Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Deepanshu Agarwal v. Uppal Chadha Hi-Tech Developers Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/03/51457/2020
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-12-05
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the complainant)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Gemini 3.8 Flash, Antigravity), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Hearing Bench-Adjudicating Officer, Proceedings under Section-38 / 40 ,/63 read with Rule-24 43—Rrprad WAT—NCR 44/03/5457/2020 Deepanshu Agarwal Versus Uppal Chadha Hi-Tech Developers Private Limited Order-Sheet Date: 05.42.2025 The complainant's case was presented through video conferencing. The file was put up. On call, on behalf of the complainant, learned Advocate Mr. Puneet Jain appeared. On behalf of the respondent, learned Advocate Mr. Amit appeared. Both parties were heard and the file was perused. It was informed by the complainant that possession of the unit has not yet been given by the respondent nor has conveyance deed been executed and registered. In the complaint in question, following hearing as per rules by the Hon'ble Ure-ow, the following orders were passed on date 29.09.2020:- 4. The respondent is ordered to ensure giving possession of the originally allotted plot along with O.C. / C.C. to the complainants by date 34.03.2024 or with consent of the complainants at previously agreed rates, possession of an alternative plot in any of its other developed projects in respect of which O.C. / C.C. has been obtained, by date 34.05.2024, and execute registry as per rules upon receiving payable stamp duty.
2... The respondent shall ensure paying MCLRH percent interest as delay interest on the amount deposited by the complainant from date 07.02208 to the date of O.C. / C.C. or offer of possession, whichever is later. This amount of interest shall be adjusted in the payable amount of final payment. In case the amount of interest exceeds the payable amount, it shall be refunded to the complainant. Keeping in view the force majeure period, interest shall not be calculated for delay in the project from date 25.03.2020 to date 25.09.2020. Also, if there are any overdues of the complainant, no interest shall be payable for this period on that either. In the matter of other complainant, calculation for delay interest shall be done as above in accordance with the agreement. 3, The respondent is also directed that according to Section 2(2४)0) of the RERA Act, 20:6, if after coming into force of RERA any rate of interest is charged by the promoter upon default of the allottee, interest at the same rate shall also be given to the allottee upon default by the promoter. Therefore, on delayed payment, interest shall be payable by the complainant also at the interest rate of MCLR+H percent. If any amount has been taken from the allottee for delay at a rate higher than this after coming into force of RERA, then for the delayed period, the amount of interest shall also be calculated at the same rate.
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | सुनवाई पीठ-न्यायनिर्णायक अधिकारी, कार्यवाही अन्तर्गत धारा-38 / 40 ,/63 सपठित नियम-24 43—Rrprad WAT—NCR 44/03/5457/2020 दीपांशु अग्रवाल बनाम उप्पल चड्ढा हाई-टेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड आदेश-पत्र दिनांक: 05.42.2025 शिकायतकर्ता का वाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। पत्रावली पेश हुई। पुकार पर शिकायतकर्ता की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री पुनीत जैन उपस्थित हुए। विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता श्री अमित उपस्थित हुए। उभयपक्षों को सुना गया एवं पत्रावली का अवलोकन किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा नहीं दिया गया है और न ही semen विलेख निष्पादित एवं पंजीकृत कराया गया है। प्रश्नतत शिकायत में माननीय Ure-ow द्वारा नियमानुसार सुनवाई के उपरान्त दिनांक 29.09.2020 को निम्नवत आदेश पारित किये गये हैं:- 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को मूल आवंटित प्लॉट का कब्जा ओ.सी.//सी.सी. सहित दिनांक 34.03.2024 तक अथवा शिकायतकर्तागण की सहमति से पूर्व में तय दरों पर, अपनी किसी अन्य विकसित परियोजना में वैकल्पिक प्लॉट, जिसका ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त किया जा चुका हो, का कब्जा दिनांक 34.05.2024 तक देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 07.02208 से ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLRH प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय रा न होगा। अन्य शिकायतकर्ता के प्रकरण में विलम्ब ब्याज के लिए अनुबन्ध के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी। 3, विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(2४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+H प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्धान्त के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जायेगी।
5. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 6. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। विपक्षी द्वारा आदेश दिनांक 29.09.2020 का अनुपालन नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा धारा-38/40,/63 के अन्तर्गत var आदेश के क्रियान्वयन हेतु प्रार्थना-पत्र दाखिल किया गया। उपरोक्त शिकायत में मा. पीठ-04ए द्वारा दिनांक 44.40. 2022 को धारा-63 के अन्तर्गत निम्न आदेश पारित किया गया है कि:- वर्णित तथ्यों एवं समस्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए यदि विपक्षी द्वारा दिनांक 30.44.2022 तक कब्जा दिये जाने की सूचना, आदेश दिनांक 29.09.2020 के अनुसार अकाउन्टस् सैटेल कर कम्पलेन्ट to पर अपलोड नहीं की जाती है, तो दिनांक 30.4.2022 के बाद सचिव, रेरा प्रकरण में आदेश दिनांक 29.09.2020 के अनुसार विलम्बित अवधि के ब्याज की धनराशि हेतु वसूली प्रमाण पत्र जारी करायें एवं विपक्षी / प्रोमोटर के विरूद्ध रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 63 के अन्तर्गत यथोचित अर्थदण्ड अधिरोपित किये जाने हेतु पत्रावली प्राधिकरण के समक्ष पेश की जाये। साथ ही प्राधिकरण के ae ee का कब्जा दिलाने की कार्यवाही भी की जाये। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तदोपरान्त अन्तर्गत धारा-38,/40,//63 के कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध न कराये जाने एवं रजिस्ट्री न कराये जाने के कारण श्रीमान सचिव, रेरा द्वारा पारित कार्यालय आदेश दिनांक 08.07.2025 के अनुसार पत्रावली नियम-24 की कार्यवाही हेतु इस पीठ को संदर्भित की गई।
विपक्षी को निर्देशित किया जाता है कि वह माननीय रेरा पीठ के आदेश के अनुपालन में कब्जा प्रस्ताव-पत्र वैध ओ.सी.,/सी.सी. सहित बकाया eat की मांग सहित पट (यदि कोई हो तो) शिकायतकर्ता को 5 दिनों के अन्दर प्रेषित करना सुनिश्चित करें तथा रेरा पोर्टल पर भी अपलोड करना सुनिश्चित करें| शिकायतकर्ता द्वारा बकाया देयों के अदा करने पर विपक्षी शिकायतकर्ता को यूनिट का भौतिक कब्जा उपलब्ध कराते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में यूनिट की रजिस्ट्री कराना सुनिश्चित करें। शिकायतकर्ता को यदि कोई आपत्ति हो, तो वह अपनी आपत्ति दाखिल कर सकता है। पत्रावली अग्रिम सुनवाई हेतु दिनांक 05.0.2026 को पेश हो। Soo आर. पी. सिंह (न्यायनिर्णायक अधिकारी) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण