Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Tripta Sharma v. Oasis Realtech Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/04/119253/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-11-12
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-3 Order passed under Section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2046 Present: Dr. Deepak Swaroop Saxena, Member | Serial No. | Complaint No. | Complainant(s) | Unit No. | Date | Amount paid as per receipts/evidence | Construction start and possession due as per builder-buyer agreement | Relief sought | |---|---|---|---|---|---|---|---| | [?] | 48244/04/9296/2024 | Vishnu Agarwal | Detroit-703 | 07.06.20i5 | Rs. 26,76,324/ | Construction start December 2044; 36 months plus 6 months grace period, i.e., June 2048 | Possession of the unit and interest on the delayed period | | 2 | NCRI44/04/I933/2024 | Poonam Rani and Nishant Kharangarh | Valencia-804 | 25.09.20:3 | Rs. 25,05,963/ | Construction start December 2074; 36 months plus 6 months grace period, i.e., June 2048 | Possession of the unit and interest on the delayed period | | 3 | NCRI44/04/I9253/2024 | Tripta Sham[?] | Sepang-802 | 76.03.20I5 | Rs. 9,44,707/ | Construction start December 2074; 36 months plus 6 months grace period, i.e., June 2048 | Possession of the unit and interest on the delayed period | | 4 | NCRI44/04/I9245/2024 | Dinesh Kushwaha and Kirti Kushwaha | Monza-4608 | 03.03.205 | Rs. 20,63,756/ | Construction start December 2044; 36 months plus 6 months grace period, i.e., June 2048 | Possession of the unit and interest on the delayed period | vs. Oasis Realtech Pvt. Ltd.
Complainant Vishnu Agarwal and three other complainants have filed complaints against the respondent. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to one project, OASIS GRANDSTAND (PHASE-l). They are therefore being disposed of by a single order. The file of complaint no. NCRI44/04/9296/2024, Vishnu Agarwal vs. Oasis Realtech Pvt. Ltd., shall be the lead complaint. In brief, the lead complainant's case is that in the project OASIS GRANDSTAND (PHASE-l) run by the respondent, unit no. Detroit-703 as shown in the table was booked, against which the complainant paid Rs. 26,76,324 //- to the respondent.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:ः- sto दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य
क्रम शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण | यूनिट न0 पत्रावली पर बिल्डर अनुबंधानुसार वांछित ह उपलब्ध बायर कब्जा दिये अनुतोष स0 रसीद /साक्ष्य के | एग्रीमेंट की जाने की अनुसार जमा तिथि तिथि धनराशि रु0 | . | ४८२44/04/9296/2024 | विष्णु अग्रवाल | Detroit- | रु0 26,76,324/ | 07.06.20i5 703 प्रारम्भ होने. | कब्जा व की तिथि विलम्बित दिसम्बर 2044 | अवधि का से 36 माह | ब्याज दिलाये तथा 6 माह | जाने का अनुग्रह अवधि | अनुरोध किया अर्थात जून. | गया है। 2048 2. | NCRI44/04/I933/2024 | पूनम रानी Valencia- | रु0 25,05,963 / | 25.09.20:3 | निर्माण कार्य | यूनिट का खरंगगढ व 804 प्रारम्भ होने | कब्जा व निशांत खरंगगढ की तिथि विलम्बित दिसम्बर 2074 | अवधि का से 36 माह | ब्याज दिलाये तथा 6 माह | जाने का अनुग्रह अवधि | अनुरोध किया अर्थात जून. | गया है। | 2048 3. | NCRI44/04/I9253/2024 | तृप्ता शम Sepang- | रु0 9,44,707/ | 76.03.20I5 | निर्माण ard | यूनिट का 802 प्रारम्भ होने | कब्जा व की तिथि विलम्बित दिसम्बर 2074 | अवधि का से 36 माह ब्याज दिलाये तथा 6 माह | जाने का अनुग्रह अवधि | अनुरोध किया अर्थात जून. | गया है। 4 2048 4. | NCRI44/04/I9245/2024 | दिनेश कुशवाह | Monza- | 0 20,63,756/ | 03.03.205 | निर्माण कार्य | यूनिट का व कीर्ति कुशवाह | 4608 प्रारम्भ होने. | कब्जा व की तिथि विलम्बित दिसम्बर 2044 | अवधि का से 36 माह ब्याज दिलाये तथा 6 माह | जाने का अनुग्रह अवधि | अनुरोध किया अर्थात जून. | गया है। 2048 बनाम ओएसिस रियलटेक प्रा.लि. —S=
शिकायतकर्ता विष्णु अग्रवाल व 3 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध शिकायत योजित की गई है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना OASIS GRANDSTAND (PHASE-l) से सम्बन्धित है। अत: एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/04/9296/2024 विष्णु अग्रवाल बनाम ओएसिस रियलटेक प्रा.लि. की पत्रावली अग्रणी शिकायत रहेगी। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना OASIS GRANDSTAND (PHASE-l) में sad तालिका में अंकित यूनिट संख्या Detroit-703 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि रु0 26,76,324 //-का भुगतान किया गया।
अग्रणी शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत लिखित अभिकथन में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने विपक्षी की परियोजना में दिनांक 34.07.2043 को यूनिट एरिया 995 वर्गफिट बुक करायी थी। आवेदन फार्म दिनांक 03.08.20:3 की प्रति एनेक््चर-ए है। विपक्षी द्वारा दिनांक 07.08.203 को रु0 2,25,000,/ का रसीद जारी किया गया जो एनेक्चर-बी है। विपक्षी द्वारा दिनांक 09.08.2043 को वेलकम लेटर जारी किया गया जो एनेक्चर-सी है। विपक्षी द्वारा दिनांक 34.08.203 को अस्थाई आवंटन पत्र जारी किया गया जो एनेक्चर-ई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदों का एनेक्चर- डी, एफ, जी, आई, जे, एल, एन, ओ, पी, क्यू, आर, एस, टी, यू, वी, डब्ल्यू, एक्स, वाई, जेड, HH, ए2, ए3, ए4, है। विपक्षी द्वारा दिनांक 05.03.2074 को परियोजना में निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया। निर्माण कार्य प्रारम्भ किये जाने का पत्र एनेक्चर-एच है। विपक्षी द्वारा दिनांक t0.0:.205 को परियोजना के लिए न्यू ले-आउट प्लान जारी किया गया जो एनेक्चर-के है। विपक्षी द्वारा दिनांक 04.06.2045 को यूनिट संख्या 703 के पक्ष में बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित किया गया जिसके क्लाज-27 के अनुसार यूनिट का कब्जा निर्माण कार्य प्रारम्भ होने से 36 माह में दिया जाना था परन्तु विपक्षी कब्जा उपलब्ध कराये जाने में असफल रहा है। आवंटन पत्र की प्रति एनेक्चर-एम है। आवंटन पत्र के aero 27 के अनुसार निर्माण कार्य प्रारम्भ होने की तिथि दिसम्बर 2044 से 36 माह में अर्थात दिसम्बर 20:7 तक आवश्यक वांछित 2 —_——S
अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना प्रस्तावित था। शिकायतकर्ता द्वारा नोटबंदी व wrfas—i9 A उत्पन्न वित्तीय संकट होने के बावजूद पेमेंट प्लान के अनुसार विपक्षी द्वारा जारी मांग पत्र के विरूद्ध किश्तों का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा अधिकांश धनराशि प्राप्त होने के उपरांत भी अभी तक यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। विपक्षी को दिनांक 05.02.2024 को यमुना विकास प्राधिकरण द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है, जिसे विपक्षी द्वारा रेरा पोर्टल पर अपलोड किया गया है परन्तु विपक्षी द्वारा वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र रेरा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया है। शिकायतकर्ता ने विपक्षी से विलम्बित अवधि का ब्याज समायोजित करते हुए फ्रेश मांग पत्र जारी करने, रेरा प्राधिकरण द्वारा तकनीकी दल से बढ़े हुए एरिया का निरीक्षण कराये जाने, विधिक रूप से बेसिक सुविधाओं के साथ यूनिट का कब्जा दिलाये जाने, eae ws निष्पादित कराये जाने, दिसम्बर 20:7 से कब्जा दिये जाने की तिथि तक प्रतिमाह विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व विधिक खर्च Go 4,00,000 / दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 के शिकायतकर्ता द्वारा रेश अधिनियम की धारा 2, 42 व 49 का उल्लेख करते हुए विपक्षी द्वारा विलम्बित अवधि का ब्याज समायोजित करते हुए फ्रेश डिमांड लेटर जारी किये जाने, बेसिक सुविधाओं के साथ विधिक रूप से यूनिट का कब्जा, कन्वेयान्स डीड निष्पादित कराये जाने, दिसम्बर 20॥7 से प्रत्येक माह कब्जा की तिथि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने व vo 4,00,000,/ विधिक खर्च दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त क्रम संख्या 3 व 4 पर शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्तागण द्वारा परिवाद के समर्थन में लिखित अभिकथन, आवंटन पत्र, बिल्डर बायर एग्रीमेंट, मांग पत्र, ऑफर ऑफ पजेशन, यूनिट निरस्तीकरण पत्र व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- =a 3
क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि | संख्या (रु0) 4 शिकायतकर्ता-विष्णु अग्रवाल विपक्षी द्वारा जारी रसीद रसीद संख्या 608 07.08.2043 BO 2,25,000/ रसीद संख्या 7284 40.0.2043 BO 2,27,772/ रसीद संख्या 2385 27.09.204 रु0 2,26,388 / रसीद संख्या 4448 30.05.206 रु0 2,26,387 / रसीद संख्या 4490 26.40.2046 रु0 2,63,237 / रसीद संख्या 4270 20.07.2046 रु0 3,77,979/ रसीद संख्या 5574 46.06.206 BO 2,72,73/ रसीद संख्या 5768 44.09.2046 BO 2,72,72/ रसीद संख्या 58:7 05.40.206 रु0 4,22,975 / रसीद संख्या 6790 25.03.2047 रु0 4,64,59 / कुल at: |रु0 26,76,324 2 शिकायतकर्ता-पूनम रानी विपक्षी द्वारा जारी रसीद रसीद संख्या 6472 26.06.2024 रु0 4,20,302/ रसीद संख्या 6327 40.09.2024 रु0 4,20,302 / रसीद संख्या 5754 40.09.2048 रु0 4,28,322 / रसीद संख्या 5364 04.04.2048 रु0 2,72,847 / रसीद संख्या 5202 4.04.2048 रु0 ,42,847 / रसीद संख्या 5203 34.04.2048 रु0 ,30,000/ wile संख्या 4999 29.06.2047 रु0 2,62,878 / रसीद संख्या 4600 29.42.2046 BO 3,82,608 / रसीद संख्या 3334 46.40.2045 BO 2,36,899 / रसीद संख्या 7945 28.03.204 रु0 2,36,500 / रसीद संख्या 4464 22.09.2043 BO 4,32,458 / रसीद संख्या 730 45.09.2043 रु0 40,000 / कुल art: — | Bo 25,05,963 / 3 शिकायतकर्ता-तृप्ता शम विपक्षी द्वारा जारी रसीद रसीद संख्या 460 29.06.2043 BO 4,54,328 / रसीद संख्या 757 24.08.2043 रु0 4,54,328 / रसीद संख्या 4864 42.03.2044 BO 4,54,328 / रसीद संख्या 264 04,03.2045 BO ,54,33 / रसीद संख्या 3453 24.44.2045 रु0 2,83,930 / रसीद संख्या 3735 44.02.206 रु0 2,07,050/ रसीद संख्या 3994 49.04.2046 रु0 2,06,366 / रसीद संख्या 4405 20.09.2046 BO 2,4,259 / रसीद संख्या 4763 45.02.2047 BO 78,220/ रसीद संख्या 5437 49.09.2047 BO 83,834 / रसीद संख्या 6392 05.40.2024 BO 75,533 / रसीद संख्या 6556 43.42.2024 BO ,54,200/ कुल aT: =~ | Bo 49,44,707 7 f शिकायतकर्ता-दिनेश कुशवाह व कीर्ति कुशवाह विपक्षी द्वारा जारी रसीद रसीद संख्या 4555 03.42.2046 रु0 2,36,494/ wile संख्या 5835 43.44.2048 रु0 90,000 / रसीद संख्या 2765 2.06.2044 BO 4,73,236 / रसीद संख्या 5834 43.44.2048 BO 3,369 / 4
>> रसीद संख्या 3945 05.04.2046 BO 208,674 / रसीद संख्या 2238 76.08.204 BO 7,69,477/ रसीद संख्या 6303 27.08.2024 BO 84,99 / रसीद संख्या 6449 07.04.2024 रु0 80,000 / रसीद संख्या 6447 06.04.2024 WO 4,205 / रसीद संख्या 2087 27.05.2044 BO ,73,236 / रसीद संख्या 6549 42.42.202 रु0 ,00,000/ चेक संख्या 734522 30.04.2046 BO 6,72,774/ कुल योग :._ | Bo 20,63,756 /
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता को परियोजना ओएसिस ग्राण्डस्टेन्ड में यूनिट संख्या संख्या 703 (फेज-4) में आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष दिनांक 04.06.205 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। बिल्डर बायर Wie /एलॉटमेंट एग्रीमेंट के क्लाज 27 के अनुसार यूनिट का कब्जा जून 208 में दिया जाना था। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि को स्वीकार किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को चारों वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने के उपरांत दिनांक 05.02.2024 को ओ.सी भी प्राप्त हो चुका है जो एनेक्चर-ए है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 48.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन भेजा जा चुका है, जो एनेक्चर-बी है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को दिनांक 48.03.2024 को मांग पत्र भेजकर सूचित किया गया जो Wea है। शिकायतकर्तागण पेमेंट प्लान के अनुसार अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट अंतिम रूप से दिनांक 03.08.2024 को निरस्त कर दी गयी है जो Waa है। बिल्डर बायर एग्रीमेंट के क्लाज 26(बी) के अनुसार यदि शिकायतकर्ता द्वारा पेमेंट शैड्यूल के अनुसार निर्धारित अवधि में धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है या अनुबंध का उललघन किया जाता है तो आवंटन निरस्त हो जाएगा और यूनिट की कुल कीमत का 5 प्रतिशत धनराशि कटौती करके अवशेष देय धनराशि बिना ब्याज के वापस किया जाना है। शिकायतकर्ता द्वारा रेश अधिनियम की धारा 466) के अनुसार यूनिट पुर्नस्थापित किये जाने का अनुरोध नहीं किया गया है, जिस कारण वर्तमान शिकायत पोषणीय न होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है। विपक्षी द्वारा यूपी wT wed 20:8 की रुल 9.3
व माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 7588 // 2042 सतीश बत्रा 5 Ss बनाम सुधीर wae, श्री हनुमान कॉटन et बनाम टाटा एयरक्राफ्ट (o7owaisn(3)i27) व wt पीठ द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर(44 /40/83450/202 मीनाक्षी सिंह बनाम ए आर लैण्डक्राफ्ट का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान वाद निरस्त किये जाने व बिल्डर aR एग्रीमेंट के अनुसार अर्नेस्ट मनी की कटौती उपरांत धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने की अनुमति दिये जाने का अनुरोध किया गया है। इसी प्रकार उक्त तालिका में अंकित शिकायतकर्ता क्रम संख्या 2, 3 व 4 के प्रकरण में भी विपक्षी द्वारा उपरोक्त तथ्यों का उल्लेख व अनुरोध किया गया है। विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति के समर्थन में ओ.सी दिनांक 05.02.2024, ऑफर ऑफ पजेशन, इंटीमेशन ऑफ डिमांड लेटर व यूनिट निरस्तीकरण पत्र की प्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट्स निरस्त किया जाना वैधानिक है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न GN. प्रश्न संख्या 4 इस आशय का विरचित किया गया है कि gar विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को आवंटित aca निरस्त किया जाना वैधानिक है। इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 22.03.2024 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी करते हुए दिनांक 22.03.2024 को शिकायतकर्ता को देय धनराशि का भुगतान किये जाने के लिए मांग पत्र भी भेजे गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया जिस कारण आवंटित यूनिट दिनांक 03.08.2024 को निरस्त कर दी गयी। इसी प्रकार war तालिका में अंकित क्रम संख्या 2, 3 व 4 के शिकायतकर्तागण के पक्ष में क्रमशः दिनांक 22.03.2024, 48.03.2024 व 26.03.2024 कल्कि. 0 को ऑफर ऑफ पजेशन व मांग पत्र जारी किया गया परन्तु शिकायतकर्तागण द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर दिनांक 03.08.2024 को आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी। शिकायतकर्तागण की ओर से दिनांक 09.09.2024 को सुनवाई के दौरान यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि विपक्षी द्वारा उनकी यूनिट वर्तमान शिकायत योजित किये जाने के पश्चात् निरस्त की गयी है जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी द्वारा उनकी यूनिट पर तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित न किये जाने के लिए यथास्थिति बनाये रखे जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी ने लिखित आपत्ति में यह तर्क प्रस्तुत किया है कि शिकायतकर्तागण को देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु मांग पत्र भेजे गये लेकिन शिकायतकर्तागण द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट दिनांक 03.08.2024 को निरस्त कर दी गयी है।
पत्रावली पर उपलब्ध शिकायतकर्तागण के बिल्डर बायर एग्रीमेंट क्रमशः दिनांक 04.06.2045, 25.09.2043, 46.05.20I5 व 03.0320i5 से स्पष्ट है कि आवंटित यूनिट की कुल कीमत क्रमश BO 28,5,456/, 28,94,406 /, 9,44,707 / व 22,00,487/ है। शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट के सापेक्ष क्रमशः रु0 26,76,324/, 25,05,963 /“, 9,44,707/ व 20,63756,/ का भुगतान किया जा चुका है। इससे यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्तागण क्रमशः 4, 2 व 4 द्वारा यूनिट के सापेक्ष लगभग 95 प्रतिशत से अधिक धनराशि की अदायगी व शिकायतकर्ता क्रम संख्या 3 द्वारा यूनिट की कीमत के सापेक्ष सम्पूर्ण धनराशि t00 प्रतिशत की अदायगी विपक्षी को की जा चुकी है। अतः विपक्षी द्वारा उठाया गया यह तर्क कि शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी को जमा धनराशि की अदायगी नहीं की जा रही है, संधारणीय नहीं है। इसके अतिरिक्त सामान्यतः यदि शिकायतकर्तागण द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20i8 की धारा 9.3 () में यह प्राविधानित है कि — In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) 7 —_—Ss
consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination. उक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता को बकाया जमा धनराशि का भुगतान न किये जाने पर प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित करें परन्तु vera शिकायत में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित कर चेतावनी नहीं दी गयी तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को बकाया धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु केवल एक मांग पत्र क्रमशः दिनांकित 22.03.2024, 22.03.2024 व 48.03.2024 को प्रेषित किये गये जिसके पश्चात विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को कोई अनुस्मारक पत्र प्रेषित नहीं किया गया जो उपरोक्त विधि व्यवस्था के विपरीत है। इसके अतिरिक्त विपक्षी के द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को निरस्त करते हुए, निरस्तीकरण पत्र शिकायतकर्तागण को प्रेषित किये गये परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि शिकायतकर्तागण को वापस नहीं की गयी है जो कि उपरोक्त नियम के अनुसार विपक्षी द्वारा धनराशि वापस की जानी थी।
उक्त के अतिरिक्त वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्तागण द्वारा प्रश्नगत परिवाद क्रमशः दिनांक 24.04.2024, 25.04.2024 व 23.04.2024 को योजित की गयी है तथा उसके उपरांत विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 03.08.2024 को प्रेषित किये गये है जिससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान परिवाद के लम्बित रहने के दौरान विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिट को कैंसिल करने की कार्यवाही की गयी है जो विधिक रूप से सही नहीं है। यह भी उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्तागण द्वारा स्वयं अपनी यूनिट सरेन्डर / निरस्त नहीं करायी गयी है। विपक्षी द्वारा ऐसा भी कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है कि प्रश्नगत यूनिट किसी अन्य क्रेता को आवंटित की जा चुकी हो और उक्त यूनिट उपलब्ध न हो। —_—_— 8 उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी का यह कथन कि शिकायतकर्तागण द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने पर आवंटित यूनिट निरस्त कर दी गयी है जो उपरोक्त विश्लेषण के अनुसार स्वीकार किये जाने योग्य नही है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्तागण की यूनिद्स को निरस्त किया जाना उपरोक्त उल्लिखित रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अनुरूप वैधानिक नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी?
अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 0:.06.20i5 को बिल्डर बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ। बिल्डर बायर एग्रीमेंट के अनुसार निर्माण कार्य प्रारम्भ होने की तिथि दिसमबर 2074 से 36 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 20:8 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इसी प्रकार vat तालिका में अंकित क्रम संख्या 2, 3 व 4 के शिकायतकर्तागण और विपक्षी के मध्य बिल्डर बायर Witte क्रमशः दिनांक 25.09.2043, 6.05.20i5 व 03.03.20i5 को निष्पादित हुए जिसके अनुसार निर्माण कार्य प्रारम्भ होने की तिथि दिसमबर 2074 से 36 माह तथा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 20:8 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी को दिनांक 05.02.2024 को कुल 8 टॉवर (टॉवर-3, 4, 5, 7, 8, 9, 40 व 44) के सापेक्ष आंशिक अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है जो पत्रावली पर लिखित आपत्ति के साथ एनेक्चर-ए के रूप में उपलब्ध है। जबकि शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा 6 माह अनुग्रह अवधि के साथ जून 20:8 F प्राप्त होना था। जा < > 9
इस प्रकार विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 6 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्तागण द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं० 6649-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल/'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4G) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन wi आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section I8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee i0 Ser does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not
unreasonable. " अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा var धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2oi6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर g.2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +!% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" SS हैक
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wea 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८,९+]प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी |४/८,२+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की aaa भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। शिकायतकर्ता «4 व 2 द्वारा जो क्षतिपूर्ति ((०॥8००/६०४०)) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति ((०॥॥०९०१५०४०७) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार we अधिनियम की धारा 7 के अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अतः पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को पुर्नस्थापित करते हुए, शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, आवंटन पत्र /अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय wera शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री RIN | 2. विपक्षी शिकायतकर्तागण को दिनांक o.0720I8 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण द्वारा wae: जमा धनराशि रु० 26,76,324, 80 25,05,963/, रु0 49,44.707,// व BO 20,63,756,/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली
2 Ss धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(28)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। verre शिकायत में इस पीठ द्वारा यथास्थिति बनाये रखने हेतु पारित आदेश एवं स्थगन आदेश को तदनुसार समाप्त किया जाता है। आदेश की एक-एक प्रति उक्त सम्बन्धित पत्रावालियों पर रखी जाए। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —=r= Sea w- 2024 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 3