Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mohammad Moazzam Ali Ahmad v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/05/94853/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Bench-II Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member Complaint No. NCRI44/05/94853/2022 Mohammad Moujam Ali Ahmad Versus Granite Hill Properties Pvt. Ltd. The complainant has instituted this case against the opposite party seeking possession of the unit and interest for the delayed period. In brief, the complainant states that they booked unit no. 0#07/00/76/835 in the opposite party's project The Downtowns [?]. Against the unit the complainant has paid Rs. 6,72,07i /- to the opposite party. The complainant says that the project is delayed and construction is proceeding at a slow pace in the project. The complainant has requested possession of the unit and interest for the delayed period. In support of their statement the complainant has filed photocopies of the allotment letter, the receipt of the deposited amount, and an additional application (regarding the inclusion of additional facts).
In its counter-statement in support of the case, the opposite party stated that the complainant had booked the unit in the Downtown project under the [agen] link plan. In respect of the allotted unit, an agreement was executed on 30.05.2044, under which the unit was to be handed over within 5 years and a 6-month grace period from the date [oer] of commencement of construction work. Construction work in the project is proceeding at a rapid pace. After completing the project, the unit will be made available with possession by October 2023. Reminder letters dated 02.09.202 and II8.42.2024 were sent to the complainant to pay the amount, but the complainant did not pay the amount. A letter dated 49.05.2022 was sent for cancellation of the unit, but the complainant has not replied. In support of its counter-statement the opposite party has filed copies of the reminder letters dated 02.05. 2024, 8.42.2024 and of the letter dated i905, 2022 regarding the cancellation of the unit. The arguments of both parties were heard and the file was examined. On the basis of the pleadings of the parties, the following points for determination have been framed:- 4. Was the opposite party's project delayed because of the COVID-49 pandemic? If yes, what is the effect? 2. Can the complainant be awarded possession and interest for the delayed period? If yes, what will be the rate of interest? Determination of point [deat]
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। पीठ-॥ उपस्थिति :- so दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य शिकायत संख्या — NCRI44/05/94853/2022 मौहम्मद मौजाम अली अहमद बनाम ग्रेनाइट हिल प्रपार्टीज प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु वाद संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना The Downtowns में यूनिट संख्या- 0#०७/00/76/835 बुक करायी गयी oft) शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष bo 6,72,07i /- विपक्षी को भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना विलम्बित है और परियोजना में धीमी गति से निर्माण कार्य हो रहा है। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, जमा धनराशि की रसीद व अतिरिक्त प्रार्थना पत्र (अतिरिक्त तथ्य को सम्मिलित करने के सम्बंध में ) की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से वाद के समर्थन में प्रतिवादपत्र प्रस्तुत किया गया जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता ने परियोजना डाउनटाउन में agen लिंक प्लान के अन्तर्गत यूनिट बुक कराई थी। आवंटित यूनिट के सम्बंध में दिनांक 30.05.2044 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार निर्माण कार्य oer होने की तिथि से 5 वर्ष तथा 6 माह अनुग्रह अवधि में i>
यूनिट का कब्जा दिया जाना था। परियोजना में निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रही है। परियोजना पूर्ण करके अक्टूबर 2023 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जाएगा। शिकायतकर्ता को धनराशि भुगतान किये जाने हेतु दिनांक 02.09.202 व ॥8.42.2024 को अनुस्मारक पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता ने धनराशि भुगतान नहीं किया। दिनांक 49.05.2022 को यूनिट निरस्त किये जाने हेतु पत्र प्रेषित किया गया परन्तु शिकायतकर्ता की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। विपक्षी ने प्रतिवादपत्र के समर्थन में अनुस्मारक पत्र दिनांक 02.05. 2024,8.42.2024व यूनिट निरस्त किये जाने के सम्बंध में पत्र दिनांक i905, 2022 की प्रतियां दाखिल की है। उभयपक्षों के तर्कों को सुना व पत्रावती का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- 4. क्या विपक्षी की परियोजना कोविड-49 महामारी के कारण विलम्बित हुई ? यदि हां तो प्रभाव। 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है? यदि हां तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु deat
परियोजना कोविड-49 महामारी के कारण भी परियोजना प्रभावित हुईं | जहां तक aifts—9 महामारी के कारण परियोजना में निर्माण कार्य प्रभावित होने का प्रश्न है तो इस सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड--49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की. अवधि दे दी. गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए 2 विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से अतिदेय धनराशि पर कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। TR बिन्दु ver निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी व शिकायतकर्ता के मध्य दिनांक 30.05.2074 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके प्रस्तर संख्या 26 के अनुसार निर्माण कार्य प्रारम्भ होने के तिथि से 5 वर्ष 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी की ओर से निर्माण कार्य प्रारम्भ होने के तिथि का कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है जिस कारण आवंटन पत्र निष्पादित होने की तिथि 30.05.20:4 से 5 वर्ष तथा 6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 20:9 में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी ने प्रतिवादपत्र में परियोजना पूर्ण करके अक्टूबर 2023 में यूनिट का कब्जा दिये जाने का तथ्य अंकित किया है।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि परियोजना विलम्ब की श्रेणी में है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over 3 —e of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable."
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह wre है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि vated द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक अनुबन्ध निष्पादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया जा सकता है कि उभयपक्ष को var अनुबन्ध की शर्ते स्वीकार हैं तथा Wr आने से पूर्व विलम्ब के लिए अनुबन्ध के अनुसार ब्याज देय होगा। रेरा के प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है, उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय बॉम्बे द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 76, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के
प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 04.05.2047) से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 04.05.2047 से रेरा के प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है, जिस वाद में पक्षकारों के मध्य कोई अनुबन्ध निष्पादित नही है, वहां शिकायतकर्ता रेरा के प्राविधानों के अनुरूप जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील सं० 6649-50 / 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession.” उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2() में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +4% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"' यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। sat प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+i प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश
4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि जून 2023 तक शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा मूलभूत सुविधाओं तथा ओ.सी. /सी.सी. के साथ उपलब्ध करायें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी परियोजना विलम्ब होने के सम्बंध में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.42.2049 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2076 की धारा 2(2४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के. डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा भी डिफॉल्ट किये जाने पर आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेंगे |
5... इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। दिनांक:-- २१ -१-- २७२३ SSS न सकता ७ नदपमप-न-नननकं८ ४2०0५. 04.2823 डा०दीपक स्वरूप सक्सेना (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर