Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepak Goyal and SatyaPal Goyal v. Oasis Realtech Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/04/119314/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-11-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-3 Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 20:6 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | Serial No. | Complaint No. | Complainant(s) | Unit No. | Date | Amount paid as per receipts/evidence | Construction start and possession due as per builder-buyer agreement | Relief sought | |---|---|---|---|---|---|---|---| | [?] | [?]952024 | Jogindar Kumar Sharma | Sepang-82 | 7.03.2045 | Rs. 49,44,774,/ | Construction start December 2044; 36 months plus 6 months grace period, i.e., June 2048 | Possession of the unit and interest on the delayed period | | 3 | [?]2024 | Deepak Goyal | Caesars-4502 | 03.06.205 | Rs. 25,86,239/ | Construction start December 204; 36 months plus 6 months grace period, i.e., June 208 | Possession of the unit and interest on the delayed period | vs. Oasis Realtech Pvt. Ltd. Complainant Jogindar Kumar Sharma and other complainants have filed complaints against the respondent. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to one project, OASIS GRANDSTAND (PHASE-). They are therefore being disposed of by a single order. The file of complaint no. NCRI44/04/935/2024, Jogindar Kumar Sharma, shall be the lead complaint.
In brief, the lead complainant's case is that in the project OASIS GRANDSTAND (PHASE-l) run by the respondent, unit no. Sepang-82[?] as shown in the table above was booked, against which the complainant paid Rs. 49,44,774,/- to the respondent. The complainant has requested possession of the unit and interest on the delayed period. The complainant states in the complaint that the respondent had promised to hand over possession of the unit by 34.:2.20:7. However, the respondent has not provided possession of the unit to date. The respondent has failed to obtain the NOC and O.C. by the date on which, under the builder-buyer agreement, possession of the unit was to be given. The respondent has unlawfully sent an offer of possession demanding payment of farmers' compensation (kisan pratikar), delayed-period interest and amounts relating to the increased area, although the complainant has already paid the basic amount; yet the respondent has failed to give possession of the unit within the period fixed under the agreement. The lead complainant has therefore requested possession of the unit and interest on the delayed period.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 पत्रावली पर बिल्डर अनुबंधानुसार वांछित ; उपलब्ध बायर कब्जा दिये अनुतोष ao रसीद /साक्ष्य के | एग्रीमेंट की | जाने की अनुसार जमा तिथि तिथि धनराशि रु0 i ~ फिलराब्बात्का952024 गि Sepang | रु0 49,44,774,/ | 7.03.2045 | निर्माण कार्य | यूनिट का कुमार शर्मा -82 प्रारम्भ होने कब्जा व की तिथि विलम्बित दिसम्बर 2044 | अवधि का से 36 माह ब्याज दिलाये तथा 6 माह | जाने का अनुग्रह अवधि | अनुरोध किया अर्थात जून. | गया है। _ 2048 3, फिलावकत्काक्राक2024 | दीपक wae | Caesars | G0 25,86,239/ | 03.06.205 | निर्माण कार्य | यूनिट का q 4502 प्रारम्भ होने कब्जा व गोयल दिसम्बर 204 | अवधि का से 36 माह ब्याज दिलाये तथा 6 माह | जाने का अनुग्रह अवधि | अनुरोध किया अर्थात जून. | गया है। 208 _| बनाम ओएसिस रियलटेक प्रा.लि. शिकायतकर्ता जोगिन्दर कुमार शर्मा व अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध शिकायत योजित की गई है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतों एक ही परियोजना OASIS GRANDSTAND (PHASE-) से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/04/935/2024 जोगिन्दर कुमार शर्मा की पत्रावली अग्रणी शिकायत रहेगी । संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना OASIS GRANDSTAND (PHASE-l) में उक्त तालिका में अंकित यूनिट संख्या Sepangei2 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा
विपक्षी को धनराशि wo 49,44,774,/-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने ae यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 34.:2.20:7 तक यूनिट का कब्जा दिये जाने का वादा किया गया था। लेकिन विपक्षी द्वारा आज की तिथि तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया | विपक्षी बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की तिथि तक एनओसी व ओ.सी प्राप्त करने में असफल रहा है। विपक्षी द्वारा अवैधानिक रूप से किसान प्रतिकर, विलम्बित ब्याज व बढ़े हुए एरिया के सम्बन्ध में धनराशि भुगतान किये जाने हेतु ऑफर ऑफ पजेशन भेजा गया है जबकि शिकायतकर्ता द्वारा बेसिक धनराशि का भुगतान किया जा चुका है फिर भी विपक्षी अनुबंध के अनुसार निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा देने में असफल रहा है। अतः अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 के शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम की धारा 2, 42 व 49 के साथ माननीय एनसीडीआरसी द्वारा प्रदीप कुमार गुप्ता बनाम ईरियो ग्रेस रियलटेक प्रा.लि. सी.सी॥89 /207 का उल्लेख करते हुए विपक्षी द्वारा विलम्बित अवधि का ब्याज समायोजित करते हुए फ्रेश डिमांड लेटर जारी किये जाने, बेसिक सुविधाओं के साथ विधिक रूप से यूनिट का कब्जा, oar डीड निष्पादित कराये जाने, दिसम्बर 207 से प्रत्येक माह कब्जा की तिथि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व रु0 4,00,000 / विधिक खर्च दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्तागण द्वारा परिवाद के समर्थन में आवंटन पत्र, बिल्डर बायर एग्रीमेंट, मांग पत्र, ऑफर ऑफ पजेशन, व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गईं धनराशि संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी रसीद रसीद संख्या t63 29.06.2043 रु0 ,54,328 / 2 जा: | ’ शिकायतकर्ता-जोगिन्दर कुमार रसीद संख्या 758 24.08.2043 BO 4,54,328 / रसीद संख्या 4860 42.03.2074 BO 7,54,328 / रसीद संख्या 2642 04.03.2045 BO ,54,334/ रसीद संख्या 3570 44.2.2045 BO 2,83,930 / रसीद संख्या 3782 22.02.2046 रु0 2,07,038 / रसीद संख्या 4046 26.04.2046 रु0 2,06,387 / रसीद संख्या 4440 23.09.2046 BO 2,4,250/ रसीद संख्या 4826 45.03.2047 BO 78,220 / रसीद संख्या 6482 04.2.2024 BO ,59,434 / रसीद संख्या 6554 43.2.202 रु0 4,20,000 / रसीद संख्या 6555 43.42.2024 BO 34,200/ कुल at: | Bo 9,44,774 2 शिकायतकर्ता-दीपक गोयल विपक्षी द्वारा जारी रसीद रसीद संख्या 2895 44.07.2045 BO 2,24,459 / रसीद संख्या 4094 47.05.2046 BO 3,5,094/ रसीद संख्या 4479 30.09.2046 BO 2,59,550/ रसीद संख्या 594 24.04.2048 रु0 2,59,69 / रसीद संख्या 5348 05.04.2048 रु0 2,59,69/ रसीद संख्या 5435 02.05.2048 रु0 ,20,300/ रसीद संख्या 6204 04.07.2024 BO .2.780 / रसीद संख्या 6364 23.09.2024 BO ,42,784/ रसीद संख्या 6584 47.42.2024 रु0 2,00,000/ रसीद संख्या 6594 48.42.2024 WO 25,559 / रसीद संख्या 209 04.07.2043 रु0 2,2,586 / रसीद संख्या 4009 44.09.2043 BO 2,30,334 / रसीद संख्या 2386 46.40.2044 रु0 2,2,460 / कुल योग : | Bo 25,86,245
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को परियोजना ओएसिस ग्राण्डस्टेन्ड में यूनिट संख्या संख्या 82 (फेज-4) आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष दिनांक 47.03.2045 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। बिल्डर बायर एग्रीमेंट,//एलॉटमेंट एग्रीमेंट के क्लाज 27 के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 20:8 तक दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा उपलब्ध कराये जाने की तिथि 34.42.207 गलत अंकित की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार स्वीकार है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को चारों वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त है तथा परियोजना के सापेक्ष विपक्षी को ओ.सी दिनांक 05.02.2024 को प्राप्त हो चुका है जो weary है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 9.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन भेजा जा चुका है, जो एनेक्चर-बी है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 48.03.2024 को मांग 3 a
पत्र भेजकर सूचित किया गया जो एनेक्चर-सी है। शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त कर यूनिट के सापेक्ष अंतिम निरस्तीकरण पत्र दिनांक 03.08.2024 को भेजा गया जो एनेक्चर-डी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि बिल्डर बायर एग्रीमेंट के wart 26(बी) के अनुसार यदि शिकायतकर्ता द्वारा निर्धारित अवधि में पेमेंट शैड्यूल के अनुसार धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है या आवंटन पत्र में उल्लिखित नियमों व शर्तों का उललघन किया जाता है तो शिकायतकर्ता का आवंटन निरस्त कर यूनिट की कुल कीमत का 45 प्रतिशत धनराशि कटौती करके अवशेष देय धनराशि बिना ब्याज के वापस कर दी जाएगी और बीबीए के क्लाज 28 के अनुसार शिकायतकर्ता का यह दायित्व है कि वह पेमेंट शैड्यूल के अनुसार समय से किश्तों का भुगतान करें, यदि शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि की किश्तों के भुगतान में विलम्ब किया जाता है तो शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज अदा करने के लिए उत्तरदायी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा रेर अधिनियम की धारा 44(5) के अनुसार यूनिट पुर्नस्थापित किये जाने का कोई अनुरोध अपने शिकायत में नहीं किया गया है, जिस कारण वर्तमान शिकायत पोषणीय न होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है। विपक्षी द्वारा यूपी Rr wer 208 की रुल 93 व माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 7588 /2072 सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल, श्री हनुमान कॉटन flea बनाम टाटा एयरक्राफ्ट (970एससीआर(3)427) व रेरा पीठ द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर।44,/40 ,/83450 / 2024 मीनाक्षी सिंह बनाम ए आर लैण्डक्राफ्ट का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान वाद निरस्त किये जाने व बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार अर्नेस्ट मनी की कटौती उपरांत धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने की अनुमति प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इसी प्रकार उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 के प्रकरण में भी विपक्षी द्वारा उपरोक्त तथ्यों का उल्लेख व अनुरोध किया गया है। ता बा 4 विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति के समर्थन में ओ.सी दिनांक 05.02.2024, ऑफर ऑफ पजेशन, इंटीमेशन ऑफ डिमांड लेटर व यूनिट निरस्तीकरण पत्र की प्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट्स निरस्त किया जाना वैधानिक है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या eT संख्या Se आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट्स निरस्त किया जाना वैधानिक है। इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 8.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी करते हुए दिनांक 48.03.2024 को शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए मांग पत्र भी भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान नही किया गया जिस कारण आवंटित यूनिट दिनांक 03.08.2024 को निरस्त कर दी गयी। इसी प्रकार उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 के शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 20.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी करते हुए दिनांक 20.03.2024 को शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र भी भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर दिनांक 03.08.2024 को आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी।
शिकायतकर्तागण की ओर से दिनांक 02.09.2024 को सुनवाई के दौरान यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि विपक्षी द्वारा उनकी यूनिट वर्तमान शिकायत योजित किये जाने के पश्चात् निरस्त की गयी है जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी द्वारा उनकी यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित न किये जाने के लिए यथास्थिति बनाये रखे जाने का अनुरोध किया गया है। आ्नाा।खओिललकन 5 पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी ने लिखित आपत्ति में यह तर्क प्रस्तुत किया है कि शिकायतकर्तागण को देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र भेजे गये लेकिन शिकायतकर्तागण द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट दिनांक 03.08.2024 को निरस्त कर दी गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध शिकायतकर्तागण के बिल्डर बायर एग्रीमेंट क्रमशः दिनांक 7.03.205 व 03.06.2045 से स्पष्ट है कि आवंटित यूनिट की कुल कीमत क्रमश BO 20,57,92, रु0 27,49,467 है। शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट के सापेक्ष क्रमशः GO ॥9,44,774, %O 25,86,239 का भुगतान किया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट के सापेक्ष लगभग os प्रतिशत से अधिक धनराशि की अदायगी की जा चुकी है। अतः विपक्षी द्वारा उठाया गया यह तर्क कि शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी को जमा धनराशि की अदायगी नहीं की जा रही है, संधारणीय नहीं है।
इसके अतिरिक्त सामान्यतः यदि शिकायतकर्तागण द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20i8 की धारा 9.3 () में यह प्राविधानित है कि — In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination. उक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता को बकाया जमा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित करें परन्तु meta शिकायत में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर चेतावनी नहीं दी गयी तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु केवल एक मांग 6
पत्र क्रमशः दिनांकित 8.03.2024, 20.03.2024 को प्रेषित किये गये जिसके पश्चात विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को कोई अनुस्मारक पत्र प्रेषित नहीं किया गया। तत्पश्चात् विपक्षी के द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को निरस्त करते हुए, निरस्तीकरण पत्र शिकायतकर्तागण को प्रेषित किये गये परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि शिकायतकर्तागण को वापस नहीं की गयी है। उक्त के अतिरिक्त वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत परिवाद क्रमशः दिनांक 25.04.2024, 25.04.2024 को योजित की गयी है तथा उसके उपरांत विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 03.08. 2024 को प्रेषित किये गये है जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान परिवाद के लम्बित रहने के दौरान विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट को कैंसिल करने की कार्यवाही की गयी है जो विधिक रूप से सही नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्तागण द्वारा स्वयं अपनी यूनिट ase / निरस्त नहीं करायी गयी है। विपक्षी द्वारा ऐसा भी कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट किसी अन्य क्रेता को आवंटित की जा चुकी हो और उक्त यूनिट उपलब्ध न हो। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी का यह कथन कि शिकायतकर्तागण द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी है स्वीकार होने योग्य नही है। अतः विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट निरस्त किया जाना उपरोक्त उल्लिखित रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप वैधानिक नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है
कि क्या शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 47.03.20i5 को बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ। बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार निर्माण कार्य प्रारम्भ होने की तिथि दिसमबर 2044 से 36 माह —S= हि तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 2078 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इसी प्रकार उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 के शिकायतकर्ता और विपक्षी के मध्य बिल्डर बायर एग्रीमेंट क्रमशः दिनांक 03,06.20I5 को निष्पादित हुए जिसके अनुसार निर्माण कार्य प्रारम्भ होने की तिथि दिसमबर 2044 से 36 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 2048 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी को दिनांक 05.02.2024 को आंशिक अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर लिखित आपत्ति के साथ wey के रूप में उपलब्ध है। जबकि शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ जून 2048 में प्राप्त होना था। इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 6 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है |
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल''में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " ss उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स wears प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without
prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा —s 9 विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) # प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the
Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+i प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। शिकायतकर्ता 2 द्वारा जो क्षतिपूर्ति (compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति (compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार kr अधिनियम की धारा 77 के अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अतः पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। 0 उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को पुर्नस्थापित करते हुए, शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र /अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी शिकायतकर्तागण को दिनांक 04.07.208 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण द्वारा क्रमशः जमा धनराशि WO 49,44,774/, 25,86,239/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25. 03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Aza अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर add के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 3
प्रश्नगत शिकायत में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने हेतु पारित आदेश एवं RA आदेश को तद्नुसार समाप्त किया जाता है। आदेश की एक-एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावालियों पर रखी जाए। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 2 \n-- __ on.) aS 2A (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर i2 vat