Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
chetna bisht v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/04/88227/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-05-27
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2076 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना,सदस्य क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | यूनिट qo | जमा धनराशि wo | एग्रीमेंट फॉर | अनुबंधानुसार वांछित सेल की कब्जा दिये अनुतोष तिथि जाने की तिथि T. फ्टरा44/04882272022 | चेतना बिष्ट | 3202 रु0 9,83,000/ | 27.0.2074 | 42 माह तथा | जमा धनराशि do व आनंदी 03 माह वापस दिलाये देवी अनुग्रह अवधि जाने का ह के साथ अर्थात | अनुरोध किया _ अक्टूबर 2077 | है। बनाम एटीएस रियलटी प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है. कि. विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट सँख्या 3302 बुक कराई गई, आवंटित यूनिट की कुल कीमत wo Bo 34,75000/e जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि रु0 9,83,000/ का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया हैं कि विपक्षी Ener आवंटित यूनिट का कब्जा जनवरी 20:7 में दिया जाना था परन्तु अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में आवंटन पत्र व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई घनराशि (रु0) संख्या | 4 पीएनबी बैंक द्वारा जारी एकाउंट स्टेटमेंट 29.05.205._[रु0 9,83,000 /
विपक्षी के अधिवक्ता दिनांक 20.07.2022 को उपस्थित हुए। विपक्षी को लिखित जवाब दाखिल किये जाने हेतु पर्याप्त अवसर दिये गये परन्तु विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक ४] SS ia 03.04.2024 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल किये जाने का अवसर समाप्त कर दिया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित बहस दाखिल की गयी।
विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित बहस में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना एटीएस ver में कामर्शियल यूनिट dear 3i02 बुक करायी गयी थी। शिकायततकर्ता द्वारा यूनिट की कुल कीमत wo 33,25,000 के सापेक्ष Go 9,83,000 // का भुगतान किया गया। विपक्षी को दिनांक 30.03.2022 को ओससी प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा क्रमशः दिनांक 29.07.2045, 07.09.2045, 03.0.2045, 0.05.206 व 09.06.20I6 को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये गये। शिकायतकर्ता डिफाल्टर है क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है जिस कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 25.8.20:7 को शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्त किये जाने हेतु अंतिम नोटिस भेजा गया। इसके उपरांत विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त weed गयी। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को धनराशि वापस की जा चुकी है जिंस कारण! शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम की धारा 2डी के अनुसार आवंटी की श्रेणी में नहीं है और वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत दिनांक 48.04.2022 को संस्थित की गयी जबकि विपक्षी द्वारा दिनांक 25.08.20i7 को शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर यूनिट निरस्त कर दी गयी और यूनिट अन्य आवंटी श्री राजेश बुदाकोटि को विक्रय कर दी गयी। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि अनुबंध के क्लाज i44 क अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर विपक्षी 20 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी जब्त करने का अधिकारी el इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा यूपी रेरा रुल्स 20:8 का 9.3 का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा अर्नेस्ट मनी के सम्बन्ध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल सिविल अपील संख्या 7588,/2042 व हनुमान कॉटन fied व अन्य बनाम टाटा एयरक्राफ्ट में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
—_ SS विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति के समर्थन में ओ.सी दिनांक 30.03.2022, अनुस्मरण पत्रों व फाइनल नोटिस फॉर टर्मिनेशन पत्र की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये हैं :- . क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? व क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? 3. क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? निस्तारण प्रश्न eT प्रश्न eT इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं”आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध॑निष्पादित किये जाने wR के प्राविधान लागू नहीं होगें ? : इस सम्बन्ध में ame सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 /202 “मैसर्स न्यूटेक Aled एंड डेवलपर्स wo feo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"54, From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जप ह अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, 2 ey) | जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि 3 ——— = “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRIOI8 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तदनुसार प्रश्न ee निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या 2 इस आशय का विरचित किया गया है
कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा लिखित बहस में उल्लिखित*किया गया है कि शिकायतकर्ता को विपक्षी द्वारा अवशेष देय emir का.भुगतान किये जाने, हेतु अनेकों अनुस्मरण पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया जिस कारण विपक्षी द्वारा:दिनांक 25.08.2047 को शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त करते हुए तथा अनुबंध के अनुसार अर्नेस्ट मनी की कटौती करते हुए अवशेय बची देय धनराशि wo 4,00,000,/ शिकायतकर्ता को वापस भुगतान किया जा चुका है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह विदित है कि प्रश्नगत यूनिट के लिए उभयपक्षों के मध्य दिनांक 27.0:.204 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 03 माह अनुग्रह अवधि के साथ अक्टूबर 2047 में दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंध पत्र के साथ संलग्न शैड्यूल- के अनुसार कन्सट्रक्शन लिंक प्लान का विकल्प चुना गया था जिसमें चरण gE रूप से यूनिट के सापेक्ष देय का भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु क्रमशः दिनांक 29.07.2075, 07.09.205 व 03.0.2045 को मांग पत्र प्रेषित किये गये उसके उपरांत दिनांक to. 4 —— 05.206 व 09.06.206 को अनुस्मरण पत्र तथा दिनांक 29.06.2047 को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अंतिम नोटिस प्रेषित किये गये। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा 25.08.2047 को शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर यूनिट निरस्त कर दी गयी।
यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 208 की धारा 9.3 में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.3 The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +4% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default'to take this benefit; ii. In case of Default ‘by: Allottee under. the..condition listed above continues for a period beyond 3 (three)-consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to. him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination.
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 33,25,000/ है, जिसके एवज में शिकायतकर्ता द्वारा रु० 9,83,000 / का भुगतान किया गया है जो कि यूनिट की कुल कीमत का लगभग 28 प्रतिशत है। विपक्षी द्वारा क्रमशः दिनांक 29.07.2045, 07.09.2045 व 03. 40.20i5 को मांग पत्र प्रेषित किये गये उसके उपरांत दिनांक 40.05.2046 व 09.06. 20i6 को अनुस्मरण पत्र तथा दिनांक 29.06.207 को अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु अंतिम नोटिस प्रेषित किये गये। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 25.08.2047 को शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट अंतिम रूप से निरस्त कर दी गयी। इसके अतिरिक्त विपक्षी अपने लिखित बहस में यह भी तथ्य अंकित किया गया है कि उनके द्वारा ved यूनिट पर तृतीय पक्ष (राजेश बुदाकोटि) के अधिकार सृजित किये जा ० —_ SS चुके। विपक्षी को प्रश्नगत परियोजना के सापेक्ष सक्षम प्राधिकरण ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण से दिनांक 30.03.2022 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है जिसकी प्रति पत्रावली पर उपलब्ध है। उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता के द्वारा निरंतर मांग पत्र के अनुसार धनराशि अदा न करने पर विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किया जाना वैधानिक है। तदनुसार प्रश्न संख्या 2 faa किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या 3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा लिखित बहस में तर्क प्रस्तुत किया गया कि शिकायतकर्ता की
आवंटित यूनिट निरस्त करके तथा अर्नेस्ट मनी जब्त करके अवशेष देय धनराशि रु0 4,00,000 / शिकायतकर्ता को वापस भुगतान*कर दी गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध 'प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी है और धनराशि रु0 4,00,000 / शिकायतकर्ता को वापस भुगतान कर दी गयी है। शिकायतकर्ता दिनांक 70.04.2026 को सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर सहमति दी गयी है कि उसे विपक्षी से रु० 4,00,000 / प्राप्त हो चुका है। यहां यह भी स्पष्ट जाना किया जाना महत्वूपर्ण प्रतीत होता है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण करते हुए परियोजना के सापेक्ष अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त किया जा चुका है। उक्त के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ” सिविल अपील नम्बर 5785,/ 2049 ईरियो ग्रेस रियलटेक wo लि0 बनाम अभिषेक wen एवं आदि” में दिनांक 44.04.2024 को पारित आदेश में जहाँ परियोजना का ओ.सी. »सी.सी प्राप्त किया जा चुका है, उसके सम्बन्ध में निम्न आर्ब्जेवेशन दिया है कि — 2I.I. The issue which now arises is whether the apartment buyers are bound to accept the offer of possession made by the Developer where the Occupation Certificate has been issued, along with the payment of Delay Compensation, or are entitled to terminate the Agreement.
(i) We are of the view that allottees at Serial Nos. I and 2 in Chart A are obligated to take possession of the apartments, since the construction was completed, and possession offered on 26.06. 2049, after the issuance of Occupation Certificate on उ7.05.2079. The Developer is however obligated to pay Delay Compensation for the period of delay which has occurred from 27.77.2076 till the date of offer of possession was made to the allottees. माननीय उच्चतम PUA की Gat नजीर के अनुसार परिवादी विपक्षी की परियोजना में अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate) HTT हो जाने के आधार पर कब्जा लेने के लिए Obligated है परन्तु वर्तमान प्रकरण में विपक्षी द्वारा पूर्व में ही शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष जमा की गयी धनराशि में से अर्नेस्ट कटौती करते हुए शेष धनराशि vo 4 लाख शिकायतकर्ता को वापस की जा चुकी है जिसे शिकायतकर्ता द्वारा प्राप्त होना स्वीकार किया गया है। यहां यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि विपक्षी द्वारा सम्पूर्ण धनराशि को जब्त नहीं किया जा सकता है। मात्र«बुंकिंग धनराशि जो कि यूनिट की बेसिक कीमत का ॥0 प्रतिशत Asis. Set धनराशि को जब्त किया जा सकता है। उक्त प्रकरण में आवंटन पत्र दिनांक 27.0:.2074 के अनुसार यूनिट का कुल बेसिक मूल्य WO 33,25,000 / ...है... जिसके... सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि रु0 9,83,000/ का भुगतान किया गया है। ऐसी स्थिति में विपक्षी द्वारा सम्पूर्ण धनराशि को जब्त नहीं किया जा सकता है।
उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए यूनिट की बेसिक कीमत BO 33,25,000,/ का १0 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी की कटौती करते हुए शिकायतकर्ता को अवशेष धनराशि मय ब्याज विपक्षी से वापस दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक शिकायकतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to 7 —_—=— discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable."
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स ent vat धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न. है; WA सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम ..2046 के अधीन दिनांक 7.:0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पदट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें दिये गये विक्रय “पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें WR 9.2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। —_—_s. 8 अतः उक्त प्राविधानों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि का 40 प्रतिशत कटौती उपरांत अवशेष धनराशि में से मय ब्याज MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से धनराशि प्राप्त करने का अधिकारी है। प्रश्न संख्या-4 Peake किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता हैं :- आदेश
4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर यूनिट की बेसिक मूल्य Go 33,25,000 / पर 40 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गयी धनराशि रु0 9,83,000,/में से कटौती करते gt अवशेष बची धनराशि में से रु0 4,00,000 / (जो विपक्षी द्वारा भुगतान किया जा चुका है।) घटाते हुए अवशेष बची धनराशि पर Bo 04 लाख भुगतान किये जाने की तिथि के उपरांत से भुगतान किये जाने की तिथि तक मय MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वापस भुगतान करना*सुनिश्चित- Hy | 2. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की IN-STAT SP MATS Mars अन्तर्गत दंडनीय होगा। 3. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सकेंगे। 4. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। A i, Talay (2 su a, पे \ FGw SS. DRS \8 J सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर