Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Vijendra Pal v. La Residentia Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/03/71998/2021
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- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। wWo—04 उपस्थिति:- श्रीमती कल्पना मिश्रा, सदस्य क्रम Po शिकायत संख्या | शिकायतकर्तणग.. | I. NCRI44/03/7998/202 | Re पाल 2. पटारा44/03/2895/202 | ४ । STs एटारा44॥2/6632/2020 | | RT कुमार शम बनाम मैसर्स ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता विजेन्द्र पाल के साथ 02 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना La Residentia 8 सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत GI-NCRI44/03/7998/202I विजेन्द्र पाल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना La Residentia 4 यूनिट संख्या-7-38/60। बुक करायी गयी थी, यूनिट की कुल कीमत 30,06,225 //- रुपये थी, जिसके लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 27,90,0ll /— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 25.02.2044 के अनुसार 30 माह एवं 6 माह की aque अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु wer
विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की msi के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 25.02.2004, जमा धनराशि की रसीदें, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गई हैं।
विपक्षी की ओर से प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि परियोजना में कुल 39 टावर हैं, जोकि 3 फेज में विभाजित किये गये हैं, जिनमें फेज-4 में कुल i8 टावर (4-48) हैं, तथा कुल i408 यूनिट्स समाहित हैं, जिसमें विपक्षी द्वारा i2 टावर का ओ.सी. प्राप्त किया जा चुका है, जिसमें कुल 872 यूनिट्स हैं तथा 625 यूनिट्स का एग्रीमेन्ट-टू-सबलीज भी किया जा चुका है और शेष यूनिट्स (फेज-4) के ओ.सी. हेतु ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी का यह भी कहना है कि जिन टॉवर का ओससी. प्राप्त किया जा चुका है, उन फ्लैटों को भौतिक कब्जा दिया जा रहा है और 4480 फ्लैटों का कब्जा दिया जा चुका है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि फेज-2 में कुल i टावर (i9-29) & जिनमें फिनिशिंग कार्य प्रगति पर है एवं टॉवर-22 के 50 फ्लैटों को सौंपा जा चुका है और शेष टॉवर के फ्लैटों को जून, 2022 एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि में सौंप दिया जाएगा। परियोजना के फेज-3 में 40 टावर (30-39) हैं, जिनमें waar का निर्माण कार्य 90 प्रतिशत पूर्ण है और फिनिशिंग कार्य प्रगति पर है, जिनमें समस्त सुविधाओं को पूर्ण कर दिसम्बर, 2022 एवं 6 माह ग्रेस पीरियड के साथ कब्जा दे दिया जाएगा। परियोजना में कुल 3256 यूनिट्स हैं, जिनमें 2642 यूनिट्स को विक्रय किया गया है। साथ ही यह भी अंकित किया गया है कि माननीय इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा श्री सुनील अंबवानी एवं श्री श्याम शंकर तिवारी की याचिका संख्या-47068 / 2009 पर दिनांक 49.07.2044 को A 2
| | निरस्त करने के कारण परियोजना में विलम्ब हुआ तथा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा समूह में याचिकाओं की सुनवाई करते हुए गजराज सिंह बनाम उ0प्र० राज्य आदि में आदेशित किया गया कि जो परियोजना 2024 के मास्टर प्लॉन अन्तर्गत स्वीकृत नहीं है, उन परियोजना पर कोई निर्माण कार्य नहीं होगा, जिस कारण परियोजना का कार्य दिनांक 49.07.20 से दिनांक 24.08.2042 तक बाधित हुआ | इसके अतिरिक्त “गजराज
सिंह बनाम उ0प्र0 राज्य एवं सावित्री देवी बनाम उ0प्र0 राज्य” के बाद में पारित स्थगनादेश के कारण भी परियोजना का निर्माण कार्य बाधित रहा। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 23.07.20I9 4 ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स प्रा0 लि0 को आम्रपाली ग्रुप का हिस्सा मानते हुए 632 फ्लैट्स, जोकि Aad स्टनिंग wear प्राएलि0 में शेयर होल्डिंग के अनुपात में थे, जिन्हें सरेन्डर करने के आदेश दिये गये थे, जिस कारण परियोजना विलम्बित हुई। कम्पनी द्वारा हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र देते हुए याचिका दाखिल की गयी, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ला रेजिडेंशिया डेवलपर्स प्राएलि0 को सम्पत्ति अलगाव करने पर रोक लगाते हुए दिनांक 44.0.2049 को आदेश पारित किये, जिसकी याचिका संख्या-940 /20:7 है, जिस कारण 44 माह बिक्री पर रोक लगने से परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी की परियोजना रेरा में पंजीकृत है, जिसकी पंजीकरण संख्या UPRERAPRI9357 है। दिनांक 29.06.202 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कोर्ट रिसीवर की नियुक्ति की गयी है, जिसके संरक्षण में परियोजना के 632 फ्लैट्स के निर्माण हेतु धनराशि प्राप्त की जा रही है। परियोजना के 632 फ्लैट्स कई टावरों में स्थित हैं और यह fost एक टावर में एक साथ नहीं हैं। विपक्षी द्वारा कहा गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी यूनिट संख्या-738-60। की कुल कीमत 30,06,225 /- रुपये है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा 26,74,20i4/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। दोनों पक्षों के मध्य दिनांक 25.02.2044 को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध निष्पादित किया गया, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता को 42 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ कब्जा दिया जाना था। परियोजना का निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है
व फिनिशिंग कार्य चल रहा है। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता को फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के WeAR-9C) के अनुसार विलम्बित अवधि के ब्याज सहित दिसम्बर, 2022 एव 6 माह की अनुग्रह अवधि में फ्लैट का भौतिक कब्जा प्रदान कर दिया जाएगा। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस किया जाना सम्भव नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि का निवेश परियोजना के निर्माण कार्य में किया जा चुका है। कंपनी का यह प्रथम दृष्टया उद्देश्य माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन करना और आदेश के अनुसार फ्लैट को अलग करना है। फ्लैट के पृथक्करण के उपरांत विपक्षी द्वारा आवंटित फ्लैट को दिसम्बर, 2022 व 6 माह की अनुग्रह अवधि में सौंप दिया जाएगा। माननीय कोर्ट रिसीवर के संरक्षण में परियोजना के निर्माण कार्य को पूर्ण किया जा रहा है और परियोजना का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। कोर्ट रिसीवर द्वारा माननीय अध्यक्ष, उ0प्र0 रेर को भी इस बात से अवगत कराया है कि वह ऐसा कोई आदेश पारित न करें, जिससे परियोजना के निर्माण कार्य को पूर्ण किये जाने में बाधा उत्पन्न हो। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रतिवाद पत्र, पत्र दिनांक 24.08.2024, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों की प्रतिलिपि, दाखिल किये गये हैं। उभयपक्ष के तर्कों को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- ॥ क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई ? यदि हां तो प्रभाव। 2 क्या शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने की मांग करना उचित है ?
3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है ? यदि हां तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु do 4 बिन्दु सं? 4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई ? यदि हां तो प्रभाव? यह वाद बिन्दु भी विपक्षी के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force Majeure Events) (जैसे दंगा, आंदोलन, हड़ताल, औद्योगिक विवाद, परियोजना पर सेवाओं एवं आपूर्ति का बाधित होना, सरकार का नीति परिवर्तन, न्यायिक err आदेश, निर्णय व feet से कार्य बाधित होना, अनुज्ञप्ति व संस्तुतियों में होने वाला विलंब आदि) के कारण परियोजना विलंबित हुई, विपक्षी की ओर से न तो यह कथन किया गया कि किन फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स की बाबत उसकी परियोजना विलंबित हुई और न ही फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स की बाबत कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल किया गया है। इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 // 2047 ”बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं are’ में अभिनिर्धारित किया गया है:-
"[4], On behalf of Amrapali group, learned senior counsel submitted that there were force majeure conditions in completing the projects. There were legal impediments in the completion of projects within the period given in the flat-buyers agreement during the period from 20]I-I5. The submission is baseless. It is apparent that the Full Bench of the High Court though held that the land acquisition was vitiated but still it was upheld. The High Court did not quash it for the reason that development has taken place. Higher compensation was ordered to be paid. That order was affirmed by this Court in 20!5 in Savitri Devi v. State of U.P. (20I5) 7 SCC 2. There was no interim stay granted by the High Court on construction work, is made clear by the Noida and Greater Noida authorities. There was no room to entertain any doubt as to the fact whether for a particular village the acquisition had been quashed. There was no quashing of land acquisition and moreover, there was no stay. Only higher compensation was ordered to be paid. There was no force majeure condition or any legal impediment as such the period from 20ll to 20i5 cannot be treated as a moratorium period vis-a-vis the “7 dues of Noida and Greater Noida authorities. The submission made as to the farmers! agitation etc. is too vague and 30% of the projects have come up; whereas 70% have not yet come up, out of the projects in Noida and Greater Noida alone."
उपरोक्त ऑब्जरवेशन से यह स्पष्ट है कि वर्ष 20i से वर्ष 20i5 के मध्य निर्माण कार्य पर कोई wer आदेश नहीं थे, जो कि नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दर्शित किया गया और इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2044 से वर्ष 20i5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर कारण या विधिक रूप से रोक नहीं था। चूंकि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वर्ष 2044 से वर्ष 20i5 के बीच कोई फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स नहीं था, ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। इसके अतिरिक्त इसी आदेश में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20i7 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर ti0 A फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature."
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। जहां तक विपक्षी की भूमि के “टाइटिल” के विवादों का प्रश्न उठाया गया है, यह सम्बन्धित भू-विक्रेता प्राधिकरण तथा बिल्डर के बीच का प्रश्न है। निश्चय ही यदि भूमि का “टाइटिल”“ वर्ष 2044 से विवाद ग्रस्त था, तो ऐसी स्थिति में वर्ष 2044 में शिकायतकर्ता को विचाराधीन भूमि पर बनने वाले फ्लैट का विक्रय किया जाना उचित न था। विपक्षी द्वारा ऐसा कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है, जिससे यह विदित हो सके कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय एवं एन.जी.टी. द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया हो। तदानुसार बिन्दु संख्या-4 eae किया जाता है। कु निस्तारण बिन्दु to 2 ee बिन्दु संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? यह वाद बिन्दु भी शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है, जिस कारण वह परियोजना के साथ नहीं रहना चाहते हैं एवं उनके द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित वापस दिलाये जाने की मांग की है। विपक्षी का कहना है कि शिकायतकर्ता को परियोजना पूर्ण कर विलम्बित अवधि के ब्याज सहित दिसम्बर, 2022 तक यूनिट का कब्जा दे देंगे।
जहाँ तक क्रेता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढ़ा जाना आवश्यक है, ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें। रेरा एक्ट की धारा 48 (॥) में प्राविधान है कि :- "Section 8 () “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building, in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस मांग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें। : —
रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ "to ensure compliance of the obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder " का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल gece सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्वों में निम्न भी सम्मिलित हैं :- “32. The Authority shall in order to facilitate the growth and promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estate sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... (any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके सभी wo होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस अथॉरिटी का है। इस क्रम में मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा ”“नीलकमल Raced wast प्रालि. बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया“ जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर i224 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :-
“]24, The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved.” उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि उक्त वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर 07 moulding reliefs by granting interest, compensation tothe allottees, and_issuing directions for timely completion of project, transit_ accommodation during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। एलोटीज़ द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने वाले एलोटीज के हितों में सन्तुलन के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया” (744 ,/ 2047) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के oe 40 में निम्न ऑब्जरवेशन किया है :-
"40. As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we are not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ee, Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund."
WO उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त प्रस्तरों में उद्धरत “ऑब्जरवेशन्स” एवं RI एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑब्जेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “orga” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन”, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट“ की स्थिति, अन्य “स्टेक or peed’, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “कन्सेन्स्स” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता दिनांक 34.42.2022 तक अपनी यूनिट का कब्जा लें। उसके बाद वे स्वयं यूनिट के भविष्य हेतु उपयोग के सम्बन्ध में निर्णय ले सकते हैं वैसे भी शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में धनराशि का निवेश कब्जे हेतु किया गया था, जिसका उपयोग विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण में किया गया है निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। यदि विपक्षी द्वारा दिनांक 34.42.2022 तक यूनिट का कब्जा नहीं दिया जाता है, तो उसके बाद धनराशि वापस किया जाना उपयुक्त होगा। तदानुसार बिन्दु सं०-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु to 3
यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी एवं शिकायतकर्ता के मध्य फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 25.02.2044 को निष्पादित किया गया था, जिसके पृष्ठ संख्या 8 के प्रस्तर 49(8) के अनुसार 30 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 36 माह में कब्जा दिये जाने का vere है। ऐसे में उपरोकतानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 24.02.2044 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। यह स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 25.02.2044 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील tio 6649-50 /20i8 *सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant ~ Builder had obtained the Completion Certificate oat 0 late as April 20i6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession."
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के ”नीलकमल Raced सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable."
अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि vouo रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक ॥7.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली oun 4 ¥ 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा fiers के प्रारूप के wer 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्रावधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" इसके अतिरिक्त Re WeN-C.NO.3289/2020 दिनांक 06.02.2020 “रूद्रा बिल्डवेल कस्ट्रक्शन्स wo fo बनाम पूनम सूद एवं अन्य“ में माननीय
उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.l (MCLR+l) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent no.] had booked a flat and till the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 20!8. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 20!8 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shall be liable to refund the 2 entire money paid by the allottee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India + I% unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice. Learned counsel for the petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 206, providing otherwise."
उपरोक््तानुसार उच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि उ0प्र0 भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2048 की प्रस्तर 9.20) के ओनसार प्रोमोटर की ओर से विलम्ब किये जाने की स्थिति में आवंटी के पास अनुबन्ध को समाप्त करने का विकल्प होगा एवं इस स्थिति में प्रोमोटर “भारतीय स्टेट बैंक” के होम लोन दर MCLRt प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से 45 दिनों में समस्त जमा धनराशि वापस करने के लिए उत्तरदायी होगा। साथ ही साथ उच्च न्यायालय द्वारा MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर को उचित एवं मान्य माना गया है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि हरियाणा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2047 के द्वारा वार्षिक ब्याज दर MCLR+2 प्रतिशत (Interest ७)0.7% S.L ७.9.) निर्धारित की गयी थी, जो सम्बन्धित मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) द्वारा अनुमन््य किया गया है, जिसको माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा उचित एवं सही माना है, साथ ही इसी आदेश के प्रस्तर 3.4 में भी स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि :- "The National Commission has rightly awarded Interest @0.7% S.I. p.a. by applying Rule I5 of the Haryana Real. 2i Estate (Regulation And Development) Rules, 207 from the date of each installment till 05.02.20I7 ie. till the date after which the Order of stay of cancellation of the allotment was passed; and thereafter, from the date of the Commission’s final Order till the date on which the amount is refunded with Interest.” अत: यह स्पष्ट है कि ब्याज दर जो कि 40.7 प्रतिशत (MCLR+2 प्रतिशत) हरियाणा रेरा द्वारा निर्धारित किया गया वह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी सही ब्याज दर माना गया है।
इससे यह अवधारित किया जा सकता है कि राज्य सरकार द्वारा नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित की गयी ब्याज दर उचित एवं सही है। ब्याज \o- दर को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के MCLR+ से सम्बद्ध करने के सिद्धान्त को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी Mert गया है और न्यायोचित ठहराया है। ऐसे में उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन और विकास), (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली (Rules), 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से 4 प्रतिशत ज्यादा है उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3-48-65 विविध 46 के द्वारा मॉडल wht के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: "7.| Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on
, unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot}:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनोक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि है रथ कु मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदानुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। हैं :- उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट को आवंटन पत्र/फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित दिनांक 34.42.2022 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 25.02.2044 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन पत्र फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा-2(2०)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLRH+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज देय होगा। विपक्षी, शिकायतकर्तागण को अनुतोष संख्या 4 व 2 देने में असफल रहता है, तो दिनांक 34.42.2022 के पश्चात् 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि ४८,२+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें। ॥ __ ३ 3 3 85 Yu = यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा सकेगें।
6 इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। 6... इस आदेश का weeds भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। दिनांक:- 24 /05 / 2022 Yes UA कल्पना मिश्रा (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण 36