Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Momin Khan v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/05/95093/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
UP Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Hearing Bench 4 A Order under Section 34 Shri Rajeev Kumar, Hon'ble Chairman Cause list (complaint number, complainant, unit number): | Complaint No. | Complainant(s) | Unit No. | |---|---|---| | NCRI44/05/94004/2022 | Atul Bhatnagar and Nidhi Bhatnagar | 2085 | | NCRI44/05/95073/2022 | Ajit Kumar | [?]4 | | NCRI44/06/94975/2022 | Shivang Goyal | T4-4053 | | NCRI44/05/95053/2022 [?] | Vivek Singh and others | 826 | | [?] | Shilpa Arora and others | 82il | | NCRI44/06/9578/2022 | Shivang Goyal | [?]-[?], Forth Floor | | NGRI44/06/9565/2022 | Shivang Goyal | [?]-508, Eight Floor | | NCRI44/05/95093/2022 [?] | Khan [?] | 026 | Versus ATS Raed Pvt. Ltd. [?] The complainants Atul Bhatnagar and Nidhi Bhatnagar, along with 07 other complainants, have filed complaints against the respondent. The facts of all these complaints are the same and they rest on the same evidence. All these complaints relate to "ATS ALLURE". Therefore, they are being disposed of by a single order. Complaint No. NCRI44/05/940042022, filed by Atul Bhatnagar and Nidhi Bhatnagar, will be the lead case. The present complaint application has been filed by the complainants against the respondent seeking possession and interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant states that they booked Unit No. 2085 in the respondent's project "ATS ALLURE", the total price of which was Rs. 36,70,000/-. Against this, the complainant paid Rs. 33,40.790/- from time to time in instalments. The complainant states that they booked the unit in the respondent's project on 9.22.2043, after which an allotment letter dated 28.04.2044 was executed between the parties in respect of the unit. As per the agreement, possession of the unit was to be given within 42 months plus a grace period of 3 months, i.e. by October 2047. The respondent sent an offer of possession dated [?]4.04.2022, but the delay interest for the delay in the project has not been adjusted or paid. The complainant has paid dues from time to time in accordance with the terms and conditions of the agreement. The respondent has delayed handing over possession of the unit by more than 4 years, and at present an amount of Rs. 5,04,000,/- is being demanded. The complainant therefore requests that possession of the unit and interest for the delayed period be granted. In support of the complainant's statement, photocopies have been filed of the written complaint, the account statement, the offer of possession dated 4.04.2022, the booking form, the allotment letter dated 28.04.2044 and other documents.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-4 ए आदेश अन्तर्गत धारा-34 श्री राजीव कुमार, माननीय अध्यक्ष | क्रम | शिकायत संख्या [= Gea eel | शिकायतकर्तागण् यूनिट संख्या संख्या bt —. पर i— 4. | NCRI44/05/94004/2022 | अतुल भटनागर एवं निधि 2085 भटनागर ua 2. | NCRI44/05/95073/2022 अजीत कुमार | इठा4 Ls ra NCRI44/06/94975/2022 शिवांग गोय T4-4053 “| HES ——— hea | * | प्टरा44/05/95053/2022 विवेक सिंह एवं अन्य 826 |» । एलसग्राव्घफ्रतलढ2छ5ठ | शिल्पा अरोड़ा एवं अन्य | 82il a NCRI44/06/9578/2022 शिवांग गोय तृड-उ0्वा, Forth Floor [—7, | NGRI44/06/9565/2022 शिवांग गोय गुठ-508, Eight Floor | * | पलरा44/05/95093/2022 |. खान | खान | 026 न L + बनाम ए.टी.एस Raed प्रा.लि. शिकायतकर्ता अतुल भटनागर एवं निधि भटनागर के साथ 07 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किये गये हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें "ats ALLURE" से सम्बन्धित है। अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/05/940042022 अतुल भटनागर एवं निधि भटनागर अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। 2
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "ATS ALLURE" में यूनिट संख्या- 2085 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 36,70,000/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 33,40.790/- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना में दिनांक 9.22. 2043 को यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 28.04.2044 को निष्पादित किया गया है। अनुबन्ध पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 एवं 3 माह की अनुग्रह अवधि अर्थात् अक्टूबर 2047 तक मिलना था। विपक्षी द्वार ऑफर आफ पोजेशन दिनांक ॥4.04. 2022 को प्रेषित किया गया है, परन्तु उनके द्वारा परियोजना में हुए विलम्ब के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज समायोजित भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध की नियम एवं शर्तों के अनुसार समय-समय पर अपनी देयता का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है और वर्तमान समय में 5,04,000,/-रूपये की धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित शिकायत पत्र, खाता विवरण, ऑफर ऑफ पोजेशन दिनांक 4.04.2022, बुकिंग फॉर्म, आवंटन पत्र दिनांक 28.04.2044 आदि की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी।
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि 03 कम्पनियों द्वारा कर्सोर्टियम बनाते हुए एम.ओ.यू निष्पादित किया गया, जिसके उपरान्त यमुना प्राधिकरण के समक्ष भूमि आवंटन हेतु आवेदन किया गया। प्राधिकरण द्वारा दिनांक 46.08.204 को ओरिस इंफास्ट्रक्चर wife. के नाम पर भूमि आवंटित की गयी और दिनांक 44.04.2043 को लीज़ Sts निष्पादित हुई। ओरिस इंफास्ट्रक्चर प्रा. लि. द्वारा विपक्षी के नाम पर भूमि आवंटित की गयी, जिसके लिए सबलीज़ डीड दिनांक 42.06.2043 को निष्पादित किया गया। भूमि का भौतिक कब्जा विपक्षी को प्राप्त नहीं हुआ था, जिसके लिए उनके द्वारा प्राधिकरण को विभिन्न तिथियों पर पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया। प्राधिकरण की तरफ से कोई संतोषजनक कार्यवाही न देखते हुए विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में Re योजित की गयी। विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य में कोई विलम्ब नहीं किया गया है। परियोजना में विलम्ब प्राधिकरण द्वारा भूमि का भौतिक कब्जा नहीं उपलब्ध कराये जाने के कारण हुआ है। ifas-t9 लॉकडाउन के कारण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु 06 माह का विस्तारण अवधि प्रदान की गयी। विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए ओ.सी प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता को अपनी देयता का भुगतान करते हुए यूनिट का कब्जा प्राप्त किये जाने हेतु विभिन्न तिथियों पर पत्र प्रेषित किये गये है। > विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में माननीय उच्च न्यायालय की आदेश की प्रति, प्राधिकरण को प्रेषित पत्रों की प्रति, शिकायतकर्ता को प्रेषित पत्र की प्रति," एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है।
पत्रावली पर दाखिल माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारित आदेश दिनांक 28.05.2020 से विदित है कि राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश दिनांक 29.08. 204 के विरूद्ध Re योजित की गयी थी, जिसमें किसानों को 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त धनराशि का भुगतान किये जाने से सम्बंधित था, जिसके उपरान्त विपक्षी को सक्षम प्राधिकरण द्वारा अतिरिक्त धनराशि की मांग की गयी थी। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर कोई रोक नहीं लगायी गयी थी और माननीय न्यायालय द्वारा शासन आदेश दिनांक 29.08.2044 को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया और सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी मांग पत्र को भी निरस्त कर दिया गया। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- 4... क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? व क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 3. an शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु Wea बिन्दु deri इस तथ्य पर विचरित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ?
इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 / 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo feo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य“ में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54, From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and श्र therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on- going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह we है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आब्जेंवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRIVI8 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार बिन्दु Wee निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण विपरीत प्रभाव पड़ा है। इस सम्बन्ध में अनुबन्ध के प्रस्तर-7.2 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित है:-
"Notwithstanding the above, the Developer shall be entitled to an extension of time from the expiry of the Completion Date, if the Completion of Construction of the said Apartment is delayed on account of any of the following reasons - a) Non-availability of steel, cement, other building materials, water or electric supply or labour, or b) Any change in the Applicable Law or existence of any injunction, stay order. prohibitory order or directions passed by any Court, tribunal, body or Competent Authority; or हि ०) Delay in securing any permission, Approvals, NOC, sanction building plan, building completion and/or occupation certificate, water, electricity, drainage or sewerage connection from the Competent Authority for reasons beyond the control of the Developer, or d) Force Majeure Event or any other reason (not limited to the reasons mentioned above) beyond the control of or unforeseen by the Developer, which may prevent or delay the Developer in performing its obligations as specified in this Allotment Letter. In case there is any delay on account of the aforesaid reasons, the Developer shall keep the Allottee(s) informed about the same along with a revised tentative date of possession." माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 04.44.20i9 को सिविल Re पिटीशन संख्या-43029 ,/4985 “एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य” में निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया।मार्च 2020 में arfas—to फैलने के कारण भी परियोजना के निर्माण कार्य में बुरा प्रभाव पड़ा ।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43029 //985 “एम. सी. मेहता बनाम भारत सरकार” में पारित आदेश दिनांक 04.4.20:9 4 निम्नलिखित निर्देश दिये है :- With respect to demolition and construction activities wedirect that no demolition and construction activities take place inDelhi and NCR region. In case it is found that such activity isdone, the local administration as well as the municipalauthoritiesincluding the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissionersshallbe personally held responsible for all such activities. They haveto act in furtherance of the Court’s order and to ensure that nosuch activity takes place. We direct that construction, demolition and activities bestopped forthwith as well as garbage burning. In case, any personis found in construction and demolition activity and garbageburning in Delhi and NCR region, he/she shall be penalized. Anyperson is doing construction and demolition activity in violationof this order, shall be penalized with Rs.l Lac for such activity.For garbage burning he/she shall be penalized with Rs.5,000/- andbesides liable for violation of theorder passed by this Court tobe dealt with in accordance with law. इसके अतिरिक्त उपरोक्त सिविल अपील संख्या-43029 / 985 में पारित आदेश दिनांक 09.2.209 4 निम्नलिखित निर्देश दिये है :- "५ In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"]2, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more." Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04.44.20i9 से दिनांक 44.02.2020) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 09.i220i9 4 पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04.44.2049 से दिनांक 09.:2.20:9) एवं 33 दिन (66+2) (दिनांक 40.42. 2049 से दिनांक 44.02.2020 तक Ua 6 बजे से सुबह 6 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। विपक्षी ऐसी दशा में कुल 35+33 = 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण लाभ पाने का अधिकारी है। समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-2 Paka किया जाता है। है; निस्तारण बिन्दु संख्या-3 बिन्दु संख्या-3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना में दिनांक 49.44.2043 को यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 28.04.2044 को निष्पादित किया गया है। अनुबन्ध पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 एवं 3 माह की अनुग्रह अवधि अर्थात् अक्टूबर 2047 तक मिलना था। विपक्षी द्वारा ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 47. 04.2022 को प्रेषित किया गया है, परन्तु उनके द्वारा परियोजना में हुए विलम्ब के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज समायोजित/भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध की नियम एवं शर्तों के अनुसार समय-समय पर अपनी देयता का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्षो से अधिक का विलम्ब किया गया है और वर्तमान समय में 5,04,000,//-रूपये की धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। दूसरी ओर विपक्षी का कहना है उनके द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चूका है और सकक्षम प्राधिकरण से ओ. सी. दिनाक 30.03.2022 को प्राप्त किया जा चूका है. पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल आवंटन पत्र दिनांक 28.04.204 के पृष्ठ संख्या-2 के प्रस्तर-7.2 में प्राविधान दिये गये है, जिसके अनुसार आवंटन पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 42 माह एवं 03 माह की अनुग्रह अवधि अर्थात् 45 माह में यूनिट का कब्जा दिया जाना था। आवंटन पत्र के अनुसार दिनांक 28.40.2047 तक कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है।
इसके अतिरिक्त फोर्स मैज्योर के मद में विपक्षी कुल 68 दिन की अवधि के लिए लाभ पाने का अधिकारी है। (जैसा कि निस्तारण बिन्दु संख्या-2 में वर्णित है) जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील do 6649-50 /20I8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — \S Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 28.4020:7 + 68 दिन अर्थात् 04.04.2048 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहाँ तक ब्याज tan का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, wife wed द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2oi6 के अधीन दिनांक 47.0.20I8 को ae) YY
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय ,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/“पटटा विलेख के प्रारूप के WER 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(9) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८,₹+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(०४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। तदनुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण के फ्लैट को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.42.2022 तक ओ.सी/सी.सी
सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और ca tery शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.0:.20i8 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि ca शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोज़ना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस ५ 40 अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(28)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये।
यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। दिनांक :-6) |! /2022 (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण