Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Varisha Shafique v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/03/52648/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2020-12-02
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar Status-Disposed
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
z भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | पीठ-2 E-Court उपस्थिति :- श्री बलविन्दर कुमार, सदस्य शिकायत संख्या :- NCRI44/03/52648/2020 वारिसा शफीक बनाम ए.टी.एस रियलटी प्रा0 लि0 प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी : विरूद्द कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना "ATS ALLURE" के टॉवर- 2 में यूनिट संख्या- 2295 बुक किया गया था, जिसके लिए उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 3,95,850/- रुपये का भुगतान किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को आवंटन पत्र के अनुसार 42 माह में कब्जा दिया जाना था, परन्तु अभी तक कब्जा नहीं दिया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि परियोजना 2 वर्ष विलम्बित है। अत: शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र /अनुबन्ध पत्र, जमा धनराशि की रसीदों आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए कहा गया कि आवंटन पत्र के प्रस्तर-7.2 में कब्जे दिये जाने के सम्बन्ध में नियम एवं शर्तों का उल्लेख है। Se ene (*; विभिन्न फोर्स मैज्योर परिस्थितियों के कारण विलम्ब्ति Be | ५४ ः Page eee अतिरिक्त पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान दिनांक 3.40.2020 को विपक्षी द्वारा कहा गया कि वह मार्च 2024 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दे देंगे। विपक्षी की ओर से अपने कथन के समर्थन में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश एवं विभिन्न पत्रों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
उभयपक्षों को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचारणीय किये गये :- 4... क्या इस प्राधिकरण को यह प्रकरण सुनने का क्षेत्राधिकार है ? 2... क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हां तो प्रभाव? 3. क्या शिकायतकर्ता कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 क्या इस अथॉरिटी को यह प्रकरण सुनने का क्षेत्राधिकार अधिकार है ? जहाँ तक प्राधिकरण को विधिक रूप से प्रकरण की सुनवाई करने के क्षेत्राधिकार का प्रश्न है, इस सम्बंध में स्पष्ट करना है कि प्रथम दृष्टया किसी परिवाद को दर्ज कराये जाने के लिए भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 के धारा-34 के अन्दर प्राविधान दिये गये है जो कि निम्न रूप से उललेखित है :- ४3], (]) Any aggrieved person may file a complaint with the Authority or the adjudicating officer, as the case may be, for any violation or contravention of the provisions of this Act or the rules and regulations made thereunder against any promoter allottee or real estate agent, as the case may be. Explanation —For the purpose of this sub- section "person" shall include the association of allottees or any voluntary consumer association Page 2 under any law for the time being in force. (2) The form, manner and fees for filing complaint under sub-section (l) shall be such as may be specified by regulations."
उपरोक्तानुसार कोई पीड़ित व्यक्ति, किसी wade, आवंटी या भू-सम्पदा अभिकर्ता के विरूद्ध अधिनियम या उसके अधीन : गये नियमों या विनियमों के उपबन्धों के किसी अतिकमण या उल्लंघन के लिए मामलों के अनुसार (as the case may be), प्राधिकरण या न्यायनिर्णायक अधिकारी के समक्ष शिकायत दाखिल कर सकता है। इससे we है कि शिकायत को प्राधिकरण और न्यायनिर्णायक अधिकारी दोनों के समक्ष उनके क्षेत्राधिकार एवं मामलों के अनुसार (as the case may be) प्रस्तुत किये जा सकते है। प्राधिकरण और न्यायनिर्णायक अधिकारी के क्षेत्राधिकार और उनके सुने जाने वाले मामले रेरा अधिनियम में सम्बंधित प्राविधानों के अन्तर्गत उल्लेख किये गये है। रेरा अधिनियम में प्राधिकरण (Authority) ERT प्रयोग किये जाने वाली शक्तियों (Powers) का अधिकार धारा-35,36,37,38, के अन्तर्गत दी गयी है। इनमें से मुख्य शक्ति जो कि धारा-38 में प्राधिकरण को दी गयी है, जिसका पढ़ा जाना उचित होगा, जो कि निम्नवत है :- "38. (l) The Authority shall have powers to impose penalty or interest, inregard to any contravention of obligations cast upon the promoters, the allottees and the real estate agents, under this Act or the rules and the regulations made thereunder. (2) The Authority shall be guided by the principles of natural justice and, subject to the other provisions of this Act and the rules made thereunder, the Authority shall have powers to regulate its own procedure. 0 Page 3 (3) Where an issue is raised relating to agreement, action, omission, practice or procedure that—
(a) has an appreciable prevention, restriction or distortion of competition in connection with the development of a real estate project; or (b) has effect of market power of monopoly situation being abused for affecting interest of allottees adversely, then the Authority, may suo motu, make reference in respect of such issue to the Competition Commission of India." उपरोक्त प्राविधान की धारा-38 की उपधारा-4 यह है कि प्राधिकरण को, सम्प्रवर्तकों, आवंटियों और भू-सम्पदा अभिकर्ताओं पर डाली गयी बाध्यताओं के किसी भी उल्लंघन के सम्बंध में, इस अधिनियम और उसके अधीन बनाये गये नियमों और विनियमों के अधीन अर्थदंड (Penalty) या ब्याज (Interest) अधिरोपित करने की शक्ति होगी। इससे स्पष्ट है कि सम्प्रवर्तक, आवंटियों और भू-सम्पदा अभिकर्ताओं पर डाली गयी बाध्यताओं (Obligations) के किसी भी उल्लंघन के लिए अर्थदंड (Penalty) और ब्याज (Interest) WHT FT घारा 38(4) के अन्तर्गत अधिरोपित किया जायेगा। इसके अतिरिक्त नन्यायनिर्णयन करने की शक्ति भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046, की धारा-74 में दी गयी है। जो कि निम्नवत् है :- "ए], ([) For the purpose of adjudging compensation under sections 2, I4, 8 and section 9, the Authority shall appoint in consultation with the appropriate Government one or more judicial officer as deemed necessary, who is or has been a District Judge to be an adjudicating officer for holding an inquiry in the prescribed manner, afler giving any person concerned a reasonable opportunity of being Page 4
{ Provided that any person whose complaint in respect of matters covered under sections 2, 4, 8 and section 9 is pending before the Consumer Disputes Redressal Forum or the Consumer Disputes Redressal Commission or the National Consumer Redressal Commission, established under section 9 of the Consumer Protection Act, 986, on or before : commencement of this Act, he may, with the permission of such Forum or Commission, as the case may be, withdraw the complaint pending before it and file an application before the adjudicating officer under this Act. (2) The application for adjudging compensation under sub-section (), shall be dealt with by the adjudicating officer as expeditiously as possible and dispose of the same within a period of sixty days from the date of receipt of the application: Provided that where any such application could not be disposed of within the said period of sixty days, the adjudicating officer shall record his reasons in writing for not disposing of the application within that period.
(3) While holding an inquiry the adjudicating officer shall have power to summon:and enforce the attendance of any person acquainted with the facts and circumstances of the case to give evidence or to produce any document which in the opinion of the adjudicating officer, may be useful for or relevant to the subject matter of the inquiry and if, on such inquiry, he is satisfied that the person has failed to comply with the provisions of any of the sections specified in sub-section (), he may direct to pay such compensation or interest, as the case any be, as he thinks fit in accordance with the provisions of any of those sections." उपरोक्त प्राविधान की aR—z7i(i) यह है कि अधिनियम की धारा-2, _ ais और aig के अधीन aifrgfet ~(Compensati — a Sr न्यायनिर्णीत करने के लिए, प्राधिकरण समुचित सरकार के परामर्श से ऐसे एक या अधिक न्यायिक अधिकारी जैसा आवश्यक समझे, जो जिला न्यायधीश है या रहा है, न््यायनिर्णायक अधिकारी के रूप में नियुक्त करेगा, जो कि किसी संबद्ध व्यक्ति को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान किये जाने के पश्चात्, विहित रीति (Prescribed manner) में जाँच करेगा। ऐसे में यह we है कि जहाँ क्षतिपूर्ति (Compensation) की मांग की जायेगी, तो उसका निर्णय न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिया जायेगा। इससे यह भी प्रतीत होता है कि प्राधिकरण की शक्ति न्यायनिर्णायक अधिकारी के नियुक्ती हेतु ser है, क्योंकि मुख्यतः नियुक्तिकर्ता प्राधिकरण है जो कि सरकार के परामर्श से करेगा।
अतः: रेरा अधिनियम की धारा-38 एवं धारा-74 से स्पष्ट है कि धारा-38 में प्राधिकरण की शक्तियां दी गयी है जिसमें कि सम्प्रवर्तकों, आवंटियों और भू-सम्पदाओं अभिकर्ताओं पर डाली गयी बाध्यताओं (Obligations) के किसी भी उल्लंघन (Any Contravention) के सम्बंध में, अर्थदंड (Penalty) एवं ब्याज (Interest) अधिरोपित किया जायेगा और धारा-74 में क्षतिपूर्ति (Compensation) हेतु न््यायनिर्णयन करने की शक्ति का अधिकार न्यायनिर्णायक अधिकारी को है जो कि केवल धारा-42, धारा-44, धारा-48 और धारा-49 (Only for Sections 2,4,8,9) के अधीन किया जायेगा। रेरा अधिनियम की धारा-42 में निम्न प्राविधान है :- "|2, Where any person makes an advance or a deposit on the basis of the information contained in the notice advertisement or prospectus, or on the basis of any model apartment, plot or building, as the case may be, and sustains any loss or damage by reason of any incorrect, false statement included therein, he shall be compensated by the promoter in the mamner as provided under this Act: Provided that if the person affected by such incorrect, false statement contained in the notice, a EY Page 6 fF: or prospectus, or the model apartment, plot or building, as the case may be, intends to withdraw from the proposed project, he shall be returned his entire investment along with interest at such rate as may be prescribed and the compensation in the manner provided under this Act."
उपरोक्तानुसार प्राविधान से यह है कि जहाँ कोई व्यक्ति सूचना, विज्ञापन प्रास्पेक्ट्स में दिये जानकारी के आधार पर कोई अग्रिम देता : या जमा करता है और उसे उसमें सम्मलित गलत, मिथ्या कथन के कारण कोई हानि या नुकसान उठाना पढ़ता है, तो उसकी सम्प्रवर्तक द्वारा इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित रीति में क्षतिपूर्ति की जायेगी। ऐसे में जहाँ शिकायतकर्ता धारा i2 3 प्राविधानों के अनुसार ससाक्ष्य क्षतिपूर्ति की माँग करेगें वहाँ उसका अभिनिर्णय न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिया जायेगा। इसी धारा के प्राविधान के दूसरे अनुच्छेद (Paragraph 2) में यह कहा गया है कि पीड़ित आवंटी परियोजना से यदि अपना नाम वापस लेना चाहता है, तो उसके निवेश की गयी धनराशि, ब्याज सहित, ऐसी दर जो कि पर जो कि विहित की जाए के अनुसार लौटाया जायेगा, और अधिनियम के अधीन उपबंधित रीति के अनुरूप उसकी क्षतिपूर्ति की जायेगी। wean यदि केवल ब्याज सहित धनराशि वापिस माँगी गई है व ब्याज दर विहित है तो उसमें अभिनिर्णय का कोई अंश समाविष्ट नहीं है। अतः इस धारा में 2 अंग है, पहला (Para ) जहाँ क्षतिपूर्ति का प्रश्न है वह न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा निर्णय किया जायेगा और दूसरा (Para 2) जहाँ जमा धनराशि मय ब्याज का प्रश्न है वह प्राधिकरण द्वारा निर्णीत किया जायेगा, इसी प्रकार we अधिनियम की oma की उपधारा-3 निम्नवत अर 0० है :-
In case any structural defect J any other defect in workmanship, quality or provision of services or any other obligations of the promoter as per the agreement for sale relating to such development is brought to the notice of the promoter within a period of five years by the allottee from the date of handing over possession, it shall be the duty of the promoter to rectify such detects without further charge, within thirty days, and in the event of promoter's failure to rectify such defects within such time, the aggrieved allottees shall be entitled to receive appropriate compensation in the manner as provided under this Act." धारा-44 में सम्प्रवर्तक द्वारा मंजूर रेखांको और परियोजना विनिर्देशों का पालन किये जाने का प्राविधान है। इसी कम में धारा-44 की उपधारा-3 में यह प्राविधानित है कि यदि कब्जा सौपें जाने की तारीख से 5 वर्ष की अवधि के भीतर आवंटी द्वारा, ऐसे विकास से सम्बंधित किसी संरचनात्मक त्रुटि या सेवाओं के कर्मकौशल, क्वालिटी या उपबन्ध या सम्प्रवर्तक की किन्हीं अन्य बाध्यताओं की ओर सम्प्रवर्तक का ध्यान दिलाया जाता है, तो सम्प्रवर्तक का यह कर्तव्य होगा कि वह ऐसी त्रुटियों को बिना किन्हीं अतिरिक्त प्रभारों के 30 दिन के भीतर दूर कराये और सम्प्रवर्तक द्वारा ऐसी त्रुटियों को ऐसे अवधि के भीतर दूर करने में असफल रहने की दशा में पीड़ित आवंटी समुचित प्रतिकर पाने का हकदार होगा, जो इस अधिनियम के अधीन उपबंधित हो ।
इससे भी यह स्पष्ट है कि इसमें क्षतिपूर्ति के निर्धारण का प्रश्न है जो कि बाध्यकारी शर्तों को पूरा न किये जाने के लिए इस धारा के अन्तर्गत, इसका निर्णय न््यायनिर्णायक अधिकारी का होगा। परन्तु पीड़ित व्यक्ति को यह स्वतंत्रता होगी कि वह, सम्प्रवर्तक द्वारा उन बाध्यकारी शर्तों को पूर्ण कराये जाने हेतु आदेश के लिए, प्राधिकरण के समक्ष अपना वाद प्ररतुत कर सकते है। [ester es set one ee अधिनियम की ais के अन्तर्गत निम्नवत् प्राविधान दिये गये Page 8 | I () If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,— (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein: or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other 4 he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. " उपरोक्त प्राविधान यह है कि यदि सम्प्रवर्तक-:
(क). विकय करार के निबन्धों के अनुसार उसमें निर्धारित तारीख तक सम्यक रूप से पूरा करने में, या | (ख). इस अधिनियम के अधीन अथवा किसी अन्य प्रकरण से | रजिस्ट्रीकरण का निलंबन या प्रतिसंहरण के कारण विकासकर्ता के रूप में | उसका कारोबार बन्द होने के कारण, | | यथास्थिति, किसी अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड या भवन का पूरा करने में असफल रहता है या उसका कब्जा देने में असमर्थ रहता है, तो वह उपलब्ध किसी अन्य उपचार पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना आवंटी की मांग पर, यदि eee परियोजना से बाहर होना चाहता है, तो यथास्थिति, उस भू-खण्ड या भवन के सम्बंध में उसके द्वारा प्राप्त रकम को, ऐसी दर पर ब्याज सहित, जो इस नियमित विहित की जाये एवं इस अधिनियम के अधीन यथा उपबन्धित रीति में क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का पात्र होगा। परन्तु जहाँ किसी आवंटी का परियोजना से बाहर आने का आशय नहीं है, वहाँ सम्प्रवर्तक द्वारा उसे कब्जा सौपें जाने तक विलम्ब के प्रत्येक माह के लिए उस दर पर जो विहित की जाये, ब्याज पाने का अधिकारी होगा। अतः यह स्पष्ट है कि यदि सम्प्रवर्तक द्वारा अनुबन्ध के अनुसार परियोजना को अपार्टमेन्ट, भू-खण्ड al भवन पूर्ण नहीं किया जाता है, या कब्जा नहीं दिया जाता है और यदि आवंटी परियोजना से बाहर आना चाहता है, तो वह अपनी जमा धनराशि ब्याज सहित और क्षतिपूर्ति भी पाने का अधिकारी होगा।
यदि आवंटी परियोजना में बना रहना चाहता है, तो प्रतिमाह विलम्ब के लिए ब्याज देय होगा। इससे भी यह स्पष्ट है कि धारा-38 के अन्तर्गत प्राधिकरण को यह शक्ति है कि जहाँ ब्याज और अर्थदंड का प्रश्न होगा, तो यह प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार में होगा और जहाँ क्षतिपूर्ति का प्रश्न होगा, तो वह धारा-74 के अन्तर्गत न््यायनिर्णायक अधिकारी के क्षेत्राधिकार में होगा। इन प्राविधानों को संयुक्त रूप से पढ़ा जाये, तो इन प्राविधानों की भाषा में यह प्रस्तावित है कि यदि प्रोमोटर द्वारा अपने बाध्यकारी अनुबन्ध के निबन्धनों के अनुसार कब्जा नहीं दिया जाता है, तो आवंटी को यह दावा करने का अधिकार होगा कि अपना oar धनराशि ब्याज सहित वापस ले सकेगें। उपरोक्तानुसार विशेष रूप से anictws को दृष्टिगत रखते हुए भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम की धारा-84 के अन्तर्गत उ0प्र0 भू-सम्पदा नियमावली, 20i6 बनायी गयी। जिसमें प्राधिकरण के समक्ष शिकायत प्रस्तुत करने के लिए फार्म “एम” नियम-33(4) एवं न्यायनिर्णायक a न -००-५३+-ओभ%आरररआभभररममम ए०8९१0 i के समक्ष आवेदन करने के लिए फार्म “एन” नियम-34(4) का प्राविधान है। इसके अतिरिक्त उ0प्र0 भू-सम्पदा प्राधिकरण (सामान्य) विनियमन, 2049 के प्रस्तर 24 के अन्तर्गत ऑनलाईन शिकायत दर्ज कराना का भी प्राविधान है। इसी कम में आवंटियों के हित के लिए निम्न 5 a= Right of Allottee
"L9. (4) The allottee shall be entitled to claim the refund of amount paid along with interest at such rate as may be prescribed and compensation in the manner as provided under this Act, from the promoter, if the promoter fails to comply or is unable to give possession of the apartment, plot or building, as the case may be, in accordance with the terms of agreement for sale or due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of his registration under the provisions of this Act or the rules or regulations made thereunder. " उपरोक्तानुसार यह है कि यदि सम्प्रवर्तत विकय करार के निबन्धों के अनुसार या इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों या विनियमों के उपबन्धों के अधीन उसके रजिस्ट्रीकरण निलम्बन या प्रतिसंहरण हो जाने के कारण, विकासकर्ता के रूप में उसका कारोबार बन्द हो जाने के कारण या विकय करार के निबन्धानुसार अनुपालन करने में असफल रहता है या, यथास्थिति, SAC, भू-खण्ड या भवन का कब्जा देने में असमर्थ रहता है, तो आवंटी द्वारा waade को दिये गये धनराशि ऐसी ब्याज दर पर वापस जायेगी जो कि विहित की जायेगी तथा अधिनियम के अधीन उपबंधित रीति में क्षतिपूर्ति सहित दावा करने का हकदार होगा। अतः: यह स्पष्ट है कि यदि सम्प्रवर्तक द्वारा किये गये विकय करार के नियम एवं शर्तों के अनुसार कब्जा नहीं जा जाता है, तो वह cc नदी कलम Page 44 a
अधीन नियम एवं नियमावली के अन्तर्गत जमा धनराशि ब्याज सहित दावा करने का हकदार होगा और इसके अतिरिक्त क्षतिपूर्ति पाने का भी अधिकारी होगा। ऐसे में यह अवधारित किया जा सकता है कि जहाँ आवंटी जमा धनराशि का ब्याज सहित दावा करने का हकदार है, तो उसका क्षेत्राधिकार प्राधिकरण के अन्तर्गत मानी जायेगी, जिसकी शक्ति धारा-38 के अन्तर्गत दी गयी है, क्योंकि ब्याज दर राज्य सरकार द्वारा विहित है एवं इसमें कोई “एडज्यूडिकेशन” का प्रश्न निहित नहीं है। जहाँ तक क्षतिपूर्ति दिलाये जाने का प्रश्न है, तो यह eater धारा 74 के अनुसार न्यायनिर्णायक अधिकारी का होगा, क्योंकि इसमें निर्धारित प्रकियानुसार साक्ष्यों के आधार पर क्षतिपूर्ति का निर्धारण अपेक्षित है। रेरा अधिनियम धारा-72 में न््यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा क्षतिपूर्ति पर विचार किये जाने वाले कारण के बारे में भी प्राविधान दिये गये है जो कि निम्नवत् है :- "72. While adjudging the quantum of compensation or interest, as the case may be, under section 7], the adjudicating officer shall have due regard to the following factors, namely:— (a) the amount of disproportionate gain or unfair advantage, wherever quantifiable, made as a result of the default; (b) the amount of loss caused as a result of the default; (c) the repetitive nature of the default; (d) such other factors which the adjudicating officer considers necessary to the case in furtherance of justice. " इस धारा के प्राविधान में ब्याज भी जोड़ा गया है, क्योंकि क्षतिपूर्ति की धनराशि की मात्रा का निर्धारण एकमुश्त धनराशि अथवा समकक्ष ब्याज दोनों Page 2
हो सकता है। स्पष्टतया क्षतिपूर्ति के रूप दिये जाने वाला ब्याज, आवंटी की जमा धनराशि की ब्याज सहित धनवापसी के प्रकरण से अलग है। जहाँ ब्याज के रूप में दी जाने वाली क्षतिपूर्ति की राशि में ब्याज दर का निर्धारण सम्मिलित है, प्राधिकरण द्वारा धनराशि ब्याज सहित वार्षिक करने की दशा में ब्याज दर पूर्व निर्धारित है तथा उसमें अभिनिर्णय का अंश नहीं है ह धनवापस किये जाने वाले प्रकरण में भुगतान किये जाने वाले ब्याज की दर राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियमावली के अन्तर्गत दी जाती है और क्षतिपूर्ति निर्धारण या ब्याज की गणना अधिनिर्याणक द्वारा निम्न 4 बिन्दुओं को दृष्टिगत रखते हुए दिये जाते है। (क) व्यतिकम के परिणाम स्वरूप अनुपातिक लाभ या अनुचित फायदे की, जहाँ कहीं अनुमान्य हो, रकम: (ख) व्यत्तिकम के परिणामस्वरूप हानि की रकम: (ग) व्यतिकम के पुनरावुत्तिपूर्ण प्रकृति: (घ) ऐसे अन्य कारक, जो न्यायनिर्णायक अधिकारी न्याय के अग्रसरण के मामले में आवश्यक समझें | ऐसे में यह स्पष्ट है कि क्षतिपूर्ति वाले प्रकरण के निस्तारण जो न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा किया जाएगा, उसका जमा धनराशि मय ब्याज वापस किये जाने वाली धनराशि से कोई लेन-देना नहीं है। यह भी है कि रेरा अधिनियम में क्षतिपूर्ति एवं जमा धनराशि मय ब्याज हेतु अलग-अलग प्राविधान दिये गये है। क्षतिपूर्ति की गणना धारा-72 में दिये गये सिर्फ 4 आधारों एवं धारा 42, 44, 8 व १9 के प्राविधानों तथा शर्तों के अनुसार ही दी जायेगी। अधिनियम के अनुसार प्राधिकरण को भू-सम्पदा सेक्टर को नियमित रूप विभिन्न प्राविधानों के अनुसार विकास करने हेतु दिये गये है साथ me Page 3
[ अधिनिर्णायक अधिकारी को नियुक्त करने j अधिकार दिया गया है जो सिर्फ विशिष्ठ रूप से कृत्य अनुसार क्षतिपूर्ति वाली धनराशि का निर्धारण Het | जहाँ तक ब्याज, अर्थदंड, क्षतिपूर्ति में अन्तर का प्रश्न है, तो इन सभी के अन्तर के सम्बंध में निम्नवत् साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट किये गये है माननीय उच्च न्यायालय बाम्बे द्वारा नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राएलि0 आदि बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया आदि में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"258. In paragraph-9 of Alok Shanker Pandey v. Union of India, (2007) 3 SCC 545, the Apex Court has held that “There is misconception about interest. Interest is not a penalty or punishment at all, but it is the normal accretion on capital. For example if A had to pay B a certain amount, sayl0 years ago, but he offers that amount to him today, then he has pocketed the interest of the principal amount. Had A paid that amount to B 0 years ago, B would have invested that amount somewhere and earned interest thereon, but instead of that A has kept that amount with himself and earned interest on it for this period. Hence equity demands that A should not only pay back the principal amount but also the interest thereon to 3.7 The object of Section 8 is to recompense an allottee for depriving him of the use of the funds paid by him. The promoter who has received money from the allottee but has failed to adhere to his contractual or statutory obligations, cannot claim that he is entitled to utilize the monies without paying any interest with respect thereto to the allottee. " उक्त से स्पष्ट है कि ब्याज अर्थदंड नहीं है और न ही कोई सजा है, किन्तु साधारण रूप से रकम पर हुई अभिवृद्धि है। धारा-8 का लक्ष्य आवंटी को जमा किये गये धनराशि के उपयोग का प्रतिदान करने हेतु है। इसी कारण यह ier 2 प्राधिकरण द्वारा क्षेत्राधिकारिता के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का Page 4 Sep «3333७» +«----क. E हुए दिया जा रहा 3) तदनुसार बिन्दु संख्या-4 enka किया जाता है। निस्तारण बिन्दु Ho 2
बिन्दु सं? 2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? 4 बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित परिस्थितियों (force majeure events) के कारण परियोजना विलंबित हुई | विपक्षी की ओर से फोर्स मैज्योर की बाबत sere: रूप से कोई ऐसा साक्ष्य पत्रावली | पर दाखिल नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित था | इस सम्बंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील | संख्या-940 // 2047 विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं | अन्य में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं प्रस्तर i004 फोर्स tek को निम्नवत् परिभाषित किया हैः- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature. " उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति | है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। dU | 5 परिस्थितियों को देखते हुए aifas—i9 को : मैज्योर की श्रेणी में माना जाना उचित होगा। तदनुसार बिन्दु Wo 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3 शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा अभी तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा नहीं दिया गया है। ऐसे में वह कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज चाहते हैं।
दूसरी ओर विपक्षी का कहना है कि वह मार्च 2024 तक परियोजना पूर्ण कर कब्जा दे देंगे। 'रेरा' के गठन के मूल उद्देश्य एवं समस्त परिस्थितियों को देखते हुए समुचित निर्णय लेकर आदेश पारित किया जाना न्यायहित में होगा। रेरा के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940// 2047 बिकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में दिनांक 2307.20:9 को परित आदेश के पृष्ठ संख्या-24 के प्रस्तर-420 में निम्नवत् veers किया हैः- 20 "It is apparent that RERA_ intends protection of home-buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have to be completed, for that,we are required to pass orders. We have already assigned the task to NBCC for completion of buildings as the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixcd and the time which could have been extended. Now, more than l0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years periud by the promoter/builder.The maximum time fixed Page 6 | रे RERA has also expired and extension could not have been beyond [ year." उत्तानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि wed द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यो को पूर्ण कराते हुए गृहकताओं को उनका आवास फ्लैट मिल सके। तत्कमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के मु में निम्नवत् उल्लेख किया है:-
"The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’ interest and at the same time to hold them responsible for the duties enjoined upon, them under the said statute. We are not absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project. " उक्त आब्जर्वेशन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहकेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य रेरा का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्ब होने पर गृहकेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना Ai ने तक नियमानुसार ब्याज पा सके। a
इसी के पश्चात् पुनः रेरा के सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील Wen-43/20i9 पायनियर अर्बन लैन्ड एंड इन्फास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य में दिनांक 09.08.209 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया है:- "The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream _ is shattered, or at least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable. " उक्त आदेश में महत्वपूर्ण आब्जर्वेशन यह दिया गया है कि रेरा का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर्स द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में फलस्वरूप पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य (Recalcitrant) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि किश्तों का समय से भुगतान करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके |
ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य, परियोजना को फलस्वरूप प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा सम्यक रूप से AV en सनक: कलम: उप-पमकपक ना तन पटक: सपना कस कस भ आराम ?०8९8 E का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्ब होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान करें। चूंकि विपक्षी द्वारा मार्च 202 तक परियोजना पूर्ण कर : दिये जाने की बात कही गयी है, जिससे विदित है कि परियोजना पूर्णता की ओर है। समस्त परिस्थितियों को देखते हुए यह उचित होग़ा कि शिकायतकर्ता दिनांक 34.03. 202 तक अपने फ्लैट का कब्जा लें। विपक्षी भी परियोजना में गंभीरता पूर्वक तीव्र गति से कार्य कराते हुए शिकायतकर्ता को कब्जा दें। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन-पत्र की पूर्ण प्रति दाखिल नहीं की गयी है, जिससे विदित हो सके कि विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र किस तिथि को निष्पादित किया गया और उनके द्वारा कब तक कब्जा दिया जाना था। यह स्पष्ट है कि पक्षकारों के मध्य आवंटन पत्र निष्पादित है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि आवंटन पत्र के प्रस्तर-72 में कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में नियम एवं शर्तों का उल्लेख है|
वर्तमान में यह भी स्पष्ट है कि परियोजना विलम्बित है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा यह वाद दर्ज कराया गया है और ऐसे में शिकायतकर्ता अनुबन्धित अवधि के पश्चात् से ओ.सी»सी.सी प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलंबित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। E सम्बंध में उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र 4 न्यायालय के नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. "
अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटटा के लिए करार) नियमावली आना |. अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये E विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wer 9.2 Gi) ¥ wie के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है Ar "The Allottee shall. have the option of terminating the Agreement in which case : Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: " यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wae 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है।
जहां तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बंध में सिविल अपील to 6649-50 /208 सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent - Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing दर possession. The Respondent - i ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. / सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो की तिथि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी. / सी.सी. मिलने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो तक की अवधि तक विलम्ब के लिए पाने के अधिकारी होगें | इसके अतिरिक्त दिनांक 47.0.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8--3-48-65 विविध / 46 के द्वारा मॉडल Wikre के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7.] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force qv Page 22 E If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension. of time for delivery of possession of the [Apartment/Plo 4 gil इसी कम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र० रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 20.05.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) @ प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25. 03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता के यूनिट की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र,अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 34.03.2024 तक पूर्णता हेतु चारों प्रमाण-पत्र अथवा ओ.सी. /सी. सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को अनुबन्धित अवधि के पश्चात् से (क) ओ. सी/सी.सी प्राप्त होने [अथवा इलैक्ट्रिकल सर्टिफिकेट, फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल सर्टिफिकेट, लिफ्ट इन्स्टालेशन सर्टिफिकेट WV Page 23 E JEM. के लिए आवेदन दिये जाने के तिथि के दिन बाद की तिथि से| अथवा (ख) कब्जा ऑफर किये जाने, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर MCLR+ प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें| साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। कोविड-49 की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु देश में हुए लॉकडाउन एवं फोर्स मैज्योर को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी। 3. विपक्षी का निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम 206 के धारा Azali) के अन्तर्गत ब्याज को परिभाषित किया गया है कि रेरा लागू होने के बाद यदि कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित ब्याज दर MCLR+I प्रतिशत है।
4... विपक्षी उपरोक्तानुसार कब्जा ऑफर पत्र जारी करना सुनिश्चित करे। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ( कुमार) (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण दिनांक :- 04/42/2020 Page 24