Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Tawish v. Sikka Infrastructure Pvt Ltd
Complaint No. NCR144/03/106780/2023
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-06-13
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (in this matter)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
Office of the U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar. Order under [?], Bench-2 (formerly Bench-4) Present: T. Venkatesh, Member Sr. No. | Complaint No. | Complainants | Unit No. 1. | NCR44/05/08924/2023 | Nikhil Agarwal | 004/0|| Elegance [?] 2. | NCRI44/06/0292/2023 | Rohit Sangal | [?] 3. | [?]44/06/00285/2023 | Rohit Sangal | SKG/KOSM/LGF/30 4. | [?]44/2/5503/2025 | Rajesh Kumar Goyal | LGF-27, Sikka Kosmic 5. | NCRI44/2/5427/2023 | Huma Zaidi | ELEGANCE TOWER 90! 6. | NCRI44/07/0894/2023 | Rajesh Kumar Goyal | LGF26 & LGF 27 7. | [?]44/05/08523/2025 | Sharad Kumar | [?] 8. | [?]244/08/936/2023 | Rohit Shah | GF-0I 9. | [?]44/03/06780/2023 | Tavish | KG Bloom 305 Versus Sikka Infrastructures Private Limited Along with the complainant Nikhil Agarwal, 08 other complainants have filed complaints against the opposite party. The facts and evidence in all these complaints are the same. All these complaints relate to the opposite party's project "Sikka Karam Greens". The complaints are therefore being disposed of by a single decision. In complaint no. NCR44/05/08924/2023, Nikhil Agarwal will be the lead case. The present complaint application has been filed by the complainants against the opposite party, seeking possession and interest for the delayed period.
In brief, the lead complainant's statement is that he booked unit No. 004/20th Elegance in the opposite party's project Sikka Karam [?], the total price of which was Rs. 23,52,840/-, against which the complainant has paid Rs. 22,92,232/- from time to time in instalments. The complainant says that, as per the agreement, possession of the unit was to be given within 42 [?], but even now possession of the unit has not been provided. The opposite party was to complete the project as per the agreement by 206 [?], but construction in the project is still ongoing. In addition, the complainant seeks possession of the unit with interest for the delayed period at 48 percent. The complainant has therefore requested possession of the unit and interest for the delayed period. In support of his statement the complainant has filed photocopies of the flat allotment agreement dated 44.05.2042, deposit receipts, and other documents.
4 उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत ems, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) उपस्थिति:-- टी० वेंकटेश, सदस्य क्रम सं0 शिकायत संख्या शिकायतकर्तागण यूनिट संख्या . | टारा44/05/ 08924/2023 निखिल अग्रवाल 004/0॥ Elegance 2. | NCRI44/06/0292/2023 रोहित संगल 560577089५97॥,ठ6093 3... सटार44/0600285/2023 | रोहित संगल SKG/KOSM/LGF/30 | | टार44/2/ 5503/2025 राजेश कुमार गोयल LGF-27,Sikka Kosmic 5. | NCRI44/2/5427/2023 हुमा जैंदी ELEGANCE TOWER 90! a NCRI44/07/0894/2023 राजेश कुमार गोयल LGF26 & LGF 27 7. टार44/05/ 08523/2025 शरद कुमार छ68०॥००/]005 न टा२44/08/936/2023 रोहित शाह GF-0I ez टार44/03/ 06780/2023 तविश KG Bloom 305 बनाम सिक्का इंफास्ट्रक्चर्स प्राइवेट लिमिटेड शिकायतकर्ता निखिल अग्रवाल के साथ 08 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरूद्ध wera शिकायतें योजित की गयी है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें विपक्षी की परियोजना " sikka Karam Greens" से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NcR44/05/08924/2023 निखिल अग्रवाल अग्रणी वाद रहेगा। प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है।
संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Sikka Karam 57०0 में यूनिट संख्या- 004/20th Elegance बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत 23,52,840/— रूपये थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 22,92,232/- रूपये का भुगतान किया गया | शिकायतकर्ता का कहना है कि अनुबन्ध पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 के अन्दर दिया जाना था, परन्तु वर्तमान समय में भी यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। विपक्षी द्वारा अनुबन्धानुसार 206 तक परियोजना पूर्ण किया जाना था, परन्तु प्रश्नतत परियोजना में निर्माण कार्य जारी है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा 48 प्रतिशत के विलम्बित अवधि के ब्याज के साथ प्रश्नगत यूनिट का कब्जा चाहा गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में फ्लैट आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 44.05.2042 की प्रति, जमा धनराशि की रसीदें, आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है।
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या- Elegance 004 आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष आवंटन पत्र दिनांक 44.05.2042 को निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा दिनांक 4.4.20i5 तक अनुग्रह अवधि के साथ प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिया जाना था। परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु नोएडा प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि दिनांक 26.08.204: को 53,9:.33 वर्गमीटर आवंटित की गयी थी, परन्तु प्राधिकरण द्वारा उक्त क्षेत्रफल से कम भूमि का कब्जा उपलब्ध कराया गया, जिसके लिए प्राधिकरण को पूर्व में सूचित किया जा चुका है। पूर्ण भूमि का कब्जा न प्राप्त होने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य किये जाने में बाधा उत्पन्न हुई है। दिनांक 04.:2.20:3 को प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को अवगत कराया गया है कि 3602.4. वर्गमीटर की भूमि जो विपक्षी को आवंटित है, का कब्जा वर्तमान समय में प्राधिकरण के पास भी नहीं है। भूमि का कब्जा न मिलने के कारण विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद में रिट याचिका संख्या-7963,/2048 योजित करते हुए माननीय न्यायालय से अनुरोध किया गया कि विवादित भूमि का कब्जा उपलब्ध कराया जाये, ताकि परियोजना का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सके तथा विवादित अवधि को शून्य अवधि प्रदान की जाने का भी अनुरोध किया गया है, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 27.02.20I8 को आदेश पारित किया गया Ch 3
माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार कार्यवाही करते हुए प्राधिकरण द्वारा दिनांक 20.02.2049 को आदेश पारित करते हुए दिनांक 26.08.2044 से दिनांक 20.02.2049 तक शून्य अवधि प्रदान की गयी। विपक्षी का यह भी कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य वायु प्रदूषण के कारण निर्माण कार्य पर लगाये गये प्रतिबंध से भी विलम्बित हुई है। var कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश के अनुसार शून्य अवधि प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में नोएडा प्राधिकरण को प्रेषित पत्र की प्रति, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 27.02.208, प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 26.02.2049 की प्रति, रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 06.06.2020 की प्रति, पीठ-4 ए द्वारा पारित आदेश आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचारणीय है :- 4. क्या force majeure events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलंबित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या-4 बिन्दु ver-i इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या वास्तव में परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
विपक्षी द्वारा दाखिल प्रतिवाद पत्र में कहा गया है परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु नोएडा प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि दिनांक 26.08.2044 को 53,94.33 वर्गमीटर आवंटित की गयी थी, परन्तु प्राधिकरण द्वारा उक्त क्षेत्रफल से कम भूमि का कब्जा उपलब्ध कराया गया, जिसके लिए प्राधिकरण को पूर्व में सूचित किया जा चुका है। पूर्ण भूमि का कब्जा न प्राप्त होने के कारण परियोजना का निर्माण कार्य किये जाने में बाघा उत्पन्न हुई है। दिनांक 04.42.2043 को प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को अवगत कराया गया है कि 3602.44 वर्गमीटर की भूमि जो विपक्षी को आवंटित है, का कब्जा वर्तमान समय में प्राधिकरण के पास भी नहीं है भूमि का कब्जा न मिलने के कारण विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहबाद में रिट याचिका संख्या-7963 /20:8 योजित करते हुए माननीय न्यायालय से अनुरोध किया गया कि विवादित भूमि का कब्जा उपलब्ध कराया जाये, ताकि परियोजना का 4 निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सके तथा विवादित अवधि को शून्य अवधि प्रदान की जाने का भी अनुरोध किया गया है, जिसमें माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 27.02. 2048 को आदेश पारित किया गया। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार कार्यवाही करते हुए प्राधिकरण द्वारा दिनांक 20.02.2049 को आदेश पारित करते हुए दिनांक 26.08.2044 से दिनांक 20.02.20I9 तक शून्य अवधि प्रदान की गयी। विपक्षी का यह भी कहना है कि परियोजना का निर्माण कार्य वायु प्रदूषण के कारण निर्माण कार्य पर लगाये गये प्रतिबंध से भी विलम्बित हुई है। उक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश के अनुसार शून्य अवधि प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है।
उभय पक्ष द्वारा हस्ताक्षरित अनुबन्ध के प्रस्तर-29 पर फोर्स मैज्योर को परिभाषित किया गया है। नोएडा प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश दिनांक 20.02.2049 के अवलोकन से यह विदित है कि भूमि विवाद के कारण प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 27.02.20:8 के अनुसार विपक्षी को दिनांक 26.08.2044 से 20.02.209 तक शून्य अवधि प्रदान किया गया है। परन्तु प्राधिकरण द्वारा वायु प्रदूषण के कारण माननीय एन.जी.टी द्वारा जारी आदेश दिनांक 44.08.2043 के अनुसार निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी थी, परन्तु विपक्षी की परियोजना ओखला वर्ल्ड सेंचूरी से 40 किलोमीटर की परिधि में नहीं पड़ती है। ऐसे में कार्यालय आदेश दिनांक 29.:.20I6 के अनुसार वायु प्रदूषण की अवधि में निर्माण कार्य न किये जाने के कारण शून्य अवधि का लाभ प्रदान नहीं किया जा सकता है। उक्त से यह स्पष्ट है कि विपक्षी को प्राधिकरण द्वारा वायु प्रदूषण के सम्बन्ध लगे प्रतिबंध की अवधि को शून्य अवधि प्रदान नहीं किया गया है, जबकि भूमि विवाद के कारण प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 27.02.208 के अनुसार विपक्षी को दिनांक 26.08.2044 से 20.02.2049 तक शून्य अवधि प्रदान किया गया है। ऐसी स्थिति में विपक्षी दिनांक 26.08.2044 से दिनांक 20.02.2049 तक शून्य अवधि प्राप्त करने के अधिकारी है।
समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ0प्र0 wr अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसकोदृष्टिगत रखते हुए दिनांक25. 03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज hs 5 प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से अतिदेय धनराशि पर कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-4 Paka किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-2 निस्तारण बिन्दु संख्या-2 इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों के आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि अनुबन्ध पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 के भीतर दिया जाना था, परन्तु अभी तक प्रश्नगत यूनिट का कब्जा नहीं दिया जा रहा है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि वह प्रश्नगत यूनिट का कब्जा चाहते है और कब्जे में हुई देरी के लिए वह is प्रतिशत के विलम्बित अवधि के साथ werd यूनिट का कब्जा चाहते है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी की ओर से अपना लिखित जवाब अंकित किया गया है कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 20.02.2049 में दिनांक 26.08.2044 से दिनांक 20.02.20I9 तक परियोजना की पूर्ण भूमि आवंटित न किये जाने के कारण शून्य अवधि घोषित की गयी है। अतः विपक्षी द्वारा var अवधि को शून्य अवधि घोषित किये जाने का अनुरोध किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 48 () में प्राविधान है कि :- Section 76 (7) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (6) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, न» 6 building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed.
इस प्रकार Sa को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नही मिलता तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के flere हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र दिनांकित 4.05.20i2 की प्रतिलिपि दाखिल की गयी है, जिसके प्रस्तर-26 के अनुसार यूनिट का कब्जा 36 माह में yer यूनिट का कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। इसके अतिरिक्त फोर्स मैज्योर के मद में विपक्षी दिनांक 26.08.2044 से दिनांक 20.02.20I9 तक की अवधि के लिए लाभ पाने का अधिकारी है। (जैसा कि निस्तारण बिन्दु संख्या- में वर्णित है |) जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 / 208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी Tay माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है किः- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. 7 The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to
reap the benefits of her own delay in taking possession. " salad विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज अधिकारी होगा। पाने UM का चूंकि नोएडा प्राधिकरण द्वारा दिनांक 20.02.20I9 तक शून्य अवधि घोषित किया गया है। ऐसी स्थिति में यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने की तिथि की गणना दिनांक 24.02.2049 से किया जाना उचित होगा। ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 2.0220i9 से 36 माह अर्थात् दिनांक 24.02.2022 से ओ.सी /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय लय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " oe अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Sat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स ex var धनराशि का उपभोग किया गया है। RI एक्ट की धारा 2(20)में प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee,as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in caseof default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liableto pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from thedate the promoter received the amount or any part thereof till the date the amountor part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment tothe promoter till the date it is paid; जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक 47.:0.20:8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 20:8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan C7 9 of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)(0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। माननीय. उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा रिट याचिका संख्या-सी-3289 / 2020 “wat बिल्डवेल कस्ट्रक्शन्स प्रा.लि. बनाम पूनम सूद एवं अन्य“ में दिनांक 06.02.2020 को पारित निर्णय में यह उललेखित किया गया है किः-
Coming to the next ground of challenge to the impugned order by the petitioner's counsel that the interest awarded by respondent no.l (MCLR+l) is excessive, is also without any merit. It is an admitted fact to the petitioner that respondent no. had booked a flat and till the filing of the writ petition, the possession of the flat has not been given to him. The interest had been awarded in terms of Clause 9.2(ii) of the form of agreement contained in the U.P. Real Estate (Regulation and Development) (Agreement for Sale/Lease) Rules, 208. The respondent no.2 has given cogent reasons in the impugned order. Respondent no.2 has rightly placed reliance on Clause 9 sub-clause(ii) of the Rules, 208 which provides that in the event of default on the part of the promotor, the allottee shall have the option of terminating the agreement in which case the promoter shall be liable to refund the entire money paid by the allottee under any head whatsoever, towards the purchase of the flat at the rate of MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on 40 home loan of State Bank of India + % unless provided otherwise under the Rules within forty-five days of receiving the termination notice. Learned counsel for the petitioner has failed to bring to our notice any Rule in the Rules, 206, providing otherwise. तत्पश्चात् Re याचिका wen-xi-oi20/2020 “हैबीटेक इंफास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम उ0प्र0 राज्य सरकार एवं अन्य” में दिनांक 06.07.2020 को महत्वपूर्ण ऑब्जर्वेशन देते हुए यह उललेखित किया है किः-
On 2.09.20I9 the respondent authority directed the petitioner to refund the entire amount alongwith interest @ MCLR + ]% from the date of deposit till the date of order. Thereafter, recovery certificate and citation was issued on 07.02.2020...................-----००००००- and only on complaint under Section 8 authority proceeded to direct for the refund of the money alongwith payment of interest @ MCLR + %, which was in view of Real Estate (Regulation & Development) (Agreement to Sale) Regulations, 20[8................... ००००-०० Thus power of refund of amount along with interest which has been provided under Section व8, with the authority was rightly exercised by it in the interest of justice. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी रेरा प्राधिकरण के पीठ द्वारा नियमावली के अन्तर्गत MCLR + % की वार्षिक ब्याज दर से दिये गये आदेश को उचित एवं सही माना है। अतः TREAT माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिये गये निर्णय से यह अवधारित किया जा सकता है कि राज्य सरकार द्वारा नियमावली के अन्तर्गत निर्धारित की गयी ब्याज दर उचित एवं सही है। ब्याज दर को स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया के MCLR+ प्रतिशत से सम्बद्ध करने के सिद्धान्त को माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा भी स्वीकारा गया है और न्यायोचित ठहराया है। ऐसे में उ0प्र0 राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विकय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित क्र्म्त्न्ग्गक्ज a2
की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLR+I प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से i प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। Tage बिन्दु संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं- आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण की यूनिट्स की समस्त सुविधाओं को अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर 45 दिन के अन्दर ओ.सी. / सी.सी. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें तथा तथा feet में अंकित फोर्स मैज्योर अवधि में ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 24.02.2022 से ओ.सी /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वाराजमा धनराशि पर विलम्ब ब्याज के रूप में MCLR+I प्रतिशत ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की देय धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। aifas-i9 के कारण फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही इस अवधि में शिकायतकर्ता द्वारा यदि अनुबन्धानुसार अथवा कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में आवंटन पत्र /अनुबन्ध पत्र के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की जायेगी।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(2०)0)के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+l प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। (3५५- 42 4. इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं इस आदेश में प्रतिपादित सिद्वान्तों के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। 5. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2076 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। 6. यदि विपक्षी द्वारा इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि रेरा प्राधिकरण के माध्यम से अपने आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। wes (सदस्य) उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण