Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Amitabh Vikkram v. Mahagun (India) Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/03/90836/2022
- Decision date
- 2026-02-19
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 / 63 सपठित नियम-24 42-शिकायत WA:—NCR44/03/90836/2022 अमिताभ विक्रम बनाम महागुन (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 47.02.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता स्वयं उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री संजना उपस्थित हुई | उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही उसके पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। प्रश्नगत शिकायत में माननीय पीठ-0ए द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 49.07.2022 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. प्रस्तुत प्रकरण में दी गयी धनराशि के रिफण्ड का अनुतोष निरस्त किया जाता है। 2... शिकायतकर्ता यदि कब्जा लेने का निर्णय लेते हैं तो ऐसी स्थिति में:- (क) विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 30.09.2022 तक फ्लैट का कब्जा दें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित we |
:-<(ख) विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनाक 08.06.2048 से ओसी. / सीसी प्राप्त किये जाने ऐी. तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो. तक की अवधि पर पे et द्वारा स्वयं जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+ प्रतिशत onde अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनाक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि अनुबन्धानुसार अथवा कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। = (ग) विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(४४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी धटा॥रता - प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की घनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 3. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 4... यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा wary |
विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 49.07.2022 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया war) उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-04 (पूर्व में पीठ-0ए) द्वारा दिनांक 42.06.2025 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है किः- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम-24 में निहित शक्तियों के अधीन पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 49-07-2022 @ WER-02 (क) के अनुसार प्रश्नगत फ्लैट के भौतिक कब्जे एवं रजिस्ट्री की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई क॑ लिए, दिनांक 05-08-2025 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 49--07-2022 के प्रस्तर-02(ख) के अनुसार दिनांक 3i-07—-2025 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की Gk हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को की तिथि से पूर्व मा. न्यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। SS क्रि/विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत धारा-34, दिनांक 9-07—2022 का समयबद्ध प से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं।
तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38 /40 / 63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण मा. पीठ-04 (पूर्व में पीठ--04ए) द्वारा पारित आदेश दिनांक 42.06.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई। & इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार निर्देशित किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को वैध ओ.सी./सी.सी. सहित बकाया eal की मांग सहित कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित नहीं किया गया। शिकायतकर्ता का कथन है कि मौके पर यूनिट तैयार नहीं है और न ही विपक्षी के पास ved परियोजना /यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त है। ऐसी स्थिति में माननीय रेरा पीठ द्वारा पारित आदेश दिनांक 49.07.2022 का अनुपालन न होने के कारण विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित किया जाना आवश्यक है। माननीय Wr पीठ-04 (पूर्व में पीठ-04ए) द्वारा पारित आदेश दिनांक 42.06.2025 में स्पष्ट रूप से veers है कि:- “यदि मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी नियम-24 की कार्यवाही के दौरान यह पाते हैं कि विपक्षी / प्रोमोटर द्वारा आदेश अन्तर्गत aei—st, दिनांक 49--07--2022 का समयबद्ध रूप से अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है, तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी प्रकरण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर wad oI" अतः माननीय Yer पीठ-04 (ad में पीठ-04ए) द्वारा पारित आदेश दिनांक 42.06. 2025 के अनुसार प्रश्नगत पत्रावली धारा-63 के अन्तर्गत विपक्षी द्वारा आदेश का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी के विरुद्ध धारा-63 के अन्तर्गत पेनल्टी /अर्थदण्ड अधिरोपित
#अर्थदण्ड अधिरोपित करने तथा ओ.सी./सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त यदि ward पीठ पत्रावली इस पीठ को संदर्भित करती है, तो इस पीठ द्वारा शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा दिलाये जाने एवं शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराये जाने हेतु अग्रिम कार्यवाही की जायेगी। आदेश रेरा पोर्टल पर अपलोड किया जाये। अतः प्रश्नगत पत्रावली सम्बन्धित पीठ को पीठ के आदेश के निर्देशानुसार वापस की जाये। eh (व आर. पी. figs? । (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण