Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Brijraj Singh Rathore v. Rudra Buildwell Projects Private Limited
Complaint No. NCR144/03/91339/2022
- Decision date
- 2026-02-13
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:-- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | यूनिट न0 | जमा धनराशि रु0 अनुबंध की अनुबंधानुसार [| वांछित ष सं० तिथि कब्जा दिये जाने की तिथि I. | ४८२44/03/9339/2022 | ब्रिजराज सिंह B6-08 | रु0 45,34,879,//_ | 05.2.2043 | 36 माह + 42 | यूनिट का राठौर व श्रीमती माह अनुग्रह कब्जा व राजेश कंवर अवधि अर्थात विलम्बित दिसम्बर 20:7 | अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम रूद्रा बिल्डवेल प्रोजेक्ट्स प्रा.लि. 'शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यहशिकायत संस्थित की गयी है।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता-का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RUDRA PALACE HEIGHTS में यूनिट संख्या बी5-4॥08 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि रु0 45,34,879,//-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना पैलेस हाईट्स टॉवर सी-2 में यूनिट संख्या 4404 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट के सम्बन्ध में दिनांक 43.02.2042 को अपार्टमेंट बायर witic निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा दिनांक 42.4.20: को डिमांड नोटिस जारी किया गया शिकायतकर्ता द्वारा समय समय पर धनराशि का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता नियमित रूप से परियोजना में निर्माण कार्य की प्रगति को देखने जाता था। यह पाया गया कि परियोजना में निर्माण कार्य नहीं हो रहा है। विपक्षी द्वारा दिनांक 27.09.2043 को मांग पत्र जारी किया गया और विपक्षी द्वारा पेमेंट प्लान फ्लेक्सी पेमेंट प्लान से कन्सट्रक्शन लिंक्ड प्लान में सुपर एरिया को बढ़ाते — उ है
हुए परिवर्तित कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट संख्या i704 से यूनिट संख्या 408 टॉवर बी-6 में परिवर्तित कर दी गयी। इसके उपरांत विपक्षी द्वारा दिनांक 05.42.20:3 को बढ़े हुए एरिया के सम्बन्ध में अपार्टमेंट बायर एग्रीमेंट निष्पादित किया गया जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 36 माह में दिया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र के अनुसार देय धनराशि का समय समय पर भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंध के अनुसार 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगाया गया है। इस सम्बन्ध में शिकायतकर्ता द्वारा धीरेश पांडेय बनाम अपीलीय अधिकरण व सेकेंड अपील 268/208 का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम की धारा 44, 2, 73 ate का उल्लेख किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ विलम्बित अवधि का ब्याज व रु0 50 हजार विधिक खर्च दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत-कै समर्थन में लिखित:कथन, आवेदन फार्म, अनुबंध पत्र, त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, पेमेंट विवरण, प्रतिउत्तर व रसीदों की छाया प्रतियां दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता.द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम od दिनांक भुगतान की गई धनराशि [संख्या (रु0)
4 विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 69 49.42.200 BO ,20,000 / रसीद संख्या 4007 20.06.2044 wo 960/ रसीद संख्या 4339 43.42.204 रु०0 90,000 / रसीद संख्या 7498 48.04.2042 BO 37.89 / रसीद संख्या 6084 27.08.204 रु0 8,75,838 / रसीद संख्या 7096 03.2.204 रु0 ,36,305 / रसीद संख्या 7098 03.42.2044 wo 4,349 / रसीद संख्या 7958 44.03.2045 BO ,40,654 / रसीद संख्या 956 23.07.2045 BO ,29,584 / कुल योग : SO 5,34,879 / विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति दाखिल की गयी जिसमें यह उल्लिखित है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या die /i:08 बुक करायी गई थी जिसके सापेक्ष दिनांक 24.07.205 को बायर एग्रीमेंट निष्पादित हुआ। अनुबंध के अनुसार यूनिट का कब्जा 36 माह तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ जनवरी 2048 में दिया 2 = |
जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा कन्सट्रक्शन पेमेंट प्लान के अन्तर्गत यूनिट बुक करायी गयी थी। शिकायतकर्ता द्वारा धनराशि Go 5,34,879 / का भुगतान किया गया है। विपक्षी की परियोजना में किसान आन्दोलन, माननीय उच्च न्यायालय व माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के कारण वर्ष 2040 से 2045 तक निर्माण कार्य बंद रहा है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि कोविड-49 महामारी के कारण रेरा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 06.06.2020 के आदेश के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने के लिए 6 माह का समय विस्तार किया गया। विपक्षी द्वारा यह उल्लिखित किया गया है कि किसान आन्दोलन के कारण भूमि पर कार्य प्रारम्भ नहीं हो सका। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा Re संख्या सी-37443 / 2044 गजराज व अन्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य में आदेश पारित करते हुये अधिग्रहण को निरस्त कर दिया गया तथा 64.7 प्रतिशत क्षतिपूर्ति भी भुगतान किये जाने का निर्देश दिया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 44.05.2045 को सावित्री देवी बनाम स्टेट ऑफ यूपी में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 2.0.204 को पारित आदेश को “स्थगित कर दिया गयाँ॥ इस प्रकार परियोजना में निर्माण कार्य af 200 से 2045 तक<बाधित रहा है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा एन.जी.टी के आदेश से समय समय पर निर्माण कार्य प्रतिबन्ध किये जाने के कारण परियोजना विलम्बित होने का तर्क प्रस्तुत किया है। विपक्षी शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 2024 तक दिये जाने तथा विलम्बित अवधि का ब्याज ऑफर ऑफ पजेशन के समय समायोजित किये जाने को तैयार है।
शिकायतकर्ता द्वारा प्रतिउत्तर विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक TER का खण्डन करते हुए यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज तथा क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में अतिरिक्त अभिलेख दाखिल किये गये है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। उभयपक्षों के तर्कों को सुना गया। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये हैं :- 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न GA :- प्रश्न RT इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 // 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo feo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54. From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed
that’the® projects already’ completed"or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू 4 ——s होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRI7895 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न Gea निस्तारित किया जाता है।
निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह प्रश्न विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया है कि aifae—i9 महामारी व अन्य फोर्स Ava के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट- में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised 09) से (फोर्स७मैज्योर& माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा'पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा ।” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:-
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:-- 5 —— SS “in the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed. ”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-t-20I9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण; ord पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक o9—42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को ser हुए, आंशिक प्रतिब॒न्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनाक o4=t4-20I9 से दिनांक 09-72—209) एवं 33 दिन(6652) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02—2020 तक uta 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। है। इसके अतिरिक्त Beto महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 WI अथॉरिटी द्वारा दिनांक. 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त 6 —_——_== अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
इस प्रकरण में विपक्षी द्वारा किसी भी न्यायालय का न तो स्थगन आदेश का उल्लेख किया गया है और न ही साक्ष्य दाखिल किया गया है। अतः: उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3:- प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता द्वारा-यूनिट.का कब्जा व. विलम्बित अवधि का बयाज दिलाये जाने का अनुरोध किया गयाहहै। विपक्षी की ओर से शिकायतकर्ता के प्रकरण में दाखिल लिखित आपत्ति में यह तर्क दिया गया कि परियोजना फोर्स मैज्योर व कोविड-49 महामारी के कारण विलम्बित हुई है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2024 में उपलब्ध कराये जाने का उल्लेख किया गया है। पत्रावली के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में var आवंटित यूनिट बुक कराई थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता व विपक्षी के मध्य दिनांक 05.42.2043 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा 36 माह तथा 42 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात दिसम्बर 207 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का प्राप्त नहीं हुआ है। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति में शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा जून 2024 में उपलब्ध कराये जाने का ad —_——
उल्लेख किया गया है तो यह समय अवधि भी बीत चुकी है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण होने के सम्बंध में कोई साक्ष्य पत्रावली पर प्रस्तुत नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना अभी पूर्ण नही है और न ही विपक्षी को ओ.सी/सी.सी प्राप्त है जबकि शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा दिसम्बर 207 में प्राप्त होना था। इस प्रकार विपक्षी कि परियोजना लगभग os वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। ऐसी स्थिति में परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहते है तो उक्त के सम्बन्ध में रेरा अधिनियम की धारा 48 (a में यह प्रावधान दिया गया है कि परियोजना विलम्बित होने के बावजूद भी यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहते है तो आवंटी को परियोजना पूर्ण होने तक प्रतीक्षा करना होगा। उपरोक्त वर्णित प्राविधान के अनुसार शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि-तक का<ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649—50//20:8 “BREF लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः-
"the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण विलम्ब ब्याज पाने के अधिकारी होगे। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “forma रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- बनना खाक 8
"Section I8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के. अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन औरू»विकास) .(विंकय /पटटा*-के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयीं हैं। इसमें Gere के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wear oi AF 'प्रमोटर"के"डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +I% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination i alt notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.3() में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को |४८,२+]प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्तागण की कोई धनराशि —_—. 9
अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। TGR प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। शिकायतकर्ता द्वारा जो क्षतिपूर्ति (Compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति (Compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेरा अधिनियम की धारा 7 के अन्तर्गत न््यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अतः पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश i विपक्षी को आदेशित किया जाता Bf वह*आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन. के भीतर -शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर शिकायतकर्ता को aided पत्र&अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी के>साथ यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं | विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 07.0i.208 से SA /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा घनराशि GO 45,34,879,/ पर ४०३५१ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 0
—— बट. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(०() के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी ८१५३ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का Soo भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता आदेश का क्रियान्वयन रेरा प्राधिकरण के माध्यम से करा सकेगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड fat जाये। sere) व हि (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर