Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Atul Chaturvedi v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/03/106898/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-08-14
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2076 की ois के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | eal यूनिट न0 | पत्रावली पर fic wR | कब्जा दिये वांछित अनुतोष . उपलब्ध रसीद के | सेल की जाने की तिथि स0 अनुसार जमा तिथि |. धनराशि रु0 प्. जिल्हा44/0706898/2023 | अतुल चतुर्वेदी रु रु 42,8,347 |[उ6302020 | 9 मार्च 202। | यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। | बनाम एटीएस रिएलटी प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। कार्यालय आख्या दिनांक 42.08.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में धारा-8 अथवा ae wos डिसबर्स्ड अथवा एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र व कोई अन्य प्रपत्र किसी पक्षकार द्वारा पत्रावली आदेशार्थ सुरक्षित होने के उपरांत रेरा पोर्टल पर या पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में उक्त तालिका में अंकित यूनिट संख्या 2246 बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष विपक्षी को तालिका में अंकित धनराशि wo 42,06,374/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में आवेदन फार्म दिनांक 24.09.2020 के माध्यम से यूनिट संख्या 2246 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष दिनांक 76.t0. 2020 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। यूनिट की कुल कीमत Wo 42,06,374 /है। शिकायतकर्ता द्वारा t00 प्रतिशत धनराशि wo 42,06,874,/ का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के क्लाज 7.4 के अनुसार शिकायतकर्ता को ——=> यूनिट का विधिक कब्जा दिनांक 37.03.202 तक उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी शिकायतकर्ता को निर्धारित समय अवधि में कब्जा दिये जाने में असफल रहा है। विपक्षी को मार्च 2022 में ओ.सी प्राप्त हो चुका है और विपक्षी द्वारा दिनांक 30.03. 2022 को ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया गया है। विपक्षी ने 42 माह विलम्ब से ऑफर ऑफ पजेशन जारी किया है। विपक्षी विलम्बित अवधि का ब्याज नहीं देना चाह रहा है। यूनिट का कब्जा निर्धारित अवधि में उपलब्ध न कराया जाना अनुबंध के शर्तों व रेरा अधिनियम की धारा i8(t) के प्राविधानों का उल्लंघन है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा परिवाद के समर्थन में एग्रीमेंट फॉर सेल व कस्टमर लेजर की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक मुगतान की गई घनराशि संख्या (रु0)
| | क्षी द्वारा जारी- poem | रु0 42,06,374 / स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवेदन फार्म दिनांक 24.09.2020 के माध्यम से विपक्षी की परियोजना एटीएस एलौर में यूनिट बुक करायी गयी थी जिसके पश्चात् शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या 2246 आवंटित की गयी थी जो एनेक्चर आर-2 व 3 है। शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट का कुल मूल्य 0 42,06,374/था। आवंटित यूनिट के सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य दिनांक 46.40.2020 को एग्रीमेंट OR सेल निष्पादित हुआ, जो एनेक्चर आर-4 है। विपक्षी द्वारा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त किये जाने के उपरांत शिकायतकर्ता को ऑफर ऑफ पजेशन दिनांक 44.04.2022 को जारी किया गया है जो एनेक्चर आर-5 है। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटित यूनिट के सापेक्ष धनराशि Bo 42,06,353,/ का भुगतान किया जा चुका है जो एनेक्चर आर-6 है। विपक्षी द्वारा यह उल्लिखित किया गया है कि उनके द्वारा दिनांक 29.07.202 को ओ.सी हेतु यमुना एक्सप्रेसवे इण्डस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी के a अक- 2 समक्ष आवेदन किया गया था तत्पश्चात् दिनांक 30.03.2022 को प्राधिकरण द्वारा कम्पलीशन सर्टिफिकेट मंजूर कर ली गयी।
विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि कोविड-49 महामारी व माननीय एनजीटी व सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्माण कार्य पर समय समय पर लगाये गये प्रतिबंधों के कारण भी परियोजना में निर्माण कार्य विलम्बित हुआ है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उन्हें अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अंतिम ऑफर ऑफ पजेशन पत्र अप्रैल 2022 में प्राप्त करने के पश्चात् भी यूनिट का कब्जा नहीं लिया गया है जिससे स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान शिकायत अनुचित लाभ पाने के उद्देश्य से योजित की गयी है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान परिवाद पोषणीय न होने के कारण खारिज किये जाने, वर्तमान प्रकरण में उचित आदेश पारित किये जाने तथा शिकायतकर्ता पर रु0 75,000 / का अर्थदण्ड लगाये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा लिखित आपत्ति के समर्थन में आवेदन फार्म, एग्रीमेंट फार सेल /लीज, कस्टमर लेजर, अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022, ऑफर ऑफ पजेशन 44.04.2022 की छाया प्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या +: प्रश्न Hee इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व oifas—t9 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940 /20:7 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य” के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं We 40 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर की परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में कोविड-49 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है। कोविड-49 HEARN के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये विपक्षी कोविड-49 के अतिरिक्त अन्य किसी आधार पर फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी नहीं है। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 Prema किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 -: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 46.40.2020 को एग्रीमेंट फार सेल,/लीज निष्पादित हुआ। एग्रीमेंट फार सेल 4 के अनुसार यूनिट का कब्जा 3t मार्च 202 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी का कहना है कि कोविड-49 महामारी व माननीय एनजीटी द्वारा निर्माण कार्य पर समय समय पर लगाये गये प्रतिबंधों के कारण भी परियोजना में निर्माण कार्य विलम्बित हुआ है। विपक्षी द्वारा यह भी उल्लिखित किया गया है कि उन्हें अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त हो गया है| वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि सक्षम प्राधिकरण से अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 को प्राप्त होने के पश्चात् शिकायतकर्ता को ऑफर आफ पोजेशन दिनांक 44.042022 को जारी किया जा चुका है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा औषचारिकताओं को पूर्ण कर कब्जा नहीं लिया जा रहा है।
उपरोक्त से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 4 वर्ष का विलम्ब किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट के साथ विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " — Sa उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल Raced सबअर्बन wife. आदि बनाम यूनियन ऑफ gears वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(0) lays down that if the promoter fails to
complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भूनसम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 7.40.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा a —— 6
विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें wer o2(i) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। sat wher को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+ sfc की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश
Lue को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र,/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी/सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। eo 7
विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2024 से ओ.सी/सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि रु0 42,06,374,/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को gra रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25. 09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी धटाकल। प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (fafa और विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी arr यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 72, 38.9024 (डा०दीपक स्वरूप WRT) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर