Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Gaurav Prakash v. Project Category-Un-Register RISE PROJECTS PVT LTD
Complaint No. NCR144/05/119627/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-03-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Hearing Bench-2 (formerly Bench-4) Order under Section 34 read with Section 37 Presiding Officer: Shri T. Venkatesh, Member Complaint No.: NCR44/05/9627/2024 Gaurav Prakash and Manju Prasad Versus M/s Rise Projects Private Limited The complaint application has been instituted by the complainant against the opposite party, seeking possession of the unit in question together with interest for the delayed period. In brief, the complainant's statement is that they booked Unit No. [?]000-2-77-302 in the opposite party's project, Rise Resort Residences Phase-I, on 44.08.2048. The total value of the unit was Rs. 73,75,988/-, against which the complainant paid Rs. 58,00,862/- to the opposite party from time to time in instalments. The complainant also says that, under clause 9.4 of the flat buyer agreement dated 08.09.20:8, the opposite party was to give possession of the unit by 34.07.2022 or earlier, but the opposite party has not given possession and has not obtained OC/CC for the project from the competent development authority. For this reason the complainant has filed this complaint under Section 34 of the RERA Act, seeking possession of the unit together with OC/CC of the project and interest for the delayed period at MCLR+ per cent per annum.
In support of the statement, the complainant has filed a detailed complaint under Section 34. The complainant states that they booked Unit No. [?]000-2-77-302 in the opposite party's project, Rise Resort Residences Phase-II, in the year 20:8. The total value of the unit was Rs. 73,75,988/-, against which the complainant paid Rs. 58,00,862/- to the opposite party from time to time in instalments, which is 75% of the sale price. For the sale of this unit, a flat buyer agreement dated 08.09.2048 was executed between the parties, under clause 9.4 of which the opposite party assured the complainant that possession of the flat would be handed over by 34 July 2022. However, the opposite party has still neither given possession of the unit nor got the sale deed of the unit executed. The opposite party sent a proposal letter for fit-out of the unit on 25.04.2024, but has still not given possession of the unit. As per the agreement, the opposite party was to hand over possession of the unit by 34.04.2023, including the grace period. The complainant has therefore requested physical possession of the unit, together with OC/CC of the project, and delay interest at MCLR+ per cent per annum. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of records, including the written complaint, the demand letter, the flat buyer agreement dated 08.09.20:8, receipts of amounts paid to the opposite party, the loan letter and written arguments.
a भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारीः- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या:-- NCR44/05/9627/2024 गौरव प्रकाश एवं मंजू प्रसाद बनाम मैसर्स राइज प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज feat जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences Phase-I 4 दिनांक 44.08.2048 को यूनिट संख्या-$0००-2-77-302 बुक करायी गयी थी। यूनिट का ga मूल्य 73,75,988/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 58,00,862/- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 08.09.20i8 के प्रस्तर-9.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 34.07.2022 तक अथवा उससे पूर्व यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है और न ही अभी तक विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की asi के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में ast के अन्तर्गत विस्तृत शिकायत प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences Phase-l में वर्ष 20:8 4 यूनिट संख्या-$#०७४-2-77-302 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य 73,75,988/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 58,00,862 /- रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि कुल Page = बिक्री मूल्य का 75% धनराशि S| sat यूनिट की बिक्री के लिए उभयपक्षों के |. फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 08.09.2048 निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-9.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया गया था कि 34 जुलाई, 2022 तक फ्लैट का कब्जा सौंप दिया जाएगा, परन्तु विपक्षी अभी तक न तो यूनिट का कब्जा प्रदान किया गया है और न ही यूनिट की सेल डीड निष्पादित करायी गयी है। विपक्षी द्वारा दिनांक 25.04.2024 को यूनिट के फिट-आउट हेतु प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 34.04.2023 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. सहित यूनिट का भौतिक कब्जा एवं MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में ars के अन्तर्गत लिखित शिकायत, मांग पत्र, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 08.09.20:8, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, ऋण पत्र, लिखित बहस आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना 'RISE FOREST FLOORS' में यूनिट संख्या-77-302 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 08.09.2048 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया था, जिसके प्रस्तर-9.4 के अनुसार शिकायतकर्ता को 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 34.04.2023 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था तथा शिकायतकर्ता द्वारा sat यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु डाउन पेमेन्ट प्लान का चयन किया गया। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 73,75,988 /- रुपये था। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रश्नगत शिकायत गौरव प्रकाश के नाम से योजित की है और मंजू प्रसाद को सह-आवंटी के रूप में अंकित नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 25.04.2024 को फिट-आउट पजेशन के लिए अन्तिम प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके साथ में उक्त यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग-पत्र प्रेषित किया गया था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि पर्यावरण प्रदूषण के कारण मा. राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दिल्ली एन.सी.आर. में समय-समय पर निर्माण गतिविधियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध लगा दिया था, जिससे परियोजना की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। साथ ही यह भी कहा गया है कि भारत सरकार ने कोविड-49 महामारी के
है. को रोकने के लिए विश्व में कुछ सबसे कठोर कार्यवाइयों का सहारा लिया और सम्पूर्ण देश में 24 मार्च, 2020 से राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन घोषित किया गया, जिसे विभिन्न अधिसूचनाओं द्वारा बढ़ाया गया था, जिस कारण निर्माण की सामग्री उपलब्ध न होने के कारण 446 दिनों से अधिक निर्माण गतिविधियां पूर्ण रूप से बाधित रहीं, जिस कारण परियोजना को पूर्ण किये जाने में विलम्ब हुआ। विपक्षी का कहना है कि परियोजना में विलम्ब का कारण शिकायतकर्ता सहित कई अन्य आवंटियों द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का समय पर भुगतान न किया जाना है, जिससे परियोजना की प्रगति पूर्ण रूप से प्रभावित हुई। उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत में शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित जवाब, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांकित 08.09.2048, मांग पत्र दिनांकित 25.04.2024, फिट-आउट पत्र दिनांक 25.04.2024, रेरा प्राधिकरण द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 06.06.2020 व 78.08.202, रेरा प्राधिकरण की मा. पीठ-4ए द्वारा अन्य शिकायतों में पारित आदेश दिनांकित 46.42.2020, अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दाखिल करते हुए कहा गया कि उनके विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences Phase-I में दिनांक 44.08.2048 को यूनिट संख्या-$0००-2-77-304 बुक करायी गयी थी। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनां 08.09.2048 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-9.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा जुलाई, 2022 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर ओ.सी. /सी.सी. सहित शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के प्रस्तर-40.4 व 40.2 का उल्लंघन किया गया है। विपक्षी द्वारा vat यूनिट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किये जाने के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा 8,07,22/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा केवल फिट-आउट प्रस्ताव-पत्र जारी किया गया है, जोकि वैधानिक नहीं है और विपक्षी द्वारा प्रेषित फिट-आउट प्रस्ताव-पत्र अवैधानिक व निराधार है। विपक्षी द्वारा अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना ओ.सी. / सी.सी. सहित यूनिट का भौतिक कब्जा एवं McCLR+ प्रतिशत ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। Page 3 Ee के cot को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध weal का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04
निस्तारण बिन्दु संख्या-04, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Rise Resort Residences Phase-Il 4 वर्ष 20:8 4 यूनिट संख्या-$0००-2-77-302 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कूल मूल्य 73,75,988/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 58,00,862/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि कुल बिक्री मूल्य का 75% धनराशि है। sat यूनिट की बिक्री के लिए उभयपक्षों के मध्य फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 08.09.2048 निष्पादित किया गया, जिसके प्रस्तर-9.4 के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया गया था कि 34 जुलाई, 2022 तक फ्लैट का कब्जा सौंप दिया जाएगा, परन्तु विपक्षी अभी तक न तो यूनिट का कब्जा प्रदान किया गया है और न ही यूनिट की सेल डीड निष्पादित करायी गयी है। विपक्षी द्वारा दिनांक 25.04.2024 को यूनिट के फिट-आउट हेतु प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 34.04.2023 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. सहित यूनिट का भौतिक कब्जा एवं MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी अपना लिखित जवाब प्रस्तुत करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना "RISE FOREST FLOORS' में यूनिट संख्या-77-302 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 08.09.2048 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया था, जिसके प्रस्तर-9. 4 के अनुसार शिकायतकर्ता को. 6 माह की aque अवधि सहित दिनांक 34.04.2023 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था तथा शिकायतकर्ता द्वारा vat यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु डाउन पेमेन्ट प्लान का चयन किया गया। यूनिट का कूल बिक्री मूल्य 73,75,988 /- रुपये था। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि प्रश्नगत शिकायत गौरव प्रकाश के नाम से योजित की है और मंजू प्रसाद को सह-आवंटी के रूप में अंकित नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा दिनांक 25.04.2024 को फिट-आउट पजेशन के लिए अन्तिम प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके साथ में उक्त यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग-पत्र प्रेषित किया गया था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया war) उपर्युक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत में शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 48 (4) F प्राविधान है कि :- Section 8 (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. Page 5 इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की aet—i(4)(b) में स्पष्ट रूप से vectra है कि प्रमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमनन एवं विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए करार / अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उलल्लेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 08.09.2048 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-46 के प्रस्तर-9.4 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को दिनांक 34.07.2022 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 34.07.2022 तक अपनी यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 / 2048 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल* में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." बिग विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2022 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, wife gated द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। ८5 Tart KEN | रेरा एक्ट की धारा-2(»9) में प्रावधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. — 7 Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20:6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.2(॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +i% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। sar प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी |४2,४+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या-सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया है। कं अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3--48-65 विविध ,/ 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with ll specifications, amenities and facilities of the Project in place on + unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. we अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-04 निस्तारित किया all जाता है। ५63
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते Page 9 ov ...... rs विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को आवंटन / अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.08.2022 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा ओ.सी. /सी.सी. सहित विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। olfas—i9 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा | विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(2४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह प्रश्नगत परियोजना » टॉवर के सम्बन्ध में विधिक ओ.सी./सी.सी. प्राप्त करने के पश्चात् शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का विधिक भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि से, शिकायतकर्ता से मेन््टेनेंस के मद शुल्क प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को विधिक ओ.सी. /सी.सी. सहित vera यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान करते समय सभी चार्जेज़ फ्लैट क्रेता अनुबन्ध में velar we प्लान / वर्णित शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करें। saan आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए | तदनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। Ce-ahfh (सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 2486 4