Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajiv Chauhan v. Solaris Realtech Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/05/109250/2023
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- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ--4) उपस्थिति:- श्री टी० वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या:-- ४टा२44/05/09250/2023 राजीव चौहान बनाम सोलारिस रियलटेक प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Flora Heritage में यूनिट WeT-T-Blasius-C2-005 बुक करायी गयी थी। यूनिट की कुल कीमत 33,79,250/— रुपये थी, जिसके सापेक्ष उनके ERT समय-समय पर किश्तों के आधार पर 33,82,835/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि अनुबन्धानुसार परियोजना विलम्ब की श्रेणी में है तथा विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना के निर्माण कार्य के सम्बन्ध में पूर्णता प्रमाण पत्र तथा अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। विपक्षी द्वारा यूनिट के सापेक्ष अवैधानिक मांग पत्र तथा दिनांक 49.09.2024 को अवैधानिक कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया। शिकायतकर्ता को विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा की प्रति, बुकिंग फॉर्म की प्रति, अनुबन्ध पत्र दिनांकित 30.09.2046 की प्रति, यूनिट निरस्तीकरण की प्रति, खाता विवरण, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.06.2046 के प्रस्तर-5.4 के अनुसार 36 माह एवं 06 माह की aque अवधि के साथ दिनांक 24.42.20:9 तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना ch
का निर्माण कार्य पूर्ण कर दिनांक 06.04.2022 को ओ.सी हेतु आवेदन किया गया था, जिसके कम में दिनांक 46.07.2022 को ओससी प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट को समय से अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किये जाने के कम में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट को निरस्त कर दिया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी के अन्तर्गत नहीं आते हैं। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनकी परियोजना Flora Heritage में यूनिट WeN-C2-B005 आवंटित की गयी थी, जिसके कम में उभयपक्ष के मध्य दिनांक 24.06.20i6 को आवंटन पत्र का निष्पादन किया गया था, जिसके अनुसार यूनिट की कुल कीमत 33,79,250 /-रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 22,28,292 /-रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनकी देय धनराशि का भुगतान किये जाने के सम्बन्ध में विभिन्न तिथियों पर मांग पत्र तथा अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये तथा दिनांक 29.09.2024 को कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र भी प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किये जाने के कम में विपक्षी द्वारा पत्र दिनांक 30.03.2023 तथा ई-मेल दिनांकित 34.03.2023 प्रेषित करते हुए शिकायतकर्ता की यूनिट को निरस्त कर दिया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा दिनांक 47.08.2023 को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित कर दिये गये है तथा विपक्षी द्वारा यह कहा गया है कि अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-7 के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि को तथा गृह ऋण के माध्यम से किये गये भुगतान को बैंक को वापस कर दिया जायेगा। उपरोक्त कथन के आधार पर प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-॥ बिन्दु woe इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? शिकायतकर्ता का कहना है कि अनुबन्धानुसार परियोजना विलम्ब की श्रेणी में है तथा विपक्षी द्वारा wena परियोजना के निर्माण कार्य के सम्बन्ध में पूर्णता प्रमाण पत्र तथा अनापत्ति प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। विपक्षी द्वारा यूनिट के सापेक्ष अवैधानिक मांग पत्र तथा दिनांक 49.09.2024 को अवैधानिक कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र प्रेषित किया गया। शिकायतकर्ता को विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
दूसरी ओर विपक्षी द्वारा अपने जवाब में अंकित किया गया है कि अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.06.2046 के प्रस्तर-5.4 के अनुसार 36 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ दिनांक 24.42.2049 तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा प्रश्नतत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर दिनांक 06.04.2022 को ओ.सी हेतु आवेदन किया गया था, जिसके कम में दिनांक 46.07.2022 को ओस्सी प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट को समय से अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किये जाने के कम में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट को निरस्त कर दिया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता आवंटी की श्रेणी के अन्तर्गत नहीं आते हैं। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनकी परियोजना Flora Heritage 4 यूनिट de-c2-B005 आवंटित की गयी थी, जिसके कम में उभयपक्ष के मध्य दिनांक 24.06.20I6 को आवंटन पत्र का निष्पादन किया गया था, जिसके अनुसार यूनिट की कुल कीमत 33,79,250 /-रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 22,28,292 //-रूपये की धनराशि का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनकी देय धनराशि का भुगतान किये जाने के सम्बन्ध में विभिन्न तिथियों पर मांग पत्र तथा अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये तथा दिनांक 29.09.202 को कब्जा हेतु प्रस्ताव पत्र भी प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान नहीं किये जाने के कम में विपक्षी द्वारा पत्र दिनांक 30.03.2023 तथा ई-मेल दिनांकित 34.03.2023 प्रेषित करते हुए शिकायतकर्ता की यूनिट को निरस्त कर दिया गया, जिसके उपरान्त विपक्षी द्वारा दिनांक 47.08.2023 को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित कर दिये गये है तथा विपक्षी द्वारा यह कहा गया है कि अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-7 के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि को तथा गृह ऋण के माध्यम से किये गये भुगतान को बैंक को वापस कर दिया जायेगा। उपरोक्त कथन के आधार पर प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
पत्रावली के अवलोकन से यह विदित है कि उभयपक्ष के मध्य अनुबन्ध पत्र का निष्पादन दिनांकित 30.09.20i6 को किया गया, जिसके अनुसार werd यूनिट की कीमत 3,73,350/-wad थी। अनुबन्ध पत्र के पृष्ठ संख्या-44 के प्रस्तर-5.4 के अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर 36 माह एवं फोर्स मैज्योर की अवधि को दृष्टिगत रखते हुए प्रश्नगत यूनिट का be कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण |
कर सभी एन.ओ.सी को प्राप्त करते हुए दिनांक 46.07.2022 को सक्षम विकास प्राधिकरण से ओ.सी प्राप्त किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को जनवरी 2022 से प्रतिमाह दिसम्बर 2022 तक ई-मेल के माध्यम से शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष बकाया धनराशि 4,25,990 /-रूपये हेतु मांग पत्र प्रेषित किये गये है, जिसके कम में विपक्षी | द्वारा दिनांक 30.03.2023 को यूनिट का निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर प्रश्नगत यूनिट को निरस्त कर fear गया। विपक्षी द्वारा यूनिट के सापेक्ष ऑफर ऑफ पोजेशन दिनांक 49.09.2024 को प्रेषित किया गया था। उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को यूनिट को निरस्त किये जाने से पूर्व मांग पत्र तथा अनुस्मारक पत्र पंजीकृत डाक के माध्यम से प्रेषित नहीं किया गया है, न ही विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किये जाने से पूर्व प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर शिकायतकर्ता को चेतावनी नहीं दी गयी और प्रश्नगत यूनिट को पत्र दिनांक 30.03.2023 के माध्यम से प्रश्नगत यूनिट को निरस्त कर दिया गया, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा अनुबन्ध पत्र के पृष्ठ संख्या-8 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत 34,78,350,/-रूपये के सापेक्ष उनके द्वारा सम्पूर्ण धनराशि का भुगतान किया जा चुका है तथा विपक्षी द्वारा भी शिकायतकर्ता द्वारा अपनी मूल शिकायत में अंकित जमा धनराशि पर कोई आपत्ति नहीं की गयी है तथा विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में रेश नियमावली का उल्लंघन करते हुए प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किया गया है, जोकि अवैधानिक है।
अतः यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किये जाने के सम्बन्ध में रेरा नियमावली का उल्लंघन किया गया है, जोकि अवैधानिक है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल आवंटन पत्र दिनांक 30.09.2046 के पृष्ठ संख्या-44 के कब्जे वाले प्रस्तर-56) के अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कब्जा % माह में दिया जाना था। ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 30.09.2049 तक कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 04.40.2049 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। Oy जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 /20i8 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Waa’ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- " the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession."
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के ”“नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(])(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay a interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable."
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2A(za) में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—F or the purpose of this clause— (i) the rate of interest chargeable from the allottee by | the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(9) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः--
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the 6 rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +i% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /e—3—t8-65 विविध ,/ 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7.. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the {Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" 7 ro इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। है :-
उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.40.2049 से ओ.सी »/सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(2०)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी ४८॥२+। प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। 8 ow इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए।
यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि वह रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण