Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mukesh Pal Singh Yadav and Nilanjna Yadav v. Mahaluxmi Infrahome Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/06/109377/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-06-13
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: NCRI44/06/09377/2023 मुकेश पाल सिंह यादव एवं नीलांजना यादव बनाम महालक्ष्मी इन्फ्राहोम प्रा. लि. निर्णय शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक 22-44-2024 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मनेन्द्र कुमार उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री श्वेता तिवारी उपस्थित हुईं। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cpt को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 22-:-2024 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायत योजित की गई है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 45-40-2024 को विपक्षी की परियोजना Migsun Ultimo में यूनिट संख्या: ४-2, 007 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.57/3,460/- थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा %.57,3,453/— की धनराशि का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा जनवरी, 2022 तक दिया जाना था। विपक्षी को पेमेन्ट प्लान के अनुसार यूनिट के सापेक्ष समस्त धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, Page | of 3 276 / 4
E-Court परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. से प्राप्त धनराशि को अपने स्टेटमेन्ट में स्वीकार किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि. मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर, दिनांक 30-05-2024 दाखिल कर, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा हस्ताक्षर एवं vero सहित पत्र, दिनांक i:-70-202i के माध्यम से रिटेन्शन धनराशि रू.29,74,537 /— को स्वीकार किया गया, जिसकी प्रति संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, जिसके साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध हैं। विपक्षी द्वारा दाखिल माँग-पत्र एवं अनुस्मारक-पत्र के साथ कोई पावती संलग्न नहीं की गयी है और न ही विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है जिससे यह साबित हो सके कि शिकायतकर्ता द्वारा उक्त दस्तावेज वर्तमान में प्राप्त किया गया हो। विपक्षी द्वारा ओ.सी., दिनांक 20-08-2049 पत्रावली पर दाखिल किया गया है, जो कि मात्र अस्थाई ओ.सी. है। उक्त ओ.सी. जारी किये जाने की तिथि से 48 माह तक ही वैद्य माना जाता है तथा यह ओ.सी. इस शर्त के साथ जारी किया जाता है कि प्रार्थी उललेखित त्रुटियों का समाधान कर, नवीन सी.सी. प्राप्त करने हेतु मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रार्थना-पत्र प्रेषित करेंगे। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ फिट-आउट प्रेषित किया गया है, जिसकी विधि में कोई मान्यता नहीं है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा ऑफर पत्र कभी प्रेषित नहीं किया गया है तथा विपक्षी द्वारा दाखिल ऑफर ऑफ फिट--आउट एवं माँग-पत्रों की कोई भी पावती उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ता को विपक्षी द्वारा दाखिल निरस्तीकरण-पत्र कभी प्राप्त नहीं हुआ है और न ही विपक्षी द्वारा इस सम्बन्ध में कोई पावती पत्रावली पर दाखिल की गयी है। उक्त दस्तावेज प्राप्त न होने की स्थिति में विपक्षी द्वारा आवंटन-पत्र के प्रस्तर-6 का आह्वान नहीं किया जा सकता है। अतः: शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन-पत्र, दिनांक 30-40-2024 की प्रति, विपक्षी द्वारा जारी Resa प्लान का पत्र, दिनांक 44-70—-202!, रसीदों की प्रति, अस्थाई ओ.सी., दिनांक 20-08-2049 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। इसके अतिरिक्त विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 42-09--2023 दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों छिपाते हुए प्रश्नगत शिकायत योजित की गयी है। इसलिए प्रश्नगत शिकायत पोषणीय नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "Migsun Ultimo" में यूनिट संख्या: Sun-2, 07 बुक करायी गयी थी। उभय पक्षों के मध्य दिनांक 30-40-2024 को आवंटन-पत्र हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-04(0) के अनुसार विपक्षी द्वारा अगस्त, 2025 तक यूनिट का कब्जा दिया जाना है। Page 2 of 3 Ph a a E-Court
vat यूनिट रिटेन्शन स्कीम के अर्न्तगत बुक करायी गयी थी, जिसमें शिकायतकर्ता को रू.29,74,537,/- की धनराशि के मद में मेसर्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. द्वारा जारी क्रेडिट नोट का समायोजन यूनिट की कुल कीमत में किया जाना था। उक्त आवंटन-पत्र के संलग्नक-«-4 के प्रस्तर-03 के अनुसार vat क्रेडिट नोट विपक्षी एवं Aad रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. के मध्य तय शर्तों को साकार होने के अधीन था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त क्रेडिट नोट साकार न होने की सूचना प्रेषित की TA शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत &.6,84,744/— के सापेक्ष केवल आंशिक धनराशि .27,38,96 /— का भुगतान किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा माँग-पत्र एवं अनुस्मारक-पत्र के माध्यम से शेष धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु शिकायतकर्ता से अनुरोध किया गया। यह भी उल्लेख किया गया है कि सम्बन्धित टावर के सापेक्ष विपक्षी को ओ.सी., दिनांक 20-08-2049 को प्राप्त हो चुका है, जिसकी प्रति संलग्न है। विपक्षी द्वारा अपने पत्र, दिनांक 49-40-2024 के माध्यम से ऑफर ऑफ फिट-आउट प्रेषित किया गया, जिसके साथ .34,5,795/- की धनराशि के मद में माँग प्रेषित की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 23-04-2023 के क्रम में अवशेष धनराशि न करते हुए .27,38,96/— की धनराशि को वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया। तदोपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की var यूनिट को अन्तिम रूप से निरस्त करते हुए निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 44-07-2023 प्रेषित किया गया तथा जमा धनराशि वापस लिये जाने हेतु औपचारिकताएऐं पूर्ण करने का अनुरोध किया गया, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा आज तिथि तक पूर्ण नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण की जा चुकी है तथा आवंटित यूनिट के सापेक्ष ऑफर ऑफ फिट-आउट समयानुसार देते हुए यूनिट का निरस्तीकरण कर दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि को विपक्षी द्वारा वापस किये जानें का कोई समुचित आधार नहीं है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा wera शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र के संलग्नक-4 की प्रति, अस्थाई ओ.सी., दिनांक 20--08-2049 की प्रति, ऑफर ऑफ फिट आउट, दिनांक 49-40--2024 की प्रति, माँग-पत्र, दिनांक 49-40-2024 की प्रति, अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 23-04-2023 की प्रति, शिकायतकर्ता द्वारा धन वापसी सम्बन्धी पत्र, दिनांक 27-04-2023 की प्रति, निरस्तीकरण पत्र, दिनांक 44--07-2023 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cal को सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का सम्यूक परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार किया:- 4. क्या विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है? 2. क्या शिकायतकर्ता अपनी जमा धनराशि मय ब्याज वापस पाने का अधिकारी है Page 3 ०3 Z E-Court निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 एवं 02 यह दोनों निस्तारण बिन्दु एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं। अतः तथ्यों एवं साक्ष्यों की पुनरावृत्ति से बचने तथा सुविधा की दृष्टि से इनका निस्तारण एक साथ किया जा रहा है। बिन्दु संख्या: 04, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता अपनी जमा धनराशि मय ब्याज वापस पाने का अधिकारी है अथवा नहीं? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 42--09-2023 दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों छिपाते हुए yeaa शिकायत योजित की गयी है। vat यूनिट रिटेन्शन स्कीम के otra बुक करायी गयी थी, जिसमें शिकायतकर्ता को रू.29,74,537 ,//- की धनराशि के मद में मेसर्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. द्वारा जारी क्रेडिट नोट का समायोजन यूनिट की कुल कीमत में किया जाना था। Gat आवंटन-पत्र के संलग्नक-4-। के प्रस्तर-03 के अनुसार var क्रेडिट नोट विपक्षी एवं मेसर्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. के मध्य तय शर्तों को साकार होने के अधीन था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त क्रेडिट नोट साकार न होने की सूचना प्रेषित की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत रू.64,84,7/- के सापेक्ष केवल आंशिक धनराशि &.27,38,96 /— का भुगतान किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा माँग-पत्र एवं अनुस्मारक-पत्र के माध्यम से शेष धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु शिकायतकर्ता से अनुरोध किया गया। यह भी उल्लेख किया गया है कि सम्बन्धित टावर के सापेक्ष विपक्षी को ओ.सी., दिनांक 20-08-2049 को प्राप्त हो चुका है, जिसकी प्रति संलग्न है। विपक्षी द्वारा अपने पत्र, दिनांक 49-40-2024 के माध्यम से ऑफर ऑफ फिट-आउट प्रेषित किया गया, जिसके साथ .34,5,795 //- की धनराशि के मद में माँग प्रेषित की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा अनुस्मारक-पत्र, दिनांक 23-0:-2023 & HA A अवशेष धनराशि न करते हुए &.27,38,9i6 /— की धनराशि को वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया, तदोपरान्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की उक्त यूनिट को अन्तिम रूप से निरस्त करते हुए निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 44-07-2023 प्रेषित किया गया तथा जमा धनराशि वापस लिये जाने हेतु औपचारिकताऐं पूर्ण करने का अनुरोध किया गया, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा आज तिथि तक पूर्ण नहीं किया गया है।
निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 45--0-2024 को विपक्षी की परियोजना Migsun Ultimo में यूनिट संख्या: Sun-2, 007 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.57/3,460//- थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रू.57,3,453//- की धनराशि का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना Page 4 of 3 Pe ia E-Court है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा जनवरी, 2022 तक दिया जाना था। विपक्षी को पेमेन्ट प्लान के अनुसार यूनिट के सापेक्ष समस्त धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. से प्राप्त धनराशि को अपने स्टेटमेन्ट में स्वीकार किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा प्रत्युत्तर, दिनांक 30-05--2024 दाखिल कर, मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा हस्ताक्षर एवं स्टाम्प सहित पत्र, दिनांक 7:-70-202i के माध्यम से Ream धनराशि रू.29,74,537 /— को स्वीकार किया गया, जिसकी प्रति संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, जिसके साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध हैं। विपक्षी द्वारा दाखिल माँग-पत्र एवं अनुस्मारक-पत्र के साथ कोई पावती संलग्न नहीं की गयी है और न ही विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया गया है जिससे यह साबित हो सके कि शिकायतकर्ता द्वारा उक्त दस्तावेज वर्तमान में प्राप्त किया गया हो विपक्षी द्वारा ओ.सी., दिनांक 20-08-2049 पत्रावली पर दाखिल किया गया है, जोकि मात्र अस्थाई ओ.सी. है। sat ओ.सी. जारी किये जाने की तिथि से 48 माह तक ही वैद्य माना जाता है तथा यह ओ.सी. इस शर्त के साथ जारी किया जाता है कि प्रार्थी उल्लेखित त्रुटियों का समाधान कर, नवीन सी.सी. प्राप्त करने हेतु मुख्य कार्यपालक अधिकारी को प्रार्थना-पत्र प्रेषित करेंगे। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ फिट--आउट प्रेषित किया गया है, जिसकी विधि में कोई मान्यता नहीं है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा ऑफर पत्र कभी प्रेषित नहीं किया गया है तथा विपक्षी द्वारा दाखिल ऑफर ऑफ फिट--आउट एवं माँग-पत्रों की कोई भी पावती उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ता को विपक्षी द्वारा दाखिल निरस्तीकरण पत्र कभी प्राप्त नहीं हुआ है और न ही विपक्षी द्वारा इस सम्बन्ध में कोई पावती पत्रावली पर दाखिल की गयी है। उक्त दस्तावेज प्राप्त न होने की स्थिति में विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के प्रस्तर-6 का आह्वान नहीं किया जा सकता है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
उ.प्र. रेरा द्वारा जारी कार्यालय आदेश, दिनांक 29-05-2024 का प्रस्तर-8.5.4 निम्नवत् है:- “कतिपय प्रकरणों में अस्थाई / अनन्तिम (Temporary) Yor प्रमाण-पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण-पत्र सीमित अवधि के लिये जारी किये जा रहे हैं। यह परम्परा अविधिक है। सम्बन्धित सक्षम प्राधिकारी कृपया समीक्षा करते हुए इस प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाये |" उपर्युक्त कार्यालय आदेश के अनुसार अस्थाई पूर्णता प्रमाण-पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण-पत्रों को सीमित अवधि के लिए जारी किये जाने पर अविधिक बताया गया है तथा Page 5 of 3 Z ८222 ५ E-Court सम्बन्धित प्राधिकारियों को प्रभावी अंकुश लगाये जाने के निर्देश दिये गये हैं। प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा अस्थाई ओ.सी. के आधार पर ऑफर ऑफ फिट-आउट प्रेषित किये जाने की बात कही गयी है तथा अस्थाई ओ.सी., दिनांक 20--.08-2049, की प्रति भी संलग्न की गयी है, परन्तु उपर्युक्त कृत्य से कार्यालय आदेश, दिनांक 29-05-2024 का स्पष्ट उल्लंघन किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ फिट-आउट, दिनांक i9-70-202: बिना विधिक ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये प्रेषित किया गया है।
इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा प्रेषित माँग-पत्र, अनुस्मारक-पत्र तथा निरस्तीकरण-पत्र पत्रावली पर संलग्न किये गये हैं। शिकायतकर्ता द्वारा अपने अभिकथन में किसी भी पत्र के प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की गयी है तथा यह तर्क भी प्रस्तुत किया गया है कि उपरोक्त के सम्बन्ध में पावती भी पत्रावली पर विपक्षी द्वारा दाखिल नहीं की गयी है। पत्रावली पर विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि विपक्षी द्वारा कब तथा किस माध्यम से शिकायतकर्ता को उपर्युक्त पत्र सन्दर्भित किये गये हैं। उपरोक्त पत्रों का शिकायतकर्ता को संज्ञान न होने के कारण निरस्तीकरण की प्रक्रिया पूर्णतः अविधिक है तथा उपरोक्त आधार पर विपक्षी द्वारा प्रेषित माँग-पत्र, दिनांक 49-40-2024, अनुस्मारक-पत्र, aie 23-0:-2023 तथा निरस्तीकरण-पत्र, दिनांक 44-07-2023 निरस्त किये जाते है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 45-40-2024 को विपक्षी की परियोजना Migsun Ultimo में यूनिट संख्या: Sun-2, 007 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत रू.57,3,460,//- थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रू.57,3,453,/- की धनराशि का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा हस्ताक्षर एवं TTT सहित पत्र, दिनांक 47-70-202: के माध्यम से रिटेन्शन धनराशि रू.29,74,537,//- को स्वीकार किया गया, जिसकी प्रति संलग्न है। शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, जिसके साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध हैं। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 के सम्बन्ध में विपक्षी का कथन है कि उभय पक्षों के मध्य दिनांक 30-40-2024 को आवंटन-पत्र हस्ताक्षरित एवं निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-04(0) के अनुसार विपक्षी द्वारा अगस्त 2025 तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था। उक्त यूनिट Rea स्कीम के अर्न्तगत बुक करायी गयी थी, जिसमें शिकायतकर्ता को रू.29,74,537 /- की धनराशि के मद में मेसर्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. द्वारा जारी क्रेडिट नोट का समायोजन यूनिट की कुल कीमत में किया जाना था। Sad आवंटन-पत्र के संलग्नक-«-१ के प्रस्तर-03 के अनुसार उक्त क्रेडिट नोट विपक्षी एवं मेसर्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. के मध्य तय शर्तों को साकार होने के अधीन था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को vad क्रेडिट नोट साकार न होने की सूचना प्रेषित की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत G.6,84,774/— के सापेक्ष केवल आंशिक धनराशि Page 6 of 83 प्र, 28 डे o E-Court रू.27,38,96 /— का भुगतान किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा माँग-पत्र एवं अनुस्मारक-पत्र के माध्यम से शेष धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु शिकायतकर्ता से अनुरोध किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि को विपक्षी द्वारा वापस किये जाने का कोई समुचित आधार नहीं है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा wera शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन-पत्र /अनुबन्ध, दिनांक 30-40-2024 की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके प्रस्तर-4(0) के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा 40 Ae + 06 माह ग्रेस अवधि सहित दिया जाना था, परन्तु निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 में दिये गये निष्कर्ष से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा बिना ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये ही ऑफर फॉर फिट-आउट शिकायतकर्ता को प्रेषित किया गया है। इस सम्बन्ध में रेश अधिनियम, 20i6 की धारा-43 में स्पष्ट रूप से प्राविधानित है कि:- 43, No deposit or advance to be taken by Promoter without fiorst entering into agreement for sale. - (7) A promoter shall not accept a sum more than ten per cent of the cost of the apartment, plot, or building as the case may be, as an advance payment or an application fee, from a person without first entering into a written agreement for sale with such person and register the said agreement for sale, under any law for the time being in force.
(2) The agreement for sale referred to in sub-section (2) shall be in such form as may be prescribed and shall specify the particulars of development of the project including the construction of building and apartments, along with specifications and internal development works and external development works, the dates and the manner by which payments towards the cost of the apartment, plot or building, as the case may be, are to be made by the allottees and the date on which the possession of the apartment, plot or building is to be handed over, the rates of interest payable by the promoter to the allottee and the allottee to the promoter in case of default, and such other particulars, as may be prescribed. उपरोकतानुसार यह स्पष्ट है कि प्रोमोटर, यथास्थिति, अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन की लागत के 40 प्रतिशत से अधिक राशि अग्रिम संदाय अथवा आवेदन फीस के रूप में किसी व्यक्ति, उस व्यक्ति के साथ लिखित करार किये बिना, स्वीकार नहीं करेगा और var विक्रय करार को तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन पंजीकृत करेगा। ऐसे में यह विपक्षी का दायित्व है कि वह यदि यूनिट की कुल कीमत की t0 प्रतिशत से ज्यादा की धनराशि प्राप्त Page 7 of 3 PAC डर 4 E-Court कर लेता है, तो निश्चित रूप से अनुबन्ध उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 740 / 8-3--48-65 विविध / 46, दिनांक 47-40-20॥8 के प्रारूप पर , निष्पादित करेगा और यदि नहीं कराता है, तो रेरा अधिनियम के अन्तर्गत दण्डनीय होगा।
प्रश्नगत प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम की धारा-43 का उल्लंघन किया गया, क्योंकि उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित आवंटन-पत्र / अनुबन्ध, उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 4740 /8—-3-8-65 विविध /t6, दिनांक 7-40-2048 के प्रारूप पर निष्पादित एवं हस्ताक्षरित नहीं किया गया है। वर्णित स्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा रे। अधिनियम की aRi3 का उल्लंघन किया गया है। चूंकि विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम, 20:6 की धारा-43 का उल्लंघन करते हुए आवंटन-पत्र / अनुबन्ध / एग्रीमेन्ट फॉर सेल उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 740 /8-3-48-65 fafaer/r6, दिनांक 7-40-2048 के प्रारूप पर निष्पादित, हस्ताक्षरित एवं पंजीकृत नहीं कराया गया है और प्रश्नगत यूनिट की बुकिंग अंतिम रूप से निरस्त करते हुए, विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की जमा धनराशि अभी तक वापस नहीं की गयी है। ऐसे में उपरोक्त विवेचना से स्पष्ट है कि विपक्षी, आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार कोई भी धनराशि जब्त करने का अधिकारी नहीं है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने हेतु आवेदन किया गया है, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की जमा धनराशि अभी तक वापस नहीं की गयी है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 0 में दिये गये निर्णय के अनुसार शिकायकर्ता को कोई विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित नहीं किया गया। स्पष्टतया शिकायतकर्ता की जमा धनराशि का विपक्षी द्वारा उक्त अवधि में उपभोग किया गया। वर्णित स्थिति में उचित होगा कि विपक्षी, शिकायतकर्ता की जमा धनराशि मय ब्याज वापस करें।
उपरोक्त अभिकथनों से यह स्पष्ट है कि उभय पक्षों के मध्य क्रेडिट-नोट के सापेक्ष अदा की गयी धनराशि के सम्बन्ध में ही विवाद शेष है। विपक्षी द्वारा पत्रावली पर दाखिल आवंटन-पत्र के संलग्नक-#-। के प्रस्तर-03 पर बल देते हुए कहा गया है कि vat क्रेडिट नोट विपक्षी एवं मेसर्स रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट लि. के मध्य तय शर्तों के साकार होने के अधीन था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल पत्र दिनांक 4:-70-202: में विपक्षी द्वारा Rear धनराशि रू.29,74,537,/- तथा पूर्व में शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि रू.5,20,000 / - को स्वयं स्वीकार करते हुए अवशेष धनराशि G.22,8,96 /— बतायी गयी है। अत: क्रेडिट नोट की धनराशि को विपक्षी द्वारा स्वीकार किये जाने के क्रम में शिकायतकर्ता उक्त धनराशि पाने का अधिकारी है। Page 8 of 3 शिकायतकर्ता द्वारा var क्रेडिट नोट के अतिरिक्त जमा धनराशि का विवरण निम्नवत् a जमा धनराशि जमा करने की तिथि रसीद संख्या (प्रमाण) रू.47,8,96 /— 20--40--202॥ MURC/I527/2-22 रू.5,00,000 / — 25—0—202 MURC/I5229/2-22 रू.5,20,000 / — 04--03--2024 ा२(/]4339/20-2] रेरा अधिनियम की ais() F स्पष्ट रूप से उल्लेखित है किः- “786, (4) If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, — (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason,
he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed.”
उपरोक्तानुसार यदि प्रोमोटर करार के निबन्धों के अनुसार उसमें दिये गये अवधि तक समय से किसी अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन को पूरा करने में असफल रहता है या कब्जा देने में असमर्थ रहता है, तो वह उपलब्ध किसी अन्य उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आवंटी की मांग पर यदि आवंटी परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो प्रकरण के अनुसार, उस अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन के सम्बन्ध में उसके प्राप्त धनराशि ब्याज सहित लौटाने का उत्तरदायी होगा। शिकायकर्ता द्वारा कहा गया कि उनकी जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जाये। विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम, 20i6 की धारा-43 का उल्लंघन करते हुए आंवटन-पत्र / अनुबन्ध / एग्रीमेन्ट फॉर सेल, उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 740 // 8-3--48-65 विविध ,/ 46, दिनांक 47-40--2048 के प्रारूप पर निष्पादित, हस्ताक्षरित एवं पंजीकृत नहीं कराया गया है और प्रश्नगत यूनिट की बुकिंग अंतिम रूप से निरस्त करते हुए, विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की जमा धनराशि अभी तक वापस नहीं की गयी है। अतः शिकायतकर्ता, रेरा अधिनियम की धारा-48(4)(ए) के Page 9 of 3 2024 E-Court अन्तर्गत परियोजना से बाहर आने का अधिकारी है और इस प्रकार शिकायतकर्ता, विपक्षी से अपनी समस्त जमा धनराशि मय ब्याज वापस प्राप्त करने का अधिकारी है।
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Racca waa? ग्रालि आदि बनाम यूनियन ऑफ sear’ के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- “Section 78(7)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.” ga: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के अधीन दिनांक 42-70-20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय ,// पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित ॥८7/2+7 प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सी: 920/ 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित व विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय // पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ॥४८०+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर So Yee ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्ता को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि ver धनराशि को डिक्रिटल Wecretal) धनराशि के रूप में रेरा द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा thatch बनाम हिमाचल weer आवास विकास IRIE 207 SCC OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- Page 0 of 3 7 E-Court “The following interesting questions arise for decision in the present case:
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature 2" 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh v. Land Acquisition Collector (7997) 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and उत of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 999 titled as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRO©) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act.
40, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. 4. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय sone विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर गोहाली क्षेत्रीय विकास ग्राधिकरण व अन्य बनाग गौरव FeV, 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी wearer राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व अन्य 2627 SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् हैः- 28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract ~ ee Page I of 3 E-Court
2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 78597] which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2027 and our order dated 4-3-2027, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the Sth instalment which became due on 20-7-2027, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. dager बिन्दु संख्या: 04 एवं 02 Pena किये जाते हैं। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की समस्त जमा धनराशि W.57,3,453/-, जमा करने की तिथि से धनराशि की वास्तविक अदायगी की तिथि तक ४८,२+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें | विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें।
प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन-पत्र / बी.बी.ए, दिनांक 30-40-2024 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा vad आवंटन-पत्र / बी.बी.ए. उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 4740 /8—3—8-65 विविध ,/ 46, दिनांक 47-40-2048 के प्रारूप पर निष्पादित, हस्ताक्षरित व पंजीकृत नहीं कराया गया है। अतः विपक्षी (प्रमोटर) द्वारा रेश अधिनियम की धारा-43 के प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है, जिसके लिए रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-64 के अधीन शास्ति का प्राविधान किया गया है। अतः सचिव, रेरा विपक्षी (प्रमोटर) के विरूद्ध शास्ति अधिरोपित करने की कार्यवाही हेतु, प्रश्नगत प्रकरण को प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें| इस आदेश की प्रति सचिव, रेरा को अग्रेतर कार्यवाही हेतु प्रेषित की जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-38, 40(2), 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा Py Page 2 of 3 E-Court 5. शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि उपर्युक्त 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। TER पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। दिनांक: 42--06-2025. (संजय आर. भूसरेड्डी) अध्यक्ष, RT| Page 3 of 3