Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
H. Nageshwara Satyanarayana v. Sikka Infrastructure Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/03/72438/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
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- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-2 Present: Shri Balwinder Kumar, Member Sr. No. | Complaint No. | Complainant(s) | Unit No. | Amount (Rs.) 1. | NCR44/0/63002/2020 [?] | Rahul Tyagi | [?] | Rs. 42,79,380/- 2. | NCR44/03/7249/202 | Santosh Kumar Singh [?] | [?] | Rs. 30,74,502/- 3. | NCRI44/03/72438/202[?] | H. Nageshwar Satyanarayan | 02 | Rs. 32,50,290/- Versus M/s Sikka Infrastructure Pvt. Ltd. The complainant Rahul Tyagi, along with 2 other complainants, has filed a case against the opposite party. The facts of all these complaints are the same and the evidence is the same. All these complaints relate to the Sikka Karnam Greens project. Therefore, these are being disposed of by a single order. Complaint [?] NCR44/0/63002/2020, Rahul Tyagi, shall be the lead case. The present complaint petition has been instituted by the complainant against the opposite party seeking possession and interest for the delayed period.
In brief, the complainant's statement is that the complainant booked Unit No. 002 in the opposite party's project Sikka Karnam Greens, for which the complainant paid Rs. 42,79,380/- from time to time in installments. The complainant says that under the "session scheme" [?] of the opposite party's project [?] ... [?] was [?]. The opposite party paid the EMI interest up to March 2020. After March 2020, the promoter is not paying EMI interest as per the [?] scheme. Furthermore, the complainant says that at the time of [?] of my flat there was a big park in the apartment layout in front of my flat, but now a [?] pool wall has been built, to which I have not consented. Therefore the complainant has requested possession and interest for the delayed period against the opposite party. In support of the complainant's statement, copies of the flat buyer's agreement dated 44.04.2047, the account statement, emails, etc. have been filed.
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-2 उपस्थिति:-- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य क्रम सं0 शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट सं० | धनराशि रु. Ps = l. एटारा44/0/63002/2020 राहुल त्यागी a 42,79,380/- 2. NCR44/03/7249/202 पंतोष कुमार सिंह iene | 30,74,502/- 3. NCRI44/03/72438/202] | एच. नागेश्वर सत्यनारायण I 02 32,50,290/- बनाम सिक्का इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता राहुल त्यागी के साथ 2 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें Sikka Karnam Greens परियोजना से सम्बंधित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत to टार44/0/63002/2020 राहुल त्यागी अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Sikka Karnam Greens में यूनिट सं0-002 बुक किया गया था, जिसके लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 42,79,380 ,/ -- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया था। शिकायतकर्ता का कहना है कि सेशन स्कीम के तहत विपक्षी की परियोजना गें Hy : a ee Page 4
= गया था। विपक्षी द्वारा मार्च 2020 तक ई.एम.आई के ब्याज का भुगतान किया। मार्च 2020 के बाद प्रमोटर उपयोजना के अनुसार ई.एम.आई का ब्याज नहीं दे रहा है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता का कहना है कि मेरे फ्लैट की gor के समय मेरे फ्लैट के सामने अपार्टमेंट के लेआउट में बड़ा पार्क था लेकिन अब eat पूल की दीवार बन गयी है जिसपर मेरी सहमति नहीं है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्र कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में शिकायती फ्लैट बॉयर अनुबन्ध दिनांक 44.04.2047, खाता विवरण, ई-मेल आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना में यूनिट सं०-002 बुक किया गया था, जिसके क्रम में बिल्डर बायर अनुबन्ध दिनांक 04.04.2047 को निष्पादित कराया TA | अनुबन्ध के प्रस्तर-26 के अनुसार vat टॉवर का निर्माण उस टॉवर के राफ्ट की ढलाई की दिनांक से 30 गाह की अवधि के भीतर होने का अनुगान था जिसमें आवंटित फ्लैट स्थित है या आवंटन अनुबन्ध की तारीख जो भी बाद में हो हालांकि हमेशा बड़ी परिस्थितियों के लिये उपरोक्त के अलावा डेवलपर्स 6 माह की ग्रेस अवधि का हकदार होगा। परियोजना फोर्स मैज्योर परिस्थितियों अर्थात कोविड-49 महामारी के कारण विलम्बित हुई, जोकि उनके नियंत्रण में नहीं था। विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता को फिटआउट जारी किया जा चुका है। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- Page 2 ः क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव ?
2. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु to 4 बिन्दु to 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हडताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक wr आदेश, निर्णय व fear से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना किसानों के उग्र Wee, के कारण परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है जिससे की —_ हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 ,/ 207 बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर t0 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature.
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं तदनुसार बिन्दु vo 4 Pena किया जाता है। ॥, Page 3 = शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, किन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है, कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता को फिटआउट जारी किया जा चुका है। पत्रावली पर दाखिल फ्लैट बॉयर अनुबन्ध दिनांक 04.04.207 के पृष्ठ सं0-8 के प्रस्तर-26 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा निर्माण शुरू होने की तिथि से 30 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ कब्जा दिया जाना था। फ्लैट बॉयर अनुबन्ध दिनांक 04.04.20:7 को विपक्षी द्वारा निष्पादित किया गया जोकि उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। फ्लैट बॉयर अनुबन्ध दिनांक 04.04.2047 के पृष्ठ सं०-8 के प्रस्तर-26 के अनुसार विपक्षी को दिनांक 04.04.2020 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था। ऐसी दशा में उपरोकतानुसार कब्जे की तिथि 04.04.2020 होती है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 05.04.2020 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है।
इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid | —— Page 4 for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्र4,/ पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के wee 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील सं० 6649-50 /20:8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Page 5 =
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने के अधिकारी et) cage बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश 4, विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स के समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.42.2024 तक ओ.सी./सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2 विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 05.04.2020 से ओ.सी /सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये ज़ाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की घनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को wy, Page 6 जाये। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में अनुबन्ध / आवंटन के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। 3. यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2006 के धारा 2 Gali) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी प्रीईएम आई की धनराशि को अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित करना सुनिश्चित करें। 5... इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का Verda भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्रावधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:- 30/07 / 2024 (बलविन्दर कुमार) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 7