Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepak Verma v. Royalgolf link city projects private limited
Complaint No. NCR144/03/71409/2021
- Decision date
- 2026-02-26
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 /40,/63 सपठित FF नियम-24 40-शिकायत BAT—NCR44/03/7409/202 दीपक वर्मा बनाम रॉयल गोल्फ लिंक सिटी प्रोजेक्ट्स प्रा.लि आदेश-पत्र दिनांक: 23.02.2026 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अतुल कुमार उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री ऊर्जा जैन उपस्थित हुई । उभयपक्षों को सुना गया एवं दाखिल जवाब का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा बताया गया कि आज तक विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही रजिस्ट्री निष्पादित कराई गई है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में बुक की गई यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं रजिस्ट्री हेतु अपनी शिकायत योजित की गई, जिसमें माननीय पीठ-02 द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 09.2.202 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट को आवंटन पत्र / अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. /सी.सी. सहित दिनांक 342.2022 तक कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी, शिकायतकर्ता दिनांक 30.09.2024 से ओ.सी/सी.सी प्राप्त होने अथवा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी याद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता
५ जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ##ज अदा करना सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी और यदि ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक है. तो नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जाए। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09. 2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी — वि एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। 3. विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 गा धारा-2(2४)() के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी भ८ा,२+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। 4... यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का क्रियान्वयन करा Tart | 5. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित Rar के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। 6. इस आदेश का उल्लंघन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा।
विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 09.42.2024 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-02 (पूर्व पीठ-4) द्वारा दिनांक 40.40.2024 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- अतः उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों के दृष्टिगत पत्रावली नियम 24 में निहित शक्तियों के अन्तर्गत यूनिट के भौतिक कब्जे की कार्यवाही हेतु मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष सुनवाई हेतु, दिनांक 20.42.2024 को संदर्भित की जाती है। सचिव, उ.प्र. रेरा प्रकरण में आदेश, दिनांक 09.42.2024 के प्रस्तर-02 के अनुसार सुनवाई की तिथि दिनांक 20.42.2024 से पूर्व विपक्षी द्वारा देय विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण-पत्र जारी करने हेतु नियमानुसार कार्यवाही कर, पत्रावली को सुनवाई की तिथि से पूर्व मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी को उपलब्ध कराना सुनिश्चित Py सुनिश्चित नहीं किया जा रहा है. तो ऐसी दशा में मा. न््यायनिर्णायक अधिकारी ण को रेरा अधिनियम की धारा-63 की कार्यवाही किये जाने हेतु पीठ को वापस सन्दर्भित कर सकते हैं। तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38 /40 / 63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री निष्पादित न कराये जाने के कारण — मा. पीठ-02 (पूर्व पीठ-4) द्वारा पारित आदेश दिनांक 40.0.2024 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई।
इस पीठ द्वारा विपक्षी को बार-बार आदेशित किये जाने के बावजूद भी ओ.सी. JO. सहित शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र नहीं भेजा गया है और न ही शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया गया और न ही यूनिट की रजिस्ट्री कराई गई है। यूनिट तैयार नहीं है और परियोजना का ओ.सी., सी.सी. भी प्राप्त नहीं है, जैसा कि विपक्षी द्वारा आज सुनवाई के दौरान कहा गया है। कार्यालय आदेश पत्रांक संख्या-3839 / यू पी. रेरा / प्रशा. // 2025-26 दिनांक 28.08. 2025 के अनुसार यूनिट इकाई को कुर्क कर, रिसीवर नियुक्त कर, कब्जा दिलाये जाने हेतु अधिकृत किया गया है, लेकिन नियम-24 की कार्यवाही के अन्तर्गत आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अनुसार यूनिट को कुर्क कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है, क्योंकि यूनिट, परियोजना तैयार नहीं है और विपक्षी के पास ओसी.»/सी.सी. भी प्राप्त नहीं है। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 09.42.2024 का अनुपालन न करने के कारण विपक्षी पर धारा-63 के अन्तर्गत अर्थदण्ड / पेनल्टी अधिरोपित करने हेतु दिनांक 09.09.2025 को प्राधिकरण को लिखते हुए आदेश की प्रति श्रीमान सचिव, रेरा को प्रेषित की जा चुकी है।
अतः क्योंकि विपक्षी के पास उक्त परियोजना / यूनिट का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं है और बिना ओ.सी./सी.सी. के शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और रजिस्ट्री नहीं कराई जा सकती है और अब ऐसी स्थिति में विपक्षी के पास ओ.सी./सी.सी. न होने के कारण शिकायतकर्ता को वैधानिक कब्जा नहीं दिलाया जा सकता है। आदेश-24 सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के अन्तर्गत विपक्षी को सिविल कारागार में निरुद्ध कर आदेश /डिक्री का निष्पादन कराये जाने का प्रावधान है, लेकिन इस सम्बन्ध में उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, लखनऊ EIT सिविल अरेस्ट हेतु कोई अधिकारी / कर्मचारी / bailiff नियुक्त नहीं है, इसलिए विपक्षी को गिरफ्तार कर सिविल कारागार में भेजे जाने का आदेश भी पारित नहीं किया जा सकता है। अतः ऐसी स्थिति में इस पीठ द्वारा आदेश का निष्पादन कराया जाना संभव नहीं हो पा रहा है। अतः पत्रावली सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। सम्बन्धित पीठ यदि चाहे, तो नियम-24 के प्रावधानों के अन्तर्गत अपने आदेश के क्लैध्रान्वयन हेतु पत्रावली प्रधान दीवानी न्यायालय को संदर्भित कर सकती है, ताकि “Fateh / डायरेक्टर को सिविल कारागार में निरुद्ध कराकर आदेश दिनांक 09.2.2024 का क्रियान्वयन कराया जा सके। सम्बन्धित पीठ यदि ओ.सी./सी.सी. के सम्बन्ध में विपक्षी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही कर, aah. JOB. उपलब्ध करा देती है, तो सम्बन्धित पीठ पुनः यदि पत्रावली इस पीठ को नियम-24 के अन्तर्गत सन्दर्भित करती है, तो ऐसी दशा में —
कर पीठ द्वारा नियम-24 के अन्तर्गत कार्यवाही करते हुए कार्यालय आदेश पत्रांक -8839 / यूपी... रेरा / प्रशा. / 2025-26. दिनांक. 28.08.2025 के अनुसार f >आवंटी को कब्जा उपलब्ध कराये जाने एवं रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने आदेश दिनांक 09.42.2024 के अनुपालन हेतु अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी । अतः पत्रावली नियमानुसार सम्बन्धित पीठ को वापस भेजी जाये। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। meth 239 9. आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण