Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
dharmender singh v. Yamuna Expressway Industrial devlopment Authority
Complaint No. NCR144/05/93794/2022
- Decision date
- 2026-08-06
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40/63 सपठित सपठित नियम-24 49-शिकायत संख्या:-0८२44/05/93794/2022 धर्मेन्द्र सिंह बनाम यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण आदेश-पत्र दिनांक: 06.08.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो amphi के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री जिज्ञासा राठी उपस्थित Be | उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि विपक्षी द्वारा आज तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। gered gerd में माननीय पीठ-04ए द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 45.05.2023 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह उपरोक्त सारणी के सभी शिकायतकर्तागण के प्लॉटस् की समस्त सुविधाओं को आवंटन पत्र/ब्रोशर के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 08.07.2024 से पूर्व ओ.सी /सी.सी. सहित भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें।
2. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह रेरा अधिनियम की धारा-47 के अधीन बिना ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये किसी भी शिकायतकर्तागण को प्लॉटस् की रजिस्ट्री कराये जाने हेतु बाध्य नहीं करेंगे और ओ.सी.,/सी.सी. प्राप्त कर चेक लिस्ट जारी करते हुए दिनांक 08.07.2024 से पूर्व शिकायतकर्तागण के पक्ष में रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। यदि ओ.सी.,// सी.सी. जारी करने के सम्बन्ध में कोई आपत्ति है, तो उठप्र० प्लानिंग एण्ड डवलपमेन्ट एक्ट, 4973 की धारा-44(3) में राज्य सरकार के समक्ष रिवीजन ग्राह्म है। = 3. विपक्षी, शिकायतकर्ता (नीलम देशवाल) को दिनांक 0.04.204 फोर्स मैज्योर के रूप में निस्तारण बिन्दु संख्या-2 में निस्तारित (क) एवं (ख) बिन्दु के अनुसार विपक्षी 4096 दिन का लाभ पाने का अधिकारी होगा + 529 (निस्तारण बिन्दु संख्या-2 के अनुसार) से ओ.सी / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLRH प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र /ब्रोशर के अनुरूप उपरोक्तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी साथ ही जिन प्रकरणों में प्लॉट हस्तान्तरण के माध्यम से प्राप्त किये गये हो, तो उन प्रकरणों में हस्तान्तरण की अनुमति VEDA द्वारा दिये जाने की तिथि से 4 वर्ष के उपरान्त विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। इसके अतिरिक्त निस्तारण बिन्दु संख्या-2 के अनुसार प्रत्येक मामलों में फोर्स मैज्योर के मद में की गणना की जायेगी।
4... कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण परियोजनाओं के निर्माण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिसके क्रम में केन्द्र सरकार द्वारा जारी निर्देशानुसार उठप्र० भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण द्वारा सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त दिनांक 06.06.2020 को आदेश पारित करते हुए कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक अर्थात् 6 माह की अतिरिक्त अवधि प्रदान की गयी। इस प्रकार 6 माह aifs—t9 के कारण निर्माण कार्य प्रभावित होने के कारण, जो कि फोर्स मैज्योर की परिस्थितियों की परिभाषा में आती है में विपक्षी द्वारा कोई ब्याज विलम्ब हेतु देय न होगा। साथ ही यदि बायरस् का कोई क्षत्तिदेय है, तो इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 5... विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2 ai) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 6... शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अधीन किसान प्रतिकर की देयता होगी। 7. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व विलम्ब ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी।
8... इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 9 यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 45.05.2023 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38 /40,/63 के अन्तर्गत vat आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना -पत्र दाखिल किया war) उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-0१ (पूर्व में पीठ--04ए) द्वारा दिनांक 70.04.2026 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा ust के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 45-05-2023 @ प्रस्तर-04 एवं 02 के अनुसार प्रश्नगत प्लॉट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 29-05-2026 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 45-05-2023 के प्रस्तर-03 @ अनुसार दिनांक 20-05-2026 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 5--05--2023 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिणयिक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। अन्तर्गत धारा-38/40,/63 की निष्पादन की कार्यवाही के दौरान माननीय सम्बन्धित रेरा पीठ द्वारा अपने आदेश का निष्पादन कराते हुए शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सका और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई जा सकी। तदोपरान्त मा. He-o7 (पूर्व में पीठ-04ए) द्वारा पारित आदेश दिनांक 70.042026 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई | — ae विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह माननीय रेरा पीठ-0(ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 5.05.2023 के अनुपालन में 2 माह के अन्दर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। यदि विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत कर सकता है, ताकि यूनिट को कुर्क कर, रिसीवर नियुक्त कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिलाया जा सके और शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई जा सके। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 04.77.2026 को पेश हो। (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण