Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vinod Chandra Sharma v. M/s Uttam Steels & Associates
Complaint No. NCR144/04/119286/2024
- Decision date
- 2026-05-26
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित -डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या |. |] यूनिट न0 | जमा धनराशि wo | प्लॉट अनुबंधानुसार | वांछित eo एलॉटीज कब्जा दिये. | अनुतोष अरेन्जमेंट की | जाने की तिथि तिथि [ एिाक्रात्गागढठ05 | विनोद चन्द्र शर्मा | ३8/743 | wo 37,87,500/ | 29.09.2022 | अनुबंध पत्र | यूनिट का निष्पादित कब्जा व होने की विलम्बित तिथि से i8 | अवधि का माह अर्थात्॒| ब्याज दिलाये जाने का मार्च 2024 अनुरोध किया L गया है। बनाम मैसर्स उत्तम ees एण्ड एसोशिएट्स (कंसोर्टियम) शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत योजित-की गयी है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना PLOT ZONE Il GA, 3C $0) में यूनिट संख्या 3a/43 बुक कराई गई थी जिसके एवज में शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Bo" 37,87,500 ,/ का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या 0743 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 29.09.2022 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ है जिसके अनुसार मार्च 2024 में यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था परन्तु अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष रु० 34,87,500/ar भुगतान किया गया है जिसके सापेक्ष विपक्षी द्वारा दिनांक 27.0.2022 को नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 44.40.2023 को शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्त किये जाने का पत्र जारी किया गया। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। —_—> शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में प्लॉट एलॉटीज अरेन्जमेंट कस्टमर लेजर व जमा की गयी धनराशि के सम्बन्ध में जारी पत्र की छाया प्रतियां दाखिल की गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) || विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर लेजर 27.0.2022 रु0 3,87,500 /
विपक्षी पत्रावली पर दिनांक 05.09.2024 को उपस्थित हुए। विपक्षी को लिखित जवाब दाखिल करने हेतु पर्याप्त अवसर प्रदान किये गये परन्तु विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक 28.05.2005 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त करते हुए पत्रावली विपक्षी के विरूद्ध एकपक्षीय कार्यवाही हेतु अग्रसारित की गयी। पीठ द्वारा दिनांक 0.09.2025 को शिकायतकर्ता की एकपक्षीय बहस सुनी गयी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कारण पत्रावली में एकपंक्षीय निर्णय पांरित-किया जा रहा है। पीठ-3 में कार्यरत् लॉ-रिसर्चर की आदेश पत्र पर अंकित amen दिनांक 26.05.2026 के अनुसार रेरा पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्तमान शिकायत से सम्बन्धित oR ede wwe Wier एवं एशोसियटस (कंसोर्टियम) क॑ नाम पर पंजीकृत है। वर्तमान परियोजना का निर्माण कार्य भी उत्तम स्टील्स एंड एसोशिएटस (कंसोर्टियम) द्वारा किया जा रहा है इसके अतिरिक्त अंसल हाई-टेक टाउनशिप्स लिमिटेड भी कंसोर्टियम का हिस्सा है तथा अंसल हाई-टेक टाउनशिप्स लिमिटेड के विरूद्ध एनसीएलटी में कार्यवाही विचाराधीन होने की कोई जानकारी रेरा पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत प्रपत्रों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न विरचित किये गये :- ॥ +. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? =——S 2 2. क्या शिकायतकर्ता प्लॉट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 :- प्रश्न संख्या-4 इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा
आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 /202 “मैसर्स =a प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo feo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54, From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, itywill apply after getting the on- going projects and future projects registered under Section 3 to/prospectively follow. the mandate of the Act 206."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से .यह स्पष्ट है कि .रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित .हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तकं७द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRII085i है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न We निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को प्लॉट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में प्लॉट बुक करायी गयी थी। उभयपक्ष के मध्य दिनांक 29.09.2022 को आवंटित यूनिट के सापेक्ष अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा अनुबंध पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा i8 माह में दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है।
पीठ द्वारा दिनांक 47.02.2026 को शिकायतकर्ता को शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल लिखित कथन के अनुसार विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट को निरस्त किये जाने के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण मय साक्ष्य दाखिल किये जाने हेतु निर्देशित किया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 24.04.2026 को सुनवाई के दौरान उक्त आदेश के क्रम में स्पष्टीकरण मय शपथ पत्र दाखिल करते हुए यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि उन्हें आज की fide यूनिट निरस्त किये जाने के सम्बन्ध में कोई निरस्तीकरण प्र प्राप्त नहीं हुआ.है। शिकायतकर्ता द्वारा दाखिल शपथ पत्र व स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि..विपक्षी' द्वारा प्रश्नगत यूनिट को निरस्त नहीं किया गया है। ह पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा अनुबंध की तिथि 29.09.2022 से 48 माह अर्थात मई मार्च 2024 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं प्राप्त हुआ है। विपक्षी की ओर से न तो लिखित कथन और न ही ओ.सी »सी. सी या वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्ध कराई गई है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नहीं है और न ही विपक्षी को ओसी»सी.सी प्राप्त हुआ है। फिर भी शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहता है तो उक्त के सम्बन्ध में रेश अधिनियम की धारा is (4a में यह प्रावधान दिया गया है कि परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना 4 SS चाहता है तो वह कब्जा प्राप्त होने तक विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है।
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील tio 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयत्ा का प्रश्न" है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स wart प्रा.लिःःआदि-बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section, .8()(b), lays.down. that ifthe promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि ww रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को 5 ss.
भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I9feert की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि-शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी A MCLREL प्रतिशत hee से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट. का. कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ. सी /सी.सी सहित प्लॉट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2024 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा
धनराशि BO 3,87,500,/ पर ४८,२+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा 2(2०)(0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी McCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो fread अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। ; इस आदेश का उल्लघंन भूल्सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथां*अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ‘A 5s > “Ze oS 2026 (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर