Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajendra Kumar Gupta and Shashi Gupta v. Aims Golf Town Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/04/74274/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-II Present: Smt. Kalpana Mishra, Member Complaint No. — NCR44/04/74274/202 Rajendra Kumar Gupta and Shashi Gupta vs. Ems Golf Town Developers Pvt. Ltd. The present complaint application has been filed by the complainant against the respondent for possession and interest on the delayed period. In brief, the lead complainant's case is that the complainant booked unit no. G-204 in the respondent's project "Aims Green Avenue (Phase-l)", the total price of which was Rs. 36,80,000/—, against which the complainant has paid Rs. 3445,744/-. The complainant says that the respondent's project is 52 months delayed and that the respondent has still not completed the construction work. The respondent has not obtained the required completion certificates or the O.C./C.C. from the competent authority. The complainant also says that the respondent is demanding additional amounts under various heads, such as [?], labour cess and Arche. The complainant has therefore requested possession and interest on the delayed period. In support of the statement, the complainant has filed photocopies of the flat allottee agreement dated 3.04.2043 and the account statement [?] of the amount deposited.
In its written reply, the respondent stated that the project in question is registered with RERA, under registration certificate number UPRERAPRI7262. The complainant had booked unit WeM-204 in tower 6 of the respondent's project "Aims Green Avenue (Phase-2)". The respondent says that construction of the project has been completed, finishing work is going on at a rapid pace, and possession of the unit will be given to the complainant shortly. The project was delayed by force majeure events, such as dharna and protests by farmers, land disputes, restrictions imposed by the Hon'ble NGT, and the spread of COVID-49 pandemic, which were beyond its control. The respondent has also stated that the agreement between the parties was executed before the RERA provisions came into force, and therefore the RERA provisions do not apply in the present case. The respondent has further stated that construction of the project has been completed; that in respect of phase-4 (towers &, B, C, 0) O.C./C.C. was received from the competent authority on 07.0.202; that an application for phase-2 was made before the competent authority on 48.42.2024; and that possession of the unit will be given to the complainant by June 2022. On the basis of these facts, the respondent has requested that the complainant's complaint be dismissed and that the complainant be directed to take possession of the unit after receipt of O.C./C.C.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-॥ जपस्थिति:- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य शिकायत सं0 — NCR44/04/74274/202 राजेन्द्र कुमार गुप्ता एवं शशि गुप्ता बनाम एम्स गोल्फ टाउन डेवलपर्स प्रा० लि० प्रस्तुत शिकायत प्रार्थनापत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "Aims Green Avenue (Phase-l)" में यूनिट संख्या- G-204 बुक करायी गयी, जिसकी कुल कीमत 36,80,000/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 3445,744/- रूपये की धनराशि का भुगतान किया किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की परियोजना 52 माह विलम्बित है और विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना की पूर्णता से सम्बन्धित वांछित प्रमाण-पत्र और ओ.सी./सी.सी. सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा विभिन्न मदों, जैसे कि de, लेबर सेस, Arche हेतु अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में फ्लैट एलॉटी अनुबन्ध पत्र दिनांकित 3.04.2043, जमा धनराशि की wie खाता विवरण की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी। पिपक्षी की ओर से विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए कथन किया
गया है कि प्रशनगत परियोजना रेरा में पंजीकृत है, जिसका पंजीकरण प्रमाण संख्या UPRERAPRI7262 है। शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "Aims Green Avenue (Phase- 2)" के टॉवर-6 में यूनिट WeM-204 बुक की गयी थी। विपक्षी का कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और फिनिशिंग कार्य तीव्र 4 ol गति से किया जा रहा है तथा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा शीघ्र ही उपलब्ध करा दिया जायेगा। प्रश्नगत परियोजना फोर्स मैच्योर ईवेन्स्ट्स जैसे कि :- किसानों द्वारा धरना प्रदर्शन, भूमि के वाद, माननीय एन.जी.टी. द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध, कोविड-49 महामारी फैलने के कारण विलम्बित हुई, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं थी। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि उभयपक्षों के मध्य अनुबन्ध रेरा के प्राविधान लागू होने से पूर्व निष्पादित कराया गया है। ऐसे में रेरा के प्राविधान प्रश्नगत प्रकरण में पर लागू नहीं होते। विपक्षी द्वारा wera परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और परियोजना के फेज-4 (टावर-&, B,C, 0) के सम्बन्ध में ओ.सी /सी.सी. सक्षम प्राधिकरण से दिनांक 07.0.202 को प्राप्त किया जा चुका है और परियोजना के फेज-2 हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 48.42.2024 को आवेदन किया जा चुका है और शिकायतकर्ता को जून 2022 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता की शिकायत खारिज किये जाने और ओ.सी/सी.सी प्राप्त होने के उपरान्त यूनिट का कब्जा प्राप्त किये जाने हेतु शिकायतकर्ता को निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौतमबुद्धनगर के समक्ष प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांकित 44.0.208 की छायाप्रति, एफ.आई.आर की छायाप्रति, सेलडीड दिनांकित 45.04.2043 की छायाप्रति, पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण का पत्र दिनांक 78.47.2079, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष परियोजना के पूर्णता प्रमाण पत्र हेतु किये गये भुगतान की गयी धनराशि की रसीद दिनांक 48.42.2024, परियोजना से सम्बंधित वांछित प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियां, परियोजना से सम्बंधित फोटोग्राफ्स की छायाप्रति दाखिल की गयी। उभयपक्ष के det को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- . क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? व क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? 3. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु der इस तथ्य पर विचरित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ?
इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 /202 “मैसर्स =a प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा० लि0 बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें we रूप से उल्लिखित किया गया है कि — "54. From the scheme of the Act 20l6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार बिन्दु संख्या- Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। wr \ “7 विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण विलम्बित हुई, जो कि उनके नियंत्रण में नहीं था। किसानों द्वारा धरना प्रदर्शन, भूमि के वाद, माननीय एन.जी.टी. द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध oifas—t9 महामारी फैलने के कारण परियोजना के निर्माण कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
उपरोक्त के सम्बन्ध में रेश अधिनियम की धारा-6 में उल्लेखित फोर्स मैज्योर की परिभाषा को उद्धरत करना आवश्यक होगाः- "force majeure" shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project. मा0 माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 / 2047 “oq चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” का उल्लेख करना महत्वपूर्ण होगा उक्त निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं WER 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- "Force majeures hall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तद्नुसार बिन्दु to 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की परियोजना 52 माह विलम्बित है और विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना की wi से सम्बन्धित वांछित प्रमाण-पत्र और ओ.सी. / सी.सी. सक्षम प्राधिकरण से प्राप्त नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा विभिन्न मदों, जैसे कि de, लेबर Ga, Ae हेतु अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
जिस पर विपक्षी द्वारा कहा गया है कि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और परियोजना के फेज-4 (टावर-», 8, ८, 0) के सम्बन्ध में ओ. | id सी / सी.सी. सक्षम प्राधिकरण से दिनांक 07.40.2024 को प्राप्त किया जा चुका है और परियोजना के फेज-2 हेतु सक्षम प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 48.42.2024 को आवेदन किया जा चुका है और शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल अनुबन्ध पत्र दिनांक 43.04.2043 के प्रस्तर-32 में प्राविधान दिये गये है, जिसके अनुसार परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 30.06.20I6 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि अर्थात् दिनांक 34.42.206 तक पूर्ण किया जाना था और यदि कब्जा दिनांक 34.42.2046 तक नहीं दिया जाता है, तो ऐसी स्थिति में विपक्षी, शिकायतकर्ता को 5,//- रूपये प्रतिवर्ग फुट प्रतिमाह की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज का भुगतान करेगा। अनुबन्ध पत्र के अनुसार कब्जा दिनांक 34.42.2046 तक दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 04.04.2047 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा sad धनराशि का उपभोग किया गया है। शा a 5 —~
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 7.020i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पदट्टा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय //पद्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(0) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- “The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:“ यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 934) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील wo 6649-50 ,/2048 सुपरटेक लिमिंटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"The period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20i6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी.,/सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने है कि के अधिकारी होंगे। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.208 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3-48-65 विविध / 6 के द्वारा मॉडल Wire के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- "7, POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
7.l Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:"
इसी कम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 20.05.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब का आंकलन नहीं किया जाएगा तथा इस हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट के समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.06.2022 तक ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 7 oat
विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2047 से दिनांक 04.05.2047 तक अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-32 के अनुसार 5 रूपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से एवं दिनांक 04.05.2047 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर ॥४०,₹+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 - तक, परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (ai) के अन्तर्गत रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ४८,२+ प्रतिशत है। विपक्षी शिकायतकर्ता से अनुबंध पत्र में उल्लेखित प्राविधान के अनुसार ही विभिन्न मदों में धनराशि की मांग करने का अधिकारी है। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक :-/0 /०६/2022 wer aA हक. (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण