Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mr Vijay Gupta v. SJP Infracon Limited
Complaint No. NCR144/05/129663/2025
- Decision date
- 2026-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
= भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारीः- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या:- NCR44/05/29663/2025 विजय गुप्ता बनाम मैसर्स एस.जे.पी इंफ्राकॉन लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध wed यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 05.02.2044 को विपक्षी की परियोजना Shri Radha Sky Gardens Phase-l के टॉवर-५ में " फ्लोर पर यूनिट संख्या-74/06 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 23,86,920 //- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 2,9,665 /- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उनके द्वारा विपक्षी को पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी समस्त देय धनराशि का भुगतान किया जा चुका है, जिसे विपक्षी द्वारा अपनी कस्टमर लेजरमांग पत्र एवं धनराशि की रसीदों में स्वीकार किया गया है। विपक्षी द्वारा 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 04.2.20i5 तक यूनिट का कब्जा समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर प्रदान किया जाना था, परन्तु 9 वर्ष से अधिक अर्थात i43 माह बीत जाने के उपरान्त भी विपक्षी द्वारा आज तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 90% से अधिक अर्थात 2,9i,665/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने से पूर्व ही होल्डिंग चार्जेस, एडवांस ade चार्जेस, एडवांस क्लब यूसेज चार्जेस, पानी के उपयोग हेतु चार्जेस की Raat एवं विभिन्न मदों में अवैध रूप से अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है, जबकि इन चार्जेस पर न तो शिकायतकर्ता सहमत हुआ है और न ही बिल्डर बायर Wire में ये चार्जेस निर्धारित किये गये हैं, जिस कारण ए?986 4 6 शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में धारा-34 के अन्तर्गत लिखित शिकायत, आवंटन पत्र,/फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 27.02.2043, पेमेन्ट प्लान, विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र दिनांक 29.44.2046, अनुस्मारक पत्र, कब्जा प्रस्ताव पत्र दिनांकित 29.03.2049, यूनिट की यथास्थिति बनाये रखने हेतु प्रार्थना-पत्र दिनांकित 29.05.2025, प्रत्युत्तर आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। -
प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को परियोजना Shri Radha Sky Gardens Phase-l के टॉवर-'4 में 44" फ्लोर पर CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट wea-Tai06 आवंटित की गयी थी, जिसका सुपर एरिया 370 वर्गफुट था। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 27.02.2043 को आवंटन पत्र हस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-4 व 22 के अनुसार शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा दिसम्बर, 2045 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ प्रदान किया जाना था। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कूल बिक्री मूल्य 23,86,920,//- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज तक 2,87,540/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। आवंटन पत्र के प्रस्तर-4 व 22 के अनुसार vad यूनिट के सापेक्ष यदि शिकायतकर्ता अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने में विफल रहता है तो विपक्षी यूनिट का आवंटन निरस्त करने के लिए स्वतंत्र है। आवंटन पत्र के प्रस्तर-22 के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि एक अस्थायी /सम्भावित समयावधि थी, जो फोर्स मेज्योर के अधीन थी। आवंटन पत्र में अंकित नियमों एवं शर्तों के अनुसार परियोजना पूर्ण होने की तिथि कोई निश्चित समयावधि नहीं थी। परियोजना को समय पर पूर्ण किया जाना मार्केट कंडीशंस, फोर्स मैज्योर एवं शिकायतकर्ता /आवंटीगण द्वारा समय पर अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने पर निर्भर थी। इसके अतिरिक्त उभयपक्षों के मध्य यह सहमति हुई थी कि विपक्षी ऐसी स्थिति में परियोजना को पूर्ण करने के लिए समयावधि बढ़ाने का अधिकारी है। प्रश्नगत परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के किसानों का धरना, नोटबंदी, निर्माण सामग्री, श्रमिकों की अनुपलब्धता, केन्द्रीय भूजल प्राधिकरण द्वारा खुदाई की अनुमति एवं भूजल दोहन पर प्रतिबन्ध तथा मा. एन.जी.टी. द्वारा दिल्ली एन.सी.आर. में हो रहे प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए लगायी गयी रोक के कारण परियोजना का
निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ। ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेन्ट एरिया बिल्डिंग रेगुलेशन, 20i0 के अनुसार दिनांक 48.03.2049 को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा 720 यूनिद्स के लिए पार्ट /अस्थायी ओ.सी. जारी किया गया, जोकि i8 माह की समयावधि के लिए जारी किया गया था, जिसमें से टॉवर-74 की 420 यूनिट्स भी शामिल हैं, जिसमें एक यूनिट dem-raii06 शिकायतकर्ता को आवंटित की गयी है। इसके अतिरिक्त ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा अपने पत्र दिनांक 30.08.2049 के माध्यम से विपक्षी को लीज़ डीड निष्पादित करने की अनुमति भी प्रदान की गयी अर्थात परियोजना के सभ टॉवर्स का निर्माण कार्य दिनांक 8.03.20i9 को पूर्ण कर लिया गया और यूनिद्स की कन्वेयंस डीड,/सेल Sts को निष्पादित करने के लिए भी विपक्षी को अनुमति दी गयी थी। इसके पश्चात् ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 24.07.2022 को अन्तिम व स्थायी ओ.सी. जारी किया गया है, जिसकी प्रति संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा समक्ष विकास प्राधिकरण से दिनांक 48.03.2049 को पार्ट /अस्थायी ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात् शिकायतकर्ता को दिनांक 29.03.2049 को कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया और अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु अनुरोध किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु अनुस्मारक पत्र दिनांक 30.07.2049 व अन्तिम अनुस्मारक पत्र दिनांक .04.09.2020 को प्रेषित किये. गये, जिसके बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा जानबूझकर इन अनुस्मारक पत्रों को नजरअंदाज किया गया और अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता ERT WT अधिनियम, 20i6 की धारा-49(6) व 9(i0) का उल्लंघन किया गया है। अनुस्मारक पत्र दिनांक 29.4.2024 के अनुसार शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अन्तिम अवसर प्रदान किया गया और नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 7 दिनों के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने का अनुरोध किया गया, जिसके पश्चात् यूनिट का आवंटन निरस्त हो जाएगा। शिकायतकर्ता कों अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु गणना शीट भी प्रदान की गयी, परन्तु शिकायतकर्ता, आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने में विफल रहा है, जिसके पश्चात् विपक्षी को पत्र दिनांक 49.06.2025 के माध्यम से यूनिट का आवंटन निरस्त करने की सूचना |) जारी करने के लिए मजबूर किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता को नोटिस मिलने <// की तिथि से 40 दिनों के भीतर कब्जे की आवश्यक औपचारिकताएँ पूर्ण करने की सूचना दी गयी थी, उसे बाद विपक्षी कंपनी आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यूनिट का आवंटन निरस्त करने के लिए मंजबूर होगी। प्रश्नगत
Page 3 Be प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा रेश अधिनियम, 2046 की ai—t9(i0) F दिये गये नियमों का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि उनके द्वारा ओ.सी. की तिथि से दो माह के भीतर अपनी यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा कहा गया है कि सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात् विपक्षी, शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा प्रदान करने के लिए हमेशा तैयार था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया। उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने के पश्चात् यूनिट का कब्जा प्राप्त करने व कन्वेयंस डीड निष्पादित कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, आवंटन पत्र दिनांकित 27.02.2043, पेमेन्ट प्लान, मा. एन.जी.टी. द्वारा पारित आदेश, निर्माण कार्य पर लगे प्रतिबन्ध के सम्बन्ध में जारी पब्लिक नोटिस, पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश, परियोजना का अस्थायी ओ.सी. दिनांक 48.03.2049, कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 29.03.2049, परियोजना का स्थायी ओ.सी. दिनांक 24.07.2022, अनुस्मारक पत्र दिनांकित 30.07.2049, 04.09.2020, 29.44.2024, यूनिट निरस्त किये जाने सम्बन्धी सूचना पत्र दिनांक 49.06.2025, अपील संख्या-258 / 2022 में रेरा अपीलीय अधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.04.2025 आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्त दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Shri Radha Sky Gardens Phase-l के टॉवर-74 में 2" फ्लोर पर यूनिट PeaT-T4/06 बुक करायी गयी थी, जिसका कुल बिक्री मूल्य 23,86,920 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा 2,9i,665/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया। बिल्डर बायर We की शर्तों के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 04.06.206 तक अथवा उससे पूर्व यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु 443 माह से अधिक का विलम्ब होने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा ved यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर के प्रस्तर-49 में कहा गया है कि फोर्स मैज्योर परिस्थिति के कारण परियोजना पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ, परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बन्ध में कोई साक्ष्य /प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर के प्रस्तर-22 में कहा गया है कि मा. एन.जी.टी. द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.04.20i5 के अनुसार परियोजना के निर्माण कार्यों पर कुछ ८2 ६2१ sy Page 4 | alam atengern) &
समय के लिए प्रतिबन्ध लगाया गया था और दिल्ली एन.सी.आर. में सभी निर्माण कार्यों पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया था। बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट की शर्तों के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 07.06.20I6 तक अथवा उससे पूर्व यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था और मा. एन.जी.टी. द्वारा पारित आदेश कब्जा दिये जाने की तिथि से पहले अथवा बाद के हैं, इसलिए विपक्षी, 443 माह से अधिक विलम्ब हेतु फोर्स मैज्योर को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा जारी अस्थायी ओ.सी. दिनांक 48.03.2049, जोकि 48 माह की समयावधि के लिए जारी किया गया था, को वैधानिक अथवा अन्तिम स्थायी ओ.सी. /सी.सी. नहीं माना जा सकता है। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना का अन्तिम व स्थायी ओ.सी. / सी.सी. दिनांक 24.07.2022 को जारी किया गया है। अन्तिम व स्थायी ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने के पश्चात् विपक्षी द्वारा आज तक शिकायतकर्ता को कोई भी यूनिट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 29.03.2049 वैधानिक नहीं था। टॉवर-74 सहित परियोजना के लिए अन्तिम अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 24.07.2022 को प्राप्त हुआ है। इसलिए विपक्षी अन्तिम अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी करने से 3 वर्ष पूर्व शिकायतकर्ता को वैधानिक रूप से कब्जा प्रदान नहीं कर सकता है। अपेक्षित वैधानिक ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त करने से पहले कब्जे का कोई भी प्रस्ताव शून्य /अमान्य एवं अवैध है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है और शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य 23,86,920,/- रुपये के सापेक्ष आज तक 2,9,665/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है और विपक्षी को मात्र ,95,255/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया जाना शेष है। शिकायतकर्ता, आवंटन पत्र में उललेखित शुल्क का भुगतान करने के लिए सदैव तत्पर रहा है। विपक्षी, यूनिट का कब्जा प्रदान किये बिना रखरखाव शुल्क प्राप्त करना निराधार है और मा. रेरा प्राधिकरण के नियमों के अनुसार शिकायतकर्ता 2/- रुपये प्रति वर्गफुट की दर से होल्डिंग शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार है। विपक्षी द्वारा वर्ष 2022 के बाद से आज तक कोई भी प्रस्ताव-पत्र जारी नहीं किया गया है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता द्वारा MCLR+% वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि के ब्याज सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान करने
9: हेतु विपक्षी को निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का a किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया है :- गा Page 5 os . aa शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04 निस्तारण बिन्दु संख्या-4, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Shri Radha Sky Gardens Phase-l के टॉवर-74 में i4" फ्लोर पर यूनिट Wea-T4aii06 बुक करायी गयी थी, जिसका कूल बिक्री मूल्य 23,86,920/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके ERT 2,94,665/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया। बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट की शर्तों के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 04.00.20I6 तक अथवा उससे पूर्व यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु 43 माह से अधिक का विलम्ब होने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 90% से अधिक अर्थात 2,9,665/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने से पूर्व ही होल्डिंग चार्जेस, एडवांस मेन््टेनेंस चार्जेस, एडवांस. क्लब Bor चार्जेस, पानी के उपयोग हेतु चार्जेस की Raat एवं विभिन्न मदों में अवैध रूप से अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है, जबकि इन चार्जेस पर न तो शिकायतकर्ता सहमत हुआ है और न ही बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट में ये चार्जेस निर्धारित किये गये हैं। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कहा गया है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा जारी अस्थायी ओ.सी. दिनांक 48.03.2049, जोकि 48 माह की समयावधि के लिए जारी किया गया था, को वैधानिक अथवा अन्तिम स्थायी ओ.सी./सी.सी. नहीं माना जा सकता है। नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना का अन्तिम व स्थायी ओ.सी./सी.सी. दिनांक 24.07.2022 को जारी किया गया है। अन्तिम व स्थायी ओ.सी. » सी.सी. प्राप्त होने के पश्चात् विपक्षी द्वारा आज तक शिकायतकर्ता को कोई भी यूनिट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रेषित यूनिट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 29.03.2049 वैधानिक नहीं था। टॉवर-74 सहित परियोजना के लिए अन्तिम अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 24.07.2022 को प्राप्त हुआ है। इसलिए विपक्षी अन्तिम अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी करने से 3 वर्ष पूर्व शिकायतकर्ता को वैधानिक रूप से कब्जा प्रदान नहीं
कि सकता है। अपेक्षित वैधानिक ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त करने से पहले कब्जे का कोई भी प्रस्ताव शून्य /अमान्य एवं अवैध है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है और शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य 23,86,920/— रुपये के सापेक्ष आज तक 2,9,665 /- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया जा चुका है और विपक्षी को मात्र ,95,255/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया जाना शेष है। शिकायतकर्ता, आवंटन पत्र में उललेखित शुल्क का भुगतान करने के लिए सदैव तत्पर रहा है। विपक्षी, यूनिट का कब्जा प्रदान किये बिना रखरखाव शुल्क प्राप्त करना निराधार है और मा. रेरा प्राधिकरण के नियमों के अनुसार शिकायतकर्ता 2/- रुपये प्रति वर्गफुट की दर से होल्डिंग शुल्क का भुगतान करने के लिए तैयार है। विपक्षी द्वारा वर्ष 2022 के बाद से आज तक कोई भी प्रस्ताव-पत्र जारी नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष विपक्षी द्वारा की जा रही अनुचित धनराशि की मांग को हटाये जाने एवं MCLR+I% वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि के ब्याज सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि उनके द्वारा शिकायतकर्ता को परियोजना Shri Radha Sky Gardens Phase-l के टॉवर-74 में ai" फ्लोर पर CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट WeN-T4/06 आवंटित की गयी थी, जिसका सुपर एरिया 4370 Giwe था। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 27.02.2043 को आवंटन पत्र हस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-4 व 22 के अनुसार शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा दिसम्बर, 2045 एवं 6 माह की aque अवधि के साथ प्रदान किया जाना था। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 23,86,920/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज तक 2,87,540/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। आवंटन पत्र के प्रस्तर-4 व 22 के अनुसार उक्त यूनिट के सापेक्ष यदि शिकायतकर्ता अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने में विफल रहता है तो विपक्षी यूनिट का आवंटन निरस्त करने के लिए स्वतंत्र है। आवंटन पत्र के प्रस्तर-22 के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि एक अस्थायी /सम्भावित समयावधि थी, जो फोर्स मेज्योर के अधीन थी। आवंटन पत्र में अंकित नियमों एवं शर्तों के अनुसार परियोजना पूर्ण होने की तिथि कोई निश्चित समयावधि नहीं थी। ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेन्ट एरिया बिल्डिंग रेगुलेशन, 20:0 के अनुसार दिनांक 48.03.2049 को ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा 720 यूनिट्स के लिए पार्ट /अस्थायी ओ.सी. जारी किया गया, जोकि i8 माह की समयावधि के लिए जारी किया गया था, Page है. ५७ जात
जिसमें से टॉवर-74 की 420 यूनिट्स भी शामिल हैं, जिसमें एक यूनिट Wer-74/06 शिकायतकर्ता को आवंटित की गयी है। इसके अतिरिक्त ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा अपने पत्र दिनांक 30.08.2049 के माध्यम से विपक्षी को लीज़ डीड निष्पादित करने की अनुमति भी प्रदान की गयी अर्थात परियोजना के wa टॉवर्स का निर्माण कार्य दिनांक 48.03.2049 को पूर्ण कर लिया गया और यूनिट्स की eae डीड सेल Ss को निष्पादित करने के लिए भी विपक्षी को अनुमति दी गयी थी। इसके पश्चात् ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 24.07.2022 को अन्तिम व स्थायी ओ.सी. जारी किया गया है, जिसकी प्रति संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उनके द्वारा समक्ष विकास प्राधिकरण से दिनांक 78.03.209 को पार्ट /अस्थायी ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात् शिकायतकर्ता को दिनांक 29.03.2049 को कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया और अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु अनुरोध किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु अनुस्मारक पत्र दिनांक 30.07.2049 व अन्तिम अनुस्मारक पत्र दिनांक 04.09.2020 को प्रेषित किये गये, जिसके बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा जानबूझकर इन अनुस्मारक पत्रों को नजरअंदाज किया गया और अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा रेश अधिनियम, 2046 की @RI-79(6) व 49(:0) का उल्लंघन किया गया है। अनुस्मारक पत्र दिनांक 29.44.2024 के अनुसार शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अन्तिम अवसर प्रदान किया गया और नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 7 दिनों के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने का अनुरोध किया गया, जिसके पश्चात् यूनिट का आवंटन निरस्त हो जाएगा शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु गणना शीट भी प्रदान की गयी, परन्तु शिकायतकर्ता, आवश्यक औपचारिकताएं पूर्ण करने में विफल रहा है, जिसके पश्चात् विपक्षी को पत्र दिनांक 49.06.2025 के माध्यम से यूनिट का आवंटन निरस्त करने की सूचना जारी करने के लिए मजबूर किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता को नोटिस मिलने की तिथि से 40 दिनों के भीतर कब्जे की आवश्यक औपचारिकताएँ पूर्ण करने की सूचना दी गयी थी, उसे बाद विपक्षी कंपनी आवंटन पत्र के नियम एवं शर्तों के अनुसार यूनिट का आवंटन निरस्त करने के लिए मजबूर होगी। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा-49(40) में दिये गये नियमों का उल्लंघन किया गया है, क्योंकि उनके द्वारा ओसी. की तिथि से दो माह के भीतर अपनी यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा कहा गया है कि सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. प्राप्त करने के पश्चात् विपक्षी,
