Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Mr. Rohit Bawa and Mrs. Menika Bawa v. Domus Greens Private Limited
Complaint No. NCR144/03/106173/2023
- Decision date
- 2026-03-28
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ- भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थितः-- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या a | यूनिट | जमा धनराशि wo We oR | अनबंधानुसार वांछित सं० न0 सेल,//लीज | कब्जा दिये अनुतोष की तिथि जाने की | तिथि ॥ « | NCRI44/03/I0673/2023 | रोहित बावा व AP : 50 7,05,08,724 / | 47.08.202 | 34.2.2027 | यूनिट का बावा कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया | गया 8 | बनाम sre tise ore. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह, शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कंथन हैं कि Weel द्वारा संचालित परियोजना ATS DOLCE में sat तालिका में अंकित यूनिट संख्या 8232 बुक करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 4,05,08,724,/ का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर 'यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा 3.2.2024 में उपलब्ध कराया जाना था परन्तु विपक्षी की परियोजना में निर्माण कार्य नहीं हो रहा है और न ही विपक्षी को परियोजना के सापेक्ष ओसी सीसी प्राप्त है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में एग्रीमेंट er सेल,/लीज व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। धाम 54 क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0)
4 विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 0024 07.08.2024 रु0 40,00,000 / रसीद संख्या 3022 27.08.2024 BO 9,893 / रसीद संख्या 0034 02.09.2024 BO 0,302 / रसीद संख्या 0076 23,09.2024 रु0 20,00,000 / रसीद संख्या 0074 23,09.2024 रु0 20,00,000 / रसीद संख्या 0079 24,09.2024 रु0 20,00,000 / रसीद संख्या 0084 27.09.2024 रु0 20,00,000 / रसीद संख्या 0042 27.09.2024 BO 4,52,776 / रसीद संख्या 0400 04.40.2024 0 78,79/ रसीद संख्या 0665 06.03.2024 रु0 42,37,60/ रसीद संख्या 0706 45.03.2024 SO 9,8 / कुल योग : रु0 4,05,08,724/
विपक्षी की ओर से लिखित जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा आवेदन फार्म के माध्यम से विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या 8232 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत wo 4,09,88,740 / थी | विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा गलत तथ्यों के आधार परूष्वर्तमान शिकायत area की गयी है। विपक्षी द्वारा दिनांक 24.04.2023 को 'शिकायत्तकर्ताष्को*प्जेशन फॉर फिट आउट जारी किया गया है तथा विपक्षी द्वारा परियोजना के सापेक्ष ओ.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी की परियोजना«एन:जीः:ठी-के आदेश-से-समय समय पर निर्माण कार्य बाधित होना तथा कोविड-49 महामारी के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को डीम्ड ओ. सी के आधार पर दिनांक 24.04.2023 को फिट आउट पजेशन जारी किया गया था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायत प्री-मैच्योर है क्योंकि आवंटन पत्र के शर्तों का पालन नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को समूचे परियोजना का ओससी प्राप्त हो चुका है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत अर्थदण्ड के साथ निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है? 2. क्या विपक्षी की परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2 था
3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या 4-:_ प्रश्न संख्या-। इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायत प्री-मैच्योर की श्रेणी में है? विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायत प्री-मैच्योर में क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं किया गया है। ॥ पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध एग्रीमेंट फॉर सेल,/लीज दिनांकित 47.08202 का अवलोकन किया जिससे यह विदित हुआ कि विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा 34 दिसम्बर 202। में दिया जाना था और शिकायतकर्ता द्वारा यह शिकायत 04.03.2023 में संस्थित की गयी है और विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2024 में दिया जाना था अर्थात शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा दिये.जाने की. समय अवधि दिसम्बर 2024 के उपरांत मार्च 2023 में यह शिकॉयत्-संस्थित की गयी है जिस कारण विपक्षी का यह तर्क की शिकायत प्री-मैच्योर है संधारणीय नहीं है। Tq प्रश्न संख्या 4 Freaker किया जाता है। _ : निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न We—7 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. टी, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-१9 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में परियोजना में निर्माया कार्य बाधित होने का समय अवधि वर्ष 20:6 से 2022 वर्णित किया गया है।
पत्रावली पर उपलब्ध एग्रीमेंट फॉर सेल दिनांकित 47.08.2024 के अवलोकन से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता द्वारा vat वर्णित समय अवधि के उपरांत अगस्त 3 क््ग्चज्ड्् 2024 में यूनिट बुक करायी गयी थी और विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा दिसम्बर 202 में दिया जाना था जिस कारण विपक्षी को var अवधि का फोर्स मैज्योर का लाभ दिया जाना न्यायोचित नहीं होगा। तद्नुसार प्रश्न संख्या-2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी और विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2024 में दिया जाना था जो अभी तक नहीं दिया गया। विपक्षी द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया कि शिकायतर्ता को डीम्ड ओ.सी के आधार पर दिनांक 24.04.2023 को पजेशन फॉर फिट आउट जारी किया जा चुका है तथा विपक्षी को समूचे परियोजना का sil yeast चुका है।
पत्रावली पर उपलब्ध Wal or अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित sf विपक्षी द्वारा दिनांक 24.04.2023 को शिकायतकर्ता को फिट archaeon) किया गया है। विपक्षी द्वारा ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक 78.0:.20i8 को जारी अधिभोग प्रमाण पत्र की प्रति दाखिल की गयी है जिसके अवलोकन से विदित है कि विपक्षी को परियोजना से सम्बन्धित टॉवर-4, टॉवर-2, टॉवर-3, टॉवर-4, टॉवर-5, टॉवर-6, टॉवर-44 व कम्यूनिटी ब्लॉक का ओ.सी प्राप्त हुआ है जबकि शिकायतकर्ता की यूनिट ATS Dolce में आवंटित है। इससे स्पष्ट है कि विपक्षी को शिकायतकर्ता की यूनिट के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त नहीं हुआ है। जबकि विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा दिसम्बर 202 में दिया जाना था। . vat के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि परियोजना डीम्ड श्रेणी में है तथा विपक्षी द्वारा दिनांक 24.04.2023 को प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में ओ.सी हेतु आवेदन किये जाने का उल्लेख किया गया है। ऐसी स्थिति में BIRT द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 29.05.2024 में उल्लिखित प्राविधानों 4 —— को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा दिनांक 24.04.2023 को अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किये जाने के उपरांत विपक्षी द्वारा सक्षम प्राधिकरण को परियोजना में कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में सूचना प्रेषित किये जाने का कोई साक्ष्य पत्रावित नहीं किया गया है जिस कारण रेरा प्राधिकरण द्वारा जारी एस.ओ.पी दिनांकित 29. 05.2024 के क्रम में विपक्षी की परियोजना डीम्ड की श्रेणी में माना जाना न्यायोचित नहीं होगा।
उपरोक्त वर्णित तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा दिसम्बर 2024 में प्राप्त होना। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना 04 वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है | इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं0 6649-50/208 /'सुपरटेक*लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय.द्वारो अभिनिर्धारित: किया Tae कि:- "the ‘period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per..the admission ‘of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession, " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार site. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। | जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- (=)
"Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment 5 या ब्छछ- due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह we है कि vow wa प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vad धनराशि का उपभोग किया गया है। ह
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2or6e° के अधीन दिनांक 47.020I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय/पटठटा &, लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं| इसमें -संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के We oN प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें were o2(ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. .within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४टा.९+प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय (=) \ है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता (ws \ 3-3 = & 2) 5 —_—=
है। रेरा की धारा-2(2४)0) में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उपरोक्त तथ्यों एव न्याय नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। TIER प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश t. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र / अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.04.2022 से ओ.सी SA प्राप्त होने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर कियेल्जानेः are तिथि. जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि Bo 7,05,08,724 / (60 एक करोड पांच लाख आठ हजार सात सौ 'एक्कीस) पर टा।ए+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अँतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी।
3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2076 की धारा 2(28)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी Mcir+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी Ss Ge x \ उसी दर से गणना की जायेगी। = ZA 4. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20i6 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। <p) hess a. ——SH83.282G (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर