Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Ravindra Arora v. Greater NOIDA Industrial Development Authority
Complaint No. NCR144/03/51466/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2020-11-03
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-04ए श्री राजीव कुमार, माननीय अध्यक्ष कम संख्या शिकायत संख्या | es >> #छत ] NCRI44/03/5466/2020 रविन्द्र अरोड़ा 2 ॥7टए₹44/0/0974/2020 नवनीत मोदी बनाम ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गौतमबुद्धनगर शिकायतकर्ता रविन्द्र अरोड़ा के साथ 04 अन्य शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध वाद योजित किया गया है। इन दोनों शिकायतों के तथ्य समान है और एक समान साक्ष्य हैं। यह दोनों शिकायतें विपक्षी की परियोजना BHS-I2/43 ETA-II 6प्र-&/ से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या —NCRI44/03/5466/2020 रविन्द्र अरोड़ा अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्द जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना BHS-{2/I3 ETA-II GH-IA/I के Block-5 में फ्लैट संख्या-30787 बुक किया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 49,62,440,//- रूपये का भुगतान किया. गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि आवंटन पत्र दिनांक 46.08.2040 को जारी किया था, जिसके अनुसार 24 माह में कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वाव आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। v4 2 शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र दिनांक 46. 08.2040, ब्रोशर की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है|
विपक्षी की ओर से प्रतिवादपत्र दाखिल करते हुए कहा गया है कि शिकायतकर्ता ने बिल्टअप हाउसिंग स्कीम BHSI2 में आवेदन किया था, जिसमें शिकायतकर्ता ने उक्त स्कीम के अन्तर्गत आवेदन संख्या-30909 पंजीयन धनराशि 7,99,000/— रूपये जमा कराते आवेदन किया। योजना का ड्रा कराने के पश्चात शिकायतकर्ता के पक्ष में फ्लैट संख्या-30797, ब्लॉक-05, WaEL-ETA-02 का आवंटन पत्र दिनांक t6.08.20I0 को प्रेषित किया गया। आवंटन पत्र के अनुसार आवंटी को दिनांक 30.09.20:0 तक आवंटन धनराशि 3,98,000/— रूपये तथा शेष बकाया धनराशि का भुगतान 5 वर्षों में 40 छमाही की किश्तों में किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 29.09.20:0 को 3,58,000,//- रूपये का भुगतान करते हुए पेमेन्ट शैड्यूल को 40 छमाही की किश्तों से बदलकर ॥ मुश्त भुगतान करने हेतु re प्लॉन को परिवर्तन करने का अनुरोध किया गया, जिसके कम में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता का अनुरोध स्वीकार करते हुए दिनांक 09.4.2040 को 43,65,440 /— रूपये की धनराशि का भुगतान दिनांक 4.4.2000 तक एक मुश्त में करने के लिए कहा गया। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 74.44.20:0 को 43,65,440/— रूपये एक मुश्त भुगतान किया गया। ग्राम-मकौड़ा की भूमि माननीय उच्च न्यायालय से विवादित होने के कारण इस योजना के सेक्टर-ईटा-2 के भवन को निकटवर्ती ग्राम-जैतपुर वेशपुर में भवनों का रिएलोकेशन किया गया। रिएलोकेशन ड्रा में आवंटी को भवन संख्या-20477, ब्लॉक-ए, सेक्टर-ईटा-2, क्षेत्रफल--86.67 वर्ग मीटर भवन का रिएलोकेट किया गया। आवंटी को लीज़ डीड व भवन का कब्जा ऑफर पत्र दिनांक 29.03.20I9 को प्रेषित कर दिया गया। कब्जा ऑफर पत्र के अनुसार आवंटी को 6 माह के भीतर भवन की लीज़ डीड कराते हुए भवन का कब्जा प्राप्त किया जाना था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अभी तक chor डीड निष्पादित नहीं करायी गयी। यदि शिकायतकर्ता लीज़ डीड निष्पादित कराने हेतु इच्छुक नहीं है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्ता प्राधिकरण के कार्यालय आदेश दिनांक्र 7.06205 के अनुसार लाभ पा सकता है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित बहस दिनांक 08.09.2020, शिकायतकर्ता को भेजे गये va दिनांक 07.04.20:6, दिनांक 48.44 .2046, दिनांक 29. 03.2049 की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के Tet को सुना गया a पत्रावली का अवलोकन किया, जिसके आधार पर निम्नलिखित वाद बिन्दु विचरित किये जाते हैं :- Jf. “os t. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना facifad हुई? यदि हां तो प्रभाव? 2. क्या शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? 3. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज का दर क्या होगा ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु संख्या-। इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई ? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से कथन किया गया है कि कुछ अप्रत्याशित घटनाओं (force majeure events) के कारण परियोजना विलंबित हुई | विपक्षी की ओर से किसी स्पेसिफिक फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के समर्थन में कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है, जिससे की विदित हो कि परियोजना की भूमि पर कार्य बाधित हुआ। इस सम्बंध में माननीय एन.सी.डी.आर.सी द्वारा उपभोक्ता शिकायत संख्या-4430,/206 “ Are कौशल एवं अन्य बनाम यूनिटेक लिमिटेड” में निर्णय के प्रस्तर 44 में फोर्स मैज्योर द्वारा परियोजना विलम्बित होने के लिए निम्न ऑबजरवेशन किया है :-
"Coming to the plea of Force Majeure taken by the opposite party. It may be noted that issue raised by the opposite party is no more resintegra. Similar pleas to explain the delay in construction were taken by the opposite party in Consumer Complaint No.347 of 294 Swarn Talwar and 2 Ors. Vs. Unitech Ltd. and other connected consumer complaints which pertain to the alleged deficiency i.e. failure of the opposite party to deliver possession of the booked apartments in the same project. In the aforesaid matters, Coordinate Bench of this Commission vide order dated 4.08.20I5 declined to accept the plea of Force Majeure taken by the opposite party. The relevant reasoning of the Coordinate Bench VY इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 // 2047 “विकम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं eR 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें की युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्रकृतिक आपदा आई हो, rejecting the plea of Force Majeure is reproduced as under: "Coming to the pleas that there was recession in the economy and a disruption due to agitation by farmers and acute shortage of labour, etc., the following view taken by us In Satish Kumar Pandey (Supra) is relevant.
"Neither any new legislation was enacted nor an existing rule, regulation or order was amended stopping suspending or delaying the construction of the complex in which apartments were agreed to be sold to the complainants. There is no allegation of any lock- out or strike by the labour at the site of the project. There is no allegation of any slow-down having been resorted to by the labourers of the opposite party or the contractors engaged by it at the site of the project. There was no civil commotion, war, enemy action, terrorist action, earthquake or any act of God which could have delayed the completion of the project within the time stipulated in the Buyers Agreement. It was contended by the counsel for the OP that the expression 'slow down' would include economic slow- down or recession in the Real Estate sector. I, however, find no merit in this contention. The word ‘slow down' having been used alongwith the words lock-out and strike, I has to be read ejusdem generis with the words lock-out and strike and therefore, can mean only a slow down if resorted by the labourers engaged in construction of the project." ०००० Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." ~
प्रश्नगत प्रकरण में ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई और विपक्षी ऐसी दशा में वह इस तर्क का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। इसके अतिरिक्त “कोविड” के प्रभाव के कारण छः: माह की अतिरिक्त अवधि सभी परियोजनाओं को अनुमन्य कराई गई है। तद्नुसार बिन्दु eri Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्तागण के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्तागण पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि आवंटन पत्र दिनांक 46.08.2040 को जारी किया था, जिसके अनुसार 24 माह में कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी द्वारा दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि आवंटी को लीज़ डीड व भवन का कब्जा ऑफर पत्र दिनाक 29.03.2049 को प्रेषित कर दिया गया। कब्जा ऑफर पत्र के अनुसार आवंटी को 6 माह के भीतर भवन की लीज़ डीड कराते हुए भवन का कब्जा प्राप्त किया जाना था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अभी तक लीज़ डीड निष्पादित नहीं करायी गयी। यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में फ्लैट बुक कराया था। इस तथ्य पर भी कोई विवाद नहीं है कि विपक्षी अनुबंधित अवधि में कब्जा प्रदान करने में असमर्थ रहा है। जहाँ तक केता द्वारा रिफण्ड के अनुरोध का प्रश्न है, इस विषय में रेरा अधिनियम के प्राविधानों को समग्र रूप से पढा जाना आवश्यक है ताकि सभी पक्षों के मत को दृष्टिगत रखते हुए एक संतुलित निर्णय लिया जा सकें |
रेरा एक्ट की धारा ig () में प्राविधान है कि :- Section 78 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (8) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the Possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार केता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा मासिक दर से ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें।
रेरा अधिनियम की धारा 34 में रेरा के अन्य “फंग्शन्स” के साथ-साथ सब-क्लॉज () में "to ensure compliance of the obligations cast upon the Promoters, the allottees and the real estate agents under this Act and the rules and regulations made thereunder" का भी उल्लेख है। इसी प्रकार धारा 32 में रियल gee सेक्टर के विकास हेतु अथॉरिटी के उत्तरदायित्यों में निम्न भी सम्मिलित हैं :-- ह “The Authority shall in order to facilitate the growth and Promotion of a healthy, transparent, efficient and competitive real estale sector make recommendations to the appropriate Government of the competent authority, as the case may be, on,— (a)protection of interest of the allottees, promoter and real estate agent,....... @any other issue that the Authority may think necessary for the promotion of the real estate sector.” उक्त प्राविधानों से यह स्पष्ट है कि “रियल एस्टेट सेक्टर” के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करने के लिए इसके wh Ro होल्डर्स के हितों को समग्र रूप से देखते हुए समुचित निर्णय लेने का उत्तरदायित्व इस ऑथरिटी का है। है इस कम में मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737,/ 2047 “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” जिसमें रेरा अधिनियम की वैद्यानिकता के सम्बंध में निर्णय दिया गया था, के प्रस्तर 424 में मा. उच्च न्यायालय द्वारा निम्न संवीक्षण किया :-
“The entire scheme of the RERA is required to be kept in mind. It is already submitted during the course of hearing that in many cases helpless allottees had approached consumer forum, High Courts, Apex Court in a given fact situation of the case. The courts have been passing orders by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth. Under RERA now this function is assigned to the authority, tribunal. An appeal lies to the High Court. Under one umbrella, under one regulation and one law all the issues are tried to be resolved. Provisions of Section 77 refers to power to adjudicate. A District Judge is conferred with the power to adjudicate compensation under Sections 72, 74, 76 and 49, A promoter could very well put up his case before the adjudicator who deals with the issues in the light of the fact situation of each case. Therefore, there should not be any apprehension that mechanically compensation would be awarded against a promoter on failure to complete the development work.”
उक्त से स्पष्ट है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद, यद्यपि समय से इकाई न मिलने की दशा में आवंटी का अपनी धनराशि ब्याज सहित मांगने का अधिकार है, तथापि war वर्णित संवीक्षा को देखते हुए अथॉरिटी, प्रकरण के समस्त तथ्यों, के आधार पर ‘by moulding reliefs by granting interest, compensation to the allottees, and issuing directions for timely completion of project, transit accommodation during completion of project, so on and so forth’ के अनुरूप आदेश पारित किए जा सकते हैं। एलोटीज द्वारा धनराशि वापस किए जाने व परियोजना में बने रहने “वाले एलोटीज के हितों में wget के प्रसंग में “चित्रा शर्मा बनाम यूनियन ऑफ इण्डिया” (744/20:7) के निर्णय में मा. सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय के प्रस्तर 40 में निम्न ऑबजरवेशन किया है af - a>
"As we have stated earlier, an amount of Rs 750 crores is lying in deposit before this Court pursuant to the interim directions, on which interest has accrued. The home buyers have earnestly sought the issuance of interim directions to facilitate a pro-rata disbursement of this amount to those of the home buyers who seek a refund. "We are keenly conscious of the fact that the claim of the home buyers who seek a refund of monies deserves to be considered with empathy. Yet, having given our anxious consideration to the plea and on the balance, we ate not inclined to accede to it for more than one reason. Firstly ....Secondly, the figures which have been made available presently, following the opening of the Web portal by the amicus curiae, indicate that 8% of the home buyers have sought'a refund of their monies while 92% would evidently prefer possession of the homes which they have purchased. We cannot be unmindful of the interests of 92% of the home buyers many of whom would also have obtained loans to secure a home. They would have a legitimate grievance if the corpus of Rs 750 crores (together with accrued interest) is distributed to the home buyers who seek a refund." इसके अतिरिक्त रेरा के गठन के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील en—o40/20:7 “बिकम चंटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” में दिनांक 23.07.20I9 को परित आदेश के पृष्ठ संख्या-244 के प्रस्तर-420 में निम्नवत् उल्लेख किया है:-
"It is apparent that RERA intends protection of home- buyers and aims at completion of the buildings. The buildings have to be completed, for that, we are required to pass orders. We have already assigned the task to NBCC_ for completion of buildings as the promoters/builders have failed to complete the building within the time fixed and the time which could have been extended. Now, more than l0 years have passed and buyers were given the assurances that they would get flats within three years period by the promoter/builder. The maximum time fixed in RERA has also expired and extension could not have been beyond | year." उक्तानुसार यह स्पष्ट किया गया है कि रेरा आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए है और उसका लक्ष्य यह है कि प्रोमोटर्स द्वारा बिल्डिंग के समस्त विकास कार्यों को पूर्ण कराते हुए गृहकेताओं को उनका आवास फ्लैट मिल सके। तत्कमानुसार आदेश के पृष्ठ संख्या-255 के प्रस्तर-437 में निम्नवत् उल्लेख किय। हैः- "The provisions of RERA are beneficial to the home buyers and are intended to insulate them from fraudulent action, ensures completion of the building and it is the duty of the court to protect and ensure the home buyers’interest and at the same time to hold them responsible for the duties enjoined upon them under the said statute. We are not absolving the home buyers from the discharge of their liability if any. At the same time, they have the right of enforcement of their right for compensation due to undue delay in completion of the project."
उक्त आब्जर्वेशन में यह भी we किया गया है कि रेरा के प्राविधान गृहकेताओं के लिए लाभकारी हैं और किसी प्रकार के विश्वासघात होने से आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए हैं एवं बिल्डिंग को पूर्ण कराने हेतु निगरानी का कार्य रेरा का है और पक्षकारों के कर्तव्यों एवं उत्तरदायित्व अधिनियम में तय किये गये हैं। यह भी लाभ दिया गया है कि परियोजना विलम्ब होने पर गृहकेताओं का यह अधिकार होगा कि वह विलम्ब के लिए परियोजना पूर्ण होने तक नियमानुसार ब्याज पा सके। इसी के पश्चात् पुनः रेरा के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-43 /2049 “पायनियर अर्बन लैन्ड एंड इन्फास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ में दिनांक 09.08.209 को आदेश के पृष्ठ संख्या-86 के प्रस्तर-29 में निम्नवत् उल्लेख किया हैः- "The object of RERA is to see that real estate projects come to fruition within the stated period and to see that allottees of such projects are not left in the lurch and are finally able to realise their dream of a home, or be paid compensation if such dream is shattered, or at al 40 least get back monies that they had advanced towards the project with interest. At the same time, recalcitrant allottees are not to be tolerated, as they must also perform their part of the bargain, namely, to pay instalments as and when they become due and payable."
उक्त आदेश में महत्वपूर्ण आब्जर्वेशन यह दिया गया है कि रेरा का लक्ष्य है कि वह अपनी निगरानी एवं देखरेख में प्रोमोटर्स द्वारा भू-सम्पदा परियोजना को एक निर्धारित अवधि में फलस्वरूप पूर्ण करा ली जाये, जिससे कि आवंटी अपने फ्लैटस् पाने से वंचित न हो जाये और उन्हें अपने सपनों का घर मिल सके, साथ ही साथ दुर्दम्य (२०८०७०४थ) आवंटियों को भी परियोजना पूर्ण कराने का सहयोग न करने में उत्तरदायित्व माना है। यह भी कहा गया है कि आवंटी अपने कर्तव्यों को सम्यक रूप से पूर्ण करें, मुख्य रूप से जैसे कि किश्तों का समय से भुगतान करना सुनिश्चित कर लें, जिससे कि परियोजना को पूर्ण किया जा सके। ऐसे में उपरोक्त माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित की गयी विधि व्यवस्था के अनुसार यह स्पष्ट है कि रेरा का मुख्य उद्देश्य, परियोजना को फलस्वरूप प्रोमोटर्स द्वारा पूर्ण कराना और आवंटियों द्वारा सम्यक रूप से अपनी किश्तों का भुगतान सुनिश्चित कर लिया जाना, जिससे कि परियोजना को निर्धारित अवधि में पूर्ण कराया जा सके। आवंटियों के हितों को संरक्षित करने के लिए परियोजना विलम्ब होने पर ब्याज का लाभ भी आवंटियों को देय होगा, परन्तु इससे पूर्व शिकायतकर्ता का यह भी उत्तरदायित्व होगा कि वह अपनी किश्तों का समय से भुगतान करें।
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा vat wet में उद्धरत “ऑबजरवेशनस्” एवं रेरा एक्ट की समग्र व्यवस्था को देखते हुए यह भी स्पष्ट है कि यदि विलम्ब के प्रत्येक मामले में धनराशि लौटाने का ही निर्णय लिया जाये तो निश्चय ही यह अधिनियम के “ऑबज़ेक्टिव” तथा “स्कीम” के अनुरूप न होगा। रिफण्ड का निर्णय लेते समय प्रत्येक मामले की “यूनीकनेस” प्रकरण के समस्त तथ्यों यथा “कन्सट्रक्शन” की स्थिति, कम्पलीशन की “टाईम लाईन“, प्रोमोटर्स के द्वारा ऑफर ऑफ पजेशन के “कमिटमेन्ट” की स्थिति, अन्य “wea होल्डर्स”, विशेष रूप से परियोजना के साथ बने रहने वाले “एलॉटीज” पर प्रभाव, “प्रस्तावित पज़ेशन डेट” के विषय में “erie” आदि पर विचार किया जाना न्यायहित में होगा। चूंकि विपक्षी द्वारा दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि आवंटी को लीज़ डीड व भवन का कब्जा ऑफर पत्र दिनाक 2903.20I9 को प्रेषित कर दिया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अभी तक ca डीड निष्पादित नहीं करायी गयी। ऐसे में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता नवम्बर 2020 तक लीज़ Ste निष्पादित A ॥:
कब्जा लेने पर विचार करें | उसके बाद फ्लैट के भविष्य में उपयोग के सम्बन्ध में वे स्वयं निर्णय ले सकते है। वैसे भी शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना में फ्लैट के कब्जे हेतु धनराशि का निवेश किया गया था, जिसका उपयोग परियोजना के निर्माण में किया गया है। निश्चय ही परियोजना में बने रहने की दशा में एलॉटीज़ को विलम्ब हेतु नियमानुसार ब्याज प्रोमोटर्स द्वारा देय होगा। समस्त परिस्थितियों एवं रेरा के गठन के मुख्य उद्देश्य को देखते हुए यह उचित होगा कि यदि विपक्षी, शिकायतकर्तागण को नवम्बर 2020 तक कब्जा देने में असफल रहते हैं, तो ऐसी fet में उनकी जमा धंनशशि मय ब्याज वापस दिलायी जाए। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 Praia किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-3 शिकायतकर्ता का कहना है कि आवंटन पत्र दिनांक t6.08.20I0 को जारी किया था, जिसके अनुसार 24 माह में कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक कब्जा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है, जिस पर विपक्षी द्वारा दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है कि आवंटी को लीज़ डीड व भवन का कब्जा ऑफर पत्र दिनाक 29.03.2049 को प्रेषित कर दिया गया। कब्जा ऑफर पत्र के अनुसार आवंटी को 6 माह के भीतर भवन की chet Vs कराते हुए भवन का कब्जा प्राप्त किया जाना था, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अभी तक cite डीड निष्पादित नहीं करायी गयी।
यह निर्विवादित है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना ईटा-2 में यूनिट के लिए आवेदन किया गया था, जिस पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट दिनांक t6.08.20I0 को आवंटित की गयी, परन्तु ग्राम-मकौड़ा की भूमि विवादित होने के कारण भवन को रिएलोकेट करते हुए भवन संख्या-20487 ब्लॉक-ए में आवंटित किया गया। यह स्पष्ट है कि मूल रूप से शिकायतकर्ता को सेक्टर-ईटा-2 में फ्लैट संख्या-307787 आवंटित किया गया था, परन्तु भूमि ५९ विवाद होने के कारण विपक्षी ahi gi के कम में भवन संख्या-20487 ब्लॉक-ए, सेक्टर-ईटा-2 में आवंटित किया गया। ड्रा के कग गें विकल्प के रूप में आवंटित की गयी नयी यूनिट के लिए कोई नया आवंटन पत्र जारी नहीं किया गया। पत्रावली पर दाखिल आवंटन पत्र दिनांक 46.08.2040 को जारी किया गया, जिसमें उल्लेखित ब्रोशर के प्रस्तर-]५ की शर्तों के अनुसार आवंटन पत्र जारी होने से 2 वर्ष तक कब्जा दिया जाना था। इस प्रकार कब्जा दिये जाने की तिथि 6.08. 2 202 हो जाती है, परन्तु उक्त निर्धारित समयावंधि तक शिकायतकर्ता को कब्जा नहीं दिया गया है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 47.08.2042 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा Re याचिका संख्या- 2737 /20:7 “नीलकमल रियलटर्स waar प्राणलि0 एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रगोटर्रा द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि विपक्षी द्वारा आवंटन के नियम एवं शर्तों के लिए aR जारी किया गया था, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा स्वीकारा गया था। ब्रोशर के प्रस्तर-0 में 4 प्रतिशत ब्याज की दर निर्धारित है, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता विपक्षी द्वारा किये गये विलम्ब के लिए धनराशि पाने का अधिकारी है, रेरा के Dy 43
प्राविधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है उसी दर से धनराशि देने का प्राविधान है। इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि माननीय उच्च न्यायालय मुम्बई द्वारा उपरोक्त विधि व्यवस्था में यह भी अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "For the reasons already indicated, aforesaid decisions are not applicable to the facts of the present case. I have already indicated that the provisions of RERA are prospective in nature. The penalty under Sections 78, 38, 59, 60, 67, 63 and 64 is to be levied on account of contravention of provisions of RERA, prospectively and not retrospectively." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि Goro रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्राविधानित दंड पूर्वव्यापी नही, बल्कि भविष्यलक्षी होना चाहिये। ऐसी दशा में रेरा के प्रभाव में (दिनाक 02.05.20:6) W पूर्व अनुबन्ध के अनुसार धनराशि भुगतान किया जाना चाहिये और रेरा के आने के बाद दिनांक 07.05.206 UWF प्राविधानो के अनुसार विलंबित अवधि में जमा धनराशि पर ब्याज पाने का अधिकारी है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2078 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः-
"The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" 4 यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLRH प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचितं प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MCLR+I प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं0 6649-50/20i8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल" में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 20!6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी.,/सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता ओ.सी./सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर ब्याज पाने के अधिकारी होगें। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ0प्र0 शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 /8-3-48-65 विविध /46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया a 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: #7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the > 75
competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on ; unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी कम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 20.05.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक..25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार बिन्दु संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। 'उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश
i. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण के फ्लैटस् की समस्त सुविधाओं को आवंटन पत्र,“ब्रोशर के अनुसार पूर्ण कराकर दिनांक 30. 44.2020 तक ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 47.08.2042 से दिनांक 30.0420I6 से 4 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से धनराशि व दिनांक 07.05.20i6 से ओ. सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक 46 की अवधि के लिए शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में आवंटन पत्र,ब्रोशर के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी |
विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा Azali) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी '४टा,२+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। यदि विपक्षी, शिकायतकर्तागण को . दिनांक 30.44.2020 तक कब्जा देने में असफल रहता है, तो दिनांक 30.44.2020 के पश्चात् 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्तागण द्वारा समस्त जमा धनराशि MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर सहित वापस अदा करना सुनिश्चित करें। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Y 97 7 7. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है; तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। दिनांक :--29 /» // 2020 ia ai Ag KO (राजीव कुमार) (अध्यक्ष) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण