Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Dr Mohammad Shakir v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/04/92473/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-01-20
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 (पूर्व पीठ-2) भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की eeI—-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित :-- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | यूनिट न0. | पत्रावली पर उपलब्ध | आवंटन की | अनुबंधानुसार वांछि दे रसीद /साक्ष्य के तिथि कब्जा दिये अनुतोष स0 अनुसार जमा धनराशि जाने की रु0 तिथि T. एकाग्ातबागकाहछ2 | Sf मोहम्मद | TowerNo8, | Go ,0,89,354/ | 254.2005 | 42 माह + 3 | जमा धनराशि शाकिर Unit No- माह अर्थात | वापस दिलाये ores अगस्त 20i9 | जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु परिवाद संस्थित की गयी है। बनाम ए.टी.एस. रियल्टी प्रा.लि. यह संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना ATS ALLURE में यूनिट संख्या 08006 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा GO ,0,89,354 //- विपक्षी को भुगतान की गई | संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में उक्त तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि का विपक्षी को भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। CSS
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, ऋण खाता विवरण, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु) 4 ie से भुगतान की गई ऋण धनराशि 27.4.205 रु0 60,7,556 / रसीद संख्या 004943 25.09.2045 रु0 2,00,000/ रसीद संख्या 06034 26.09.2045 BO 9,22,545/ रसीद संख्या06509 44.42.2045 रु0 36,,549 / रु0 4,07,5,650 —Fjaay को ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्रिधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या 6 / 208 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग gro लि0 में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि का भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जां दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है।
यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। यह भी 2 उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता के न आने पर कई अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकातकर्ता कब्जा लेने नहीं आया। विपक्षी द्वार अपने कथन के समर्थन में ऑफर ऑफ पजेशन, अनुस्मारक पत्र, Rote ate एकाउंट एवं अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 की छायाप्रति दाखिल की गयी है। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न विरचित किये गये हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? निस्तारण प्रश्न eA शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा हस्ताक्षारित आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है जिस कारण वह परियोजना में बने रहना नहीं चाहते हैं जिस कारण उनके द्वारा समस्त जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त होने के उपरांत शिकायतकर्ता को दिनांक 44.04.2022 व 26.05.2022 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया जा चुका है। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी एवं शिकायतकर्ता के मध्य दिनांक 25.44.205 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार 45 माह में अर्थात अगस्त 209 तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था जो अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अनुसार यह भी स्पष्ट है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो चुका है तथा शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 44.04.2022 व 26.05.2022 को ऑफर ऑफ पजेशन( जिसमें दिनांक 30.03.2022 को ओसी प्राप्त होना अंकित है) जारी किया जो पत्रावली पर उपलब्ध है। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि विपक्षी द्वारा जुलाई 2022 में प्रस्तुत लिखित आपत्ति के प्रस्तर संख्या 45 में यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को att mat है तथा परियोजना कब्जा के लिए तैयार है। शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन दिनांक 44.04.2022 व 26.05.2022 जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता न तो अवशेष धनराशि भुगतान किया और न ही कब्जा लेने आया। जहाँ तक क्रेता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है तो इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। रेरा एक्ट की धारा 48 ()) में प्राविधान है कि :- Section 8. Return of Amount and Compensation- (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building.- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason,
he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग संकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें | Ser अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ सब-क्लॉज (63) में "to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल gee सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,—
(a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (any other issue that the A uthority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह wre है कि “रियल wee सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी wa होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। | इस कम में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका संख्या- 2737 /20:7 “नीलकमल Raced सबअरबन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया”, जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर 424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया गया :-
“The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 77 refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 72, 74, 78 and 79. A promoter could very well put up his case before the adjudicator who 5 —— SS deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on failure to complete the development work.”
उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी को अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर % moulding reliefs by granting interest, compensation {0 tle ० ranting interest, compensation to the allottees and_issuing directions for timely completion of project, transit" ‘or timely completion of project, transit accommodation during completion of during completion o, project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त रेरा के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,// 2047 “बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 23.07.209 को परित आदेश के पृष्ठ संख्या-244 के प्रस्तर-420 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "Tt is apparent that RERA intends protection of home-buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have to be completed, for that, we are required to pass orders. We have already assigned the task to NBCC for completion of buildings as the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixed and the time which could have been extended. Now, more than l0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years period by the promoter/builder. The maximum time fixed in RERA has also expired and extension could not have been beyond | year."
उक्तानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि प्रोमोटर्स द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यों को पूर्ण कराते हुए Jesus को उनका आवास / फ्लैट मिल सके | तत्कमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के प्रस्तर-43 में निम्नवत् उल्लेख किया हैः- "The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, 6 SSS ae ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’interest and at the same time to hold them responsible for the duties enjoined upon them under the said statute. We are not absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project." उक्त आब्जर्वेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहकेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य रेरा का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्बित होने पर गृहकेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना पूर्ण होने तक नियमानुसार ब्याज पा सके |
इसी के पश्चात् पुनः रेरा के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43 / 2049 “पायनियर अर्बन ces एंड इन्फास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 09.08.2079 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream is shattered, or at least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable." उक्त आदेश में महत्वपूर्ण आब्जर्वेशन यह दिया गया है कि रेरा का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर्स द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में फलस्वरूप पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य 7 => (Recalcitrant) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि किश्तों का समय से भुगतान करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके।
ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य है, परियोजना को फलस्वरूप प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा सम्यक रूप से अपनी किश्तों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्बित होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान करें| मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त pert में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन", प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “स्टेक होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “ सिविल अपील नम्बर 5785 /20'9 ईरियो ग्रेस रियलटेक wo fio बनाम अभिषेक Ger एवं आदि” में दिनांक 47.0.202 को पारित आदेश में जहाँ परियोजना का ओ.सी. /सी.सी प्राप्त किया जा चुका है, उसके सम्बन्ध में निम्न आर्ब्जेवेशन दिया है कि :- SS 8
2I.. The issue which now arises is whether the apartment buyers are bound to accept the offer of possession made by the Developer where the Occupation Certificate has been issued, along with the payment of Delay Compensation, or are entitled to terminate the Agreement. (9 We are of the view that allottees at Serial Nos. उ and 2 in Chart A are obligated to take possession of the apartments, since the construction was completed, and possession offered on 28.06.2079, after the issuance of Occupation Certificate on ३7.05.2079, The Developer is however obligated to pay Delay Compensation for the period of delay which has occurred from 27.77.2078 till the date of offer of possession was made to the allottees. माननीय उच्चतम IRIE की vat नजीर के अनुसार परिवादी विपक्षी की परियोजना में अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate) HTT BT जाने के आधार पर कब्जा लेने के लिए Obligated है | प्रश्नगत प्रकरण में विपक्षी को परियोजना के सन्दर्भ में दिनांक 30.03.2022 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया और उसके उपरांत शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 26.05.2022 को ऑफर ऑफ पजेशन भी जारी कर दिया गया है। उक्त वर्णित तथ्यों एवं =a नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलाया जाना न्यायोचित नहीं होगा। अतः प्रस्तुत परिवाद निरस्त किये जाने योग्य है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 frente किया जाता है। आदेश प्रस्तुत परिवाद निरस्त की जाती है। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। ae एनडलसमथमों
TS. ol. 202 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 9