Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Urmila Thakur and Rajeev Ranjan v. M/s. Jss Buildcon Private Limited
Complaint No. NCR144/03/71463/2021
Verified by Puneet Jain, Editor
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- Not recorded
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- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
an भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। पीठ-2 उपस्थिति:- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य क्रम Po शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण् यूनिट सं0 aad w/ l. | NCR44/02/70562/202 आशीष मिश्रा T-/62 | 35,95,249/- 2. | NCR44/02/70794/202 | राजीव शर्मा T-I/C-408 | 49,5,88/- | 3. | NCR44/03/7463/202 | उर्मिला ठाकुर एवं | T-I/A-04 | 35,,428/- | राजीव रंजन 4. | टारा44/03/55/202। | प्रवीन कुमार जैन | १-/8-62 | 34,54,337/- ae निमेश जैन 5. | NCRI44/03/757/202 | संजीव कुमार वार्ष्णेय | T-i/C-44 | 48,97,43/- एवं वैशाली वार्ष्णेय बनाम मैसर्स जे.एस.एस. बिल्डकॉन प्रा0 लि0 शिकायतकर्ता आशीष मिश्रा के साथ 4 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें NCR MONARCH परियोजना से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत Wo—-NCR44/02/70562/202i आशीष मिश्रा अग्रणी वाद रहेगा | प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के few कब्जा एवं विलग्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना NCR MONARCH में यूनिट सं0- T-I/62 बुक किया गया था, 0, लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 35,95,2 | - Page I
रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि दिनांक 07.05. 2043 को यूनिट बुक की गयी थी जिसका कब्जा 03.05.20I6 तक दिया जाना था जोकि अभी तक नहीं दिया गया है। विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना से सम्बन्धित ओ.सी /सी.सी भी प्राप्त नहीं किया गया है एवं शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पजेशन दिनांक 26.44.2020 को आफर किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्र कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में वकालतनामा, बिल्डर बायर wwe feats 05.0.203, जमा धनराशि की रसीद आदि की | 3 दाखिल की गयी हैं। विपक्षी द्वारा प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं परियोजना से सम्बन्धित तीन प्रमाण पत्र प्राप्त किये जा चुके है। विपक्षी द्वारा परियोजना F Structural Change भी किया गया है इसके अतिरिक्त eh | | के समक्ष सुनवाई के दौरान विपक्षी द्वारा विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में आर्केटेक पत्र, मा. एन.सी. wad. के आदेशों, मा. उच्च न्यायालय के आदेश, ग्रेटर नोएडा ऑद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा जारी विज्ञापन, मा. एन.जी.टी के आदेश, एन.ओ., फोटोग्राफ, मांग पत्र आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। उभयपक्ष को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- 4... क्या बिल्डर द्वारा फ्लैट के सुपर एरिया का क्षेत्रफल बढ़ाया गया है, यदि हाँ तो किस दर से गणना की जायेगी? a क्या force majeure होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई ? यदि हां तो प्रभाव ?
3: ao शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया है कि विपक्षी बिल्डर द्वारा io प्रतिशत से अधिक सुपर एरिया बढ़ा दिया गया है, जबकि बिल्डिंग स्ट्रक्चर में कोई भौतिक परिवर्तन नहीं है। Ec सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के सिविल अपील संख्या 3703-3704 / 2020 एक्सपेरिऑन डेवलपर्स प्रा० लि० बनाम पवन गुप्ता में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि :- We are not inclined to interfere with the order of the National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) dated 26" August 2020 in Constimer complaint number 285 and 286 oF 208. National Consumer Disputes Redressal Commissio (NCDRC) ने शिकायत संख्या 285-286 /208 पवन गुप्ता बनाम एक्सपेरिऑन डेवलपर्स प्रा० लि० में स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि :- "In respect of excess area, the complainant has made a point that without any basis the opposite party sent the demand for excess area and the certificate of the architect was sent to the complainant, which is of a later date. The justification given by the opposite party that on the basis of the internal report of the architect the demand was made for excess area is not acceptable because no such report or any other document has been filed by the opposite party to prove the excess seamen | Tt went on to observe that once the original plan is approved by
== competent authority, the areas of residential unit as well as of the common spaces and common buildings are specified and super area cannot change until there is change in either the area of the flat or in the area of any of the common buildings or the total area of the project (plot area) is changed. The real test for excess area would be that the opposite party should provide a comparison of the areas of the original approved common spaces and the flats with finally approved common spaces/ buildings and the flats. This has not been done. There is no prevailing system when the competent authority which approves the plan issues some kind of certificate in respect of the extra super area at the final stage. There is no harm in communicating and charging for the extra area at the final stage but for the sake of transparency the opposite party must share the actual reason for increase in the super area based on the comparison of the originally approved buildings and finally approved buildings. Basically the idea is that the allottee must know the change in the finally approved lay-out and areas of | = spaces and the originally approved lay-out and areas. In yview,until this is done, the opposite party is not entitled to payment of any excess area."
इस सम्बंध में विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि अनुबन्ध के समय सुपर एरिया के विभिन्न मदों का विवरण, वर्तमान में उन्हीं मदों में परियोजना के परिवर्तित क्षेत्रफल व उस परिवर्तन का कारण बताते हुए एवं दोनों स्थितियों में शिकायतकर्ता के क्षेत्रफल की गणना का आधार स्पष्ट करने व उसे वेबसाइट पर डालने के बाद ही यह धनराशि देय होगा। तदोपरांत शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान किया जाएगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-4 निस्तारित fal जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु सं०-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी Pe ee | Page 4 के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) अर्थात विभिन्न वादों में माननीय न्यायालयों के आदेशों के कारण परियोजना प्रभावित हुई। विपक्षी ger vad कथन के बाबत कोई ऐसा साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है, जिससे की विदित हो सके कि वास्तव में परियोजना प्रभावित हुई। इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20:7 बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं wee ॥40 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature.
उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स Aver ४ स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। वर्तमान परिस्थितियों में कोविड-49 को फोर्स मैज्यौर की श्रेणी में माना जाना उचित होगा। तदनुसार बिन्दु सं०-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु सं०-3 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। दूसरी ओर विपक्षी का कहना है कि वह टॉवर-4 का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है, और शिकातयकर्ता को 2 माह के अन्दर कब्जा उपलब्ध करा दिया जायेगा। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में बिल्डर बायर एग्रीमेंट दिनांक 05.04.2043 की प्रति दाखिल की गयी है, जिसके पृष्ठ सं0-७ के प्रस्तर-27 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा निर्माण कार्य शुरू किये जाने की तिथि 04.42.2042 से 36 माह एवं 6 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 30 मई 20i6 तक कब्जा दिया जाना था। ऐसे में उपरोक्तानुसार कब्जे की तिथि 30.05.2046 होती है। dL Page 5 | ब्लड. स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है और ऐसे में शिकायतकर्ता दिनांक 3.05.206 से ओ.सी. /सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand tu the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The Ps ०५०२ 5 to pay interest is not a penalty as _payment—of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. aid: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमौटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलग्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20r6 के अधीन दिनांक 7.0.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय/पट्टा के लिए करार) नियमावली 2or8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये नियम |" Wwe 6
a विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफ़ाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o.2(ii) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+H | की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस —= सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 /“2048 सुपस्टेक लिमिटेड बनाम रजनी - गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- |
" the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने हक / ;गानित नी नीम भाजा तकनीक जीत... अधिकारी erm) ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी. मिलने |क्ष्थवा हि ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्ब के लिए ब्याज पाने के अधिकारी होगें।
जैसा कि सभी जन-मानस को ज्ञात है कि विश्व के सभी देशों में कोरोना वायरस जैसी महामारी का संक्रमण व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। ऐसी स्थिति में कोविड-49 (Corona Virus Disease) की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु सम्पूर्ण देश में दिनांक 24.03.2020 को लॉकडाउन की घोषणा की गयी थी, लॉकडाउन की परिस्थिति में सभी कार्यों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था, जिससे की सभी क्षेत्र प्रभावित हुए और इसमें रियल gece सेक्टर भी सम्मिलित है। न््यायहित में इसी को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। | Bisbee | बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं। आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 3.0.202 तक ओ.सी. /सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री ॥
2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 32.05.20:6 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है, तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाए। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप TRIGA गणना की जाएगी। aifas—t9 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। 3. विपक्षी, उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र ओ.सी. मिलने के उपरान्त जारी लक जज सुनिश्चित करें | हरे / Page 8 | eee विपक्षी, को निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 2046 के धारा 2 (zai) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर add के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर ]४८7२+ प्रतिशत है। 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। — आदेश का उल्लधंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। दिनांक:-- 05 /40 / 2024 (बलविन्दर कुमार)
(सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 9