Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Richa Setia v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/03/116890/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2026-02-04
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की amei—3i के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Sto दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट | जमा धनराशि vo | आवंटन की | अनुबंधानुसार | वांछित ष io न0 तिथि कब्जा दिये ह जाने की तिथि T. प्लकावबा0॥68902024 | ऋचा सेतिय 2426 | रु० 33,45,880/ | 22.0.204 | 42 माह + 03 | यूनिट का माह अनुग्रह | कब्जा व अवधि अर्थात | विलम्बित अक्टूबर 2047 | अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत .संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता.काःकंथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट बुक करायी७&गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि रु0 33,45,880 // को«भुगतान_किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा जुलाई 20:7 4 यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु विपक्षी को 37.03.2022 को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है। विपक्षी द्वारा न तो विलम्बित अवधि का ब्याज दिया गया है और न ही यूनिट का कब्जा प्रस्ताव दिया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में शिकायत संख्या vaeienes44 / 44 / 402244 / 2022 ऋचा सेतिया बनाम एटीएस रियलटी प्रालि. के विरूद्ध जमा धनराशि वापस दिलाये जाने हेतु शिकायत योजित की गयी थी जो पीठ द्वारा दिनांक 22.:22023 को Ros आदेश निरस्त कर दिया गया था। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में आवंटन पत्र, अनुसमरण पत्र, स्टेटमेंट ऑफ अकाउंट, इन्टीमेशन ऑफ फाइनल ऑफर ऑफ पजेशन, ऑफर ऑफ पजेशन की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। 4 — SS शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) विपक्षी द्वारा जारी Rete ain एकाउंट Wet रु0 33,45,880 / विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर444 /44 /402244 / 2022 यूनिट संख्या 2426 के लिए दिनांक 5.44.2022 को Ros हेतु योजित की गयी थी जो पीठ द्वारा दिनांक 22.42.2023 को विपक्षी को ओ.सी प्राप्त होने के आधार पर Ros का अनुतोष निरस्त कर दिया गया था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या 2726 के लिए पुनः यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु योजित की गयी है। इस प्रकार शिकायतकर्ता की शिकायत रेस ज्यूडिकाटा से बाधित है। इस सम्बन्ध में fre द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गुडा विजयलक्षमी ar yer wares सेखारा सष्टी में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। vad के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा अर्नेस्ट मनी के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय. द्वारा सिविल अपील संख्या 7588 /2042 सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल व श्री हनुमान कॉटन Mest व अन्य बनाम टाटा एयरक्राफ्ट में पारित आदेश का भी उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया जाता हैं :- 4. क्या वर्तमान शिकायत रेस-ज्यूडिकाटा से बाधित है अथवा नही?
2. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 3. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? — क:- 2 निस्तारण प्रश्न We :- प्रश्न संख्या-4 इस तथ्य पर विरचित है कि क्या वर्तमान शिकायत रेस-ज्यूडिकाटा से बाधित है अथवा नहीं? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में यूनिट संख्या 272 के लिए शिकायत संख्या vaisnes44 / 44 / 402244 / 2022 tees हेतु योजित की गयी थी जिसे पीठ द्वारा दिनांक 23.42.2023 को विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने के आधार पर निरस्त कर दिया गया था। इसके पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत कब्जा व विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु योजित किया गया है जिस कारण शिकायत रेस-ज्यूडिकाटा से बाधित है। शिकायतकर्ता की ओर से तर्क प्रस्तुत किया गया कि उनके द्वारा रिफन्ड हेतु पूर्व में योजित प्रकरण निरस्त हो जाने के कारण वर्तमान शिकायत कब्जा दिलाये जाने हेतु योजित की गयी है।
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के" अवलोकन सें*विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में शिकायत संख्या waelener4a /4 /402244 / 2022 ऋचा सेतिया बनाम एटीएस रियलटी प्रा.लि:योजित-की गयी थी जिसे पीठ द्वारा दिनांक 22.42. 2023 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ” सिविल अपील नम्बर 5785, 2049 ईरियो ग्रेस रियलटेक wo feo बनाम अभिषेक wen एवं आदि” में दिनांक 44.04. 2024 को पारित आदेश में जहाँ परियोजना का ओ.सी. /सी.सी प्राप्त किया जा चुका है, उसके सम्बन्ध में निम्न आर्ब्जेवेशन दिया है कि :- 2i.. The issue which now arises is whether the apartment buyers are bound to accept the offer of possession made by the Developer where the Occupation Certificate has been issued, along with the payment of Delay Compensation, or are entitled to terminate the Agreement. (i) We are of the view that allottees at Serial Nos. I and 2 in Chart A are obligated to take possession of the apartments, since the construction was completed, and possession offered on 26.06.2079, after the issuance of Occupation Certificate on 34.05.2079, The Developer is however obligated to pay Delay Compensation for the period of delay which has occurred from 27747.20768 till the date of offer of possession was made to the allottees. माननीय उच्चतम न्यायालय की vad नजीर के अनुसार शिकायतकर्ता विपक्षी की परियोजना में अधिभोग प्रमाण पत्र (Occupancy Certificate) UIST हो जाने के आधार पर कब्जा लेने के लिए Obligated है जिस कारण शिकायकर्ता को जमा 3 Sa
धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुतोष निरस्त किया गया था परन्तु वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुतोष चाहा गया है। इस प्रकार पूर्व शिकायत और वर्तमान शिकायत में अनुतोष भिन्न होने के कारण वर्तमान शिकायत रेस-ज्यूडिकाटा से बाधित नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 :- प्रश्न संख्या-2 इस तथ्य पर विरचित है कि ww आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 ,// 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo fio बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :-
"54: काया the'scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन mga” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRIINS है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह 4 OSS
स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- " प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ).कों*विलम्ब की अवधि माना जाएगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय «द्वारा. सिविल अपील संख्या: 43029 / 985, “MLC. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.”
इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,//4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:- "2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQ| category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated 5 OS (=) क्षेका, गौतगवुद्धनगर in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-44-20:9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक o4-7:-20:9 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक ia 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना. न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि.>उपर्युकत--वर्णित, दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 feat 33 fea अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व. माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। TER प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। 6 ——Ss निस्तारण प्रश्न संख्या 4-: प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विचरित किया गया है
कि an शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह we है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त आवंटित यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 22.0:.20:4 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 03 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात अक्टूबर 20:7 में दिया जाना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। उक्त के अतिरिक्त यह भी विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन दिनांक 44.04.2022 जारी किया जा चुका है जिसकी प्रति पत्रावली पर उपलब्ध है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 07 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया ware! चूंकि.शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि&का ब्याज«दिलाये-जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिंट armen एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकंय /पंटंटां के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /gect विलेख के प्रारूप के we 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2(॥) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLR+infaget की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता 8 —_ है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(28)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। है।
उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित oan देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएँ। विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 07.44.20i8 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की“तिथिं-जो-भी बाद adhe शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि GO 33,45,880,/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 3 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029 / 4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। 9 ——_=_ 8.
विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा 2(2४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी Mcir+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का veces भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा | विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा. प्राधिकरण के. माध्यम से. आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया ore | (sto दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 0