Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mrs. Kumari Archana v. APV Realty Limited
Complaint No. NCR144/04/93049/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Order under Section 34 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | Serial No. | Complaint No. | Complainant | Unit No. | Amount deposited as per receipts | Date of allotment | Possession date (with 6-month grace period) | |---|---|---|---|---|---|---| | [?] | NCRI44/04/93049/2022[?] | Kumari Archana | N-205 | Rs. 54,24,287/ | 09.42.2045 | 3.(2.208 + 6 months grace period, i.e., June 2079 | | 2 | NCRI44/04/93072/2022 | Vishal Mahajan | N-908 | Rs. 57,22,44/7 | 30.08,206 | 37.08.20I9 + 6 months grace period, i.e., February 2020 | | 3 | NCRI44/04/93073/2022 | Satish Ku[?] | [?]-4707 | Rs. 3,96,2i0/ | 06.08.205 | 34.08.208 + 6 months grace period, i.e., February 2049 | | 4 | NCRI44/04/9322/2022 | Vikas Sindhwani | HMONOO | Rs. 25,26,484/ | 74.05.20i6 | 34.05.20i9 + 6 months grace period, i.e., November 2049 [8002] | | 5 | [?]44/04/93299/2022 | Satish Chandra | HMONO08 | Rs. 32,66,758 / | 23.08.206 | 34.08.20i9 + 6 months grace period, i.e., [?] 005 February 2020 | | [?] | [?]44/04/93497/2022 | Gaurav [?] | HMONOI7 | Rs. 48,76,282 / | 03.40.205 | 37.0.20I8 + 6 months grace period, i.e., 002 April 209 | | [?] | NCRI44/07/97435/2022 | Sunita Suman | N-2207 | Rs. §7,2,04/ | 25.02.205 | 28.02.208 + 6 months grace period, i.e., August 2048 | vs. APV Realty Ltd.
Along with complainant Kumari Archana, six other complainants have filed a case against the respondent. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to one project, AJNARA HOMES (PHASE-2 TOWER N & 0). They are therefore being disposed of by a single order. The file of complaint no. NCRI44/04/93049/2022, Kumari Archana, shall be the lead case. In brief, the lead complainant's case is that unit no. N-205 was booked in the project Ajnara Homes (Phase-2 Tower N & 0) run by the respondent, against which the complainant has paid Rs. 54,24,287/- to the respondent. In support of their statement, the complainants have filed photocopies of their written arguments, the allotment letter, the [?] account statement, and receipts for the amounts deposited. In the written reply filed by the respondent, it was stated that the complainant had been allotted unit no. N-205, against which an allotment letter was executed on 09.42.205. The complainant has paid Rs. 54,24,87 /- against the unit. As per the allotment, possession of the unit was to be given in June 2049, with 36 months plus a 6-month grace period. Due to the COVID-49 pandemic, the RERA Authority extended the time for completion of the project by 6 months. The project was delayed under force majeure, as the construction work in the project was affected by the COVID-49 pandemic and an order of the NGT.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 आदेश अन्तर्गत धारा-34 उपस्थितिः- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | यूनिट न० | पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | कब्जा दिये जाने की io रसीद के अनुसार तिथि तिथि जमा धनराशि रु0 T. | एटरा44/04/93049/2022 कुमारी अर्चना | —205 | रु0 54,24,287/ 09.42.2045 | 3.(2.208+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात _| जून 2079 2. | NCRI44/04/93072/2022 विशाल महाजन | N-908 | रु० 57,22,44/7 30.08,206 | 37.08.20I9+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात _॥| 'फरवरी 2020 C DAR ——T | 3. | NCRI44/04/93073/2022 पतीश कु ॥-4707.._ [| रु० 3,96,2i0/ 06.08.205 | 34.08.208+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात mace 'फरवरी 2049 4- | NCRI44/04/9322/2022 | विकास सिंधवानी | HMONOO | रु0 25,26,484/ 74.05.20i6 | 34.05.20i9+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात 8002 नवम्बर 2049 5 | शटर44/04/93299/2022 सतीश चन्द्र HMONO08 | रु0 32,66,758 / 23.08.206 | 34.08.20i9+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात अध्रवाज। 005 फरवरी 2020 | | पटर[44/04/93497/2022 गौरव aferat | HMONOI7 | ¥0 48,76,282 / 03.40.205 | 37.0.20I8+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात 002 अप्रैल 209 i | pale व. NCRI44/07/97435/2022 सुनीता सुमन | N-2207 | रु० §7,2,04/ 25.02.205 | 28.02.208+6 माह अनुग्रह अवधि अर्थात अगस्त 2048 बनाम एपीवी रिएलटी लिमिटेड शिकायतकर्ता कुमारी अर्चना के साथ 06 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना AJNARA HOMES (PHASE-2 TOWER N & 0) से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका aT 4
निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/04/93049/2022 कुमारी अर्चना की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना Ajnara Homes (Phase-2 Tower N & 0) में यूनिट संख्या N-205 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता ERI wo 54,24,287 /- विपक्षी को भुगतान किया गया है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस, आवंटन पत्र, Rede aie एकाउंट व जमा धनराशि रसीदें की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से प्रतिवाद पत्र में यह उल्लिखित किया गया कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या एन-205 आवंटित की गई थी जिसके सापेक्ष दिनांक 09.42.205 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ है। शिकायतकर्ता ने यूनिट के सापेक्ष रु० 54,24,87 /-भुगतान किया है। आवंटन के अनुसार यूनिट का कब्जा 36 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ जून 2049 में दिया जाना था। कोविड-49 महामारी के कारण रेरा प्राधिकरण द्वारा परियोजना को पूर्ण किये जाने के लिए 6 माह का समय अवधि विस्तार किया गया है। परियोजना फोर्स मैज्योर के अधीन विलम्ब हुआ है जिसमें कोविड-49 महामारी व एन.जी.टी के आदेश के कारण परियोजना में निर्माण कार्य प्रभावित हुआ। विपक्षी ने फोर्स मैज्योर के सम्बंध में निखिल सिंघल बनाम Fo गौर wa हाई टेक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रालि. शिकायत संख्या एनसीआर(44 /09 / 64244 / 2020 आदेश दिनांक t6.:2.2020 का संदर्भ अंकित किया है। शिकायतकर्ता अवशेष धनराशि भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकता है। सम्बन्धित टावर में 50 परिवार निवास कर रहे हैं। अतः विपक्षी ने शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त करने के लिए निर्देश दिये जाने का अनुरोध किया है।
विपक्षी द्वारा प्रतिवादपत्र के समर्थन में पेमेंट विवरण की प्रति उपलब्ध कराई गई है। अग्रणी शिकायतकर्ता की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत किया गया जिसमें प्रतिवादपत्र का प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुऐ यूनिट का कब्जा विलम्बित अवधि का ब्याज व प्री.ईएमआई दिलाये जाने का अनुरोध किया है। उभयपक्ष के cat को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विचरित किये जाते हैं :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न We प्रश्न संख्या-। इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर seca होने कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. टी व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में gate पीठ के द्वारा पारित आदेशों का संदर्भ अंकित किया गया है परन्तु विपक्षी की ओर से पीठ द्वारा पारित आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई है। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20:7 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं WER 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." 3 जा ७3.
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिस कारण विपक्षी इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। कोविड--49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25092020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार प्रश्न Wer निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गई तालिका में अंकित धनराशि पर विपक्षी की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई है।
उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 09.2.205 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा दिनांक 34.42.2078 तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 20॥9 में प्राप्त होना था। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। a विपक्षी ने यह भी तर्क प्रस्तुत किया है कि शिकायतकर्तागण अवशेष धनराशि भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते है परन्तु विपक्षी ने परियोजना पूर्ण हो जाने या अधिभोग प्रमाण पत्र /एन.ओ.सी के सम्बंध में कोई तर्क प्रस्तुत नहीं किया है और न ही परियोजना पूर्ण होने के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत किया है कि परियोजना कब तक पूर्ण कर लिया जाएगा। जबकि वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा अनुबंधानुसार वर्ष 2048-20 में प्राप्त होना था। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि परियोजना करीब 5 वर्ष विलम्बित है। चूंकि शिकायतकर्तागण ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है, जिस कारण शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील wo 6649-50 ,/2048 "queen लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स wards प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ gears वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vow रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब =e 6 तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-्सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2076 के अधीन दिनांक 7.0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा aca के प्रारूप के wer 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- ‘The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +/% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: " यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ISREd की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(29)09में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अत: शिकायतकर्तागण कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने के अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 Peake किया जाता है। En 7 उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है।
आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि शिकायतकर्तागण को आवंटन के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 30 नवम्बर 2023 तक si. सी/सी.सी सहित आवंटित यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री Here | विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि WO 54,24,287 //-.पर ]४८४॥२+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र,/अनुबन्ध के अनुरूप vad तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर ब्याज की गणना की जायेगी। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Azali) के अनुसार Ue Wi लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को fear जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McLR+H प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के 8 TT
बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये। इस आदेश का werd भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा wet | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ~~ \n-= SN est 35५०५ ef. २-७ 23 (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ0प्र0 भू--सम्पदा विनियामक प्राधिकरण