Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
seema singhal v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/03/90805/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-12-31
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
E-Court U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, H-469, Gamma-2, Greater Noida, Gautam Buddh Nagar-204308. Hearing Bench-04 (formerly Bench-04-A) Decision and order under Section 39 Presiding Officer: Shri Sanjay R. Bhusareddy, Chairman Complaint No.: Sect-39/l/NCR44/03/90805/2022 La Residencia Developers Pvt. Ltd. Versus Seema Singhal The case was heard through video conferencing on [?] 44--0-2025. When called, on behalf of the applicant/builder, the proxy advocate of learned advocate Shri [?] Kumar, Shri Puneet Jain, appeared. On behalf of the respondent/allottee, learned advocate Shri Manas Rai appeared. The Bench, after hearing the submissions of the learned advocates of both parties in detail, reserved the file for order on the same date, 44-40-2025. The application in question was submitted by the applicant/builder through the RERA portal on 04-03-2025, and a detailed written application under Section 39, undated, was physically submitted on 03-03-2025.
In the above applications the applicant/builder has stated that the allottee has paid only Rs. 2,00,000/- against the price of the unit in question, which is Rs. 36,00,000/-. The allottee has uploaded a bank statement, which shows that on 22-4[?]-20[?]7, by cheque, Rs. 0,00,000/- was paid to "Newtek La Palesia Pvt. Ltd.", which has no connection with the applicant/builder (La Residencia Developers Pvt. Ltd.). The applicant/builder has received no amount from the allottee other than Rs. 2,00,000/-, which is recorded and mentioned in the applicant/builder's payment ledger. The allottee [remainder of this paragraph is illegible]. Facts were wrongly presented and false documents were filed, as a result of which an ex parte final order was obtained on 03-04-2023, in which, on the basis of the facts put forward by the allottee, the amount paid by the allottee, which should have been recorded as Rs. 2,00,000/-, was wrongly recorded as [?]2,00,000/-.
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-39 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: Sect-39/l/NCR44/03/90805/2022 ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि. बनाम सीमा सिंघल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दिनांक 44--0-2025 को की गई | पुकार पर प्रार्थी / बिल्डर की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री are कुमार के प्रॉक्सी अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। विपक्षी / आवंटी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री मानस राय उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के cat को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु, दिनांक 44-40-2025 को ही सुरक्षित की गयी।
प्रस्तुत प्रार्थना-पत्र प्रार्थी ,/ बिल्डर द्वारा दिनांक 04-03-2025 को रेरा पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत करने के साथ-साथ दिनांक 03-03-2025 को भौतिक रूप से विस्तृत / | लिखित प्रार्थना-पत्र तिथि रहित अन्तर्गत धारा-39 प्रस्तुत किया गया। प्रार्थी / बिल्डर “| err उपर्युक्त प्रार्थना-पत्रों में कहा गया है कि विपक्षी / आवंटी द्वारा प्रश्नगत यूनिट की Soe कीमत %.36,00,000/— के सापेक्ष सिर्फ रू.2,00,000,//- की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी (आवंटी) द्वारा एक बैंक स्टेटमेन्ट अपलोड किया गया है, जिसमें दिनांक 22-4:-20:7 को चेक के माध्यम से “न्यूटेक ला पलेसिया प्रा. लि.” को. रू.0,00,000,/- की धनराशि का भुगतान किया जाना प्रदर्शित किया गया है, जिसका. प्रार्थी/ बिल्डर (ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि.) से कोई सम्बन्ध नहीं है। प्रार्थी / बिल्डर. को विपक्षी (आवंटी) से रू.2,00,000,/- के अतिरिक्त कोई अन्य धनराशि प्राप्त नहीं हुई | है, जो कि प्रार्थी / बिल्डर के पेमेन्ट लेजर में अंकित » वर्णित है। विपक्षी "कट । Page I of 4 E-Court [तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और असत्य दस्तावेज जमा किये गये | जिसके परिणामस्वरूप दिनांक 03-04-2023 को एकपक्षीय अंतिम आदेश प्राप्त हुआ, | | जिसमें विपक्षी (आवंटी) द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर भुगतान की गयी धनराशि रू.2,00,000,/- के स्थान पर गलत तरीके से B.t2,00,000/— अंकित हो गयी है।
इसके अतिरिक्त विपक्षी (आवंटी) द्वारा सहमत शर्तों का पालन न करने तथा आवश्यक भुगतान न करने के कारण दिनांक 45-06-2048 को यूनिट निरस्त कर दी गयी थी। | इसलिए विपक्षी (आवंटी) को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा नहीं दिया जा सकता। हालांकि | विपक्षी (आवंटी) द्वारा सभी मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने पर प्रार्थी / बिल्डर, वैधानिक | | कटौतियों के बाद रू.2,00,000,/- की धनराशि वापस करने हेतु तैयार है। इन आधारों | | पर प्रार्थी / बिल्डर की ओर से पीठ द्वारा एकपक्षीय रूप से पारित अंतिम आदेश, दिनांक | 03-04-2023 में विपक्षी (आवंटी) द्वारा भुगतान की गयी अंकित धनराशि | रू.2,00,000 /— के स्थान पर रू.2,00,000 /— अंकित / संशोधित किये जाने तथा उक्त प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा-39 के निस्तारण तक, धारा-63 के अन्तर्गत अग्रिम कार्यवाही | | को स्थगित किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रार्थी / बिल्डर द्वारा अपने कथन के समर्थन में बैंक स्टेटमेन्ट, एप्लीकेन्ट लेजर, यूनिट निरस्तीकरण पत्र, दिनांक 45--06-2048 की प्रति, प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा-39, | दिनांक 22-05-2023 की प्रति, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। | प्रार्थी / बिल्डर के उक्त प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा-39 के विरूद्ध विपक्षी (आवंटी) | द्वारा अपना लिखित जवाब, दिनांक 06-06-2025 दाखिल करते हुए कहा गया है कि | प्रार्थी // बिल्डर द्वारा योजित उपर्युक्त प्रार्थना-पत्र धारा-39 के अन्तर्गत पोषणीय एवं | स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, क्योंकि विपक्षी (आवंटी) द्वारा प्रार्थी ,” बिल्डर को प्रश्नगत |
यूनिट की कुल कीमत रू.38,69,646,/- के सापेक्ष &.22,00,000/— की धनराशि का | भुगतान किया गया है। प्रार्थी / बिल्डर द्वारा ue यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये | जाने में विफलता के कारण, विपक्षी (आवंटी) द्वारा रेश अधिनियम, 2046 की ees | के अन्तर्गत प्रश्नगत शिकायत योजित की गयी थी। पीठ द्वारा जारी नोटिसों की तामीला | | होने के बावजूद veil /“ बिल्डर ने जानबूझकर अन्तर्गत धारा-34 की कार्यवाही में बचने | का प्रयास किया गया और पीठ के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, पीठ द्वारा | दिनांक 03-04-2023 को अंतिम आदेश पारित किया गया, परन्तु प्रार्थी / बिल्डर द्वारा | vat अंतिम आदेश, दिनांक 03-04-2023 का कोई अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया | | गया है। प्रार्थी / बिल्डर द्वारा पूर्व सूचना दिये बिना दिनांक 5-06-2048 को प्रश्नगत | | यूनिट को अवैधानिक रूप से निरस्त कर दिया गया था, परन्तु विपक्षी (आवंटी) को उक्त | निरस्तीकरण पत्र, दिनांक 45--06-2048 कभी भी प्राप्त नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त प्रार्थी / बिल्डर, उक्त निरस्तीकरण पत्र को भेजे जाने एवं विपक्षी (आवंटी) को विधिवत् प्राप्त होने के दावे को साबित करने के लिए स्पीड पोस्ट रसीद, कूरियर पावती, ई-मेल | Page 2 of 4 ७ मक (2८ ie =z i i x aa ९८: “a fog 2 / E-Court | सम्भव नहीं है।
| प्राथी / बिल्डर द्वारा यूनिट निरस्त करना पूर्णता अविधिक है। प्रार्थी /बिल्डर के अधिकारियों के कहने पर विपक्षी (आवंटी) द्वारा “न्यूटेक ला पलेसिया प्रा. लि.” को रू.0,00,000,/- की धनराशि का भुगतान किया गया था, जिन्होंने विपक्षी (आवंटी) को यह आश्वासन दिया था कि दोनों संस्थायें सहयोगी कम्पनियाँ हैं। इसके अतिरिक्त दोनों कम्पनियों के एक ही निदेशक हैं, जिनका नाम श्री संजीव कुमार है। प्रार्थी / बिल्डर, विपक्षी (आवंटी) की मेहनत की कमाई को हड़पने तथा अपने कानूनी एवं संविदात्मक | दायित्वों से बचने का जानबूझकर प्रयास कर रहा है। इन आधारों पर विपक्षी / आवंटी द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख करते हुए, weft / बिल्डर द्वारा योजित उपर्युक्त प्रार्थना-पत्र में अंकित तथ्यों / अभिकथनों का खण्डन कर, प्रश्नगत प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत aise को उपर्युक्तानुसार खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रस्तुत पत्रावली भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-39 के अन्तर्गत प्रस्तुत की गयी है, जो कि निम्नवत् प्राविधान्वित है:- “प्राधिकरण अभिलेख से ग्रकट किसी Teh को सुधारने की दृष्टि से इस अधिनियम के अधीन किये गये आदेश की तारीख से दो वर्ष की अवधि के ae किसी समय उसके द्वारा पारित किसी आदेश को संशोधित कर सकेगा और यदि पक्षकारों द्वार उसके ध्यान में गलती caret जाती & तो ऐसा संशोधन करेगाः- परन्तु ऐसा कोई संशोधन ऐसे किसी आदेश के सम्बंध में जिसके विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन her reg की गयी है नहीं किया जायेगाः- Wey यह और कि meer अभिलेख से प्रकट किसी गलती का सुधार करते | समय इस अधिनियम के SIT के अधीन प्रारित उसके आदेश के MRA भाग BT | संशोधन नहीं करेगा।/”
मैंने उभय पक्षों के विद्वान अधिवक्तागण के caf को विस्तार से सुना गया एवं पत्रावली पर दाखिल किये गये समस्त साक्ष्यों का परिशीलन किया गया, जिनके परिशीलन से यह विदित है कि प्रार्थी / बिल्डर द्वारा योजित उक्त प्रार्थना-पत्र के माध्यम से जिस अनुतोष की माँग की जा रही है, वह भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-39 की परिधि में नहीं आता है, क्योंकि प्रार्थी /“ बिल्डर द्वारा मूल रूप से उक्त प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा-39 में पीठ द्वारा एकपक्षीय रूप से पारित अंतिम आदेश, दिनांक 03-04-2023 में विपक्षी (आवंटी) द्वारा भुगतान की गयी अंकित धनराशि ¥.2,00,000 /— के स्थान पर रू.2,00,000/- अंकित /संशोधित किये जाने का अनुरोध | किया गया है, परन्तु उक्त अनुरोध प्रार्थना-पत्र अन्तर्गत धारा-39, भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 के प्राविधानों के अन्तर्गत स्वीकार किया जाना नियमानुसार Page 3 of 4 E-Court | प्रस्तुत मामलें में पीठ द्वारा धारा-34 के अन्तर्गत आदेश, दिनांक 03-04-2023 | गुण-दोष के आधार पर, रेरा अधिनियम उत्तर प्रदेश Rr नियमावली व उसके अधीन | | जारी विज्ञप्ति आदि में दिए प्राविधानों के अनुसार पारित किया गया है तथा पत्रावली पर | | उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ऐसी कोई तकनीकी गलती परिलक्षित नहीं होती है, जो कि रेरा अधिनियम की धारा-39 से आच्छादित et) अतः पीठ द्वारा ast के | अन्तर्गत पारित आदेश, दिनांक 03-04-2023 यथावत् बने रहेगें। | समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आधार पर प्रार्थी / बिल्डर | | ला रेसीडेन्सिया डेवलपर्स प्रा. लि.) की ओर से प्रस्तुत प्रश्नगत रेक्टीफिकेशन प्रार्थना-पत्र | | उपर्युक्तानुसार खारिज किया जाता है। |
आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। | दिनांक: 30-42-2025. Page 4 of 4