Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Suresh Prabhakar and Urvashi Prabhkar v. Strategic Developers Private Limited
Complaint No. NCR144/03/117762/2024
- Decision date
- 2026-06-11
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। सुनवाई पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारीः:- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या:-- ४ट7२44/03/7762/2024 सुरेश प्रभाकर एवं उर्वशी प्रभाकर बनाम : मैसर्स efits डेवलपर्स प्रा. लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध meri यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 29.09.20:9
को विपक्षी की परियोजना Royal Court के टॉवर-८ में 0" फ्लोर पर यूनिट PaN-C-00l बुक करायी ot) यूनिट कुल बिक्री मूल्य 54,38,200,/- रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 42,38,200/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर दिनांक 05.4.2020 तक उक्त यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक न तो यूनिट का वैधानिक कब्जा प्रदान किया गया है और न ही विलम्बित अवधि का ब्याज दिया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से आवश्यक प्रमाण-पत्रों सहित परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है, जिस कारण यूनिट का वैधानिक कब्जा प्रदान किये जाने में विलम्ब किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान विपक्षी को समय पर किया गया है, परन्तु विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित | अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवेदन /बुकिंग फॉर्म दिनांक 29.09.2049, Bat यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित व
| आवंटन पत्र/अनुबन्ध दिनांक 05.44.2049, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि की रसीदें, प्रत्युत्तर, sat यूनिट के सम्बन्ध में विपक्षी को प्रेषित विभिन्न ई-मेल, रेरा प्राधिकरण की तकनीकी टीम द्वारा दिनांक 03.08.2022 को किये गये परियोजना के स्थलीय निरीक्षण की आख्या, विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से प्राप्त परियोजना के टॉवर-«, 8, ८ के सम्बन्ध में ओ.सी. /अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 26.::.20:9, अपील संख्या-262 // 2023 एवं 485 / 2023 में मा. उ.प्र. भू-सम्पदा अपीलीय अधिकरण, लखनऊ द्वारा पारित आदेश दिनांक 42.02.2025 एवं 48.02.2025, रेरा प्राधिकरण की पीठ-3 द्वारा शिकायत GT-NCR44/02/7704/2024 में पारित आदेश दिनांक 09.09. 2025, आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
प्रश्नगत शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से अपना लिखित उत्तर दिनांक 46.07.2025 प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "Royal Court” में आवेदन फॉर्म दिनांक 29.09.2049 के माध्यम से यूनिट Wea-c-i00l बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 05.44.2049 को आवंटन पत्र/अनुबन्ध हस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 54,38,200 /- रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज की तिथि तक 42,38,200,/- रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना के टॉवर का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता को यूनिट आवंटित की गयी थी तथा टॉवर से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र जैसे- फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर सर्टिफिकेट एवं लिफ्ट इंस्टॉलेशन सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त कर टॉवर के ओ.सी./अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 34.07.2048 को आवेदन किया गया और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 26.44.2049 को परियोजना के टॉवर-«, 8, ८ के सम्बन्ध में ओ.सी. / अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी किया गया। ओ.सी. प्राप्त होने के पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 30.44.2049 जारी किया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को विभिन्न मांग-पत्र, अनुस्मारक पत्र दिनांक 05.02.2020, 25.02.2020, 08.03.2020, 9.03.2020, 49.03.2020, 5.05.2020 एवं 28.07.2020 प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा अन्तिम नोटिस दिनांक 45.09.2022 प्रेषित किये जाने के पश्चात् यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.40.2022 के माध्यम से शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी कंपनी अर्नेस्ट मनी (बयाना धनराशि) की कटौती करने के बाद शिकायतकर्ता द्वारा
Carr KEN * iy 2 Pp te? i) Ll a tREY gy कु vy ees Y,
| 9 की गयी धनराशि वापस करने के लिए तैयार थी। यूनिट का आवंटन निरस्त होने के लगभग 06 माह बाद दिनांक 76.05.2023 को शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी कंपनी से संपर्क किया गया, जिसके जवाब में विपक्षी कंपनी द्वारा उसी परियोजना में एक दूसरी यूनिट संख्या-70-40 में आवंटन ट्रांसफर करने के लिए सहमत हो गई। यह ट्रांसफर कुछ शर्तों के अधीन था, जिसमें विपक्षी कंपनी को तीन किश्तों में भुगतान के लिए 2,00,000/- रुपये के पोस्ट-डेटेड चेक जारी करना शामिल था। इस व्यवस्था की शर्तों को विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल दिनांक 20.05.2023 के माध्यम से विधिवत स्वीकार एवं कन्फर्म किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुरोध और उसके बाद की व्यवस्था के अन्तर्गत विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 20.07.2023 को “श्री अमित कुमार गुप्ता के पक्ष में vat यूनिट (यूनिट Wen-c-00l) के सम्बन्ध में तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित कर दिये गये। शिकायतकर्ता, विपक्षी कंपनी के ई-मेल दिनांक 76.05.2023 एवं 20.05.2023 में बनाये गये नियम एवं शर्तों का अनुपालन करने में असफल रहा है और यूनिट PeM-D-i40l के सम्बन्ध में अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने अथवा नया आवंटन-पत्र /अनुबन्ध जारी करने हेतु कोई कदम नहीं उठाया गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा कोई अनुपालन नहीं किया गया है, जिस कारण विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 05.40.2022 को किया गया यूनिट आवंटन निरस्तीकरण वैधानिक है। शिकायतकर्ता द्वारा रेरा अधिनियम, 2076 की धारा-9(6) एवं 9(7) का उल्लंघन किया गया है। इसके अतिरिक्त रेरा अधिनियम, 2076 की IRIH-90) के अनुसार आवंटी को परियोजना का ओ.सी. प्राप्त होने की तिथि से 02 माह की भीतर आवंटित यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करना अनिवार्य है, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा प्राप्त करने में विफल रहा है। इसके अतिरिक्त भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2048 की धारा-9.30) में स्पष्ट रूप से अंकित है कि यदि आवंटी द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट जारी रहता है तो प्रमोटर इस सम्बन्ध में नोटिस दिये जाने के बाद भी यह डिफॉल्ट तीन (3) महीनों से अधिक समय तक बना रहता है तो प्रमोटर, आवंटन प्राप्तकर्ता के पक्ष में अपार्टमेंट / प्लॉट, का आवंटन रद्द कर सकता है और बुकिंग धनराशि ब्याज काटकर आवंटन प्राप्तकर्ता द्वारा भुगतान की गई धनराशि वापस कर सकता है, और इस प्रकार यह अनुबन्ध समाप्त हो जाएगा। विपक्षी कंपनी, शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि, अर्नेस्ट मनी की कटौती करने के बाद, वापस करने के लिए तैयार है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं
| Seererenes को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्गगत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन लिखित उत्तर, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से परियोजना के cara, 8 & ८ के सम्बन्ध में प्राप्त अस्थायी ओ.सी. दिनांक 07.03.209 एवं स्थायी ओ.सी. / अधिभोग प्रमाण-पत्र दिनांक 26.44.209, शिकायतकर्ता को प्रेषित कब्जा प्रस्ताव कम । कॉल नोटिस अन्तिम मांग-पत्र दिनांक 30.44.2049, विभिन्न अनुस्मारक पत्र दिनांक 05.02.2020, 25.02.2020, 08.03.2020, 9.03.2020, 5.05.2020, 28.07.2020, अन्तिम नोटिस दिनांक 5.09.2022, यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.40.2022, ई-मेल दिनांक 6.05.2023, ई-मेल के माध्यम से प्रेषित यूनिट We—p-i40l के सम्बन्ध में कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 20.05.2023, उक्त यूनिट (यूनिट Weat-c-i00!) के सम्बन्ध में तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष में निष्पादित आवंटन पत्र/अनुबन्ध दिनांक 20.07.2023 अभिलेखों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दिनांक 25.09.2025 दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि विपक्षी कंपनी द्वारा अपनी परियोजना "Royal Court’ के टॉवर-८ में नवम्बर, 2049 में यूनिट संख्या-0-00। आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरेत व निष्पादित आवंटन पत्र/अनुबन्ध दिनांक 05.::.20I9 के प्रस्तर-25 के अनुसार विपक्षी कंपनी द्वारा आवंटन,/ अनुबन्ध की तिथि से 06 | माह एवं 06 माह की aque अवधि सहित दिनांक 05.44.2020 तक उक्त यूनिट का प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त किये बिना परियोजना के किसी भी आवंटी को यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जा सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा यह विशेष रूप से अस्वीकार किया जाता है कि विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता के टॉवर के ओ. | सी. प्राप्त करने के उपरान्त शिकायतकर्ता द्वारा चुने गये we प्लान के अनुसार भुगतान करने में विफल रहने के बाद भी शिकायतकर्ता की यूनिट को | सौंपने हेतु वास्तविक कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 30.44.2049 प्रेषित किया गया है, क्योंकि विपक्षी द्वारा उसकी कोई पोस्ट रसीद और न ही कूरियर रसीद दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य 54,38.200/— रुपये में से आज की तिथि तक 77.93% धनराशि अर्थात 42,38,200/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जबकि । शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार यूनिट की कुल धनराशि का दो किश्तों में भुगतान किया जाना था, प्रथम किश्त, जोकि कुल धनराशि का 0% धनराशि बुकिंग के समय तथा द्वितीय किश्त, कुल धनराशि का 90% धनराशि
यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने के समय भुगतान किया जाना था। विपक्षी |
द्वारा अपने लिखित उत्तर के wees में किया गया लिखित कथन स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है कि विपक्षी कंपनी द्वारा कब्जा प्रस्ताव-पत्र जारी करने के पश्चात् शिकायतकर्ता को विभिन्न मांग-पत्र एवं अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये हैं, क्योंकि विपक्षी कंपनी द्वारा न तो कोई पोस्ट रसीद और न ही कूरियर रसीद एवं न ही कम्युनिकेशन मोड अपने लिखित उत्तर के साथ संलग्न किये हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यूनिट निरस्त किये जाने से पूर्व शिकायतकर्ता को कोई मांग-पत्र, अनुस्मारक-पत्र एवं निरस्तीकरण पत्र प्राप्त हुए हों। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर में अंकित कथनों के आधार पर मा. पीठ को गुमराह करने करने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 28.08.2020 अर्थात कब्जा सौंपने की निर्धारित तिथि बीत जाने के बाद विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल के माध्यम से शिकायतकर्ता को सूचना दी गयी कि यूनिट का स्टेटस बैंक के रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं है, क्योंकि उक्त यूनिट के सापेक्ष पहले ही ऋण | जारी किया जा चुका है, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल दिनांक 28.08.2020 के माध्यम से यह भी सूचना दी गयी कि 8-9 यूनिद्स में पेमेंट | प्लान से जुड़ी समस्याओं के कारण बैंक उन फ्लैट्स के लिए Noc जारी नहीं कर रहा है। उक्त जानकारी प्राप्त ee ue शिकायतकर्ता ने अपने जवाब में कहा कि वह Noc के लिए दिनांक 5.09.2020 तक प्रतीक्षा करेंगे और ऐसा न । || पर वह अपनी समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित की मांग करेंगे। इसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल दिनांक 25.44.2020 के माध्यम से अवगत कराया गया कि शिकायतकर्ता को आवंटित फ्लैट में फिनिशिंग का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है और समय पर यूनिट का कब्जा प्रदान कर दिया जाएगा। विपक्षी कंपनी ने शिकायतकर्ता को अपना मन बदलने एवं बुक की गयी यूनिट के कब्जे की प्रतीक्षा करने के लिए मनाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने दिनांक 26.44.2020 को ई-मेल के माध्यम से विपक्षी कंपनी को सूचित किया | कि वह दिनांक 45.42.2020 तक कब्जा लेने के लिए तैयार हैं। इसके अतिरिक्त
शिकायतकर्ता द्वारा ई-मेल दिनांक 08.42.2020 के माध्यम से विपक्षी कंपनी को सूचना दी गयी कि दिनांक 46.42.2020 तक फ्लैट में सिर्फ pop एवं फायरिंग का कार्य हुआ है। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी कंपनी से फ्लैट का शेष का कार्य पूर्ण करने का अनुरोध किया गया ताकि शिकायतकर्ता दिनांक 45.04.2024 तक फ्लैट का कब्जा प्राप्त कर सकें। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी कंपनी को दिनांक A BSE 44.04.2023 को विधिक नोटिस भेजा गया, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था हु ae. 2 कि शिकायतकर्ता हमेशा अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने के लिए तैयार Rie रहे हैं, जब भी फ्लैट का कब्जा प्रस्ताव-पत्र भेजा जाएगा, वह SY आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट । का कब्जा प्राप्त करने हेतु इच्छुक हैं। इसके अतिरिक्त मई, 2023 में Page 5
| विनर. एवं विपक्षी कंपनी के मध्य दोबारा समझौते हेतु वार्तालाप शुरू हुआ। दोनों पक्षों के मध्य विस्तार से चर्चा के बाद यूनिट wem-c-i00 को लेकर बिल्डर की तरफ से विवाद होने के कारण यूनिट Wen-c-00i के स्थान पर यूनिट संख्या-/0-40 का कब्जा सौंपने के लिए विपक्षी तैयार हो गया, परन्तु बाद में न तो कोई आवंटन/अनुबन्ध निष्पादित किया गया और न ही यूनिट संख्या-/0-40 का कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर के प्रस्तर-8 में अंकित किया गया है कि विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 20.07.2023 को उक्त यूनिट संख्या-0-00 में तृतीय पक्ष "श्री अमित कुमार गुप्ता” के अधिकार सूजित किये जा चुके हैं, परन्तु विपक्षी कंपनी द्वारा आज तक न तो उक्त यूनिट संख्या-0-00 में तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किये गये हैं और न ही तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष कोई सेल Sts (बिक्री विलेख) निष्पादित की गयी है, जब विपक्षी को वर्ष 2049 में परियोजना का ओ.सी. /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त हो गया था तो विपक्षी कंपनी द्वारा ओ.सी. प्राप्त होने के 04 वर्ष बाद भी वर्ष 2023 में तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष कोई सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित क्यों नहीं किया गया और न ही कोई रजिस्टर्ड एग्रीमेन्ट निष्पादित किया गया और तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष में नया आवंटन पत्र जारी करने से पहले शिकायतकर्ता की जमा धनराशि आज तक वापस क्यों नहीं की गयी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता की प्रश्नगत शिकायत को स्वीकार करते हुए विलम्बित अवधि के ब्याज सहित प्रश्नगत यूनिट का वैधानिक कब्जा एवं शिकायतकर्ता के पक्ष सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित किये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किये गये हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? 2... क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-04 निस्तारण बिन्दु संख्या-4, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लॉन के अनुसार धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी कंपनी द्वारा अपनी परियोजना "Royal Court” के टॉवर-८ में नवम्बर, 2049 में यूनिट Wen-c-200i आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित आवंटन पत्र /अनुबन्ध दिनांक 05.44.2049 के प्रस्तर-25 के अनुसार विपक्षी कंपनी द्वारा आवंटन, अनुबन्ध की तिथि से 06 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 05.4.2020 तक उक्त यूनिट का प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना का कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त किये बिना परियोजना के किसी भी आवंटी को यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया जा सकता है। शिकायतकर्ता द्वारा यह विशेष रूप से अस्वीकार किया जाता है कि विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता के टॉवर के ओ.सी. प्राप्त करने के उपरान्त शिकायतकर्ता द्वारा चुने गये पेमेन्ट प्लान के अनुसार भुगतान करने में विफल रहने के बाद भी शिकायतकर्ता की यूनिट को सौंपने हेतु वास्तविक कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक । 30.44.2049 प्रेषित किया गया है, क्योंकि विपक्षी द्वारा उसकी कोई पोस्ट रसीद और न ही कूरियर रसीद दाखिल की गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य 54,38,200,//- रुपये में से आज की तिथि तक 77.93% धनराशि अर्थात 42,38,200,/- रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा wre प्लान के अनुसार यूनिट की कुल धनराशि का दो किश्तों में भुगतान किया जाना था, प्रथम किश्त, जोकि कुल धनराशि का 0% धनराशि बुकिंग के समय तथा द्वितीय किश्त, कुल धनराशि का 90% धनराशि यूनिट का कब्जा प्रदान किये जाने के समय भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर के प्रस्तर-5 में किया गया लिखित कथन स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है कि विपक्षी कंपनी द्वारा कब्जा प्रस्ताव-पत्र जारी करने के पश्चात् शिकायतकर्ता को विभिन्न मांग-पत्र एवं अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये हैं, क्योंकि विपक्षी कंपनी द्वारा न तो कोई पोस्ट रसीद और न ही कूरियर रसीद एवं न ही कम्युनिकेशन मोड अपने लिखित उत्तर के साथ संलग्न किये हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यूनिट निरस्त किये जाने से पूर्व शिकायतकर्ता को कोई मांग-पत्र, अनुस्मारक-पत्र एवं निरस्तीकरण पत्र प्राप्त हुए हों। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर में अंकित 2 कथनों के आधार पर मा. पीठ को गुमराह करने करने की कोशिश की जा रही | है। शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 28.08.2020 अर्थात कब्जा सौंपने की निर्धारित >/ तिथि बीत जाने के बाद विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल के माध्यम से शिकायतकर्ता को सूचना दी गयी कि यूनिट का स्टेटस बैंक के रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं है, क्योंकि sar यूनिट के सापेक्ष पहले ही ऋण जारी किया जा चुका है, जिसके
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| | विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल दिनांक 28.08.2020 के माध्यम से यह भी सूचना दी गयी कि 8-9 यूनिद्स में पेमेंट प्लान से जुड़ी समस्याओं के कारण बैंक उन फ्लैट्स के लिए Noc जारी नहीं कर रहा है। उक्त जानकारी प्राप्त होने पर शिकायतकर्ता ने अपने जवाब में कहा कि वह Noc के लिए दिनांक 45.09.2020 तक प्रतीक्षा करेंगे और ऐसा न होने पर वह अपनी समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित की मांग करेंगे। इसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल दिनांक 25.44.2020 के माध्यम से अवगत कराया गया कि शिकायतकर्ता को आवंटित फ्लैट में फिनिशिंग का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है और समय पर यूनिट का कब्जा प्रदान कर दिया जाएगा। विपक्षी कंपनी ने शिकायतकर्ता को अपना मन बदलने एवं बुक की गयी यूनिट के कब्जे की प्रतीक्षा करने के लिए मनाया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने दिनांक 26.44.2020 को ई-मेल के माध्यम से विपक्षी कंपनी को सूचित किया कि वह दिनांक 45.42.2020 तक कब्जा लेने के लिए तैयार हैं। इसके अतिरिक्त मई, 2023 में शिकायतकर्ता एवं विपक्षी कंपनी के मध्य दोबारा समझौते हेतु वार्तालाप शुरू हुआ। दोनों पक्षों के मध्य विस्तार से चर्चा के बाद यूनिट संख्या-0-00 को लेकर बिल्डर की तरफ से विवाद होने के कारण यूनिट WeN-c-00I के स्थान पर यूनिट wep. I40i का कब्जा सौंपने के लिए विपक्षी तैयार हो गया, परन्तु बाद में न तो कोई आवंटन /अनुबन्ध निष्पादित किया गया और न ही यूनिट We-p-i40l का कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया। विपक्षी द्वारा अपने लिखित उत्तर के प्रस्तर-8 में अंकित किया गया है कि विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 20.07.2023 को उक्त यूनिट dea-c-l00l में तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता" के अधिकार सृजित किये जा चुके हैं, परन्तु विपक्षी कंपनी द्वारा आज तक न तो उक्त यूनिट संख्या- 0-00 में तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित किये गये हैं और न ही तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता“ के पक्ष कोई सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित की गयी है, जब विपक्षी को वर्ष 20i9 में परियोजना का ओ.सी. /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त हो गया था तो विपक्षी कंपनी द्वारा ओ.सी. प्राप्त होने के 04 वर्ष बाद भी वर्ष 2023 में तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष कोई सेल Se (बिक्री विलेख) निष्पादित क्यों नहीं किया गया और न ही कोई रजिस्टर्ड एग्रीमेन्ट निष्पादित किया गया और तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता" के पक्ष में नया आवंटन पत्र जारी करने से पहले शिकायतकर्ता की जमा धनराशि आज तक वापस क्यों नहीं की गयी। उपरोक्त वर्णित तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता की प्रश्नगत शिकायत को स्वीकार करते हुए विलम्बित अवधि के ब्याज सहित प्रश्नगत यूनिट का वैधानिक कब्जा एवं शिकायतकर्ता के पक्ष सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित किये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी की ओर से अपना लिखित उत्तर दिनांक 6.07.2025 प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी परियोजना "Royal Court” में आवेदन फॉर्म दिनांक 29.09.2049 के माध्यम से यूनिट wea—c-i00 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 05.44.2049 को आवंटन पत्र/अनुबन्ध हस्ताक्षरित व निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 54,38,200/— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा आज की तिथि तक 42,38,200/— रुपये की धनराशि का भुगतान किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना के टॉवर का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता को यूनिट आवंटित की गयी थी तथा टॉवर से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र जैसे- फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर सर्टिफिकेट एवं लिफ्ट इंस्टॉलेशन सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त कर टॉवर के ओ.सी. /अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 34.07.208 को आवेदन किया गया और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 26.44.2049 को परियोजना के daa, 8, ० के सम्बन्ध में ओ.सी.,/अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी किया गया। ओ.सी. प्राप्त होने के पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 30.44.2049 जारी किया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को विभिन्न मांग-पत्र, अनुस्मारक पत्र दिनांक 05.02.2020, 25.02.2020, 08.03.2020, 49.03.2020, 49.03.2020, 45.05.2020 एवं 28.07.2020 प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा अन्तिम नोटिस दिनांक 5.09.2022 प्रेषित किये जाने के पश्चात् यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.40.2022 के माध्यम से शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त कर fear गया। इसके अतिरिक्त विपक्षी कंपनी अर्नेस्ट मनी (बयाना धनराशि) की कटौती करने के बाद शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि वापस करने के लिए तैयार थी। यूनिट का आवंटन निरस्त होने के लगभग 06 माह बाद दिनांक 46.05.2023 को शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी कंपनी से संपर्क किया गया, जिसके जवाब में विपक्षी कंपनी द्वारा उसी परियोजना में एक दूसरी यूनिट WEN-D-40] में आवंटन ट्रांसफर करने के लिए सहमत हो गई | यह ट्रांसफर कुछ शर्तों के अधीन था, जिसमें विपक्षी कंपनी को dim किश्तों में भुगतान के लिए 2,00,000/— रुपये के पोस्ट-डेटेड चेक जारी करना शामिल था। इस
52) व्यवस्था की शर्तों को विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल दिनांक 20.05.2023 के माध्यम से विधिवत स्वीकार एवं कन्फर्म किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुरोध और उसके बाद की व्यवस्था के अन्तर्गत विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 20.07.2023 को श्री अमित कुमार गुप्ता के पक्ष में cat यूनिट (यूनिट We-c-200l) के Page 9
है. | में तृतीय पक्ष के अधिकार सृजित कर दिये गये। शिकायतकर्ता, विपक्षी कंपनी के ई-मेल दिनांक 46.05.2023 एवं 20.05.2023 में बनाये गये नियम एवं शर्तों का अनुपालन करने में असफल रहा है और यूनिट We-p-i40l के सम्बन्ध में अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने अथवा नया आवंटन-पत्र / अनुबन्ध जारी करने हेतु कोई कदम नहीं उठाया गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा कोई अनुपालन नहीं किया गया है, जिस कारण विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 05.40.2022 को किया गया यूनिट आवंटन निरस्तीकरण वैधानिक है। शिकायतकर्ता द्वारा रेश अधिनियम, 206 की धारा-9(6) एवं 9(7) का उल्लंघन किया गया है। इसके अतिरिक्त रेरा अधिनियम, 2046 की ARI-9(0) के अनुसार आवंटी को परियोजना का ओ.सी. प्राप्त होने की तिथि से 02 माह की भीतर आवंटित यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त करना अनिवार्य है, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा प्राप्त करने में विफल रहा है। इसके अतिरिक्त भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) नियमावली, 2048 की धारा-9.30)) में स्पष्ट रूप से अंकित है कि यदि आवंटी द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट जारी रहता है तो प्रमोटर इस सम्बन्ध में नोटिस दिये जाने के बाद भी यह डिफॉल्ट तीन (3) महीनों से अधिक समय तक बना रहता है तो प्रमोटर, आवंटन प्राप्तकर्ता के पक्ष में अपार्टमेंट / प्लॉट, का आवंटन रद्द कर सकता है और बुकिंग धनराशि ब्याज काटकर आवंटन प्राप्तकर्ता द्वारा भुगतान की गई धनराशि वापस कर सकता है, और इस प्रकार यह अनुबन्ध समाप्त हो जाएगा। विपक्षी कंपनी, शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि, अर्नेस्ट मनी की कटौती करने के बाद, वापस करने के लिए तैयार है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा petted शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय “पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित seat है :- "In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter, If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the घारा-9.3 : construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7%6 unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due." "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events:
i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7%6 unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit; ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of _ the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee Page 4 Sa such termination at least thirty days prior to such termination."
प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता एवं विपक्षी कम्पनी के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित आवटन-पत्र /अनुबन्ध दिनांक 05.44.2049 के संलग्नक पेमेन्ट प्लान के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम किश्त का भुगतान बुकिंग के समय अर्थात दिनांक 04.40.2049 को यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 0% धनराशि, द्वितीय किश्त अर्थात 90% धनराशि का भुगतान प्रश्नगत यूनिट का कब्जा ऑफर किये जाने पर अर्थात दिनांक 45.44.209 को विपक्षी कम्पनी को किया जाना था।
चूंकि प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य 54,38,200 / - रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 42,38,200 //-रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी कंपनी को किया गया जोकि कूल बिक्री मूल्य का 77 प्रतिशत से अधिक है और उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित आवंटन-पत्र /अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि 05.44.2049 से 06 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ 42 माह अर्थात दिनांक 04.44.2020 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान किये जाने हेतु ई-मेल दिनांक 28.08.2020 के माध्यम से विपक्षी कंपनी से ११0८ जारी किये जाने का अनुरोध किया गया है, जिसमें विपक्षी कंपनी द्वारा ई-मेल के माध्यम से शिकायतकर्ता को सूचना दी गयी कि यूनिट का स्टेटस बैंक के रिकॉर्ड में स्पष्ट नहीं है, क्योंकि उक्त यूनिट के सापेक्ष पहले ही ऋण जारी किया जा चुका है और 8-9 यूनिट्स में पेमेंट प्लान से जुड़ी समस्याओं के कारण बैंक उन फ्लैट्स के लिए noc जारी नहीं कर रहा है। Sat जानकारी प्राप्त होने पर शिकायतकर्ता ने अपने जवाब में कहा कि वह Noc के लिए दिनांक 45.09.2020 तक प्रतीक्षा करेंगे और ऐसा न होने पर वह अपनी समस्त जमा धनराशि ब्याज सहित वापस किये जाने की मांग करेंगे, परन्तु विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को Noc प्रदान नहीं की गयी और न ही तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष में नया आवंटन पत्र जारी किये जाने से पूर्व शिकायतकर्ता की जमा धनराशि आज तक वापस की गयी।
यदि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, तो यह विपक्षी की जिम्मेदारी बनती है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट को निरस्त करते हुए उसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि ब्याज सहित उन्हें वापस कर देते, परन्तु शिकायतकर्ता की जमा धनराशि ब्याज सहित विपक्षी द्वारा वापस नहीं की गयी। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) Page 2 | 2048 की धारा-9.30) में स्पष्ट रूप से अंकित है कि यदि आवंटी द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट जारी रहता है तो प्रमोटर इस सम्बन्ध में नोटिस दिये जाने के बाद भी यह डिफॉल्ट तीन (3) महीनों से अधिक समय तक बना रहता है तो प्रमोटर, आवंटन प्राप्तकर्ता के पक्ष में अपार्टमेंट / प्लॉट, का आवंटन रद्द कर सकता है और बुकिंग धनराशि एवं ब्याज काटकर आवंटन प्राप्तकर्ता द्वारा भुगतान की गई धनराशि वापस कर सकता है, और इस प्रकार यह अनुबन्ध समाप्त हो जाएगा, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त करने के पश्चात् उनकी जमा धनराशि वापस नहीं की गयी है। प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अपनी यूनिट सरेन्डर / निरस्त नहीं करायी गयी है। वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक / अपूर्ण है। tr अधिनियम की ais के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-04 निस्तारित किया जाता है।
निस्तारण बिन्दु संख्या-02 निस्तारण बिन्दु संख्या-02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर दिनांक 05.4.2020 तक उक्त यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा आज तक न तो यूनिट का वैधानिक कब्जा प्रदान किया गया है और न ही विलम्बित अवधि का ब्याज दिया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा सक्षम विकास प्राधिकरण से आवश्यक प्रमाण-पत्रों सहित परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है, जिस कारण यूनिट का वैधानिक कब्जा प्रदान किये जाने में विलम्ब किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि का भुगतान विपक्षी को समय पर किया गया है, परन्तु विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार परियोजना को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा wera शिकायत को स्वीकार करते हुए विलम्बित अवधि के ब्याज सहित प्रश्नगत यूनिट का वैधानिक कब्जा एवं शिकायतकर्ता के Page i3 | इनक. सेल डीड (बिक्री विलेख) निष्पादित किये जाने हेतु विपक्षी को निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी द्वारा अपना लिखित उत्तर दिनांक 6.07.2025 प्रस्तुत करते हुए कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के टॉवर का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिसमें शिकायतकर्ता को यूनिट आवंटित की गयी थी तथा टॉवर से सम्बन्धित चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र जैसे- फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी सर्टिफिकेट, स्ट्रक्चरल इंजीनियर सर्टिफिकेट एवं लिफ्ट इंस्टॉलेशन सेफ्टी सर्टिफिकेट प्राप्त कर टॉवर के ओ.सी. / अधिभोग प्रमाण-पत्र प्राप्त करने हेतु ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 34.07.20I8 को आवेदन किया गया और ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 26.44.2049 को परियोजना के टॉवर-#, 8, ० के सम्बन्ध में ओ.सी./ अधिभोग प्रमाण-पत्र जारी किया गया। ओ.सी. प्राप्त होने के पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांक 30.44.2049 जारी किया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा शिकायतकर्ता को विभिन्न मांग-पत्र, अनुस्मारक पत्र दिनांक 05.02.2020, 25.02.2020, 08.03.2020, 79.03.2020, 49.03.2020, 45.05.2020 एवं 28.07.2020 प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा अन्तिम नोटिस दिनांक 45.09.2022 प्रेषित किये जाने के पश्चात् यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.40.2022 के माध्यम से शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया, जिसके पश्चात् विपक्षी कंपनी द्वारा दिनांक 20.07.2023 को श्री अमित कुमार गुप्ता के पक्ष में उक्त यूनिट (यूनिट wen-c-00) के सम्बन्ध में तृतीय पक्ष के अधिकार सूजित कर दिये wa) विपक्षी कंपनी, शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि, अर्नेस्ट मनी की कटौती करने के बाद, वापस करने के लिए तैयार है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा प्रश्नगत शिकायत को खारिज किये जाने का अनुरोध किया गया है।
रेरा एक्ट की धारा-48() में प्राविधान है कि :- Section 48 (I) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (9) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed. इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की aRt—sI(4)(b) में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार/अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन-पत्र/अनुबन्ध दिनांक 05.44.2049 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य हस्ताक्षरित व निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-42 के प्रस्तर-25 के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी कंपनी द्वारा आवंटन पत्र/अनुबन्ध निष्पादित किये जाने की तिथि से 06 माह एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के भीतर परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था। ऐसे में उपरोक््तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 04.44.2020 तक उक्त यूनिट का कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 05.44.2020 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहाँ तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या-6649-50 ,// 208 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल* में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20!6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा. लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया” की याचिका में मा. उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who | has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay । interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्रावधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के मध्य किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा-2(2४) में प्रावधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid: जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.40.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये | विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण । (Events of defaullaRata है, जिसमें प्रस्तर-9.20॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर । होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- ॥ "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the | अपनाया. within forty-five days of receiving the termination notice:"'
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर-9.30) में निर्धारित है। उक्त प्रावधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी MciR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है। इसके अतिरिक्त दिनांक 47.40.2048 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8-3--48-65 विविध,/ 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
#7,] Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to the association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or failure due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से Page 8 |e कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-02 निस्तारित किया | जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- । आदेश । 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्थापित करते हुए, इस आदेश के अनुरूप माँग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, आवंटन-पत्र / अनुबन्ध | के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित | प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। 2. विपक्षी कंपनी द्वारा तृतीय पक्ष “श्री अमित कुमार गुप्ता” के पक्ष में दिनांक 20.07.2023 को विधि विरुद्ध एवं अवैधानिक रूप से किया गया उक्त यूनिट का आवंटन निरस्त किया जाता है। 3... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 05.44.2020 से प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान किये जाने की तिथि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLRH प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा।
4... विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(४9)6) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्तागण द्वारा भी MCLR+ WRT की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को विधिक ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्रदान करते समय सभी ae आवंटन,अनुबन्ध पत्र में उललेखित पेमेन्ट प्लान/ वर्णित शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित He | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40 एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता er पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। तद्नुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। Ff ce [ ० वेंकटेश #9/0 6 /2 6 (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण Page 20