Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Anil Mittal v. Fusion Buildtech Private Limited
Complaint No. NCR144/03/118038/2024
- Decision date
- 2026-05-15
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी:- श्री टी. dees, सदस्य शिकायत संख्या:- NCR44/03/8038/2024 अनिल मित्तल बनाम ted फ्यूजन fiesta प्राइवेट लिमिटेड प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध प्रश्गगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 05.40.2043 को विपक्षी की परियोजना Fusion Homes (पंजीयन संख्या-एशराणर&एशर73302) के टॉवर-& में io" फ्लोर पर यूनिट We-A-006 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कूल मूल्य 32,80,480/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 22,4,882/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा बकाया राशि का लगभग तीन गुना से अधिक दर पर ब्याज की मांग और परियोजना में 2 वर्ष का विलम्ब होने के बावजदू भी अतिरिक्त शुल्क की मांग की जा रही है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा भी प्रदान नही किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में आवेदन फॉर्म दिनांक 05.40.2043, आवंटन पत्र दिनांक 05.40.2043, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 24.42.2043, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि का चेक एवं खाता विवरण, विभिन्न माँग पत्र, परियोजना के टॉवर-&, B, GES 7 के सम्बन्ध में ओ.सी. /अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 04.04.2048, परियोजना के टॉवर-9 के सम्बन्ध में ओ.सी.,/अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 49.04.2048, परियोजना के टॉवर-6 & HO सम्बन्ध में ओ.सी. /अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 08.05.2049, परियोजना के aH & ३ के सम्बन्ध में ओ.सी.,/ अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 2986 | 44.07.2020, ब्रोशर, ले-आउट प्लान, कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 04.04.2048, wre प्लान, ऋण पत्र, त्रिपक्षीय ager दिनांक 44.02.2044, प्रत्युत्तर आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
yea शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर दिनांक 23.04.2025 प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना Fusion Homes में आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.42.2043 के माध्यम से यूनिट Pew-A-006 बुक करायी गयी थी, यूनिट का कुल मूल्य 33,77,73/— रुपये था। उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन »अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-47 के अनुसार शिकायतकर्ता को 30 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 24.:2.20:6 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा अब तक मात्र 22,4,882/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है एवं वर्ष 2044 के बाद से अवशेष भुगतान करने में विफल रहा है, जोकि i2,69,832/-eay (विलम्ब ब्याज के बिना) की धनराशि का भुगतान अवशेष है। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान न करने के कारण यूनिट का निर्माण कार्य धीमा हो गया। इसके बावजूद भी विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य जारी रखा और सितंबर, 20:4 तक परियोजना का 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका था, जोकि निर्माण 44वीं मंजिल के ete तक पहुंच गया था। विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. / अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 04.04.2048 को प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम पाँच किश्तों का भुगतान न किए जाने एवं विपक्षी द्वारा कई बार अनुस्मारक-पत्र एवं मांग-पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद भी शिकायतकर्ता अपेक्षित भुगतान करने में विफल रहा हैं, जिसके बावजूद भी विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उसी दिन कब्जा प्रस्ताव पत्र जारी किया war) विपक्षी का कहना है कि परियोजना के निर्माण कार्य में विलम्ब विपक्षी के कारण नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान न करने के कारण हुआ, जिससे निर्माण कार्य बाधित हुआ। यह दृढ़तापूर्वक निवेदन किया जाता है कि विपक्षी द्वारा की गयी धनराशि के सम्बन्ध में सभी मांगें निर्माण के चरण का सख्ती से पालन करते हुए की गई हैं और प्राधिकरण को शिकायतकर्ता को यह तर्क देने की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए कि परियोजना में निर्माण कार्य नहीं चल रहा था, क्योंकि शेष घर खरीददारों ने भी अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान कर वर्ष, 2048 में ही अपनी यूनिटों का कब्ज़ा प्राप्त कर लिया गया है इसके अतिरिक्त विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता कई वर्षों से अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान करने में चूक कर रहा है, इसलिए वह कब्जे के लिए विलम्ब ब्याज का दावा करने का हकदार नहीं है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता बकाया भुगतानों पर 24 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से विलम्ब
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अवधि पर विलम्ब ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है और फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के प्रस्तर-49 के अनुसार शिकायतकर्ता कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि से os/— रुपये प्रति वर्ग फुट प्रति माह की दर से होल्डिंग शुल्क का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी है। विपक्षी का कहना है कि ये चार्जेज़ उस अवधि के लिए लगाये जाएंगे, जिस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विलम्ब हुआ अर्थात 82 माह के लिए होल्डिंग चार्जेज अर्थात दिनांक 04.04.2048 से दिनांक 34.07.2025 तक 05,/- रुपये प्रति वर्ग फूट प्रति माह + जी.एस.टी. के मद में 5,00,73 ,/“- रुपये है। (82 माह x 5/— रुपये x 035 वर्ग फुट) + 8% जी.एस.टी.। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में, शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गई शिकायत निराधार है, क्योंकि कब्जे में विलम्ब सीधे तौर पर शिकायतकर्ता द्वारा देय किश्तों का भुगतान न करने के कारण हुआ। शिकायतकर्ता, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि एवं लागू विलम्ब ब्याज का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है और शिकायतकर्ता को अवशेष मूल धनराशि 2,69,832/-wuad पर 24% प्रति वर्ष की दर से भुगतान करने तथा अवशेष देय धनराशि की किश्तों पर 24 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से विलम्ब ब्याज के रूप में 34,30,24 //- रुपये की धनराशि का भुगतान करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता को दिनांक o.04.20i8 से आज (दिनांक 34.04.2025) तक की अवधि के लिए os /— रुपये प्रति वर्ग फूट प्रति माह की दर 5,00,733 /-रुपये होल्डिंग चार्जेज तथा अप्रैल, 2049 से अप्रैल, 2024 तक की अवधि के लिए 2,60,979 //-रुपये रखरखाव शुल्क का भुगतान करने हेतु निर्देशित किये जाने का भी अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर दिनांक 23.04.2025, आवेदन फार्म दिनांक 05.:0.2073, आवंटन पत्र दिनांक 05.40.2043, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 24.42.2043, त्रिपक्षीय समझौता दिनांक 44.02.2044 की प्रति, विभिन्न मांग पत्र एवं अनुस्मारक पत्र, परियोजना का ओ.सी. / अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 04.04.2048, शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट के सम्बन्ध में प्रेषित कब्जा प्रस्ताव-पंत्र दिनांक 07.0:.20:8, Ae शुल्क के सम्बन्ध में विवरण, आदि अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया है कि उनके द्वारा दिनांक 05.40.2043 को विपक्षी की परियोजना Fusion Homes के टॉवर-& में 20™ फ्लोर पर यूनिट WN-A-006 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 24.2.2043 को हतस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया, जिसकी शर्तों के अनुसार Page 3 (he
| SESE द्वारा दिनांक 24.0620i6 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य || रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अप्रैल, 2074 तक 22,4,882 ,/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया किया जा चुका था, जिसमें इलाहाबाद बैंक द्वारा स्वीकृत गृह ऋण के माध्यम से वितरित धनराशि भी शामिल है, जिसमें शिकायतकर्ता की वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह से स्वीकार किया गया और निर्माण के चरणों के अनुसार ही भुगतान की मांग करने का आश्वासन दिया गया था। विपक्षी का यह दावा कि शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान में चूक की गयी है, यह झूठा एवं भ्रामक है। शिकायतकर्ता द्वारा सभी भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किए गये थे। शिकायतकर्ता का निवेदन है कि विपक्षी द्वारा उठाई गई मांगें मनमानी, समय से पूर्व और निर्माण की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं थी। विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य से सम्बन्धित चरणों को पूर्ण किए बिना मांग पत्र जारी करके भुगतान योजना की शर्तों का बार-बार उल्लंघन किया, जिससे फ्लैट क्रेता अनुबन्ध का घोर उल्लंघन हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना स्थल पर धीमी प्रगति और विकास की स्पष्ट कमी के सम्बन्ध में बार-बार चिंता व्यक्त किए जाने के बावजूद, विपक्षी स्थिति को सुधारने या संबोधित करने में विफल रहा। यह आश्चर्यजनक है कि दिनांक 49.04.2048 को विपक्षी द्वारा 2!,24,659 //- रुपये की कुल धनराशि की मांग करते हुए एक मांग पत्र जारी किया गया, जिसमें अवशेष मूल धनराशि 2,69,832/- रुपये एवं ब्याज की धनराशि 8,54,827 / - रुपये शामिल थी, जब शिकायतकर्ता द्वारा इस बढ़े हुए एवं अनुचित ब्याज के सम्बन्ध में आपत्ति उठाने व स्पष्टीकरण मांगने के लिए विपक्षी कंपनी से संपर्क किया, तो विपक्षी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने से साफ इनकार कर दिया और इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा we रूप से कहा गया कि जब तक शिकायतकर्ता अवैध और निराधार ब्याज सहित पूर्ण धनराशि का भुगतान नहीं कर देता, तब तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जाएगा। विपक्षी द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि शिकायतकर्ता से अवशेष देय मूल धनराशि 2,69,832/- रुपये है। हालांकि, यह धनराशि अत्यधिक बढ़ाये गये एवं अनुचित ब्याज की मांग के साथ ही मांगी गई थी। हालांकि, यह निर्विवाद तथ्य है कि शिकायतकर्ता ने अप्रैल, 20:4 तक पहले ही 22,4,882/- रुपये की एक बड़ी धनराशि का भुगतान कर दिया गया था, जोकि कुल धनराशि के दो-तिहाई से अधिक थी। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि यूनिट
_ के कब्जे में हुए विलम्ब एवं अनुचित शुल्क अधिरोपित करना पूर्ण रूप से अवैध Aste. है। विपक्षी द्वारा अब तक विलम्ब ब्याज के रूप में 34,30,24/- रुपये की aes aN कण धनराशि की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि अवैधानिक भी है। ऐसे में re ae शिकायतकर्ता द्वारा कुल देय धनराशि में से 22,4,882/- रुपये की धनराशि 4 * & » Page 4 का भुगतान .पहले ही कर दिया गया है और वह मूल अवशेष धनराशि 2,69,832/—- रुपये का भुगतान करने के लिए तैयार है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष मूल देय धनराशि 2,69,832/- रुपये को स्वीकार करते हुए विपक्षी को निर्देशित किये जाने तथा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुरूप एवं रेरा अधिनियम, 2046 के नियमों के अनुसार यूनिट का भौतिक कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा बिलम्ब ब्याज के रूप में की जा रही 34,30,24./- रुपये अनुचित धनराशि की माँग एवं होल्डिंग चार्जेज के मद में की जा रही 5,00,733 /-रुपये की अवैध माँग को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4... क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? व क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2 क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-॥
निस्तारण बिन्दु संख्या-4, इस तथ्य पर विचरित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्रावधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 / 2024 “ef ace प्रमोटर्स एण्ड डेवलपर्स प्रा. लि. बनाम उ.प्र. राज्य व अन्य” में दिये गये निर्णय में स्पष्ट रूप से उललेखित किया गया है कि :- 54. From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can-safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." Page 5 5 _— AAT, CS ९ बह | e/a
55555 | विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के ऑब्जरवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा wera परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑन गोईंग” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार बिन्दु deni निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 निस्तारण बिन्दु संख्या-2, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है।
शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक 05.40.2043 को विपक्षी की परियोजना Fusion Homes के टॉवर-& में 20" फ्लोर पर यूनिट WeA-A-L006 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 24.42.2043 को हतस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया, जिसकी शर्तों के अनुसार विपक्षी द्वारा दिनांक 24.06.20:6 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 32,80,480,/- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा अप्रैल, 2044 तक 22,44,882/-— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया किया जा चुका था, जिसमें इलाहाबाद बैंक द्वारा स्वीकृत गृह ऋण के माध्यम से वितरित धनराशि भी शामिल है, जिसमें शिकायतकर्ता की वित्तीय व्यवस्था को पूरी तरह से स्वीकार किया गया और निर्माण के चरणों के अनुसार ही भुगतान की मांग करने का आश्वासन दिया गया था। विपक्षी का यह दावा कि शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान में चूक की गयी है, यह झूठा एवं भ्रामक है। शिकायतकर्ता द्वारा सभी भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर किए गये थे। शिकायतकर्ता का निवेदन है कि विपक्षी द्वारा उठाई गई मांगें मनमानी, समय से पूर्व और निर्माण की वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं थी। विपक्षी द्वारा परियोजना के निर्माण कार्य से सम्बन्धित Page 6
चरणों को पूर्ण किए बिना मांग पत्र जारी करके भुगतान योजना की शर्तों का बार-बार उल्लंघन किया, जिससे फ्लैट क्रेता अनुबन्ध का भी घोर उल्लंघन हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना स्थल पर धीमी प्रगति और विकास की स्पष्ट कमी के सम्बन्ध में बार-बार चिंता व्यक्त किए जाने के बावजूद, विपक्षी स्थिति को सुधारने या संबोधित करने में विफल रहा। यह आश्चर्यजनक है कि दिनांक 49.04.2048 को विपक्षी द्वारा 2!,24,659,/- रुपये की कुल धनराशि की मांग करते हुए एक मांग पत्र जारी किया गया, जिसमें अवशेष मूल धनराशि 2,69,832 /- रुपये एवं ब्याज की धनराशि 8,54,827 //- रुपये शामिल थी, जब शिकायतकर्ता द्वारा इस बढ़े हुए एवं अनुचित ब्याज के सम्बन्ध में आपत्ति उठाने व स्पष्टीकरण मांगने के लिए विपक्षी कंपनी से संपर्क किया, तो विपक्षी ने इस मुद्दे पर चर्चा करने से साफ इनकार कर दिया और इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि जब तक शिकायतकर्ता अवैध और निराधार ब्याज सहित पूर्ण धनराशि का भुगतान नहीं कर देता, तब तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जाएगा। विपक्षी द्वारा स्वयं स्वीकार किया गया है कि शिकायतकर्ता से अवशेष देय मूल धनराशि 2,69,832/—- रुपये है। हालांकि, यह धनराशि अत्यधिक बढ़ाये गये एवं अनुचित ब्याज की मांग के साथ ही मांगी गई थी। हालांकि, यह निर्विवाद तथ्य है कि शिकायतकर्ता ने अप्रैल, 2074 तक पहले ही 22,4,882 //- रुपये की एक बड़ी धनराशि का भुगतान कर दिया गया था, जोकि कुल धनराशि के दो-तिहाई से अधिक थी। उपरोक्त तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि यूनिट के कब्जे में हुए विलम्ब एवं अनुचित शुल्क अधिरोपित करना पूर्ण रूप से अवैध है। विपक्षी द्वारा अब तक विलम्ब ब्याज के रूप में 34,30,24./- रुपये की धनराशि की मांग करना न केवल अनुचित है बल्कि अवैधानिक भी है। ऐसे में शिकायतकर्ता द्वारा कुल देय धनराशि में से 22,4,882 /- रुपये की धनराशि का भुगतान पहले ही कर दिया गया है और वह मूल अवशेष धनराशि 2,69,832/— रुपये का भुगतान करने के लिए तैयार है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष मूल देय धनराशि 2,69,832/—- रुपये को स्वीकार करते हुए विपक्षी को निर्देशित किये जाने तथा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के अनुरूप एवं रेरा अधिनियम, 20i6 के नियमों के अनुसार यूनिट का भौतिक कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा बिलम्ब ब्याज के रूप में की जा रही 34,30,24./— रुपये अनुचित धनराशि की माँग एवं होल्डिंग चार्जेज़ के मद में की जा रही 5,00,733 /-रुपये की अवैध माँग को निरस्त किये जाने का अनुरीध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना Fusion Homes में आवंटन / अनुबन्ध पत्र दिनांक 24.42.2043 के माध्यम से यूनिट Pe-A-l006 बुक करायी गयी थी, यूनिट का कुल मूल्य 33,77/73/- रुपये था। var यूनिट के सापेक्ष Page 7
उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन /अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-47 के अनुसार शिकायतकर्ता को 30 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 24.2.20i6 तक यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। शिकायतकर्ता द्वारा अब तक मात्र 22,4,882,/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है एवं वर्ष 204 के बाद से अवशेष भुगतान करने में विफल रहा है, जोकि 2,69,832/-on) (विलम्ब ब्याज के बिना) की धनराशि का भुगतान अवशेष है। हालांकि, शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान न करने के कारण यूनिट का निर्माण कार्य धीमा हो गया। इसके बावजूद भी विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य जारी रखा और सितंबर, 2004 तक परियोजना का 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका था, जोकि निर्माण 44वीं मंजिल के ets तक पहुंच गया था। विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. / अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 04.04.2048 को प्राप्त किया जा चुका है और शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम पाँच किश्तों का भुगतान न किए जाने एवं विपक्षी द्वारा कई बार अनुस्मारक-पत्र एवं मांग-पत्र प्रेषित किये जाने के बावजूद भी शिकायतकर्ता अपेक्षित भुगतान करने में विफल रहा हैं, जिसके बावजूद भी विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उसी दिन कब्जा प्रस्ताव पत्र जारी किया गया। विपक्षी का कहना है कि परियोजना के निर्माण कार्य में विलम्ब विपक्षी के कारण नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान न करने के कारण हुआ, जिससे निर्माण कार्य बाधित हुआ। यह दृढ़तापूर्वक निवेदन किया जाता है कि विपक्षी द्वारा की गयी धनराशि के सम्बन्ध में सभी मांगें निर्माण के चरण का सख्ती से पालन करते हुए की गई हैं और प्राधिकरण को शिकायतकर्ता को यह तर्क देने की अनुमति भी नहीं दी जानी चाहिए कि परियोजना में निर्माण कार्य नहीं चल रहा था, क्योंकि शेष घर खरीददारों ने भी अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान कर वर्ष, 2048 में ही अपनी यूनिटों का कब्जा प्राप्त कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी का यह भी कहना है कि शिकायतकर्ता कई वर्षों से अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान करने में चूक कर रहा है, इसलिए वह कब्जे के लिए विलम्ब ब्याज का दावा करने का हकदार नहीं है। दूसरी ओर, शिकायतकर्ता बकाया भुगतानों पर 24 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से विलम्ब अवधि पर विलम्ब ब्याज का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है और फ्लैट क्रेता अनुबन्ध के प्रस्तर-49 के अनुसार शिकायतकर्ता कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि से 05/— रुपये प्रति वर्ग we प्रति माह की दर से होल्डिंग Yow का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी है। विपक्षी का कहना है कि ये चार्जेज़ उस अवधि के लिए लगाये जाएंगे, जिस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विलम्ब हुआ अर्थात 82 माह के लिए होल्डिंग चार्जेज़ अर्थात दिनांक 04.04.2048 से दिनांक 34.04.2025 तक 05,//- रुपये
Page 8 [es 6 प्रति वर्ग फुट प्रति माह + जी.एस.टी. के मद में 5,00,73/- रुपये है। (82 माह x 5/— रुपये x 035 वर्ग फुट) + i8% जी.एस.टी.| उपरोक्त तथ्यों के आलोक में, शिकायतकर्ता द्वारा दायर की गई शिकायत निराधार है, क्योंकि कब्जे में विलम्ब सीधे तौर पर शिकायतकर्ता द्वारा देय किश्तों का भुगतान न करने के कारण हुआ। शिकायतकर्ता, फ्लैट क्रेता अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार अपनी अवशेष देय धनराशि एवं लागू विलम्ब ब्याज का भुगतान करने के लिए भी उत्तरदायी है। उपरोक्त वर्णित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है और शिकायतकर्ता को अवशेष मूल धनराशि 2,69,832 //-रुपये पर 24% प्रति वर्ष की दर से भुगतान करने तथा अवशेष देय धनराशि की किश्तों पर 24 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से विलम्ब ब्याज के रूप में 34,30,24,//- रुपये की धनराशि का भुगतान करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2048 से आज (दिनांक 34.0.2025) तक की अवधि के लिए 05/- रुपये प्रति वर्ग फूट प्रति माह की दर 5,00,733 /-रुपये होल्डिंग चार्जेज़ तथा अप्रैल, 2049 से अप्रैल, 2024 तक की अवधि के लिए 2,60,979 /-रुपये रखरखाव शुल्क का भुगतान करने हेतु निर्देशित किये जाने का भी अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा-48() में प्राविधान है कि — Section 8 (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or
(b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the Page 9 ee handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें White के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की aI—24(4)(b) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें | उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार /अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओसी.»/सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे | पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट क्रेता अनुबन्ध दिनांक 24.42.2043 की छायाप्रति दाखिल है, जो उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या- के wae-7 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 30 माह एवं t80 दिनों की अनुग्रह अवधि के भीतर परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता (आवंटी) को var यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 23.42.2046 तक यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में प्रश्नगत यूनिट कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी कंपनी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से दिनांक 04.04.2048 को परियोजना के टॉवर-&, जिसमें शिकायतकर्ता की यूनिट स्थित है, का ओ.सी.,/अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त किया जा चुका है और उसी दिन अर्थात दिनांक 04.04.2048 को विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 0१.04.2048 प्रेषित किया गया है, जिसे शिकायतकर्ता द्वारा अपनी मूल शिकायत
में संलग्न किया गया है और रेरा पोर्टल के कम्पलेन्ट पेज पर भी अपलोड fear गया है, जिससे यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रेषित (लो कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 07.07.208 प्राप्त हुआ है, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा f aarti अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं किया , क्योंकि विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता से देय धनराशि की किश्तों में हुए विलम्ब हेतु 24 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से एवं अन्य मदों में अनुचित ?०8९१0 ii की मांग की गयी, जोकि अनुबन्ध में वर्णित Gare प्लान एवं उल्लेखित नियमों व शर्तों के विपरीत होने के कारण वैधानिक एवं विधिसम्मत नहीं है, जिस कारण विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रेषित कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 04.04.2048 अवैधानिक है। यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबच्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 24:220I6 से प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के "नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि —
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः oR निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के मध्य किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। pe: भी उल्लेखनीय है कि पक्षकारों के मध्य एक आवंटन /अनुबन्ध ष्यादित है, जो कि उभयपक्ष द्वारा हस्ताक्षरित है, जिससे यह अवधारित किया सकता है कि उभयपक्ष को var आवंटन»अनुबन्ध की शर्तें स्वीकार हैं। Page 44
आवंटन »अनुबन्ध में विलम्ब के लिए विलम्ब धनराशि दिये जाने का प्रावधान है। रेरा के प्रावधानों के अनुसार जिस दर से विपक्षी द्वारा धनराशि प्राप्त की गयी है, उसी दर से धनराशि देने का प्रावधान है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की ai—t8 दिनाक 04.05.2047 को अधिसूचित हुई, जिसके सम्बन्ध में उ.प्र. आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-2 की अधिसूचना दिनांक 03.05.20i7 से उ.प्र. में रेगुलेटरी अथॉरिटी के रूप मे कार्य करने की स्वीकृति राज्यपाल, महोदय ने दिनांक 04.05.2047 से प्रदान की अर्थात् दिनांक 04.05.207 से भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 206 लागू हुआ है। इस अधिनियम का प्रवर्तन प्रोस्पेक्टिव है| अतः दिनांक 04.05.2047 से पूर्व की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना अनुबन्ध के प्रावधानों के अन्तर्गत की जायेगी और दिनांक 04.05.2047 से आगे की अवधि के लिए विलम्ब ब्याज की गणना रेरा अधिनियम के प्रावधानों के अधीन की जायेगी। RT एक्ट की धारा-2(»७) में प्राविधान है कि:- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause— (i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest
payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 अधिसूचित की गयी है, इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Cm of default) परिभाषित है, जिसमें weaR-9.2(i) F प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- ?०१६8९2 = Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति A भी प्रस्तर-9.30) में
निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या-सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & = » में भी उचित एवं विधिपूर्ण माना गया 2 | ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर %८7/९+7 प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.0.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना Ge—7740 /8--3--48-65 विविध,/ 46 के द्वारा मॉडल WAS के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT: ॥7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with ll Page 3
& amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. wer अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दु का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश
4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को फ्लैट es अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर, We प्लान के अनुरूप संशोधित मांग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त करते हुए ओ.सी./सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय tery शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें| 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 24.:2.20i6 से दिनांक 30.04.2047 तक आवंटन/अनुबन्ध पत्र में निर्धारित दर के अनुसार व दिनांक 07.05.20i7 से भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। कोविड-49 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक Page 4 a में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 206 की धारा-2(४)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा | अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ अतिशित की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा 'लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी।
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि की किश्तों का भुगतान किये जाने में विलम्ब किया गया है तो वह रेरा आने अर्थात दिनांक 04.05.2047 से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार एवं रेरा आने के उपरांत MCLR+I प्रतिशत की वार्षिक ब्याज दर से ब्याज देय होगा। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का विधिक भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि से, शिकायतकर्ता से ea के मद में शुल्क प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे। विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को विधिक ओ.सी. /सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान करते समय सभी चार्जेज आवंटन»अनुबन्ध पत्र में उललेखित पेमेन्ट प्लान / वर्णित शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करें | विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह दिनांक 42.40.2048 से पूर्व अनुबन्ध के अनुसार एवं दिनांक 42.40.2048 के पश्चात् उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार /अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.3 के अनुसार ही विपक्षी, शिकायतकर्ता से werd यूनिट के कारपेट एरिया के अनुपात में 02/- रुपये प्रति वर्गफुट प्रतिमाह की दर से होल्डिंग चार्जेज़ अधिरोपित करेंगे। इस आदेश का Verda भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 206 की धारा-38, 40 एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। Page 5 he
9... शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता eT पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। ८ (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page l6