतानामा, दिनांक 24-04--2049 के WIR-4(b) के अनुसार शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष 50 प्रतिशत धनराशि का भुगतान समझौतानामा निष्पादित किए जाने की तिथि से 40 दिनों में किया जाना था तथा अवशेष धनराशि का भुगतान प्रश्नगत यूनिट का कार्य पूर्ण हो जाने पर किया जाना था। शिकायतकर्ता के कथनानुसार प्रश्नगत यूनिट का कुल मूल्य रू.39,46,809 //- है, जिससे यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को उक्त समझौतानामा के WA-4(b) के अनुसार G.9,73,404/— की धनराशि का भुगतान समझौतानामा निष्पादित किए जाने की तिथि से 40 दिन अर्थात् दिनांक 04--05-2049 तक किया जाना था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन मे कहा गया है कि उनके द्वारा कुल .6,5,544/— की धनराशि का भुगतान, दिनांक 30-04-2049 तक किया जा चुका है तथा अवशेष धनराशि का भुगतान वर्ष, 2024 में किया गया है। अतः उपरोक्त तथ्यों से यह विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा समझौतानामा की शर्तों का उल्लंघन किया गया है तथा व्यतिक्रम के आधार पर विपक्षी द्वारा उनसे विलम्ब ब्याज की मांग की जा रही है, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त माँग में विलम्ब के आधार पर धनराशि का विभाजन एवं विलम्बित अवधि का वर्णन नहीं किया गया है। इसलिए यहाँ यह भी निर्णीत करना उचित होगा कि विपक्षी कम्पनी द्वारा किस अवधि तक विलम्ब ब्याज अधिरोपित किया जाना सही एवं उचित है तथा ब्याज की दर क्या होगी? इस सम्बन्ध में शिकायतकर्ता द्वारा समझौतानामा में उललेखित धनराशि का भुगतान समायानुसार किए जाने मे व्यतिक्रम किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि पर समझौतानामा मे अंकित भुगतान किये जाने की तिथि अर्थात् दिनांक Page 5 of 0
a 9 से वास्तविक भुगतान किये जाने की तिथि तक ब्याज प्राप्त किया जाना उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06-06-2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु, दिनांक 25-03-2020 से 06 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-09-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स के कारण मानी जायेगी। अतः उपर्युक्त के दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 के अधीन दिनांक 42-70-20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित merr+ प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सी: 920 /2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors." में भी उचित व विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ,४८४/१+/ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से । प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है।
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-2(७७)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी ४८7#+7 प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की aRT-i04( में प्रोमोटर्स का निम्न उत्तरदायित्व अंकित है:- "...execute a registered conveyance deed of the apartment, plot or building, as the case may be, in favour of the allottee along with the undivided proportionate title in the common areas to the association of allottees or competent authority, as the case may be, as provided under section 77 of this Act; Page 6 of 0 = ही भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की ARI-29(00) Gy में एलॉटीज के निम्न उत्तरदायित्व अंकित हैं:- #(0) Every allottee shall take physical possession of the apartment, plot or building as the case may be, within a period of two months of the occupancy certificate issued for the said apartment, plot or building, as the case may be. (77) Every allottee shall participate towards registration of the conveyance deed of the apartment, plot or building, as the case may be, as provided under sub-section (7) of section 7 of this Act."
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की amei—i7 निम्नवत् है :- 7#॥7, (4) The promoter shall execute a registered conveyance deed in favour of the allottee along with the undivided proportionate title in the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, and hand over the physical possession of the plot, apartment of building, as the case may be, to the allottees and the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, in a real estate project, and the other title documents pertaining thereto within specified period as per sanctioned plans as provided under the local laws: Provided that, in the absence of any local law, conveyance deed in favour of the allottee or the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, under this section shall be carried out by the promoter within three months from date of issue of occupancy certificate. (2) After obtaining the occupancy certificate and handing over physical possession to the allottees in terms of sub-section (7), it shall be the responsibility of the promoter to handover the necessary documents and plans, including common areas, to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, as per the local laws:
Provided that, in the absence of any local law, the promoter shall handover the necessary documents and plans, including common areas, the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, within thirty days after obtaining the occupancy certificate." उपर्युक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रजिस्टर्ड लीज़/सेल डीड एवं कब्जा दिये जाने से पूर्व बिल्डिंग / अपार्टमेन्ट / प्लॉट आदि का “ओक्यूपेन्सी सर्टिफिकेट” अपेक्षित है। बिना vat सर्टिफिकेट के न तो विधिपूर्वक कब्जा ही दिया जा सकता है एवं न ही “टाईटल gaa” नियमानुसार सम्भव है। चूंकि प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा प्रश्नगत | परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी., दिनांक 29-07-2024 को प्राप्त किया जा चुका है। शिकायतकर्ता अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों में यह उचित होगा कि शिकायतकत उपर्युक्त विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि का भुगतान कर, विपक्षी से एन.डी.सी. प्राप्त Page 7 of 0 E-Court = हुए, शिकायतकर्ता के पक्ष में शीघ्र प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल डीड /रजिस्ट्री निष्पादित एवं हस्ताक्षरित करायें।
जहाँ तक विपक्षी द्वारा जी.एस.टी. के सम्बन्ध में प्राप्त की गई अतिरिक्त धनराशि को वापस दिलाए जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में रेरा पोर्टल पर अपलोडेड समस्त प्रमोटर्स (विकासकताओं) द्वारा आवंटियों से जमा कराई जाने वाली जी.एस.टी. के दरों के सम्बन्ध में जारी पत्र संख्या: 242 / यू पी. रेरा / 2024-25, दिनांक 08-04-2025 के संलग्न क॑ अनुसार ही विपक्षी द्वारा जी.एस.टी. प्राप्त की जाएगी। यदि जी.एस.टी. के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता द्वारा कोई अतिरिक्त धनराशि दी गई हो, तो विपक्षी द्वारा उक्त धनराशि को वापस / अंतिम माँग मे समायोजित किया जाएगा। Te विचारणीय बिन्दु Peake किया जाता है। इसके अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्ता को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि ver धनराशि को डिक्रिटल (Deere) धनराशि के रूप में रेरा द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा hatch बनाम हिमाचल wee आवास विकास WRI 2677 SCC OnLine HP $204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case: 2, Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature 27
9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh v. Land Acquisition Collector (7997) 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and 3 of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 7999 titled as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRC) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act. Page 8 of 0 E-Court = 0. In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats.
44. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय sorted विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर मोहाली क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण व अन्य बनाम गौरव FETA, 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी WS AT राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व अन्य 2027 SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् हैः- 28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 76597/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter.
29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2024 and our order dated 4-3-20247, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the 5th instalment which became due on 20-7-202/, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. उपर्युक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैः- आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता से विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त कर, शिकायतकर्ता को नियमानुसार एन.डी.सी. जारी करते हुए, आदेश Page 9 of 0 E-Court पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में रजिस्ट्रेशन ऑफ सेल डीड » रजिस्ट्री निष्पादित व हस्ताक्षरित कराना सुनिश्चित Hy | 2. olfas—i9 के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25--09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की IIa) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी meres प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश का Verda भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40 एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। 5. शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित He | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तदनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। दिनांक: 27-04-2026. Page 0 of 0