Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mamta Goswami v. M/s. Jss Buildcon Private Limited
Complaint No. NCR144/03/91313/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Not recorded
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- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Codex, Luna 6), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Order under Section-34, Bench-II Present: Mrs. Kalpana Mishra, Member Serial No. Complaint Number Complainant | / | 8a244/03/9798/2022[?] Neeraj Garg and Pulkit Garg 2. NCR44/03/9824/2022 Pomya Garg and Indu Garg 3. NCR44/03/933/2022 Mamta Goswami | * | NCR44/0I/88435/2022 Kapil Dev Shah | » | Patara44/0/88739/2022[?] Ta[?] Kumar Tevatiya | “ | NCRI44/0I/88575/2022 Satyavan Gupta 7. NCRI44/40/830I5/202I Arvind Kumar Versus J.S.S. Buildcon Pvt. Ltd.[?] Complaints have been filed against the respondent by the complainants Neeraj Garg and Pulkit Garg, together with 6 other complainants. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to Tower Nos. P-[?], 1-2 and 3 of the respondent's project, NcR MONARCH. Accordingly, they are being disposed of by a single decision. Complaint No. Tara44/03/9798/2022[?], Neeraj Garg and Pulkit Garg, shall be the lead case. The present complaint application has been instituted by the complainant against the respondent to obtain possession and interest for the period of delay.
Briefly, the complainant states that they booked Unit No. T-I/B-707 in the respondent's project NCR MONARCH, the total price of which is Rs. 4,35,250/—, against which the complainant paid Rs. 33,04,823 /-. The complainant states that the respondent's project is delayed by 4 years and 7 months, and that the respondent has neither completed construction of the project in question nor obtained the O.C./C.C. from the competent authority. The complainant also states that at[?] per cent of the amount payable for the unit has already been paid. The respondent has still not given possession to the complainant. Accordingly, the complainant has requested possession and interest for the period of delay against the respondent. In support of their statement, the complainant has filed photocopies of the detailed written complaint application, the agreement, the statement of account, receipts[?] for the deposited amount, the welcome letter dated 08.07.2044, and other documents.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अंतर्गत धारा-34, पीठ-॥ उपस्थिति:- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य क्रम सं0 शिकायत संख्या शिकायतकर्ता | / | ८ा२44/03/9798/2022 नीरज गर्ग एवं पुलकित गर्ग 2. NCR44/03/9824/2022 पोम्या गर्ग एवं इंदु गर्ग 3. NCR44/03/933/2022 ममता गोस्वामी | * | NCR44/0I/88435/2022 कपिल देव शाह | » | पटारा44/0/88739/2022 Ta कुमार तेवतिय | “ | NCRI44/0I/88575/2022 सत्यवान गुप्ता 7. NCRI44/40/830I5/202I अरविन्द कुमार बनाम Fo जे.एस.एस बिल्डकॉन yo feo शिकायतकर्ता नीरज गर्ग एवं पुलकित गर्ग के साथ 6 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध शिकायतें योजित की गयी हैं। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें विपक्षी की परियोजना NcR MONARCH के टॉवर संख्या प-, १-2 एवं 3 से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Wo टारा44/03/9798/2022 नीरज गर्ग एवं पुलकित गर्ग अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना NCR MONARCH में यूनिट Go—-T-I/B-707 बुक की गई थी, जिसकी कुल कीमत 4,35,250/— रूपये है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 33,04,823 /- रूपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की परियोजना 4 वर्ष 7 माह विलम्बित है और अभी तक विपक्षी द्वारा प्रश्नगनत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही सक्षम प्राधिकरण से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उनके द्वारा यूनिट के सापेक्ष at प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जा चुका की गई है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता 4 i al को अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में विस्तरित लिखित शिकायत प्रार्थना पत्र, अनुबन्ध पत्र, खाता विवरण, जमा धनराशि की wie एवं स्वागत पत्र दिनांकित 08.07.2044 आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में जवाब दाखिल करते हुए किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विधि का दुरूपयोग करते हुए शिकायत प्राधिकरण के समक्ष योजित की गई है। विपक्षी द्वारा अंकित किया गया है कि परियोजना के मूल ले-आउट में परिवर्तन, अनुबंध-पत्र में उल्लेखित प्राविधान के अनुसार है जिसमें स्पष्ट रूप से अंकित है कि उक्त ले-आउट प्लान अनिश्चित है, जोकि सक्षम प्राधिकरण के अनुमोदन के उपरान्त परिवर्तित होने की सम्भावना है। प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 2046 से अक्टूबर 20i8 तक मा0 Wad. द्वारा वाद संख्या-0730घ0 /2046 में पारित आदेश दिनांक 04.03.2076 में विक्रय पर लगाई गई रोक के कारण प्रभावित रहा मा0 एन.सी.एल.टी. के उक्त आदेश के कारण आवेदकों की बुकिंग रुक गई और जिन आवंटियों द्वारा इकाई बुक की गई, वे अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान हेतु तैयार नहीं थे, जिसके कारण निर्माण कार्य कथित तौर पर मई 2046 के अंत तक ठप हो गया और विपक्षी द्वारा केवल फ्लैट खरीदारों से एकत्र किए गए धन से परियोजना का निर्माण किया जा रहा था। Alo एन.सी.एल.टी. द्वारा दिनांक 3t.0820i8 को पारित किया गया। उक्त अवधि में आवंटियों से निर्धारित धनराशि प्राप्त न कर पाने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा। ग्रेटर नोएडा औद्यौगिक विकास प्राधिकरण किये गये भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में किसानों द्वारा मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष Re याचिका संख्या-47068 / 2009 हरकरन सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी. योजित की गई जिसमें mo उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में विपक्षी के पक्ष में निष्पादित लीज डीड रद्द कर दी गई और विपक्षी द्वारा कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही पुनः प्रारम्भ की गई जिसके उपरान्त परियोजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। मा0 एनजीटी और माननीय सर्वोच्च द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध, afas—i9 की वैश्विक महामारी के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा। प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में चारों वांछित प्रमाण-पत्र प्राप्त किये जा चुके हैं। परियोजना का 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 32,60,038 //- रूपये का भुगतान किया गया है एवं 33,43,34 /- रूपये का भुगतान किया जाना अवशेष है और शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष धनराशि के भुगतान के उपरान्त यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा। विपक्षी द्वारा यह भी कथन किया गया है कि परियोजना के टॉवर संख्या- प- के आवंटियो को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा एवं टॉवर संख्या-ग-
ew 2 2 एवं प-3 के आवंटियो को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदांन कर दिया जायेगा। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में ao एन.सी.एल.टी. द्वारा पारित आदेश, विभिन्न पत्रों, माननीय एन.सी.एल.टी के आदेश की छायाप्रतियां ई-मेल के माध्यम से पीठ को उपलब्ध करायी गयी हैं। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- 4... क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव ? 2. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु सं-4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परिय बिन्दु wo- इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य मार्च 20I6 से अक्टूबर 20I8 तक HO एन.सी.एल.टी. द्वारा वाद संख्या-0730४9 ,/ 2046 में पारित आदेश दिनांक 04.03.2046 में विक्रय पर लगाई गई रोक के कारण प्रभावित रहा wo एन.सी.एल.टी. के var आदेश के कारण आवेदकों की बुकिंग रुक गई और जिन आवंटियों द्वारा इकाई बुक की गई, वे अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान हेतु तैयार नहीं थे, जिसके कारण निर्माण कार्य कथित तौर पर मई 2046 के अंत तक ठप हो गया और विपक्षी द्वारा केवल फ्लैट खरीदारों से एकत्र किए गए धन से परियोजना का निर्माण किया जा रहा था। Alo एन.सी.एल. टी. द्वारा दिनांक 3.08.2048 को पारित किया गया। उक्त अवधि में आवंटियों से निर्धारित धनराशि प्राप्त न कर पाने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा। ग्रेटर नोएडा औद्यौगिक विकास प्राधिकरण किये गये भूमि अधिग्रहण के सम्बन्ध में किसानों द्वारा मा0 उच्च न्यायालय के समक्ष Re याचिका संख्या-47068 / 2009 हरकरन सिंह बनाम स्टेट ऑफ यूपी. योजित की गई जिसमें ao उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश में विपक्षी के पक्ष में निष्पादित लीज डीड रद्द कर दी गई और विपक्षी द्वारा कानूनी और प्रशासनिक कार्यवाही पुनः प्रारम्भ की गई जिसके उपरान्त परियोजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। मा0 एनजीटी और माननीय eo सर्वोच्च द्वारा लगाये गये प्रतिबन्ध, aific-i9 की वैश्विक महामारी के कारण परियोजना का निर्माण कार्य प्रभावित रहा | आवंटन» अनुबन्ध पत्र में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्नलिखित प्राविधान दिये गये हैं :-
j. Force Majeure Clause: means any event or combination of events or circumstances beyond the control of theCompany which cannot (a) by the exercise of reasonable diligence, or (b) despite the adoption of reasonableprecaution and/ or alternative measures, be prevented, or caused to be prevented, and which adversely affects the Company's ability to perform obligations under this Application, which shall include but not be limited to: i, Acts of God i.e. fire, drought, flood, earthquake, epidemics, natural disasters etc. ii. Explosions or accidents, air crashes and shipwrecks, act of terrorism. iii, Strikes or look outs, industrial dispute. iv. Non-availability of cement, steel or other construction material due to strikes of manufacturers, suppliers, y. transporters or other intermediaries or due to any reason whatsoever. vi. War and hostilities of war, riots, bandh, act of terrorism or civil commotion.
The promulgation or amendment in any law, rules or regulation or the issue of any injunction court order or direction from any government authority that prevents or restricts the party/company from complying with any with other authority or if any other authority or if any competent authority (ies) refuses, delays, withholds, denies the grant of neccessary approvals for the said complex/said building of if any matters, issues relating to such approvals, permissions, notices, notifications by the compitant authority(ies) become subject matter of any suit/writ before a competent court or any other Quasi Judicial Body or for any other reason whatsoever. अतः: विपक्षी ao एन.सी.एल.टी. के समक्ष प्रकरण लम्बित होने की अवधि दिनांक 04.03.206 से 34.08.2048 कुल 9१0 दिनों की अवधि का लाभ प्राप्त करने का अधिकारी है। उपरोक्त अवधि में परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। oa
समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर gree के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या- निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं0-2 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की परियोजना 4 वर्ष 7 माह विलम्बित है और अभी तक विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं किया गया है और न ही सक्षम प्राधिकरण से ओ.सी./सी.सी. प्राप्त किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उनके द्वारा यूनिट के सापेक्ष ai प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जा चुका की गई है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
जिस पर विपक्षी द्वारा जवाब दाखिल करते हुए कहा गया है कि प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में चारों वांछित प्रमाण-पत्र प्राप्त किये जा चुके हैं। परियोजना का 90 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष 32,60,038 /- रूपये का भुगतान किया गया है एवं 33,3,34 /— रूपये का भुगतान किया जाना अवशेष है, अवशेष धनराशि के भुगतान के उपरान्त शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा। परियोजना के टॉवर संख्या- प-। के आवंटियो को यूनिट का कब्जा अगस्त 2022 तक प्रदान कर दिया जायेगा एवं टॉवर संख्या-प-2 एवं प-3 के आवंटियो को यूनिट का कब्जा जून 2023 तक प्रदान कर दिया जायेगा। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबंध पत्र की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ सं0-6 के प्रस्तर-27 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा निर्माण कार्य शुरू किये जाने की तिथि 04.42.2042 से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। sar यूनिट का आवंटन शिकायतकर्ता के पक्ष में दिनांक 05.04.2043 को किया गया है ऐसे में उपरोक्तानुसार 05.04.2043 से 36 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 05.07.20i6 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। चूंकि प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य दिनांक 04.03.206 से 34.08.2048 कुल ot0 दिनों तक मा0 एन.सी.एल.टी. द्वारा पारित आदेश के कारण परियोजना के निर्माण कार्य बाधित रहा। ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता को कब्जा प्रदान किये जाने की अवधि दिनांक Yo
24.04.2047 + 90 दिन अर्थात् दिनांक 04.04.2049 तक विपक्षी यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 02.04.2049 से ओ.सी.,/ सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स waada प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable.
aa: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, wife wed द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 7.0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार) नियमावली 2078 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पदूटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wae 9.2()) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any ov 6 head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील सं0 6649-50 ,/ 2048 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि +- "the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने के अधिकारी होगें।
जैसा कि सभी जन-मानस को ज्ञात है कि विश्व के सभी देशों में कोरोना वायरस जैसी महामारी का संक्रमण व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। ऐसी स्थिति में कोविड-49 (Corona Virus Disease) की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु सम्पूर्ण देश में दिनांक 24.03.2020 को लॉकडाउन की घोषणा की गयी थी, लॉकडाउन की परिस्थिति में सभी कार्यों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था, जिससे की सभी क्षेत्र प्रभावित हुए और इसमें रियल gee सेक्टर भी सम्मिलित है। न््यायहित में इसी को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 Peake किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं। Yor आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह टावर Gerri के शिकायतकर्तागण की यूनिद्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र/ अनुबन्ध पत्र के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 3t.422022 तक एवं टॉवर संख्या-7-2 एवं १-3 के शिकायतकर्तागण को दिनांक 30.06.2023 तक ओ.सी. JOM. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय KIT Yow प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 02.04.209 से ओ.सी/सी-सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाये। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड ao एन.सी.एल.टी. द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 को दृष्टिगत रखते हुए निस्तारण बिन्दु संख्या-4 में उल्लेखित अवधि में विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 3. विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (०00) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ॥४टा४+ प्रतिशत है। 4. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि सभी चार्जेस अनुबंध पत्र के प्राविधानों के अनुरूप अधिरोपितं करेंगें एवं vat अधिरोपित धनराशि के सम्बन्ध में गणना शीट शिकायतकर्तागण को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। 6. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Oo” \ 7. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें। दिनांक:- 27 ,/ 09 / 2022 Yan (कल्पना मिश्रा) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण