Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mrs. Sarika v. SJP Infracon Limited
Complaint No. NCR144/040349/2019
- Decision date
- 2019-12-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-3 श्री राजीव कुमार, अध्यक्ष शिकायत सं0-एनसीआर444 / 040349 / 2049 सारिका बनाम एस जे पी इन्फाकॉन लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि के लिए प्रतिपूर्ति (compensation ) दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना Shri Radha Sky Park में फ्लैट =o “टी 44” /402 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा wo 39,48,885,/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा पृथक रूप से लिखित अभिकथन प्रस्तुत किया गया है जिसमें यह उल्लेख है कि उक्त यूनिट पूर्व में श्री शरद त्यागी को विपक्षी द्वारा दिनांक os. 0१.2043 को आवंटित की गयी थी तत्पश्चात् श्री शरद त्यागी द्वारा शपथ पत्र दिनांक 47.03.2047 के माध्यम से उक्त यूनिट अपनी बहन के नाम स्थानान्तरित कर दिया गया, जिसके उपरांत विपक्षी ने उक्त यूनिट शिकायतकर्ता सारिका के पक्ष में कर दी गयी। शिकायतकर्ता द्वारा यह भी कथन किया गया है कि उसके द्वारा उक्त यूनिट के सम्बंध में आखिरी किश्त छोड़कर बाकी समस्त किश्तें भुगतान कर दी गयी है। विपक्षी व शिकायतकर्ता के मध्य pis | दिनांक 49.04.2047 को आवंटन पत्र पर हस्ताक्षर किया गया जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को सितम्बर 2047 तक Sa यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था जो अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि के लिए gfraff (compensation ) दिलाये जाने हेतु याचना की है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 05.04.2043 (शरद त्यागी), आवंटन पत्र दिनांक 49.04. 20i7 (सारिका), शपथ पत्र दिनांक 47.03.2047 लिखित प्रार्थना पत्र, जमा की गयी धनराशि की रसीदें दाखिल की गयी है। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र, आवंटनपत्र, कब्जे का विवरण, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी पत्र दिनांक 02.09.2046, विकास कार्य रोके जाने के सम्बंध में पत्र दिनांक 08.06.2042, संशोधित कब्जा प्रमाण पत्र दिनांक 08.02.203, प्रति प्रस्तुत की गयी। विपक्षी ने अपने प्रतिवादपत्र के प्रस्तर संख्या 3 में यह उल्लेख है कि विपक्षी द्वारा प्रथम फेज का निर्माण कार्य पूर्ण करके टॉवर नम्बर 4, 5, 6, 7, 8, 40 व 74 का ओ.सी प्राप्त कर लिया गया है तथा पजेशन लेटर उक्त टॉवर के आवटियों को भेजे जा चुके है। शिकायतकर्ता का यूनिट ढॉवर न. 44 में स्थित है, जिसके ओससी प्राप्ति हेतु आवेदन दिनांक 02.0:.20I8 को किया जा चुका है। Reply on merit के vex संख्या 6 में परियोजना में विलम्ब होने के कारण स्पष्ट किये गये है जिनमें से किसानों द्वारा अवरोध, माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश दिनांक 48.40.2043, नोट बंदी तथा शिकायतकर्ताओं द्वारा विलम्ब से धनराशि भुगतान किये जाने के कारण बताये गये है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवादपत्र में नीलकमल AA,
रियलटर सब ada प्राएलि0 व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इण्डिय व अन्य, सीमैक्स Gaga प्राणलि0 बनाम स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया व अन्य का विवरण दिया है। प्रतिवादी ने अपने प्रतिवादपत्र के माध्यम से यह भी अवगत कराया है कि वह 4350 offer of possession अन्य केताओं को जारी किया जा चुका है तथा करीब 650 सब लीज-डीड करवाई जा चुकी है। प्रतिवादपत्र & Grounds के प्रस्तर संख्या 7 व 40 में यह अंकित किया गया है कि That the GNIDA after consideration of the conditions ,hurdles created by various modes and situations of the Real estate sector vide its notification dated 02,०9.2०ण6 has itself increased the date of completion of the project from <2ण6 to 2020.Therefore ,the opposite party cannot be held liable for the delay which is cause due the force majeure. Para 8 :It is to submit that the respondent has issued total 350 offer of possession and many of the flats have been delivered to the customers and 650 sub lease deeds have been executed in favour of the customers. Para 70 : it is stated that the respondent company is ready to give the possession of the subject flat however, the possession of the flat is subject to the No Dues Certificates after making the entire payment by the complainant as per the terms and conditions of the
allotment letter dated 79-04-207- शिकायतकरता की ओर से लिखित अभिकथन प्रस्तुत किया गया है जिसमें यह उल्लेख है कि उक्त यूनिट पूर्व में शरद त्यागी को विपक्षी द्वारा दिनांक 05.0:.203 को आवंटित की गयी थी तत्पश्चत् श्री शरद त्यागी द्वारा शपथ पत्र दिनांक 47.03.2047 के माध्यम से उकत यूनिट अपनी बहन के नाम स्थानान्तरित कर दिया गया, जिसके उपरांत विपक्षी ने उक्त यूनिट शिकायतकर्ता सारिका के पक्ष में कर दी गयी | विपक्षी व शिकायतकर्ता के मध्य दिनांक t9. QL 3 04.2047 को आवंटन पत्र पर, हस्ताक्षर किया गया, जिसके possession of unit के clause 7 के अनुसार शिकायतकर्ता को सितम्बर 2047 तक उक्त यूनिट का कब्जा दिया जाना था व उक्त क्लाज में 6 माह की अतिरिक्त अवधि अंकित है। शिकायतकर्ता द्वारा दिसम्बर 20:5 से प्रथम आवंटन के अनुसार विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व प्रतिपूर्ति (Compensation) का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये गये :- ह | बिन्दु संख्या 4: क्या परियोजना विलम्बित है? बिन्दु संख्या 2 : क्या परियोजना विलम्ब होने का कारण force majeure है? बिन्दु संख्या 3: क्या शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज पाने का अधिकारी है? बिन्दु संख्या 4: क्या शिकायतकर्ता विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या 4 विचाराधीन यूनिट के सम्बंध में दिन्तांक 49.0420i7 को आवंटन पत्र निष्पादित किया गया था जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा सितम्बर 20i7 तक प्राप्त ton
होना था, परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा परियोजना विलम्ब के सम्बंध में किसान आंदोलन, नोट बंदी व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का हवाला दिया गया है। विपक्षी द्वारा vat के सम्बंध में अभिलेखीय साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किये गये जिससे परियोजना में विलम्ब का कारण स्पष्ट हो सके। इससे स्पष्ट है कि परियोजना दो साल से अधिक विलम्ब है। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 4 निर्णीत की जाती है। निस्तारण बिन्दु संख्या 2 पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से यह स्पष्ट है कि प्रतिवादी ने अपने प्रतिवाद पत्र में इस विलम्ब के सम्बंध में कोई तर्क अथवा तथ्य प्रस्तुत नहीं किया है बल्कि मात्र grounds के प्रस्तर- | में यह अंकित किया है कि ” In present case, the delay in old projects have caused due to force majeure reasons “ इससे स्पष्ट है कि प्रतिवादी की परियोजना विलम्बित है। इस सम्बंध में रेश अधिनियम की धारा 6 में यह व्याख्या किया गया है कि For the purpose of this section, the expression "force majeure i shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the realestate project इससे स्पष्ट है कि परियोजना force majeure के कारण विलम्ब नहीं हुई है बल्कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा निर्माण विकास कार्य रोके जाने के कारण हुआ, जिसके सम्बंध में पत्र दिनांक 08.06.20i2 जारी की गयी थी तथा ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा निर्माण कार्य पूर्ण करने हेतु समय विस्तरण के सम्बंध में पत्र दिनांक 020920I6 को जारी किया गया, WY —
पत्रावली पर उपलब्ध है। इस प्रकार परियोजना 4 force majeure के कारण विलम्ब नहीं हुआ है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य में विस्तार किन कारणों से किये गये इसका कोई साक्ष्य विपक्षी द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया मात्र ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी पत्र दिनांक 02.09..6 प्रस्तुत किया गया। विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र में परियोजना में हुये विलम्ब के लिए निम्न कारण दशार्य गये है:- 4. Hindrance and Obstacle created by Farmers. 2 The order dated व8न०न5 passed by Hon'ble Supreme court Civil Appeal No 4798 of 203. 3- The central Government Policy decision dated o8th/9th November 206 to withdraw the currency note Rs- 500/- & Rs t000/- from the legal tender had adversely impacted realty sector as a whole. 4- Delay in payments by majority of the buyers of _ the said group housing project. इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील eem—940/20:7 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में अभिनिर्धारित किया गया oH 747, On behalf of Amrapali group, learned senior counsel submitted that there were force majeure conditions in completing the projects. There were acs
legal impediments in the completion of projects within the period given in the _flat-buyers agreement during the period from 2077-75. The submission is baseless. It is apparent that the Full Bench of the High Court though held that the land acquisition was vitiated but still it was upheld. The High Court did not quash it for the reason that development has taken place. Higher compensation was ordered to be paid. That order was affirmed by this Court in 2075 in Savitri Devi v. State of U.P. (2075) 7 SCC 27. There was no interim stay granted by the High Court on construction work, is made clear by the Noida and Greater Noida authorities. There was no room to entertain any doubt as to the fact whether for a particular village the acquisition had been quashed. There was no quashing of land acquisition and moreover, there was no stay. Only higher compensation was ordered to be paid. There was no force majeure condition or any legal impediment as such the period from 2007 to 2075 cannot be treated as a moratorium period vis-a-vis the dues of Noida and Greater Noida authorities. The submission made as to the farmers' agitation etc. is too vague and 30% of the projects have come up; whereas 70% have not yet come up, out of the projects in Noida and Greater Noida alone." Ie
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है. कि वर्ष 200 से वर्ष 20s के मध्य निर्माण कार्य पर कोई स्थगन आदेश नहीं थे, जो कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दर्शित कियां गया और इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 204 से वर्ष ots के बीच कोई फोर्स मैज्योर कारण या विधिक रूप से रोक नहीं था। जहाँ तक किसानों का उग्र प्र्दशन की बात है, वह निराधार है। चूंकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्ष 204 से वर्ष 20:5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर नहीं था। इसके अतिरिक्त इसी आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /207 विंकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 wd wea i0 4 फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की थुद्ध, बाड़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। इस प्रकार परियोजना force majeure के कारण विलम्ब नही हुई है। तदूनुसार वाद बिन्दु संख्या 2 निर्णीत की जाती है 5s निस्तारण बिन्दु संख्या 3 पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से स्पष्ट है
कि शिकायतकर्ता को vat यूनिट का कब्जा सितम्बर 20:7 तक प्राप्त होना था जो शिकायतकर्ता को अभी तक प्राप्त नहीं हुआ जिस कारण शिकायतकर्ता ने जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने हेतु अनुरोध किया है। परन्तु विपक्षी ने अपने प्रतिवाद पत्र में अंकित किया है कि vat टॉवर का ओसी प्राप्त करने हेतु आवेदन कर दिया है और शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराने को तैयार है। रेरा अधिनियम की धारा 44(4) प्राविधानित है किः- (4) The promoter shall— (a) be responsible for all obligations, responsibilties and functions under the provisions of this Act or the rules and regulations made thereunder or to the allottees as per the agreement for sale, or to the association of allottees, as the case may be, till the conveyance of all the apartments, plots or buildings, as the case may be, to the allottees, or the common areas to the association of allottees or the competent authority, as the case may be: इसी प्रकार धारा 32 में Raa gece सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion. of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case ay may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (pany other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.”
उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी स्टेक होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। इस सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिंविल अपील संख्या 744/20:7 चित्रा शर्मा आंदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया आदिं में किया गया आब्जरवेशन महत्वपूर्ण है कि :- "40, As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ....... ०००० Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently WU wv
prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय wae मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य "wa होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पजेशन डेट“ के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। समस्त परिस्थितियों को देखते यदि विपक्षी द्वारा अपनी परियोजना में जिसके टॉवर पूर्ण हैं का प्रस्ताव दिया जा रहा है, तो ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता वैकल्पिक यूनिट का कब्जा प्राप्त करने में विचार करें। उसके बाद फ्लैट के भविष्य में उपयोग के सम्बन्ध में वे निर्णय ले सकते है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ ar विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि यदि शिकायतकर्ता को उसके द्वारा जमा की गयी धनराशि को वापस कर Jr i
दिया जाता है तो उस स्थिति में अन्य केताओं के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा जो यूनिट का कब्जा चाहते है। तद्नुसार वाद बिन्दु संख्या 3 निर्णीत की जाती है। निस्तारण वाद बिन्दु संख्या 4 : पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 05.04.20:3 को आवंटन पत्र हस्ताक्षरित किया गया था जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा सितम्बर 207 तक प्राप्त होना था, परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना विलम्बित है और शिकायतकर्ता विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में सिंविल अपील Ho 6649-50 / 208 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :—"The period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2076 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed "
to reap the benefits of her own delay in taking possession. उपरोक्त विधि व्यवस्था के के अनुसार ओ.सी. मिलने व कब्जा ऑफर करने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में उक्त शिकायतकर्ता मात्र ओ. सी. / सी.सी अथवा कब्जा किये जाने की तिथि तक, जो भी बाद में हो के दिनांक तक ही ब्याज पाने के अधिकारी होगें। 2 जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमनन और विकास) (विकय / पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के we 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा .डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर (iii) में निर्धारित है। var प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+] प्रतिशत की ब्याज दर पर ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि विलंबित है, तो विपक्षी भी MCLR+] प्रतिशत की दर से ही ब्याज पाने का अधिकारी होगा। तदनुसार वाद बिन्दु संख्या 4 निर्णीत की जाती हैं। Qr 3 विश्लेषण :- उपरोक्त विचारण बिन्दुओं के निस्तारण में प्रस्तुत हुये साक्ष्यों एवं dat से स्पष्ट होता है कि शिकायतकर्ता को सितम्बर 2047 तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी ने प्रतिवादपत्र में यह अंकित किया है कि शिकायतकर्ता को var यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 02.0920:6 को विपक्षी की परियोजना का निर्माण कार्य फरवरी 2020 तक पूर्ण करने हेतु समय विस्तार किया गया। विपक्षी ERT Possession Summary as on ॥-०5-2०१ प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह विवरण अंकित है : Possession Summary as On 37.05.2079 I [ Total No of Units in Shri Radha Sky | 2028 Gardens 2 Total No of Units for which Occupancy | 7720 Certificate Received 3 No of Vacant Unit 39 पर | Letter of Offer of Possession issued a0 5 No Dues Certificate Issued 930 |" | 6 Registry/Sub lease Deed Executed 650 | 7 | Handover of Flats/Shops . Taso | Flats/Shops Ready and work in Progress | 225 |? | | Family Shifted 230 L 34
इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना में लोग रह रहें है और विपक्षी शिकायतकर्ता को यूनिट का शीघ्र कब्जा देने के लिए प्रयासरत् है। अतः ऐसी परिस्थति में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज ait (occupancy certificate) Ura होने की तिथि तक दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक शिकायतकर्ता द्वारा लिखित अभिकथन में विलम्बित अवधि का ब्याज दिसम्बर 20i5 से दिलाये जाने का कथन किया गया है उस सम्बंध में यह उल्लेखनीय है कि उक्त यूनिट पूर्व में श्री शरद त्यागी को विपक्षी द्वारा दिनांक 05.04.2043 को आवंटित की गयी थी तत्पश्चात् श्री शरद त्यागी द्वारा शपथ पत्र दिनांक 47.03. 20i7 के माध्यम से vat यूनिट अपनी बहन के नाम स्थानान्तरित कर दिया गया जिस कम में आवंटन पत्र दिनांक 49.04.2047 निष्पादित किया गया जिसके अंनुसार कब्जा सितम्बर 2047 व अतिरिक्त अवधि 6 माह में दिया जाना था। इससे स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता दिनांक 49 मार्च 2048 से विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। जहां तक शिकायतकर्ता द्वारा अपने लिखित अभिकथन दिनांक 44.40.49 में जिन अनुतोषों के संदर्भ में प्रतिपूर्ति चाही गयी है वह रेरा अधिनियम की धारा i2, 74, 78 व 4१9 के अन्तर्गत नहीं आती जिस कारण प्रतिपूर्ति के सम्बंध में प्रस्तुत वाद न्यायनिर्णयक अधिकारी के समक्ष संदर्भित किया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है। हक गज उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट का कब्जा (physical possession) ओ. सी /सी.सी के साथ फरवरी 2020 तक उपलब्ध करायें।
2. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि विलम्बित अवधि का ब्याज दिनांक 90320i8 से sie प्राप्त होने की तिथि या ऑफर ऑफ पजेशन जो बाद में हो, तक MciR+I% की ब्याज दर से भुगतान करेगा। इस धनराशि को कब्जा दिये जाने के समय अंतिम देय धनराशि में समायोजित (adjust) किया जायेगा। 4. शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई धनराशि का भुगतान करना शेष है तो रेरा अधिनियम की धारा 2(Za)(i) के अधीन उस विलम्बित अवधि का ब्याज विपक्षी प्राप्त करने का अधिकारी है परन्तु ब्याज ॥०३+१% की दर से अधिक देय नहीं होगा। इस आदेश का उल्लघंन उ0प्र0भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक 267! /20:9 (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) somo भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण १6