Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shitiz Khanna v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/03/72100/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- Not recorded
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-2 उपस्थितिः-- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य | Ho | ao | शिकायत संख्या peel यूनिट Ho Peer 4. N@RI44/03/72086/202i | कुशाग्र अग्रवाल | 2233 | 40,85,684/- | 2. | NCRI44/03/729/202 die | जैन 7 2072/02 | 35,52,38I/- 3. | NCRI44/03/72089/202 अंकित गेरा । 0202i | 46,44,509/- ॥ a NCR44/03/72095/202I अंकित | 04026 | 46,4i,748/- | | इटार44/03/72098/202 कुशाग्र अग्रवाल | 2232 40,85,684/- | ६ | एलरसबबा०उलञआ0020०टा | शिटिज खन्ना | 6203 | 33,35,087/- 7. | NGRI44/03/7206/202 यमन शम पर 3i6l | 32,2,246/- कक एटाराबक03/72752/202 | नेहा गुप्ता 607 | 33,94,946/- | / | 9. = NCR44/03/7273/202! Rar fret =| «= 7043. | 30,30,39/- बडा इटार44/03/7277/202 7 Sale मसुरकर |! 5234 | 37,35,563/- बनाम ए.टी.एस रियलटी प्राइवेट लिमिटेड do—-NCR44/03/72086/202 कुशाग्र अग्रवाल अग्रणी वाद रहेगा। शिकायतकर्ता कुशाग्र अग्रवाल के साथ 9 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें ATS ALLURE परियोजना से सम्बंधित है। aa: एक ही निर्णय से .इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत ५५ प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के fg कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज वापस fad जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना ATS ALLURE में यूनिट सं०- 2233 बुक किया गया था, जिसके लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 40,85,684/- रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि उक्त यूनिट को वर्ष 2ore में आवंटित किया जाना था हालांकि परियोजना अभी विकास के अधीन है और निर्धारित समय सीम। से काफी आगे है। परियोजना अभी भी विकास के अधीन है और अनिवार्य ओ.सी JA अभी भी प्राप्त नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज वापस दिलाये जाने क। अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 03. 06.2045, त्रिपक्षीय अनुबन्ध, आवेदक खाता बही आदि की छायाप्रति दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर जवाब दाखिल करते हुए कहा गया कि आवंटन पत्र के प्रस्तर-7.2 भें कब्जे दिये जाने के नियम एवं शर्तों का उल्लेख है। परियोजना विभिन्न फोर्स गैज्योर परिस्थितियों के कारण विलम्बित हुयी और इस सम्बंध में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में याचिका दायर है जो कि जम्बित है। आंवटन पत्र एवं २२ में परियोजना की दी गयी तिथि के अनुसार कब्जा दे दिया जायेगा। परियोजना पूर्णता की ओर है और शीघ्र ही शिकायतकर्ता को वे कब्जा दे देंगे। परियोजना में विलम्ब 24 मार्च 2020 को सम्पूर्ण लॉकडाउन एवं कोविड-49 के कारण निर्माण कार्य बाधित रहा है। आवंटन पत्र के प्रस्तर-7.2 के अनुसार 42 माह एवं 3 माह की अनुग्रह अवधि के कब्जा दिया जाना है। दी गई परिस्थितियों में शिकायत की वर्तमान शिकयत प्रीमैच्योर है, और पार्टियों के बीच सहमति के अनुसार समय अवधि समाप्त नहीं हुई हैं और अभी भी अप्रत्याशित परिस्थितियों के अस्तित्व के कारण विलम्ब जारी eg और शिकायतकर्ता कब्जे की पेशकश करेगा दिसंबर 2024 तक, ant Page 2 कोई लॉकटाडन न हो और परिणामस्वरूप साइट पर काम रूक जाए। इसके अतिरिक्त पीठ के समक्ष सुनवाई दिनांक 08.07.2024 को विपक्षी द्वारा कथन किया गया कि शिकायतकर्ता को दिसम्बर 2024 तक कब्जा दे दिया जायेगा। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में उच्च न्यायालय के आदेश, विभिन्न पत्रों की प्रति दाखिल की गयी है। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये :- 4... क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? > क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु सं० 4
बिन्दु सं० 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) के कारण परियोजना विलंबित हुई, साथ ही यह भी कहा गया कि परियोजना के सम्बंध में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष वाद दायर है, जो कि अभी लम्बित है उस कारण से भी परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की ओर से फोर्स मैज्योर की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्वत में परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या--940 / 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर 40 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- iV Page 3 Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए कोविड-49 को फोर्स मैच्योर की श्रेणी में माना जाना उचित होगा। तदनुसार बिन्दु सं०- 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 2
शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है, ऐसे में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। दूसरी ओर विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता को परियोजना पूर्ण कर दिसम्बर 2024 तक कब्जा दे देगें। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन-पत्र दिनांक 03.06. ois की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ संख्या-07 के प्रस्तर-7.2 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा आवंटन-पत्र जारी होने की तिथि से 42 माह एवं 3 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 45 माह में अपार्टमेंट पूर्ण किया जाना था, उक्त आवंटन-पत्र दिनांक 03.06.205 को उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया था। ऐसे में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 03.03.209 होती है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 04.032049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। dL —— Cr" Page + 4 इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन wit. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः-
Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व dar के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा YMA (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2ore के अधीन दिनांक 47.70.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of 4७६४७) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2 (i) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- d Page 5 a र / _ट्ीडट ि िफफजफजहं[/।हफोघभैपघ[घपफहझ/शझ ै।। The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४टा॥२+ प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता | है | जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील vio 6649-50 /20i8 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — | Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not | गाए" भतार) 6 ry be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि तक विलम्ब के लिए पाने के अधिकारी ert) दिनांक 77.:0.20i8 को उ0प्र० शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-740 /8—-3—-48-65 विविध / 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट की नियमावली के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है:- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"॥7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों एवं परिस्थितियों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी । परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् Rae ana wo Gas ta a tw mL 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स a अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही आवंटियों से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। | तदनुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स के समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.42.2024 तक पूर्णता हेतु चारों प्रमाण-पत्र अथवा ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय KEPT शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। > विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 04.03.2049 से ओ-.सी.,/ सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की तिथि तक शिकायतकततांगण द्वारा जमा धनराशि पर शटा॥त] प्रतिशत की दर से हि अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करे| साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक | है, तो नियमानुसार शिकायतकर्तागण को वापस की जाये। अन्य शिकायतकर्ता | के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। | कोविड-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन एवं फोर्स मैज्योर को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना गें हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। 3, विपक्षी, शिकायतकर्ता से किसी भी प्रकार की अतिरिक्त चार्जेज़ की मांग | नहीं करेंगे। il ————— eeeeeeeeeeeesse Page 8 8
विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (ai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर MCLR+ प्रतिशत है। 5. विपक्षी उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र ओ.सी./सी.सी सहित जारी करना सुनिश्चित करे। 6. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित fart के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का woods भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक :- 30 /07 / 2024 (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 9 © >