Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pradip Koli v. S. J. P. Hotels & Resorts Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/03/91819/2022
- Decision date
- 2026-02-26
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, 47-शिकायत PAM:—NCR 44/03/989/2022 प्रदीप कोली बनाम एस. जे. पी. होटल्स एंड रिसॉर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 26.02.2026 ‘ शिकायतकर्ता का ae वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री रोहित महावर उपस्थित हुए। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि आज तक विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही रजिस्ट्री निष्पादित कराई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में बुक की गई यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं रजिस्ट्री हेतु अपनी शिकायत योजित की गई, जिसमें माननीय पीठ-04 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 27.09.2022 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिटस् की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30.44.2022 तक ओ. सी/सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्तागण से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता (पूनम fase) को दिनांक 04.40.2020 से ओ.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि 29.07.2024 तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। efas—i9 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि कोई अतिदेय — (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन / अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार विलम्ब ब्याज की गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा 2(2४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRHI प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4... विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को यूनिट का कब्जा देते समय सभी चार्जेज आवंटन पत्र /अनुब॒न्ध के अनुरूप अधिरोपित करेगें।
5. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता (शुभम् कुमार शर्मा एवं रिचा पाठक) के प्रकरण में यूनिट के बाबत उनके द्वारा जी.एस.टी के मद में धनराशि किस दर से ली गयी है, 'इन्पुट क्रेडिट' क्लेम लिया गया है अथवा नहीं तथा प्रो-रेटा आधार पर शिकायतकर्ता का क्या देय अंश था, इन्हें ‘aes अकाउण्टेंट से 45 दिनों में प्रमाणित कराकर शिकायतकर्ता को उक्त स्थिति स्पष्ट करें व तद्नुसार यदि कोई इनपुट wise’ इस इकाई के सम्बन्ध में क्लेम किया गया हो, तो तदनुसार अपेक्षित समायोजन करें। 6. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता (शुभम् कुमार शर्मा एवं रिचा पाठक) के प्रकरण में त्रिपक्षीय अनुबन्ध/ TAA, के अनुसार प्री-ई. एम.आई. का भुगतान करें तथा यदि पूर्व में किसी किश्त का भुगतान नहीं किया गया है अथवा विपक्षी का विधिक उत्तरदायित्व होने के बाद भी शिकायतकर्ता द्वारा वित्तीय संस्था को किया गया हो, तो उसका समायोजन अंतिम देय धनराशि में करना सुनिश्चित करें। 7. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी | 8... इस आदेश का उल्लघंन ATT (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 9. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायत्कर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेंगें।
विपक्षी द्वारा उक्त आदेश का अनुपालन न करने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा उक्त आदेश के निष्पादन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया war) तदोपरान्त शिकायत में मा. पीठ-04 (पूर्व पीठ-0१ए) द्वारा दिनांक 3.04.2022 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः: उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा ores के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 27-09-2022 के प्रस्तर-04 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई के लिए, दिनांक 20-03-2025 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 27-09-2022 के प्रस्तर-02 के अनुसार दिनांक 40-03-2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। यदि मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी नियम 24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 27-09-2022 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा 63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं।
तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,/40,/63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराने व यूनिट की रजिस्ट्री निष्पादित न कराये जाने के कारण माननीय पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 34.04.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित करने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.09.2022 का अनुपालन नहीं किया गया। ऐसी स्थिति में दिनांक 09.0.2025 को यूनिट को कुर्क करने का आदेश पारित किया गया, जिसके अनुसार रेरा अधिकृत रिसीवर द्वारा अपनी wat आख्या दिनांकित 08.42.2025 दाखिल की जा चुकी है और शिकायतकर्ता की यूनिट न्यायालय के कब्जे में है। विपक्षी द्वारा समय से आदेश दिनांक 27.09.2022 का अनुपालन का अनुपालन नहीं किया गया और न ही शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया और न ही शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई। ऐसी स्थिति में उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली-2048 के नियम-9.2 के अनुसार विपक्षी को कोई होल्डिंग चार्ज अदा करने के लिए बाध्य नहीं है। क्योंकि शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है, इसलिए शिकायतकर्ता पिछला कोई मेन््टेनेन्स विपक्षी को अदा करने के लिए बाध्य नहीं है। जहाँ तक विलम्ब ब्याज का प्रश्न है, तो शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट के मद में समय से धनराशि का भुगतान किया गया है, इसलिए विपक्षी, शिकायतकर्ता से विलम्ब ब्याज की धनराशि प्राप्त करने का अधिकारी नहीं है। ey विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह उपरोकतानुसार नया मांग-पत्र बनाकर
शिकायतकर्ता को प्रेषित करना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता को निर्देशित किया जाता है कि वह उपरोकतानुसार विपक्षी को एक माह के अन्दर बकाया धनराशि का भुगतान करना सुनिश्चित करें। तद्पश्चात विपक्षी, शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिष्ट्री कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए इस पीठ द्वारा अग्रिम कार्यवाही की जायेगी। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 43.05.2026 को पेश हो। Seb आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण