Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Manish Ruwali v. Logix Heights Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/05/120325/2024
- Decision date
- 2026-04-11
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, va-i69, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-20308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत oe—3i सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: ]२८0२।44/05/] 20325/2024 मनीष रूवाली बनाम लॉजिक्स हाईदूस प्रा. लि. (महागुन ग्रुप) निर्णय शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो oer के माध्यम से दिनांक 03-09-2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अमर खेड़ा उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से अधिकृत प्रतिनिधि सुश्री eran उपस्थित हुईं। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के cal of विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 03-09-2025 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा werd यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज ford जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरुद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायत योजित की गई है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक t6-05-20:5 को विपक्षी की परियोजना "MAHAGUN MEADOWS" गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: 608, 2&2 9, Greenshire बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत B9346,3/— है और ey F “| शिकायतकर्ता द्वारा %.89,74,00/— की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता ‘ah *or यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को पूर्ण कर, समस्त सुविधाओं बज 6 सहित दिनांक 30-06-2048 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा कब्जा नहीं दिया जा
रहा है। विपक्षी द्वारा परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है तथा लिफ्ट का कार्य अपूर्ण है। इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा समस्त सुविधाओं सहित प्रश्नगत Page ० 7 E-Court यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अपना विस्तृत शिकायत, दिनांक 48-05—2004 तथा विपक्षी द्वारा प्रस्तुत आपत्ति-पत्र के विरूद्ध अपना प्र॒त्युत्तर, दिनांक 27-05-2025 एवं लिखित बहस तिथि रहित दाखिल कर, घटनाक्रम की समय सारणी प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा verre परियोजना के सम्बन्ध में प्रारम्भ से ही लापरवाही एवं अनुबन्ध मे seca दायित्वों का उल्लंघन किया गया है। अनुबन्ध-पत्र के प्रावधानों के विपरीत न तो विपक्षी द्वारा निर्धारित समय (दिनांक 30-06—207 8) पर प्रश्नगत यूनिट का वैध कब्जा प्रदान किया गया और न ही वादा की गई मूलभूत एवं सामुदायिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं, जिससे परियोजना आज तक अपूर्ण है। विपक्षी ने अवैध रूप से बिना ओ.सी. प्राप्त किये, कब्जा प्रस्ताव-पत्र जारी कर अवशेष धनराशि की माँग की गई, जबकि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना मे हुए विलम्ब के आधार पर देय प्रतिकर »ब्याज का भुगतान या समायोजन नहीं किया गया, जिस कारण विपक्षी द्वारा अवशेष धनराशि की माँग विधिसम्मत नहीं है। विपक्षी का उक्त कृत्य भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 206 के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, परियोजना निधियों के दुरुपयोग, आवश्यक स्वीकृतियों एवं पारदर्शिता के अभाव तथा शिकायतकर्ता के विधिक नोटिस की उपेक्षा से विपक्षी की दुर्भावनापूर्ण एवं मनमानी कार्यप्रणाली परिलक्षित होती है।
विपक्षी द्वारा उठायी गई सभी आपत्तियाँ तथ्यहीन एवं विधि-विरुद्ध हैं। विपक्षी द्वारा रू.5.700,//- की धनराशि के सम्बन्ध में कथित अंतराल का समुचित स्पष्टीकरण यह है कि विपक्षी द्वारा उक्त धनराशि अनुबन्ध में नाम संशोधित / सम्मिलित किए जाने के आधार पर वसूली गई है, जिसकी रसीद, दिनांक 28-07-2045 पत्रावली के साथ संलग्न है। अतः धनराशि के सम्बन्ध में दोनों पक्षों के मध्य कोई विवाद शेष नहीं है। विपक्षी द्वारा भुगतान में विलम्ब, कब्जा प्रस्ताव एवं ओ.सी. प्राप्त किए जाने हेतु दिए गए आवेदन के आधार पर जो तर्क प्रस्तुत किए हैं, वह न केवल अस्पष्ट एवं अप्रमाणित हैं, बल्कि परियोजना की वास्तविक अपूर्णता, आवश्यक स्वीकृतियों जैसे ओ.सी. अथवा सक्षम प्रधिकारी से प्राप्त आवश्यक एन.ओ.सी. के अभाव तथा मूलभूत सुविधाओं की अनुपलब्धता को छिपाने का प्रयास मात्र हैं। विपक्षी द्वारा दिनांक 02-04-2024 को प्रेषित कब्जा प्रस्ताव-पत्र अवैध एवं अमान्य है, क्योंकि यह अपूर्ण परियोजना एवं कथित डीम्ड ओ.सी. जैसी विधि-विरुद्ध अवधारणा पर आधारित है। साथ ही विपक्षी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी प्रमाण से परियोजना की संरचनात्मक एवं सुरक्षा सम्बन्धित गंभीर त्रुटियाँ परिलक्षित होती हैं। कोविड-49 अथवा अन्य कारणों के आधार पर विलम्ब को उचित ठहराने का प्रयास भी न््यायसंगत नहीं है, क्योंकि कब्जा दिए जाने हेतु अनुबन्ध में उललेखित अवधि समाप्त हो चुकी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने Gat कथन के समर्थन में रेरा प्राधिकरण द्वारा अन्य शिकायतों में पारित आदेशों का उल्लेख किया गया है। इन आधारों पर शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा प्रस्ताव-पत्र को निरस्त कर, विलम्ब अवधि की धनराशि को समायोजित करते हुए नवीन एवं संशोधित Page 2 of 7 E-Court
मौग-पत्र जारी कर, ओ.सी./सी.सी. सहित यूनिट का कार्य पूर्ण कर, समस्त सुविधाओं सहित प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिलाये जाने तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन-पत्र, दिनांक 43--08-2045 की प्रति, खाता विवरण की प्रति, कब्जा प्रस्ताव पत्र, दिनांक 02—-0:—2024 की प्रति, विधिक नोटिस, दिनांक 7-04-2024 की प्रति, स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी की प्रति, रसीद दिनांक 44-08-2045, आर.टी.आई. के जवाब, दिनांक 42-44-2024 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
इस पर विपक्षी कम्पनी द्वारा अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 47-03--2025 दाखिल एवं अपलोड करते हुए कहा गया कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना “MAHAGUN MEADOWS” के Greenshire Tower में फ्लैट संख्या: 608 बुक कराया WAT | विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा सभी चारों वांछित प्रमाण-पत्रों सहित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन, दिनांक 26-72-2023 को प्रस्तुत किया गया और शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 02-0i-2024 को प्रेषित किया गया। विपक्षी का यह भी कहना है कि उभय पक्षों के मध्य प्रश्नगत यूनिट के सम्बन्ध में अनुबन्ध पत्र, दिनांक 43-08-20:5 निष्पादित एवं हस्ताक्षरित किया गया, जिसके प्रस्तर-4.4 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिनांक 30-06-2048 तक दिया जाना था। इसके अतिरिक्त उक्त कब्जा दिया जाना फोर्स मैज्योर की परिस्थितियों के अधीन था। शिकायतकर्ता द्वारा अपनी समस्त धनराशि का भुगतान अनुबन्ध-पत्र के अनुसार नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा wr कम्प्लेन्ट पेज के फार्म-एम पर B.89,4,0/-— की धनराशि अंकित की गई है, परन्तु उनके द्वारा उक्त दावे को बल देने के लिए कोई भी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है।
genre परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण विलम्बित हुई, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं था। किसान आंदोलन, रियल एस्टेट सेक्टर में गिरावट, सरकार विमुद्रीकरण नीति, दिनांक os—ii-2006, दिल्ली एन.सी.आर. में बढ़ते प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर प्रतिबन्ध, मा. एन.जी.टी. द्वारा निर्माण कार्य पर लगाया गया प्रतिबन्ध, wifas—t9 आदि कारणों से प्रश्नगत परियोजना के निर्माण कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। विपक्षी द्वारा विभिन्न विधि व्यवस्थाओ एवं इस पीठ द्वारा पारित आदेशों का उल्लेख करते हुए, शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही पूर्ण करने सम्बन्धी आदेश पारित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन-पत्र, दिनांक 43-08-2045 की प्रति, सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी./सी.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन दिनांक 26-42-2023 की प्रति, फायर एन.ओ.सी., दिनांक 46-42-2023 की प्रति, स्ट्रक्चर Page 3 of 7 E-Court एन.ओ.सी., दिनाक 44-07-2022 की प्रति, विद्युत अधिष्ठापन से सम्बन्धित ड्राइंग के अनुमोदन से सम्बन्धित पत्र, दिनांक 23-42-2024 की प्रति, लिफ्ट एन.ओ.सी., दिनांक 26-2-2023 की प्रति, ऑफर-ऑफ-पोजेशन पत्र, दिनांक 02-0:-2004 की प्रति, रेरा कार्यालय आदेश, दिनांक 06-06-2020 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। मैंने उभय पक्षों के cet ar विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का were परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार किया:- 4. क्या Force Majeure Events के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव?
2... क्या शिकायतकर्ता को बिना ओ.सी./सी.सी. अथवा Ss ओ.सी /सी.सी के आधार पर कब्जा ऑफर किया जा सकता है तथा क्या शिकायतकर्ता द्वारा समय पर अनुबन्धानुसार प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष धनराशि का भुगतान किया गया है? 3... क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 बिन्दु संख्या: 04, इस आशय से विचरित किया गया है कि कया Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई है? यदि हाँ तो प्रभाव? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। प्रकरण में विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के मद में यह कहा गया है कि प्रश्नगत परियोजना फोर्स मैज्योर grey के कारण विलम्बित हुई, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं था। किसान आंदोलन, रियल एस्टेट सेक्टर में गिरावट, सरकार विमुद्रीकरण नीति, दिनांक 08-4-206, दिल्ली एन.सी.आर. में बढ़ते प्रदूषण के कारण निर्माण कार्यों पर प्रतिबन्ध, मा. एन.जी.टी. द्वारा निर्माण कार्य पर लगाया गया प्रतिबन्ध, कोविड-49 आदि कारणों से प्रश्नगत परियोजना के निर्माण कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। इन आधारों पर विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के मद में लाभ प्रदान किये जाने तथा yea शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि कोविड-49 अथवा अन्य कारणों के आधार पर विलम्ब को उचित ठहराने का प्रयास भी न््यायसंगत नहीं है, क्योंकि कब्जा दिए जाने हेतु अनुबन्ध में उललेखित अवधि समाप्त हो चुकी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने उक्त Page 4 of 7 E-Court
कथन के समर्थन में रेरा प्राधिकरण द्वारा अन्य शिकायतों में पारित आदेशें का उल्लेख किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 73029 // 4985, M.C. Mehta Versus Union of India” में, पारित आदेश, दिनांक o4-7:-20:9 4 निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029//4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-20॥9 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05./2,2079, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under: -
72, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (2076) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severet/emergency category for ms 48 hours or more. Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
Key पर्यावर्णीय आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4—t-20:9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, दिनांक 09-42-20॥9 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04--44-2049 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन (66+2) (दिनांक 0-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Bia 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण Page 5 of 7 E-Court कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह we है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनों अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है। अतः इस अवधि में कुल-35 दिन +33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है तथा 68 दिन की अवधि के लिए के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है तथा 68 दिन की अवधि के लिए ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। इसके अतिरिक्त समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06-06-2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु, दिनाक 25-03-2020 से 06 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-09-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर sees के कारण मानी जायेगी। अतः उपर्युक्त के दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक
परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या: 04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को बिना ओ.सी. / सी.सी. अथवा Ss ओ.सी. / सी.सी. के आधार पर कब्जा ऑफर किया जा सकता है तथा क्या शिकायतकर्ता द्वारा समय पर अनुबन्धानुसार प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष धनराशि का भुगतान किया गया है? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। प्रकरण में विपक्षी का यह कहना है कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण करते हुए, सभी चारों वांछित प्रमाण-पत्रों सहित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन, दिनांक 26-42-2023 को प्रस्तुत किया गया और शिकायतकर्ता के पक्ष में कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 02-0:-2024 को प्रेषित किया गया। इस पर शिकायतकर्ता का यह कहना है कि विपक्षी द्वारा भुगतान मे विलम्ब, कब्जा प्रस्ताव एवं ओ.सी. प्राप्त किए जाने हेतु दिये गए आवेदन के आधार पर जो तर्क प्रस्तुत किए हैं, वह न केवल अस्पष्ट एवं अप्रमाणित हैं, बल्कि परियोजना की वास्तविक अपूर्णता, आवश्यक स्वीकृतियों जैसे ओ.सी. अथवा सक्षम प्रधिकारी से प्राप्त आवश्यक एन.ओ.सी. के अभाव तथा मूलभूत सुविधाओं की अनुपलब्धता को छिपाने का प्रयास मात्र हैं। विपक्षी द्वारा दिनांक 02-04-2024 को प्रेषित कब्ज़ा प्रस्ताव-पत्र अवैध एवं अमान्य है, क्योंकि यह Page 6 of 7 ( Wo E-Court
= एवं कथित Ss ओ.सी. जैसी विधि-विरुद्ध अवधारणा पर आधारित है। साथ ही विपक्षी द्वारा प्रस्तुत तकनीकी प्रमाण से परियोजना की संरचनात्मक एवं सुरक्षा सम्बन्धित गंभीर त्रुटियाँ परिलक्षित होती हैं। इस सम्बन्ध में भू-सम्पदा (fafa और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-44(4)() में स्पष्ट रूप से उल्लिखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वे ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त कर उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उल्लिखित है कि ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त प्रोमोटर आवंटी को लिखित में इकाई का कब्जा ऑफर करेंगे। इसके अतिरिक्त नवीन ओखला औद्योगिक विकास एरिया बिल्डिंग रेगुलेशन, 2040 के रेगुलेशन-20.0 एवं 20..4 में निम्नलिखित उल्लेखित है:- “Regulation 20.0: Notice for issue of occupancy certificate - Every owner shall have to submit a notice of completion of the building to the Authority regarding completion of work described in the building permit as per Appendix-9 accompanied by the documents as per checklist annexed with Appendix-9. Regulation 20,.7.4: Occupancy certificate necessary for occupation —
No building erected, re-erected, shall be occupied in whole or part until the issue of occupancy certificate by the Chief Executive Officer in the Form given in Appendix -7, Provided that if the Chief Executive Officer fails to issue the occupancy certificate or send any intimation showing his inability to issue such certificate within 90 days of the date of receipt of application for occupancy certificate an intimation to this effect shall have to be sent to the Authority by the owner for occupying the building. In case objections are intimated by the Chief Executive Officer or by an authorized officer showing inability to issue occupancy certificate the owner shall take necessary action to remove the objections. If the objections remain un-removed for a period of 6 months the application for issue of occupancy certificate shall stand automatically rejected. Thereafter the Chief Executive Officer shall take suitable action for removal of unauthorised construction with fee. Thereafter, the applicant has to apply afresh with fee for occupancy certificate and in such case time extension shall not be required.” उपर्युक्तानुसार भवन के मालिक द्वारा भवन पूर्ण होने पर प्राधिकरण को सूचित किया जायेगा तथा अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी होने से पूर्व कोई भी ऐसे भवन का कब्जा नहीं लेगा, परन्तु यदि मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा ओ.सी. प्राप्ति के आवेदन से 90 दिनों के अन्दर ओ.सी. जारी नहीं किया जाता है, तो उस स्थिति में भवन के मालिक Page 7 of 7 E-Court
= को सूचित करने के उपरान्त भवन का कब्जा प्राप्त / प्रदान किया जा सकता है। इस सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की ai—(4() 4 प्रोमोटर्स का निम्न उत्तरदायित्व अंकित है:- ",..execute a registered conveyance deed of the apartment, plot or building, as the case may be, in favour of the allottee along with the undivided proportionate title in the common areas to the association of allottees or competent authority, as the case may be, as provided under section I7 of this Act; साथ ही भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की eRT—-29(40) एवं (0॥) में एलॉटीज़ के निम्न उत्तरदायित्व अंकित हैं:- ॥(70) Every allottee shall take physical possession of the apartment, plot or building as the case may be, within a period of two months of the occupancy certificate issued for the said apartment, plot or building, as the case may be. (47) Every allottee shall participate towards registration of the conveyance deed of the apartment, plot or building, as the case may be, as provided under sub-section (7) of section 7 of this Act." भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2006 की aRi—i7 निम्नवत् हैः-
777, (4) The promoter shall execute a registered conveyance deed in favour of the allottee along with the undivided proportionate title in the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, and hand over the physical possession of the plot, apartment of building, as the case may be, to the allottees and the common areas to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, in a real estate project, and the other title documents pertaining thereto within specified period as per sanctioned plans as provided under the local laws: Provided that, in the absence of any local law, conveyance deed in favour of | the allottee or the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, under this section shall be carried out by the promoter within three months from date of issue of occupancy certificate. (2) After obtaining the occupancy certificate and handing over physical possession to the allottees in terms of sub-section (2), it shall be the responsibility of the promoter to handover the necessary documents and plans, including common areas, to the association of the allottees or the competent authority, as the case may be, as per the local laws: Provided that, in the absence of any local law, the promoter shall handover the necessary documents and plans, including common areas, the association Page 8 of 7 E-Court
e the allottees or the competent authority, as the case may be, within thirty days after obtaining the occupancy certificate." उपर्युक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि रजिस्टर्ड लीज़/सेल डीड wd कब्जा दिये जाने से पूर्व बिल्डिंग / अपार्टमेन्ट / प्लॉट आदि का “ओक्यूपेन्सी सर्टिफिकेट” अपेक्षित है। बिना उक्त सर्टिफिकेट के न तो विधिपूर्वक कब्जा दिया जा सकता है एवं न ही “टाईटल grea’ नियमानुसार सम्भव है। प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी द्वारा ऐसा भी कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है, जिसके अवलोकन से यह विदित हो सके कि वर्तमान समय में विपक्षी को प्रश्नगत परियोजना / टॉवर्स के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण द्वारा ओ.सी./ सी.सी. जारी किया जा चुका हो और न ही उपर्युक्तानुसार विपक्षी को प्रश्नगत परियोजना / टॉवर्स के सम्बन्ध में डीम्ड ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त हुआ है। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता के पक्ष में प्रेषित कब्जा ऑफर पत्र, दिनांक 02-04-2024 वैधानिक एवं विधिसम्मत नहीं है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त करने हेतु दिये गये ओ.सी./सी.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन, दिनांक 26-42-2023 की प्रति, फायर एन.ओ.सी., दिनांक .6-72-2023 की प्रति, स्ट्रक्चर एन.ओ.सी.. दिनाक 44-04-2022 की प्रति, विद्युत अधिष्ठापन से सम्बन्धित ड्राइंग के अनुमोदन से सम्बन्धित पत्र, दिनांक 23-42-2024 की प्रति, लिफ्ट एन.ओ.सी., दिनांक 26-42-2023 की प्रति दाखिल की गयी हैं, परन्तु विपक्षी द्वारा इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. की प्रति दाखिल नहीं की गयी है।
जहाँ तक विपक्षी द्वारा विद्युत अधिष्ठापन से सम्बन्धी ड्राइंग के अनुमोदन से सम्बन्धित पत्र, दिनांक 23-42-2024 की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके अवलोकन से यह स्पष्ट रूप से विदित है कि उक्त पत्र ट्रान्सफार्मर सब-स्टेशन के विद्युतीय अधिष्ठापन से सम्बन्धी ड्राइंग के अनुमोदन के सम्बन्ध में हैं, जिसको विपक्षी द्वारा मिथ्यापूर्ण तरीके से इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. के रूप में अपलोड कर, उसका गलत लाभ लिये जाने की कुचेष्टा करने का प्रयास कर रहा है। उपर्युक्त वर्णित विद्युतीय अधिष्ठापन सम्बन्धी पत्र को विधिक रूप से इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. कतई नहीं माना जा सकता है। इसी प्रकार सर्वप्रथम एक अन्य शिकायत संख्या: /४८:44/७३/४07082/2023, “अंकित जैन एवं अंकिता अग्रवाल व अन्य बनाम हेबे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. (महागुन ग्रुप)” में भी विपक्षी द्वारा इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. का भिथ्यापूर्ण तरीके से प्रस्तुतीकरण करने के उद्देश्य से एक गलत आलेख पोर्टल पर अपलोड किया गया था, जिसके कारण पीठ द्वारा उनको कड़ी चेतावनी प्रदान की गयी थी और vad शिकायत के आदेश, दिनांक 22--07-2024 में स्पष्ट रूप से निम्नवत् हिदायत दी गयी थी, “भविष्य में ऐसे कुकृत्य करने पर विपक्षी के विरुद्ध ऐसे कृत्य को विधि विरुद्ध एवं कुचेष्टा मानते हुए yaa (विनियमन और विकास) अधिनियम 2076 की धारा-69 के arta MRT हेदु RT प्राधिकरण को alt करने पर विचार किया जाएगा।” Page 9 of 7 E-Court
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6, उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 तथा नवीन ओखला औद्योगिक विकास एरिया बिल्डिंग रेगुलेशन, 2040 में दी गई विधि व्यवस्था के अनुसार विपक्षी / प्रमोटर द्वारा परियोजना से सम्बन्धित सभी वांछित अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर, ओ.सी. प्राप्त करने हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष आवेदन किया जाना चाहिए और आवेदन किये जाने की तिथि से 90 दिनों के अन्दर यदि सक्षम प्राधिकरण द्वारा ओ.सी. जारी नहीं किया जाता है, तो उस स्थिति में भवन के मालिक द्वारा प्राधिकरण को सूचित करने के उपरान्त भवन का कब्जा प्राप्त / प्रदान किया जा सकता है, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा ऐसा कोई प्रमाणीय एवं अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि उनके द्वारा नवीन ओखला औद्योगिक विकास एरिया बिल्डिंग रेगुलेशन, 2040 के रेगुलेशन-20.0 एवं 20..4 में वर्णित उपरोक्त प्राविधान के अनुसार आवेदन किये जाने की तिथि से 90 दिन के उपरान्त सक्षम प्राधिकरण द्वारा ओ.सी. जारी न किये जाने की स्थिति में कोई सूचना प्रेषित की गयी हो और सूचना प्रेषित किये जाने के उपरान्त सक्षम प्राधिकरण द्वारा कोई जवाब न दिये जाने की स्थिति में उनके द्वारा शिकायतकर्तागण के पक्ष में उपर्युक्तानुसार विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किया गया हो। उपर्युक्त के अतिरिक्त प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी द्वारा सिर्फ तीन caer एन.ओ.सी. दिनांक 44-04-2022 की प्रति, फायर एन.ओ.सी., दिनांक 46-42-2023 की प्रति, लिफ्ट एन.ओ.सी., दिनांक 28-42-2023 की प्रति के साथ ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु दिये गये आवेदन-पत्र, दिनांक 25-42-2023 की प्रति दाखिल की गयी है।
अतः उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में यह स्पष्ट है कि विपक्षी के कथनानुसार उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना के ब्लॉक /Ctae-Greenshire के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत किया गया आवेदन-पत्र, दिनांक 26-42-2023 उपर्युक्त प्रस्तरों में वर्णित नियमानुसार पूर्ण एवं विधि सम्मत नहीं हैं। इसके अतिरिक्त उपर्युक्त प्रस्तरों में वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी / सम्प्रवर्तक को दिनांक 22-07-2024 को चेतावनी देने के बावजूद भी उनके आचरण में कोई सुधार नहीं आया है, इसलिए सचिव, रेरा को आदेश की प्रति इस निर्देश से प्रेषित की जाये कि इस प्रकरण को यथाशीघ्र धारा-63, रेरा अधिनियम 2046 के अन्तर्गत कार्यवाही हेतु विपक्षी / सम्प्रवर्तक के इस प्रकार के कुकृत्यों के लिए इस शिकायत को रेरा प्राधिकरण के समक्ष नियमानुसार निर्णय हेतु प्रस्तुत करें। जहाँ तक शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष धनराशि का भुगतान एवं समय पर किये जाने का, तो इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा कहा गया है शिकायतकर्ता द्वारा अपनी समस्त धनराशि का भुगतान अनुबन्ध-पत्र के अनुसार नहीं ७ हु६& किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा रेरा कप्प्लेन्ट पेज के फार्म-एम पर Ba9,74,0i4 /- की धनराशि अंकित की गई है, परन्तु उनके द्वारा उक्त दावे को बल देने के लिए भी Page 0 of 7 E-Court साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा विभिन्न विधि व्यवस्थाओ एवं इस पीठ द्वारा पारित आदेशों का उल्लेख कर, प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 46-05-2045 को विपक्षी की परियोजना "MAHAGUN MEADOWS" गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: 608, Greenshire बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत G.93,46,43/— है और शिकायतकर्ता द्वारा .89,74,004 /— की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा उठायी गई सभी आपत्तियाँ तथ्यहीन एवं विधि-विरुद्ध हैं। विपक्षी द्वारा रू5,700/- की धनराशि के सम्बन्ध में कथित अन्तराल का समुचित स्पष्टीकरण यह है कि विपक्षी द्वारा उक्त धनराशि अनुबन्ध में नाम संशोधित /सम्मिलित किये जाने के आधार पर वसूली गई है, जिसकी रसीद, दिनांक 28-07-20:5 पत्रावली के साथ संलग्न है। अतः धनराशि के सम्बन्ध में दोनों पक्षों के मध्य कोई विवाद शेष नहीं है। पत्रवाली पर उपलब्ध अनुबन्ध-पत्र के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम किश्त रू.4,68,280 /— का भुगतान Wee की पूर्णता अथवा 30-06—2074 से 42 माह बाद की तिथि, जो भी पहले हो, तक भुगतान किया जाना था। उभय पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष w.89,44,007/- की धनराशि का भुगतान किया गया है जबकि यूनिट की कुल कीमत &.93,46,43/— है। विपक्षी ने अपने उक्त कथन को बल दिये जाने हेतु विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के खाता विवरण की प्रति संलग्न की गई है। उक्त तथ्यों से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान समय पर नहीं किया गया S| अतः विपक्षी, शिकायतकर्ता से रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(७४)6) के अनुसार उक्त अवशेष धनराशि मे हुए विलम्ब के आधार पर ब्याज वसूले जाने का अधिकारी है। Tag बिन्दु संख्या: 02 Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 03
बिन्दु संख्या: 03, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा wera परियोजना के सम्बन्ध में प्रारम्भ से ही लापरवाही एवं अनुबन्ध में उललेखित दायित्वों का उल्लंघन किया गया है। अनुबन्ध-पत्र के प्रावधानों के विपरीत न तो विपक्षी द्वारा निर्धारित समय (दिनांक 30-06-2048) पर प्रश्नगत यूनिट का वैध कब्जा प्रदान किया गया और न ही वादा की Page ] of 7 E-Court गई मूलभूत एवं सामुदायिक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं, जिससे परियोजना आज तक अपूर्ण है। प्रतिवादी ने अवैध रूप से बिना ओ.सी. प्राप्त किये, कब्जा प्रस्ताव-पत्र जारी कर अवशेष धनराशि की माँग की गई, जबकि विपक्षी द्वारा wera परियोजना मे हुए विलम्ब के आधार पर देय प्रतिकर / ब्याज का भुगतान या समायोजन नहीं किया गया, जिस कारण विपक्षी द्वारा अवशेष धनराशि की माँग विधिसम्मत नहीं है। विपक्षी का उक्त कृत्य भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 & प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, परियोजना निधियों के दुरुपयोग, आवश्यक स्वीकृतियों एवं पारदर्शिता के अभाव तथा शिकायतकर्ता के विधिक नोटिस की उपेक्षा से विपक्षी की दुर्भावनापूर्ण एवं मनमानी कार्यप्रणाली परिलक्षित होती है।
इस पर विपक्षी का कहना है कि उभय पक्षों के मध्य yea यूनिट के सम्बन्ध में अनुबन्ध-पत्र, दिनांक 43-08-2045 निष्पादित एवं हस्ताक्षरित किया गया, जिसके प्रस्तर-4.4 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिनांक 30-06-2048 तक दिया जाना था। इसके अतिरिक्त उक्त कब्जा दिया जाना फोर्स मेजयोर की परिस्थितियों के अधीन था। भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-48() में प्राविधान है कि:- " Section 46. Return of Amount and Compensation- (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building: - (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed."
इस प्रकार आवंटी को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नही है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा Page 2 of 7 E-Court Ee शिकायतकर्ता की मूल शिकायत में मुख्य अनुतोष प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के सम्बन्ध में है। शिकायतकर्ता द्वारा पत्रावली पर दाखिल उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित आवंटन-पत्र, दिनांक 43-08-2045 के प्रस्तर-4.4 के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा, दिनांक 30—-06—20'8 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उक्त निर्धारित अवधि में एवं अभी तक प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है इस, सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या: 6649-50 / 2048, “Ms. Supertech Ltd. Versus Rajni Goyal” में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 46) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as 4॥ए72076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession."
उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होंगे। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता को विपक्षी से दिनांक ot-07-20:8 में 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त अर्थात् दिनांक 07-09--208 से (निस्तारण बिन्दु संख्या: 02) के अनुसार ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा ओ.सी. / सी.सी. सहित विधिक कब्जा ऑफर पत्र जारी किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना उचित होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Neelkamal Realtors Suburban Pvt, Ltd. Versus Union of India & Ors.” में अभिनिर्धारित किया गया है किः- "Section 78(67)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's Page 3 of 7 E-Court
= till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money." अतः उपर्युक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20i6 के अधीन दिनांक i2-40-20:8 को उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित #८7.४+7 प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या: सीः 920 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित व विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर mcir+i प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से | प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। Te बिन्दु संख्या: 03 Peake किया जाता है।
इसके अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्ता को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि उक्त धनराशि को डिक्रिटल (Wecretal) धनराशि के रूप में रेरा द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा सीआई टी बनाम हिमाचल प्रदेश आवास विकास परिषद 2077 SCC OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case: 2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can Page 4 of 7 E-Court = if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature ?"
9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh v, Land Acquisition Collector (79979 224 ITR 557 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and उता of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 74999 titled as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRC) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 494.4 of the Income-tax Act. 40, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats.
44. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. usta sade विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर गोहाली क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण व अन्य बनाम गौरव FEAT, 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। उपर्युक्त वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा. उच्च न्यायालय, बम्बई द्वारा भी MMT ग़जकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व अन्य 2027 SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् है- 28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 Page 5 of 7 E-Court SCC OnLine Ker 78597 which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter.
29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2027 and our order dated 4-3-2024, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the 5th instalment which became due on 20-7-2024, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित विधिक भौतिक कब्जा उपलब्ध कराते हुए, शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी, शिकायतकर्ता को विपक्षी से दिनांक 04-07-2048 में 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक 07-09-2048 से (निस्तारण बिन्दु संख्या: 02) के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा ओ.सी. /सी.सी. सहित विधिक कब्जा ऑफर पत्र जारी किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर #८7.#+7 प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता wl वापस की जायेगी।
कोविड-49 के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्तागण को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्तागण से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-2(»०)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी #८7#+7 प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से Page 6 of 7 AGT laps, 5, a per =) es लक Tips 8. दिनांक: 40-04--2026. (tof 8 Qs * E-Court ll. विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा दिये जाते समय सभी चार्जेज आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार प्राप्त करने के अधिकारी हैं। विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें | यदि प्रश्नगत शिकायत में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने का कोई आदेश या कोई We आदेश पारित किया गया है, तो उसे तद्नुसार समाप्त किया जाता है।
सचिव, उ.प्र. रेर को आदेश की प्रति इस निर्देश से प्रेषित की जाये कि इस प्रकरण को यथाशीघ्र धारा-63, रेरा अधिनियम 2046 के अन्तर्गत कार्यवाही हेतु विपक्षी / सम्प्रवर्तक के इस आदेश के पृष्ठ संख्या: 09 एवं 40 पर वर्णित कुकृत्यों के लिए इस शिकायत को रेरा प्राधिकरण के समक्ष नियमानुसार निर्णय हेतु प्रस्तुत करें। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत्त प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें। पक्षकार अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे । आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। भूसरेड्डी) अध्यक्ष, उ.प्र. RI Page 7 of 7