Page 8 | wf i = क्षेका, गौतमदुद्धनगर er 3) शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा प्रदान करने के लिए हमेशा तैयार था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं किया गया। उपरोक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने के पश्चात् यूनिट का कब्जा प्राप्त करने व HIT डीड निष्पादित कराये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 8 (4) F प्राविधान है कि :- Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act:
Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें white के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित BEPC अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की aRI—-(4)(b) में स्पष्ट रूप से उलल्लेखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. Page 9 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए करार /अनुबन्ध) नियमावली, 20i8 & प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे |
पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन/फ्लैट क्रेता अनुबन्ध पत्र दिनांकित 27.02.2043 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-08 के प्रस्तर-22 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा दिसम्बर, 20i5 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, ऐसे में vues शिकायतकर्ता दिनांक 30.06.2046 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा आवंटन / फ्लैट क्रेता अनुबन्ध में निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 // 2048 ”सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Mae’ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession."
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2046 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी | Eee में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के मध्य किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। RT एक्ट की धारा 2(za) ¥ प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount Page or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 2oi8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में gated के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.267) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर-9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी |॥27+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या- सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय ,/पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर ,४८7/2+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से ofa ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8-3--48-65 विविध 46 के द्वारा मॉडल wit के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7.l Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते age 3 आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को आवंटन »अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, पेमेन्ट प्लान के अनुरूप संशोधित अन्तिम मांग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त करते हुए, ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय wry शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2046 से दिनांक 30.04.2047 तक आवंटन/»अनुबन्ध पत्र में निर्धारित दर के अनुसार व दिनांक 04.05.2047 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(2४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी add को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ TR की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय //पट्टा के लिए करार /अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.3 के अनुसार ही विपक्षी, शिकायतकर्ता से प्रश्नगत यूनिट के कारपेट एरिया के अनुपात में 02,/- रुपये प्रति वर्गफूट प्रतिमाह की दर से होल्डिंग चार्जेज़ अधिरोपित करेंगे। Zz विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह प्रश्नगत परियोजना / टॉवर के सम्बन्ध में विधिक ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त करने के पश्चात् शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का विधिक भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि से, शिकायतकर्ता से मेन्टेनेंस के मद में शुल्क प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे | 6. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को विधिक ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान करते समय सभी चार्जेज़ आवंटन/अनुबन्ध पत्र में उललेखित wre प्लान/ वर्णित शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित Hy | 7. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
8. शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। ews (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 5