Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Laugashri v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/06/109946/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-08-06
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:ः-डा०दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य ७ शिकायत संख्या al यूनिट न0 | पत्रावली पर आवंटन पत्र | कब्जा दिये वांछित अनुतोष उपलब्ध रसीद के | की तिथि | जाने की तिथि do अनुसार जमा धनराशि रु0 I. _ एदराब406709946/2023 श्री :-4494.. रु0 4,48,000/ | 28.0i.2004 | 42 माह तथा | यूनिट का 3 माह अनुग्रह | कब्जा व अवधि के साथ | विलम्बित अवधि अर्थात अक्टूबर | का ब्याज 2047 दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम
एटीएस रिएलटी प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। कार्यालय आख्या दिनांक 06.08.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में धारा-8 अथवा स्वामहि फण्ड डिस्बर्समेंट अथवा एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र किसी पक्षकार द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में उक्त तालिका में अंकित यूनिट संख्या आई-4494 बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष विपक्षी को तालिका में अंकित धनराशि Bo 44,48,000 / का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा जनवरी 20:7 में यूनिट का कब्जा दिया जाना प्रस्तावित था परन्तु विपक्षी कब्जा देने में असफल रहा है। विपक्षी को आवश्यक प्रमाण पत्र आज तक प्राप्तत नहीं हुए है। शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में शिकायत संख्या एनसीआर(44 ,// 03 // 94363 / 2022 जमा धनराशि वापस दिलाये जाने के अनुतोष से रेरा प्राधिकरण के समक्ष संस्थित की गयी थी जिसे प्राधिकरण द्वारा निरस्त किया गया था जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित की गयी है। विपक्षी gw रेश अधिनियम आजा आय 4 की धारा 8 का उललघन किया गया है। विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन उपलब्ध नहीं कराया गया है जबकि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है।
शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 28.04.2044 (। पृष्ठ) , प्रतिउत्तर व जमा की धनराशि की रसीदों की छाया प्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गईं धनराशि संख्या (रु0) | विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 00907 20.44.203 रु0 6,8,000 / रसीद संख्या 00908 20..203 रु0 5,30,000 / कुल योग : | eo 77,48,000 7 विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवेदन फार्म दिनांक 08.44.2043 के माध्यम से विपक्षी की परियोजना एटीएस एलौर में यूनिट बुक करायी गयी थी जिसके पश्चात् दिनांक 28. 0.2044 को शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या ii94 आवंटित की गयी थी। शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कुल मूल्य Go 47,62,500 /am जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा केवल FO 44,48,000,/ का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक 47.:.20i5 को यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए शिकायतकर्ता को अनुस्मरण पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त अनुस्मरण पत्र की जानबूझकर अनदेखी की गयी जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 09.06.20I6 को शिकायतकर्ता को यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु पुनः अनुस्मरण पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त अनुस्मरण पत्र की भी अनदेखी की गयी जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को बकाया धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण नोटिस ऑफ टर्मिनेशन दिनांक 08.i2. 20i7 को प्रेषित किया गया जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के हित में
पुनः अंतिम अनुस्मरण पत्र दिनांक 29.06.2047 को प्रेषित करते हुए शिकायतकर्ता —_—_—>- 2
को दिनांक 44.07.2047 तक बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए समय प्रदान किया गया परन्तु शिकायतकर्ता अनुस्मरण पत्र के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने में असमर्थ रहे जिस कारण विपक्षी के पास शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किये जाने के अलावा कोई अन्य विकल्प उपलब्ध न होने की स्थिति में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट दिनांक 25.08.2047 को निरस्त कर दी गयी। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण के उपरांत उक्त यूनिट दिनांक 49.08.2049 को श्रीमती दीपा डीमरी व गणेश प्रसाद को आवंटित की गयी जिसके पश्चात् उक्त आवंटियों द्वारा प्रश्नगत यूनिट पुनः श्री अश्वनी कुमार व कोमल गुप्ता को wraraka कर दी गयी जिसके पश्चात् यूनिट के सापेक्ष उक्त आंवटियों द्वारा पूर्ण भुगतान कर, परियोजना के सापेक्ष अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त होने के उपरांत यूनिट का भौतिक कब्जा दिनांक 42.08.2022 को प्राप्त किया जा चुका है। शिकायतकर्ता लगातार अनुस्मरण पत्र भेजे जाने के उपरांत भी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने में असफल रहे जिस कारण अनुबंध के क्लाज-44 में उल्लिखित शर्तों व रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त की गयी जिस कारण विपक्षी शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गयी धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा एक अन्य शिकायत संख्या एनसीआर(44 / 03 // 9363 / 2022 जमा धनराशि वापस दिलाये जाने के उद्देश्य से विपक्षी के विरूद्ध योजित की गयी थी जिसे रेरा प्राधिकरण द्वारा विपक्षी के पक्ष में निर्णीत किया गया है, उक्त शिकायत में रेरा प्राधिकरण की संयुक्त पीठ द्वारा यह पाया गया कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण है व विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने की याचना स्वीकार होने योग्य नहीं है। विपक्षी द्वारा कहा गया है कि बाजार में मंदी , पर्यावरण मंत्रालय द्वारा ईट निर्माण पर लगाये गये प्रतिबंध एवं एनजीटी द्वारा भू जल निकासी व निर्माण कार्य पर लगाये गये प्रतिबंधों के कारण ऑफर ऑफ पजेशन जारी किये जाने में विलम्ब हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारां आवंटन पत्र की शर्तों के अनुसार समय से भुगतान नहीं किया गया है जिस कारण वश शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त की गयी जिसे
3 शिकायतकर्ता द्वारा कभी पुर्नस्थापित नहीं कराया गया जिस कारण शिकायतकर्ता कोई अनुतोष पाने के अधिकारी नहीं है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान परिवाद पोषणीय न होने के कारण खारिज किये जाने व शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर शिकायत संस्थित करने पर रु0 75,000/ का अर्थदण्ड लगाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत प्रतिउत्तर में यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य समय से पूर्ण नहीं किया गया है और परियोजना में चल रहे निर्माण कार्य की स्थिति से अवगत नहीं कराया गया जिस कारण शिकायतकर्ता के पास अन्य विकल्प उपलब्ध न होने की स्थिति में उनके द्वारा विपक्षी द्वारा जारी मांग पत्रों के विरूद्ध धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि दिनांक 08.44.2043 को यूनिट संख्या 4494 आवंटित होने के पश्चात् उनके द्वारा यूनिट की कुल कीमत GO 47,62,500/ के सापेक्ष Go 4,48,000 // का भुगतान किया गया है जो कि यूनिट की कुल कीमत का io प्रतिशत से ज्यादा है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि आवंटन पत्र के क्लाज 7.2 के अनुसार विपक्षी को परियोजना का निर्माण कार्य आवंटन के तिथि से 42 माह अर्थात 28.07.2047 तक पूर्ण किया जाना था परन्तु विपक्षी निर्धारित समय अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करने में असफल रहे है क्योंकि उनके द्वारा स्वयं उल्लिखित किया गया है कि उन्हें परियोजना के सापेक्ष अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हुआ है जो कि कब्जा उपलब्ध कराये जाने की तिथि से 56 माह विलम्बित है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उन्हें विपक्षी द्वारा जारी टर्मिनेशन लेटर नोटिस ऑफ फाइनल अपारच्यूनिटी व यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा स्वयं err गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में शिकायत संख्या एनसीआर(44 / 03 / 94363 /2022 जमा धनराशि वापस दिलाये जाने के उद्देश्य से दाखिल की गयी थी जो विपक्षी को वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने के आधार पर माननीय प्राधिकरण द्वारा शिकायतकर्ता को यह आदेशित करते हुए निरस्त की गयी कि परियोजना रहने योग्य है जिस कारण शिकायतकर्ता कब्जा लेने
ताज SS 4 पर विचार कर सकते है जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के उद्देश्य से योजित की गयी है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये :- 4. क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है? निस्तारण प्रश्न संख्या 7 -: प्रश्न Ge- इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का बयाज दिलाया जा सकता है? इस प्रश्न को साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 28.04.2044 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा जनवरी 20:7 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है जिस कारण शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है।
विपक्षी द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 25.08.2047 को शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट निरस्त किये जाने के उपरांत vat यूनिट दिनांक 49.08.2049 को श्रीमती दीपा डीमरी व गणेश प्रसाद को आवंटित की गयी जिसके पश्चात् उक्त आवंटियों द्वारा प्रश्नगत यूनिट पुनः श्री अश्वनी कुमार व कोमल गुप्ता को दिनांक 42.08.2022 को स्थानान्तारित कर दी गयी जिसके पश्चात् उक्त आंवटियों द्वारा यूनिट के सापेक्ष पूर्ण धनराशि भुगतान कर तथा परियोजना के सापेक्ष विपक्षी को प्राप्त अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 के उपरांत यूनिट का भौतिक कब्जा दिनांक 42.08.2022 को प्राप्त किया जा चुका है जिसका साक्ष्य कब्जा पत्र दिनांक 42.08.2022 एनेक्चर आर-40 के रूप में पत्रावली पर उपलब्ध है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में दिनांक 08.44.20i3 को आवेदन फार्म के माध्यम से यूनिट बुक करायी गयी जिसके पश्चात् आवंटन पत्र दिनांक 28.04.2044 के माध्यम से शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट संख्या 4494 आवंटित की गयी है। शिकायतकर्ता — सन्ककनता | >
द्वारा परियोजना के सापेक्ष धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु कन्सट्रक्शन लिंक प्लान का चयन किया गया जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को प्रत्येक फ्लोर का निर्माण पूर्ण होने के पश्चात् धनराशि का भुगतान करते हुए GO 25,98,909 / का भुगतान किया जाना था तथा शेष धनराशि का भुगतान कब्जा दिये जाने के समय किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष दिनांक 20.44.2043 तक रु0 44,48,000,// का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा अनुबंध पत्र व पेमेंट प्लान के अनुसार धनराशि wo 7,65,936,/का भुगतान किये जाने हेतु शिकायतकर्ता को अनुस्मरण पत्र मय मांग पत्र दिनांक 27.42.20i5 को प्रेषित किया गया जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा पूर्व प्रेषित मांग पत्र की धनराशि समायोजित करते हुए पुनः दिनांक 20.05.206 को धनराशि Go 73,9,35/or भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र शिकायतकर्ता को प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा पुनः मांग पत्र के सापेक्ष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। इसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 09.06.2046 को पूर्व प्रेषित मांग पत्र दिनांकित 40.05.206 में उल्लिखित धनराशि समायोजित करते हुए शिकायतकर्ता को पुनः अवशेष धनराशि wo 48,89,344 / का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा लगातार तीसरी बार मांग पत्र के सापेक्ष विपक्षी को बकाया धनराशि का भुगतान नहीं किया गया जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा दिनांक 08.02.2047 को अस्थाई यूनिट निरस्तीकरण पत्र शिकायतकर्ता को प्रेषित कर अवशेष धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अवसर प्रदान किया गया जिसके पश्चात् शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी द्वारा दिनांक 29.06.2047 को शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या 4494 के सापेक्ष अवशेष धनराशि दिनांक 44.07.2007 तक भुगतान किये जाने हेतु अंतिम अवसर प्रदान किया गया परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा पुनः मांग पत्र के सापेक्ष धनराशि का भुगतान नहीं किया गया जिसके पश्चात् विपक्षी द्वारा कोई अन्य विकल्प उपलब्ध न होने की स्थिति में दिनांक 25.08.2047 को शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण के उपरांत उक्त यूनिट संख्या 4494 दिनांक 42.08.2022 को श्री अश्वनी कुमार व कोमल गुप्ता को स्थानान्तारित कर दी गयी जिसके पश्चात् अश्वनी कुमार गुप्ता व
6 कोमल गुप्ता द्वारा उक्त यूनिट संख्या 4494 का भौतिक कब्जा परियोजना के सापेक्ष विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त अधिभोग प्रमाण पत्र के उपरांत दिनांक 42.08.2022 को प्राप्त किया जा चुका है जिसका साक्ष्य पत्रावली पर Waa आर-40 उपलब्ध है। उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 25.08.2047 को शिकायतकर्ता को आवंटित प्रश्नगत यूनिट निरस्त किये जाने के उपरांत उक्त यूनिट विपक्षी द्वारा दिनांक 49.08.2049 को श्रीमती दीपा डीमरी व गणेश प्रसाद को आवंटित की गयी जिसके पश्चात् उक्त आवंटियों द्वारा yea यूनिट पुनः श्री अश्वनी कुमार व कोमल गुप्ता को दिनांक 42.08.2022 को स्थानान्तारित कर दी गयी। आवंटी श्री अश्वनी कुमार व कोमल गुप्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष पूर्ण धनराशि भुगतान कर तथा परियोजना के सापेक्ष विपक्षी को प्राप्त अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 के साथ यूनिट का भौतिक कब्जा दिनांक 42.08.2022 को प्राप्त किया जा चुका है। इस प्रकार विपक्षी द्वारा दिनांक 42.08.2022 को अन्य क्रेता अश्वनी कुमार गुप्ता व कोमल को प्रश्नगत यूनिट विक्रय कर तृतीय पक्ष का अधिकार सृजित किया जा चुका है जिसका साक्ष्य विपक्षी द्वारा पत्रावली पर Wea sme-i0 के रूप में पत्रावित किया गया है। ऐसी स्थिति में जब प्रश्नगत यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किये जा चुके है व तृतीय पक्ष द्वारा wana यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त किया जा चुका है तब ऐसी स्थिति में वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिलाने का अनुतोष दिया जाना सम्भव नहीं है। अतः उक्त कारणों से शिकायतकर्ता वांछित अनुतोष पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है।
अतः शिकायतकर्ता की शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। आदेश प्रस्तुत परिवाद निरस्त की जाती है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। PRIA es (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) =e सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 7