Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Virander kumar jain(HUF) v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/05/119679/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-08-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारीः- श्री हरीश त्रिपाठी, न््यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित अधिकारी शिकायत संख्या शिकायतकर्ता यूनिट संख्या आवंटन / विक्रय करार के अनुसार कब्जा प्रदान करने की तिथि यूनिट का कुल विक्रय मूल्य अभिकथित रूप से भुगतान की गई धनराशि भुगतान का प्रमाण / साक्ष्य रसीदें, स्टेटमेंट आदि (भुगतान की तिथि सहित) NCRI44/06/I209/2024 | सुरेश कुमार वाघवानी 926 3.07.209 (with 06 month grace period) ,2,425/- ,08,063/- a) ,5,048 (04.06.4) b) 6430 (.07.4) ०) 5739 (08.08.4) 0) 5739 (22.04.5) e) 6288 (29.07.5) f) 6455 (2.03.6) 8) 6455 (27.09.6) h) 6789 (26.2.6) i) 6622 (26.05.7) j) 62498 (20.02.2I) Total ,08,063/- NCR44/05/I9679/2024 | विरेन्द्र कुमार जैन (एच.यू एफ.) SKG/M ON/LG F-829 No BBA Executed 7,79,740/- 5,90,420/- a) 50000 (24.09.25) b) 00000 (24.09.25) ०) 00000 (24.09.25) d) 40420 (24.09.24) e) 00000 (24.09.24) ) 00000 (24.09.24) Total 5,90,420/- Page बनाम मैसर्स ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्रा. लि. ‘aware (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20/6 की धारश-8॥ में प्रदत्त शक्तियों BT FAT करते हुए ग्राधिकरण द्वार ग्रत्यायोजन के सम्बन्ध में लिये यये foe के आधार WwW जारी कार्यालय TT सरख्या-6304,2 ए्रएफ्फ्424कांए.:02./5-87/2026-27. दिनाक ॥906.2026. के. ERT प्रत्यायोजित शक्तियों का उ्रयोग करते हुए श्श्नगत शिकायतों को निस्तारण किया जा रहा है
शिकायतकर्ता सुरेश कुमार वाधवानी के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी, मैसर्स ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्रा.लि. के विरुद्ध जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ प्रश्नगत शिकायतें प्रस्तुत की गयी हैं। उपरोक्त शिकायतों के तथ्य एवं साक्ष्य एक समान हैं। दोनों शिकायतें एक ही विपक्षी की एक ही परियोजना The Downtown (पंजीयन संख्या- UPRERAPRJS5805) से सम्बन्धित हैं। तथ्यों एवं साक्ष्य की पुनरावृत्ति से बचने तथा सुगमता की दृष्टि से दोनों शिकायतों का एक ही निर्णय द्वारा एक साथ निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत PN-NCRI44/06/I2094/2024, सुरेश कुमार वाधवानी अग्रणी शिकायत रहेगी | अग्रणी शिकायत में शिकायतकर्ता का कथन है कि उसके द्वारा दिनांक 34.05.2044 को विपक्षी की परियोजना The Downtown के CfaeKapital Grand 9" फ्लोर पर iss वर्ग फुट की यूनिट संख्या-926 बुक करायी गयी थी। यूनिट की कुल कीमत 2,2,425/- रुपये थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर विपक्षी को रु.,08,063 /— का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कथन है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित विक्रय अनुबन्ध के अनुसार यूनिट का कब्जा प्रदान करने में 05 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। विपक्षी द्वारा अनावश्यक व अवैध धनराशि की मांग भी की गयी है। विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण की स्थिति के सम्बन्ध में शिकायतकर्ता को गलत जानकारी प्रदान की गयी।
शिकायतकर्ता द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत लिखित शिकायत प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 34.07.2044 को कंस्ट्रक्शन लिंक पेमेन्ट प्लान (CLP) के अन्तर्गत विक्रय अनुबन्ध निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा विक्रय अनुबन्ध में दी गयी भुगतान योजना के अनुसार निर्धारित waa के भीतर लगभग समस्त किश्तों का aa कर fear गया, जिसके बावजूद भी विपक्षी ert ई-मेल दिनांक 09.04.2024 व 47.04.2024 के माध्यम से 4,33,96l /— रुपये अवैध धनराशि की मांग की गयी। विक्रय अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 34.07. 20i9 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा 05 वर्ष से अधिक का विलम्ब होने के बावजूद अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का पूर्णता/अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान किये जाने की तिथि से समस्त जमा धनराशि MCLR + 2% वार्षिक ब्याज की दर से वापस तथा मानसिक उत्पीड़न हेतु 5,00,000,//- रुपये की धनराशि व वाद व्यय हेतु ,00,000/- रुपये की धनराशि दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उपरोक्त अभिकथनों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने के अनुतोष हेतु प्रस्तुत की गयी है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवेदन फॉर्म, आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 34.07.2044, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, विभिन्न ई-मेल, विपक्षी द्वारा 4,33,96./- रुपये की धनराशि के सम्बन्ध में जारी मांग पत्र दिनांक 05.04.2024, अनुस्मारक पत्र दिनांक 49.04.2024, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायत अभिकथनों का उत्तर देने के लिए विपक्षी को नोटिस जारी किया गया। नोटिस तामील होने के पश्चात् विपक्षी उपस्थित हुआ। लिखित उत्तर दाखिल करने हेतु कई तिथियाँ नियत की गईं। पर्याप्त एवं युक्तियुकत अवसर दिये जाने के बावजूद विपक्षी की ओर से कोई लिखित उत्तर दाखिल नहीं किया गया। प्रश्नगनत प्रकरण को प्रथम सुनवाई हेतु दिनांक 49.09.2024 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री प्रिया सिंह उपस्थित हुईं एवं विपक्षी की ओर से प्रॉक्सी अधिवक्ता सुश्री विद्या राणा उपस्थित हुईं। विपक्षी को निर्देशित किया गया कि वह आगामी 4 सप्ताह के अन्दर अपना लिखित उत्तर रेरा पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें, साथ ८2822 उत्तर में अंकित 2 Page 3 {i BY तप (३ ¥ \ Ks हे 99922
प्रश्नगत प्रकरण को द्वितीय सुनवाई हेतु दिनांक 23.04.2025 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री प्रिया उपस्थित हुईं एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री मालिनी उपस्थित हुईं। विपक्षी की ओर से पूर्व आदेश दिनांक 49.09.2024 के अनुपालन में कोई लिखित उत्तर दाखिल नहीं किया गया और विपक्षी को अन्तिम अवसर देते हुए निर्देशित किया गया कि वह प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में आगामी 4 सप्ताह के अन्दर अपना लिखित उत्तर रेरा पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित करें, साथ ही शिकायतकर्ता से प्राप्त धनराशि की पुष्टि भी अपने लिखित उत्तर में अंकित करना सुनिश्चित करें | प्रश्नगत प्रकरण को तृतीय सुनवाई हेतु दिनांक 74.07.2025 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री प्रिया उपस्थित हुईं एवं विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। अन्तिम अवसर दिये जाने के बावजूद भी विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर दाखिल नहीं किया गया। विपक्षी को पर्याप्त अवसर दिये जाने के बावजूद लिखित उत्तर दाखिल न करने के कारण अवसर समाप्त किया गया। प्रश्नगत प्रकरणों को चतुर्थ सुनवाई हेतु दिनांक 48.03.2026 को प्रस्तुत किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री प्रिया उपस्थित हुईं एवं विपक्षी अनुपस्थित रहे। उभयपक्ष को आगामी 04 सप्ताह के अन्दर अपनी-अपनी लिखित बहस रेरा पोर्टल के कम्पलेन्ट पेज पर अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में दाखिल करने हेतु निर्देशित किया गया, परन्तु विपक्षी द्वारा अपनी लिखित बहस भी अपलोड एवं दाखिल नहीं की गयी।
प्रश्नगत प्रकरण को अन्तिम सुनवाई हेतु दिनांक 45.07.2026 को प्रस्तुत किया गया। शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री प्रिया उपस्थित हुईं। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री विकास पांडेय उपस्थित हुए। विपक्षी को अपनी लिखित बहस रेरा कम्पलेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल करने हेतु 04 सप्ताह का समय प्रदान किया गया, परन्तु विपक्षी की ओर से कोई लिखित बहस भी अपलोड एवं दाखिल नहीं की गयी। विपक्षी को प्रश्नगत शिकायतों के सम्बन्ध में अपना लिखित उत्तर रेरा कम्पलेन्ट पेज पर अपलोड एवं दाखिल करने हेतु पर्याप्त एवं युक्तियुक्त अवसर प्रदान किया गया, परन्तु विपक्षी की ओर से न तो कोई लिखित उत्तर दाखिल किया गया और न ही कोई लिखित बहस दाखिल की गयी। द्वितीय प्रकरण को भी विभिन्न तिथियों पर पीठ के समक्ष प्रस्तुत कर उपरोक्तानुसार समान कार्यवाही की गयी। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य न सामग्री का सम्यक परिशीलन किया | ॥ Page 4 - के अभिकथमनों, प्रतिकथनों, प्रस्तुत किये गये साक्ष्य एवं मौखिक बहस में प्रस्तुत किये गये तर्कों के आधार पर निम्नलिखित अवधार्य बिन्दु उत्पन्न होता है:- 4. क्या विपक्षी द्वारा कब्जा प्रदान करने में विलम्ब किया गया है, जिसके आधार पर शिकायतकर्ता जमा धनराशि ब्याज सहित वापस प्राप्त करने का अधिकारी है ? अवधार्य बिन्दु संख्या-04 यह soured बिन्दु इस आशय का है कि gar विपक्षी द्वारा कब्जा प्रदान करने में विलम्ब किया गया है, जिसके आधार पर शिकायतकर्ता जमा धनराशि ब्याज सहित वापस प्राप्त करने का अधिकारी है ?
यह अवधार्य बिन्दु शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत में किये गये अभिकथनों के आधार पर उत्पन्न हुआ है, अतः इसे साबित करने का प्रमाण भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN, जिसकी पंजीकरण संख्या- (UPRERAPRJ5805) के Cld¥—Kapital Grand में दिनांक 34.05.2044 को i9% फ्लोर पर यूनिट WeT-i926 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 34.07.2044 को कंस्ट्रक्शन लिंक पेमेन्ट प्लान (CLP) के अन्तर्गत विक्रय aera निष्पादित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा विक्रय अनुबन्ध में दी गयी भुगतान योजना के अनुसार निर्धारित समय के भीतर लगभग समस्त किश्तों का भुगतान कर दिया गया, जिसके बावजूद भी विपक्षी द्वारा ई-मेल दिनांक 09.04.2024 व 7.04.2024 के माध्यम से 4,33,96./— रुपये अवैध धनराशि की मांग की गयी। विक्रय अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 34.07.20I9 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा 05 वर्ष से अधिक का विलम्ब किये जाने के बावजूद भी अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान किये जाने की तिथि से समस्त जमा धनराशि MCLR + 2% वार्षिक ब्याज की दर से वापस तथा मानसिक उत्पीड़न हेतु 5,00,000/— रुपये की धनराशि व वाद व्यय हेतु ,00,000/— रुपये की धनराशि दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन»अनुबन्ध पत्र दिनांक eee ee 07.20i4 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्ष ४ है। P age 5
अनुबंध के पृष्ठ संख्या-09 पर कब्जे से सम्बन्धित प्रस्तर-26 के अवलोकन से प्रकट होता है कि विपक्षी कंपनी द्वारा आवंटन /अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 5 वर्ष एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। इस प्रकार दिनांक 34.04.2020 तक निर्माण कार्य पूर्ण कर सभी आवश्यक प्रमाण-पत्रों के साथ शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्रदान करना, विपक्षी का दायित्व था। विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य / प्रमाण दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह प्रकट हो सके कि उनके द्वारा प्रश्नगत परियोजना /टॉवर का निर्माण कार्य पूर्ण कर सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया जा चुका हो। प्रश्नगत प्रकरणों में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को अभी तक उनकी यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही जमा धनराशि ब्याज सहित वापस की गयी है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण से प्राप्त धनराशि का उक्त अवधि में उपभोग किया गया है। शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस प्राप्त किये जाने हेतु प्रश्नगत शिकायतें योजित की गयी हैं। समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को जमा धनराशि ब्याज सहित वापस कराया जाना उचित प्रतीत होता है।
रेरा अधिनियम की धारा-49(५) में यह प्रावधान किया गया है कि यदि प्रमोटर विक्रय अनुबन्ध के निबन्धनों, अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों एवं विनियमों के उपबन्धों के अधीन निर्धारित समय के अन्दर कब्जा देने में असफल रहता है तो आवंटी जमा धनराशि विहित ब्याज दर सहित वापस प्राप्त करने के साथ-साथ अधिनियम में उपबन्धित रीति से प्रतिकर भी प्राप्त करने का अधिकारी होगा। धारा-49(4) के प्रावधान निम्नवत् है:- "]9(4) The allottee shall be entitled to claim the refund of amount paid along with interest at such rate as may be prescribed and compensation in the manner as provided under this Act, from the promoter, if the promoter fails to comply or is unable to give possession of the apartment plot or building, as the case may be, in accordance with the terms of agreement for sale or due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of his registration under the provisions of this Act or the rules or regulations made thereunder." इसी प्रकार रेरा अधिनियम के otis (॥) में विलम्ब ब्याज एवं प्रतिकर के सम्बन्ध में स्पष्ट रूप से प्रावधान किया गया है कि:-
यदि प्रमोटर निर्धारित समय में निर्माण कार्य पूरा करने या कब्जे देने में असफल रहता है और आवटी परियोजना से बाहर होना चाहता है तो आवंटी की माग पर प्राप्त की गई धनराशि, ऐसी ब्याज दर सहित जो विहित की जाए, वापस कर देगा। साथ ही साथ अधिनियम में उपबन्धित रीति से प्रतिकर भी देय होगा। धारा-48(4) के WH के अनुसार यदि आवंटी परियोजना से बाहर नहीं होना चाहता तो वह कब्जा प्राप्त होने तक प्रत्येक माह के विलम्ब के लिए विहित दर पर ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ais (3) के प्रावधान निम्नवत् है- "8, Return of amount and compensation" (l) If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an upartment, plot or building- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein, or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason,he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any Fe remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act:
Provided that where allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा कोलकाता बेस्ट इंटरनेशनल सिटी प्रा. लि. बनाम देवाशीष रुद्रा (2020) 8 5८८ 643 के मामले में स्पष्ट रूप से _अभिनिर्धारित किया गया है किः- ८ छानय/ | e oy "It would be manifestly unreasonable to construe the ; contract between the parties as requiring the buyer to y, wait indefinitely for possession. By 20l6, nearly seven qe anger te aan years had elapsed from the date of the agreeme en ....................ध++++०-०+०++०+७७+ «५» -«»-+--++म-+-++--++- थक ननमन-ानम-म----म-८+८-+-«ाेभ+भान++++-+-«८ पतन +आथन++++++3+<5+ऊभल«+लआथ« «3-८ नम मममनमनम-ऊमममनशमलआभआरभलआभे+ाा+++आ+न according to the developer, the completion certificate was received on 29 March 206. This was nearly seven years after the extended date for the handing over of possession prescribed by the agreement. A buyer can be expected to wait for possession for a reasonable period. A period of seven years is beyond what is reasonable. Hence, it would have been manifestly unfair to non-suit the buyer merely on the basis of the first prayer in the reliefs sought before the SCDRC. There was in any event a prayer for refund. In the circumstances, we are of the view that the orders passed by the SCDRC and by the NCDRC for refund of moneys were justified."
इसी प्रकार मा. सर्वोच्च =e ने “पायनियर अर्बनलैन्ड एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम गोविन्द राघवन (20I9) 5 SCC 725” के मामले में भी अभिनिर्धारित किया गया है कि "9. We see no illegality in the Impugned Order dated 23.0.20I8 passed by the National Commission. The Appellant Builder failed to fulfill his contractual obligation of obtaining the Occupancy Certificate and offering possession of the flat to the Respondent - Purchaser within the time stipulated in the Agreement, or within a reasonable time thereafter. The Respondent -Flat Purchaser could not be compelled to take possession of the flat, even though it was offered almost 2 years after the grace period under the Agreement expired. During this period, the Respondent Flat Purchaser had to service a loan that he had obtained for purchasing the flat, by paying Interest @0% to the Bank. In the meanwhile, the Respondent Flat Purchaser also located an alternate property in Gurugram. In these circumstances, the Respondent Flat Purchaser was entitled to be granted the relief prayed for ie. refund of the entire amount deposited by him with Interest." उपरोक्त विधि व्यवस्थाओं में प्रतिपादित सिंद्धान्त के अनुसार गृहक्रेता को एक उचित एवं युक्तियुक्त समय तक ही प्रतीक्षा कराया जा सकता है। पूर्णता प्रमाण-पत्र प्राप्त होने के उपरान्त भी शिकायतकर्तागण जमा धनराशि पाने के अधिकारी हैं। चूंकि परियोजना समय से पूर्ण नहीं की गयी है। ऐसी दशा में ARTI शिकायतकर्तागण जमा धनराशि मय ब्याज पाने के अधिकारी है।
जहाँ तक शिकायतकर्तागण को ब्याज सहित धनराशि वापस किये जाने प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में है कि मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय की | हुँ न््यायपीठ ने नीलकमल Raced सबअर्बन प्रा. लि. बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 20I7 SCC Online Bom 9302 के मामले में निर्णय के प्रस्तर-306 में द्वारा अभिनिर्धारित किया है कि "Section 8(!)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to anyother remedy availabe, to return the amount received in this behalf with interest including compensation. If the allottee does not intend to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment. of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable"
Imperia structure Ltd - Vs. Anil Patni (2020) 0 SCC 783 (Para-25) के मामले में यह अवधारित किया है कि ais के अधीन कब्जे में विलम्ब होने पर जमा धनराशि ब्याज सहित वापस प्राप्त करने का आवंटी का अधिकार एक बिना शर्त अधिकार (Unqualified Right) है। मा. सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायमूर्तिगण की sais ने मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. बनाम उ.प्र. राज्य व अन्य 202 SCC Online SC 044 के मामले में निर्णय के प्रस्तर-25 F Imperia structure Ltd. Vs Anil Patni (2020) 0 SCC 783 के उपरोक्त मामले में बताये गये आवंटी के बिना शर्त अधिकार (Unqualified Right) को और अधिक स्पष्ट एवं व्यापक करते हुए यह sama किया है कि amis (3)७) एवं धारा-49(4) के अधीन जमा धनराशि वापस प्राप्त करने का आवंटी का अधिकार एक बिना शर्त पूर्ण अधिकार (Unqualified absolute Right) है, जो किसी शर्त अथवा आकस्मिकता पर 5. आधारित नहीं है। निर्णय का प्रस्तर-25 निग्नवत् है:- "25. The unqualified right of the allottee to seek refund referred under Section 8()(a) and Section 9(4) of the Act is not dependent on any contingencies orstipulati >.........................___--------न--------+----नन----+--------------ाननामाननमननानननननमननननमननननननननन-ानन--+ा------+नन-+-+ननााननन-ाननननन-ाननन--गभ-नगन-नननाननननननननननमननननन-ननननननननना-ानन-म-नननमनन-भ«नन--म-ा--<-<-ा--ममा-म-ाा------ा----ा-ााानममनमाानननननमननन-ननयनन-ननभभनऋनन«-नननभननन-ननननभनभनभनन«ननन-_ं-नभननाना
thereof. It appears that the legislature has consciously provided this right of refund on demand as an unconditional absolute right to the allottee, if the promoter fails to give possession of the apartment, plot or building within the time stipulated under the terms of the agreement regardless of unforeseen events or stay orders of the court/tribunal, which is in either way not attributable to the allottee/homebuyer, the promoter is under an obligation to refund the amount on demand with interest at the rate prescribed by the State Government including | compensation in the manner provided under the Act with the proviso that if the allottee does not wish to withdraw from the project, he shall be entitled for interest for the period of delay till handing over possession at the rate prescribed." अतः उपरोक्त निर्णयों के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा जमा धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा अधिनियम की धारा-2(2४) में ब्याज को परिभाषित किया गया है, धारा-2(20) निम्नवत हैः- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation. For the purpose of this clause- (I) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default;
(i) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; अब प्रश्न उत्पन्न होता है कि जमा धनराशि पर देय ब्याज की दर क्या होगी। ब्याज की दर के सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 --84 के अधीन प्राप्त शक्ति प्रयोग करते = दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / deer के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। नियमावली के नियम 3(0) के अनुसार प्रमोटर व आवंटी के मध्य निष्पादित किये जाने वाले विक्रय» पट्टा के लिए करार, अनुलग्नक के अनुसार प्रपत्र में होगा। नियम-2 में अनुलग्नक को परिभाषित किया गया है। जिसके अनुसार 'शब्द' 'अनुलग्नक' का तात्पर्य इस नियमावली के साथ संलग्न किसी अनुलग्नक से है। नियमावली के नियन-3 (॥) में वर्णित अनुलग्नक विक्रय /पटटा विलेख के मानक प्रपत्र के खण्ड-9 में व्यतिक्रम एवं उसके परिणामों का प्रकरण (Events of default) परिभाषित है। खण्ड-9.20)67) में प्रमोटर के व्यतिक्रम की दशा में आवंटी को प्राप्त अधिकारों के सम्बन्ध में प्राविधानित किया गया है। 9- Events of defaults and consiquences:- खण्ड-9.20) में प्रमोटर के व्यतिक्रम की दशा में आवंटी हेतु प्रावधान है किः-
9.2(i) Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest. उपरोक्त खण्ड से यह स्पष्ट है कि यदि परियोजना के निर्माण में विलम्ब होता है, तो आवंटी को भुगतान रोक देने का अधिकार प्राप्त है। इसी प्रकार खण्ड-9.20) में यह प्राविधान किया गया है कि यदि प्रमोटर द्वारा व्यत्तिक्रम किया जाता है, तो आवंटी को अनुबन्ध समाप्त करने का अधिकार प्राप्त होगा। खण्ड-9.2(9) के प्रावधान निम्नवत् हैः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of : Lending Rate) on home loan of State Bank of ee India +% unless provided otherwise under the ) Rules. within forty-five "CBZ of receiving the @ termination notice:" Ke) क्षेका, गौतमबुद्धनगर -—— ee Page l नियमावली के नियम 3(0) में वर्णित अनुलग्नक विक्रय /पटटा विलेख के मानक प्रपत्र के खण्ड-9.3(5) में आवंटी के द्वारा व्यतिक्रम की स्थिति में भी MCLR+! प्रतिशत वार्षिक की यही ब्याज दर निर्धारित की गई है। उपरोक्त विधिक प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को विलम्बित अवधि के लिए McLR+ प्रतिशत वार्षिक की ब्याज दर के साथ जमा धनराशि वापस दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
मा. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खण्ड watts ने भी Re याचिका संख्या-सी-3289 / 2020 wat बिल्डवेल कंस्ट्रक्शन्स wife. बनाम पूनम सूद एवं अन्य निर्णीत दिनांक 06.02.2020 के मामले में पारित निर्णय में McLR+I प्रतिशत की ब्याज दर को उचित मानते हुए यह संप्रेक्षण किया गया है कि:-
"Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.l (MCLR+I) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent no.I had booked a flat and till the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 208. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 20I8 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shall be liable to refund the entire money paid by the allottee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India+ क्% unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice. Learned counsel for the petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 20I6, providing otherwise."
इसी प्रकार मा. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की एक अन्य खण्ड न््यायपीठ ने भी हैबीटेक इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम उ.प्र. राज्य सरकार एवं अन्य 2020 SCC Online All 693 के मामले में निर्णय के प्रस्तर-3, 7 व 29 में यह SE कक सम्प्रेक्षण किया है कि; ए०६९१2 On 2.09,.20]9 the respondent authority directed the petitioner to refund the entire amount alongwith interest @ MCLR + % from the date of deposit till the date of order. Thereafter, recovery certificate and citation was issued on 07.02.2020 and only on complaint under Section I8 authority proceeded to direct for the refund of the money alongwith payment of interest @MCLR + %, which was in view of Real Estate (Regulation & Development) (Agreement to Sale) Regulations, 20!8..... Thus power of refund of amount along with interest which has been provided under Section 8, with the authority was rightly exercised by it in the interest of justice. इस प्रकार मा. उच्च न्यायालय द्वारा भी रेरा प्राधिकरण के पीठ द्वारा नियमावली के अधीन जमा धनराशि MCLR+I% की वार्षिक ब्याज दर सहित वापस किये जाने के आदेश को उचित एवं विधिपूर्ण माना है। अतः उपरोकक्तानुसार मा. उच्च न्यायालय की दोनों खण्ड न्यायपीठों द्वारा दिये गये निर्णयों में यह सुस्थापित किया जा चुका है कि राज्य सरकार द्वारा नियमावली-2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी ब्याज दर उचित एवं विधिपूर्ण है। ब्याज दर को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के McLR+ प्रतिशत से सम्बद्ध करने के सिद्धान्त को मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा भी स्वीकार करते हुए न्यायोचित माना गया है।
ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विकय पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की होमलोन की अधिकतम ब्याज दर से 4 प्रतिशत अधिक है, उचित एवं सही है। यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है। विपक्षी द्वारा पीठ के समक्ष उपस्थित होकर यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसके द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर पूर्णता /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा चुका है। रेरा पोर्टल के अवलोकन से यह प्रकट होता है कि पोर्टल पर कोई भी पूर्णता /अधिभोग प्रमाण-पत्र अपलोड नहीं है। विक्रय अनुबन्ध के निबन्धनों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 34.04.2020 तक कब्जा दिया जाना संविदात्मक एवं विधिक दायित्व था। शिकायतकर्ता द्वारा प्रार्था की गयी है कि जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलायी जाये। शिकायतकर्ता को निर्धारित अवधि में जय ee नहीं दिया गया। परियोजना का पूर्णता /अधिभोग >-पत्र भी प्राप्त नहीं हुआ है। अतः शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की ai9(4) सपठित धारा-48(4)(ए) के अन्तर्गत परियोजना से बाहर जाने का अधिकारी है। अवधार्य बिन्दु संख्या-04 उपरोक्तानुसार निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त अवधार्य बिन्दु पर दिये गये निष्कर्ष के आधार पर निम्नलिखित आदेश पारित किये जाते हैं :- | आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि, जमा करने की तिथि से लेकर धनराशि वास्तविक अदायगी की तिथि तक, MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर सहित वापस करना सुनिश्चित करें |
2. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि वे रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने पक्ष में पारित आदेश का क्रियान्वयन करा सकेंगे | 3. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं | इस आदेश में प्रतिपादित Rar के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5... शिकायतकर्तागण को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण “er पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु आवेदन अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया BE: | तदूनुसार पत्रावलियाँ ae हों। ५2 ~ हरीश त्रिपाठी (न्यायनिर्णायक अधिकारी / प्रत्यायोजित अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 4