Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amar Nath Gupta v. M/s. Jss Buildcon Private Limited
Complaint No. NCR144/03/91816/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, We उपस्थिति:- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य क्रम dO शिकायत संख्या [Rese | . | NCRI44/02/87995/2022 [a राजेश वर्मा 2. NCRI44/2/86270/2024 r eee कुमार 3. NCRI44/42/74589/202 श्रीमती शालिनी सिंह | + | एटारा44/0॥/87885/2022 [ee | वत्स |e | 5. पटारा44/03/986/2022 | कअरनाथगुत्ता | नाथ गुप्ता | « | एटलरा4ब4/02/90277/2022 | अनाहिता मलिक | 7. एटारा44/02/90392/2022 4 पीयूष कुमार | _+ | NCR44/03/9379/2022 | eRe | कुमार रावल | * | “| NCRI44/04/88023/2022 वीरेन्द्र मित्रा भारद्वाज 0.. स्टारा44/0/87749/2022 दीपक विनायक L बनाम मे0 जे.एस.एस बिल्डकॉन प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता राजेश वर्मा के साथ 9 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध vera शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें विपक्षी की परियोजना NCR MONARCH के टॉवर संख्या Tr, 72 एवं 73 से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Wo NCRI44/0/87995/2022 राजेश वर्मा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्र जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना NCR MONARCH में यूनिट WO- १-/4-24 बुक की गई थी, जिसकी 4 Ye
कुल कीमत 40,4475 /— रुपये थी, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 33,04974/— रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना स्थल पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है और विपक्षी की परियोजना 60 माह विलम्बित है। विपक्षी द्वारा यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की अवधि तक प्री-ई.एम.आई. की धनराशि का भुगतान किया जाना था, जो कि विपक्षी द्वारा नहीं किया जा रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में अनुबंध पत्र दिनांकित 30.0.205, त्रिपक्षीय अनुबन्ध 30.40.2045, मांग पत्र की छायाप्रति, जमा धनराशि की रसीदें आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में जवाब दाखिल करते हुए किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि का दुरूपयोग करते हुए शिकायत प्राधिकरण के समक्ष योजित की गई है। विपक्षी द्वारा अंकित किया ग़या है कि परियोजना के मूल ले-आउट में परिवर्तन, अनुबंध-पत्र में उल्लेखित प्राविधान के अनुसार है जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि war ले-आउट प्लान अनिश्चित है, जोकि सक्षम प्राधिकरण के अनुमोदन के उपरान्त परिवर्तित होने की सम्भावना है। प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 2006 से अक्टूबर 208 तक मा0 एन.सी.एल.टी. द्वारा वाद संख्या-0730घ0 /2046 में पारित आदेश दिनांक 04.03.2046 में विक्रय पर लगाई गई रोक के कारण प्रभावित रहा मा0 एन.सी.एल.टी. के उक्त आदेश के कारण आवेदकों की बुकिंग रुक गई और जिन आवंटियों द्वारा इकाई बुक की गई, वे अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान हेतु तैयार नहीं थे, जिसके कारण निर्माण कार्य कथित तौर पर मई 2046 के अंत तक ठप हो गया और विपक्षी द्वारा केवल फ्लैट खरीदारों से एकत्र किए गए धन से परियोजना का निर्माण किया जा रहा था। मा0 एन.सी.एल.टी. द्वारा दिनांक 34.0820i8 को पारित किया गया। उक्त अवधि में आवंटियों से निर्धारित धनराशि प्राप्त न कर पाने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा। ग्रेटर नोएडा औद्यौगिक विकास प्राधिकरण किये गये भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में किसानों द्वारा मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष Re याचिका संख्या-47068 / 2009 हरकरन सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी. योजित की गई जिसमें wo उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में विपक्षी के पक्ष में निष्पादित लीज डीड रद कर दी गई और विपक्षी द्वारा कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही पुनः प्रारम्भ की गई जिसके उपरान्त परियोजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। मा0 एनजीटी और माननीय सर्वोच्च द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध, कोविड-49 की वैश्विक महामारी के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित ver) प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में चारों वांछित प्रमाण-पत्र प्राप्त किये जा चुके हैं। परियोजना का 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के
शा 2 सापेक्ष 22,99,000 /— रूपये का भुगतान किया गया है एवं 46,8,722,//- रूपये का भुगतान किया जाना अवशेष है, अवशेष धनराशि के भुगतान के उपरान्त शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा। विपक्षी द्वारा यह भी कथन किया गया है कि परियोजना के टॉवर संख्या- पर- के आवंटियो को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा एवं टॉवर संख्या-प-2 एवं प-3 के आवंटियो को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक Walt कर दिया जायेगा। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में wo एन.सी.एल.टी. द्वारा पारित आदेश, विभिन्न पत्रों, माननीय एन.सी.एल.टी के आदेश की छायाप्रतियां ई-मेल के माध्यम से पीठ को उपलब्ध करायी गयी हैं। उभयपक्षों के aot को सुना व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- 4. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव ? 2. क्या शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने की मांग करना उचित है? 3. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या- बिन्दु wo- इस आशय का विचरित किया गया है कि a वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स होने कारण विलम्बित हुईं? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 206 से अक्टूबर 20i8 तक Ao एन.सी.एल.टी. द्वारा वाद संख्या-0०30४)/206 में पारित आदेश दिनांक 04.03.206 में विक्रय पर लगाई गई रोक के कारण प्रभावित रहा मा0 एन.सी.एल.टी. के उक्त आदेश के कारण आवेदकों की बुकिंग रुक गई और जिन आवंटियों द्वारा इकाई बुक की गई, वे अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान हेतु तैयार नहीं थे, जिसके कारण निर्माण कार्य कथित तौर पर मई 2046 के अंत तक ठप हो गया और विपक्षी द्वारा केवल फ्लैट खरीदारों से एकत्र किए गए धन से परियोजना का निर्माण किया जा रहा था। ATO एन.सी.एल.टी. द्वारा दिनांक 34.08.2048 को पारित किया गया। उक्त अवधि में आवंटियों से निर्धारित धनराशि प्राप्त न कर पाने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा। ग्रेटर Ye नोएडा औद्यौगिक विकास प्राधिकरण किये गये भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में किसानों ERI Wo उच्च न्यायालय के समक्ष Re याचिका संख्या-47068 /2009 हरकरन सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी. योजित की गई जिसमें wo उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में विपक्षी के पक्ष में निष्पादित लीज डीड रद्द कर दी गई और विपक्षी द्वारा कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही पुनः प्रारम्भ की गई जिसके उपरान्त परियोजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। मा0 एनजीटी और माननीय सर्वोच्च द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध, कोविड-49 की वैश्विक महामारी के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा। आवंटन /» अनुबन्ध पत्र दिनांकित 300.205 के फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित प्राविधान दिये गये हैं :-
j. Force Majeure Clause: means any event or combination of events or circumstances beyond the control of theCompany which cannot (a) by the exercise of reasonable diligence, or (b) despite the adoption of reasonableprecaution and/ or alternative measures, be prevented, or caused to be prevented, and which adversely affects the Company's ability to perform obligations under this Application, which shall include but not be limited to: 7. Acts of God i.e. fire, drought, flood, earthquake, epidemics, natural disasters etc. ii, Explosions or accidents, air crashes and shipwrecks, act of terrorism. iti. Strikes or look outs, industrial dispute. 79. Non-availability of cement, steel or other construction material due to strikes of manufacturers, suppliers, y. transporters or other intermediaries or due to any reason whatsoever. vi. War and hostilities of war, riots, bandh, act of terrorism or civil commotion.
The promulgation or amendment in any law, rules or regulation or the issue of any injunction court order or direction from any government authority that prevents or restricts the party/company from complying with any with other authority or if any other authority or if any competent authority (ies) refuses, delays, withholds, denies the grant of neccessary approvals for the said complex/said building of if any matters, issues relating to such approvals, permissions, notices, notifications by the compitant authority(ies) become subject matter of any suit/writ before a competent court or any other Quasi Judicial Body or for any other reason whatsoever. अतः विपक्षी मा0 एन.सी.एल.टी. के समक्ष प्रकरण लम्बित होने की अवधि दिनांक 04.03.2046 से 34.08.2048 कुल 9१0 दिनों की अवधि का लाभ प्राप्त करने का अधिकारी है। उपरोक्त अवधि में परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज wf प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 WT अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.032020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु He निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं० 2
शिकायतकर्ता का कहना है कि परियोजना स्थल पर किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं किया जा रहा है और विपक्षी की परियोजना 60 माह विलम्बित है। विपक्षी द्वारा यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जानें की अवधि तक प्री-ई.एम.आई. की धनराशि का भुगतान किया जाना था, जो कि विपक्षी द्वारा नहीं किया जा रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। जिस पर विपक्षी का कहना है कि प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में चारों वांछित प्रमाण-पत्र प्राप्त किये जा चुके हैं। परियोजना का 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 22,99,000/- रूपये का भुगतान किया गया है एवं 46,8,722/— रूपये का भुगतान किया जाना अवशेष है, अवशेष धनराशि के भुगतान के उपरान्त शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक Walt कर दिया जायेगा। परियोजना के टॉवर संख्या- प- के आवंटियो को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा एवं टॉवर संख्या-प-2 एवं 3 के आवंटियो को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदान कर दिया जायेगा। जहाँ तक क्रेता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्रावधानों को समग्र रूप से पढा जाना आवश्यक है, ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा Ue | रेरा एक्ट की धारा 48 (4) 4 प्रावधान है कि — "Section 78 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to ह give possession of an apartment, plot or building,
in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for \ any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ ” to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder / का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल gee सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :-
“32 The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on, (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्रावधानों से यह we है कि “रियल wee सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके wh ee होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस अथॉरिटी का है। इस कम में मा. मुम्बई उच्च न्यायालय द्वारा नीलकमल रियलटर्स सब॒अरबन प्रा.लि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया, जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर-424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :- +]24, The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind, It is already submitted during the course of hearing that in. many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing </
directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 7I refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 42, 44, 48 and 29, 4 promoter could very well put up his case before the adjudicator who deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on failure to complete the development work.” उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर ‘by moulding reliefs by granting interest, ६९/7९/5207: interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transi directions for timely completion ०, roject, transit. accommodation during completion of project, so on and so forth of project, so on_ and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। एलोटीज द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में सन्तुलन के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया”
(744 /207) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर-40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है :- "40, As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers ave earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ......s-ese0e Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." we
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा vat vent में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं Wr एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबजेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप Roos का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “erage” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन“, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “Wa होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन न होगा। के विषय में “कन्सेन्सस्” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। —- AI डेट” ww के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /207 बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में दिनांक 23.07.2049 को परित आदेश के पृष्ठ संख्या-244 के प्रस्तर-420 में निम्नवत् उल्लेख किया है:-
20. "It is apparent that RERA intends protection of home- buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have to be completed, for that, we are required to pass orders. We have already assigned the task to NBCC for completion of buildings as the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixed and the time which could have been extended. Now, more than 0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years period by the promoter/builder.The maximum time fixed in RERA has also expired and extension could not have been beyond | year." उक्तानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि प्रोमोटर्स द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यों को पूर्ण कराते हुए गृहकेताओं को उनका आवास फ्लैट मिल सके। तत्क्रमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के प्रस्तर-437 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’interest and at the same time to hold them responsible for the duties enjoined upon them under the said statute. We are not absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project." A
उक्त आब्जर्वेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहकेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य रेरा का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्ब होने पर गृहकेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना पूर्ण होने तक नियमानुसार ब्याज पा सके। इसी के पश्चात् पुनः रेरा के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43 // 2049 पायनियर अर्बन लैन्ड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में दिनांक 09.08.209 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream is shattered, or at least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable."
उक्त आदेश में महत्वपूर्ण आब्जर्वेशन यह दिया गया है कि रेरा का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में फलस्वरूप पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य (Recalcitrant) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि किश्तों का समय से भुगतान करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके। ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य, परियोजना को फलस्वरूप प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा सम्यक रूप से अपनी किश्तों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्ब होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान करें। । गा
पत्रावली पर उपलब्ध स्थलीय निरीक्षण आख्या दिनांकित 09.06.2022 के बिन्दु संख्या-6 के अवलोकन से विदित है कि टॉवर संख्या- '- का सम्पूर्ण निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है और विपक्षी द्वारा की प्रश्नगत परियोजना के टॉवर संख्या- प- के सम्बन्ध में चारों वांछित प्रमाण पत्र प्राप्त किया जा चुके हैं और टॉवर संख्या-प-2 एवं प-3 के आवंटियो को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदान कर दिया जायेगा। स्पष्ट है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है तथा परियोजना के अन्य आवंटी कब्जे हेतु प्रतिक्षारत हैं। समस्त परिस्थितियों को देखते हुए न््यायहित में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता परियोजना पूर्ण होने पर कब्जा लें। उसके बाद वे स्वयं यूनिट के भविष्य हेतु उपयोग के सम्बन्ध में निर्णय ले सकते हैं। वैसे भी शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में निवेश कब्जे हेतु किया गया था, जिसका उपयोग विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण में किया गया है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में शिकायतकर्ता को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। यदि विपक्षी द्वारा टॉवर Perri के शिकायतकर्तागण को दिनांक 34.2.2022 तक एवं टॉवर संख्या-7-2 एवं T-3 के शिकायतकर्तागण को दिनांक 30.06.2023 तक शिकायतकर्तागण को परियोजना पूर्ण कर कब्जा नहीं दिया जाता है, तो उसके तुरन्त बाद शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि ब्याज सहित वापस किया जाना उपयुक्त होगा। निस्तारण बिन्दु सं0-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 3
यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी एवं शिकायंतकर्ता के मध्य आवंटन / अनुबंध पत्र दिनांक 30.40.2045 को निष्पादित किया गया था, जिसके प्रस्तर-23 के अनुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2006 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि दिनांक 30.06.2047 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। चूंकि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 04.03.20i6 से 34.08.2048 कुल 9१0 दिनों तक Ho एन.सी.एल.टी. द्वारा पारित आदेश के कारण परियोजना के निर्माण कार्य बाधित रहा। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान किये जाने की अवधि दिनांक 30.06.20i7 + 9i0 दिन अर्थात् दिनांक 27.2.20I9 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 28.42.2049 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के ”“नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि — रा 0
"Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession, The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." aa उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय//पदट्टा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय, पद्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। है शा 4 जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,//2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने या कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर ब्याज पाने के अधिकारी होगें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं:- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह cee Gerri के शिकायतकर्तागण की यूनिद्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.42.2022 तक एवं टॉवर संख्या-7-2 एवं -3 के शिकायतकर्तागण को दिनांक 30.06.2023 तक ivi. JOS. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और ca KI शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री ped |
2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 28.42.209 से ओ.सी/सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप SRT गणना की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड ao एन.सी.एल.टी. द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 को दृष्टिगत रखते हुए निस्तारण बिन्दु der में उललेखित अवधि में विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की : a जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। : विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 20I6 के धारा 2 (Gai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ४८ा॥९+ प्रतिशत है। ः विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि सभी ante अनुबंध पत्र के प्राविधानों के अनुरूप अधिरोपित करेंगें एवं उक्त अधिरोपित धनराशि के सम्बन्ध में गणना शीट शिकायतकर्तागण को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। | विपक्षी टॉवर Veer के शिकायतकर्तागण को दिनांक 32.:2.2022 तक
कब्जा देने में असफल रहता है, तो दिनांक 34.2.2022 के पश्चात् 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि MCLR+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें एवं टॉवर संख्या- प्-2 एवं 7-3 शिकायतकर्तागण को दिनांक 30.06.2023 तक कब्जा देने में असफल रहता है, तो दिनांक 30.06.2023 के पश्चात् 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि MCLR+] प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें और यूनिट के सापेक्ष बैंक द्वारा ऋण के माध्यम से प्राप्त की गई धनराशि बैंक को वापस अदा करना सुनिश्चित करें। . इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। . इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। . यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। दिनांक — 27/09 / 2022 ‘ Kw PA (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण ॥ 5