Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Tanuja Arya v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/02/90666/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2024-10-10
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Adjudicating Officer Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
English translation. Machine translation from the Hindi by AI (Claude Haiku), not reviewed. The original order below is the authoritative text.
U.P. Real Estate Regulatory Authority, Regional Office, Gautam Buddh Nagar Bench-3 Order passed under section 34 of the Real Estate (Regulation and Development) Act 2046 Present: [Sto] Deepak Swaroop Saxena, Member | Complaint No. | Complainants | Unit | Amount paid (Rs.) | Possession due | Relief sought | |---|---|---|---|---|---| | [?]844/02/090666/2022 [?] | Tanuja Arya and R.C. Arya | 408 | 33.72[?] | 42 months + 3 months grace period, i.e. November 2047 | Possession of the unit and interest for the delay period | vs. ATS Realty Pvt. Ltd. The complainant has instituted this complaint against the opposite party seeking possession of the unit and interest for the delay period. The Bench, on 30.04.2024, accepted the application for recording the name of the co-allottee, which is recorded in the order sheet. According to the office report dated 09.0.2024, in the present case no party has placed on the file, up to 09402024, any document relating to section 8, Swami Fund or NCLT, or any other document, after the file was reserved for order. In brief, the complainant's case is that unit no. 4095 was booked in the opposite party's project ATS ALLURE, against which the complainant paid the amount shown in the table, Rs. 33,07,253/-, to the opposite party.
The complainant has stated on the complaint page that the opposite party was to complete the project and give possession of the unit in November 2047, but the time given by the opposite party has expired. The opposite party has not yet received O.C./C.C. The complainant booked the unit under the opposite party's project under the Construction Linked Plan, against which an allotment letter was executed. The total value of the unit is Rs. 36,4,250/- [forad], against which Rs. 33,07,253/- has been paid to the opposite party. The opposite party was to give possession of the unit under clause 7.2 of the allotment letter dated 45.02.204, with 42 months and a grace period of 3 months. The complainant has paid about 90 per cent of the amount to the opposite party. The complainant therefore requests possession of the unit along with O.C./C.C. and interest for the delay period, issue of an offer of possession after receipt of O.C./C.C., and compensation for mental harassment of Rs. [?],00,000/-. In support of the complainant's statement, photocopies of the allotment letter and customer ledger have been filed. The details of the amount paid by the complainant to the opposite party are as follows: | Serial | Particulars | Date | Amount paid (Rs.) | |---|---|---|---| | 4 | Customer ledger issued by the opposite party | 24.02.2022 | Rs. 33,07,253/- |
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Sto दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम ado शिकायत संख्या शिकायतकर्ता यूनिट | पत्रावली पर आवंटन की | कब्जा दिये वांछित अनुतोष न0 उपलब्ध रसीद के | तिथि जाने की तिथि अनुसार जमा धनराशि रु0 प्रट844/02/090666/2022. | तनुजा आर्या व. 408 | wo 33.72छ> ऋछछठााए 42 माह + 3 | यूनिट का आर सी आर्या माह अनुग्रह कब्जा व अवधि के साथ | विलम्बित अवधि अर्थात नवम्बर | का ब्याज 2047 दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एटीएस रिएलटी प्रा. लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह परिवाद संस्थित की गयी है। पीठ द्वारा दिनांक 30.04.2024 को सह आवंटी का नाम अंकित किये जाने का प्रार्थना पत्र स्वीकार किया गया जो आदेश पत्र में अंकित है। कार्यालय आख्या दिनांक 09.0.2024 के अनुसार वर्तमान प्रकरण में धारा-8 अथवा स्वामहि फण्ड fers अथवा एनसीएलटी से सम्बन्धित कोई प्रपत्र अथवा अन्य कोई प्रपत्र आदेशार्थ सुरक्षित होने के उपरांत दिनांक 09402024 तक किसी पक्षकार द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध नहीं कराया गया है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में यूनिट संख्या 4095 बुक कराई गई थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को तालिका में अंकित धनराशि wo 33,07,253 / का भुगतान किया गया।
शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत पृष्ठ पर यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण करके यूनिट का कब्जा नवम्बर 2047 में दिया जाना था परन्तु विपक्षी द्वारा दी गयी समयावधि समाप्त हो चुकी है। विपक्षी को अभी तक ओ.सी/सी.सी प्राप्त नहीं हुआ है। शिकायतकर्ता ने विपक्षी की परियोजना =——Ss 4 कन्सट्रक्शन लिंक प्लान के अन्तर्गत यूनिट बुक करायी थी जिसके सापेक्ष आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। यूनिट की कुल मूल्य wo 36,4,250/2 forad सापेक्ष विपक्षी को धनराशि Bo 33,07,253,” का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र दिनांक 45.02.204 के क्लाज 7.2 के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ दिया जाना था। शिकायतकर्ता ने विपक्षी को लगभग 90 प्रतिशत धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। अतः शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा ओ.सी,सी.सी व विलम्बित अवधि ब्याज के साथ, ओसी »सी.सी प्राप्त होने के उपरांत ऑफर ऑफ पजेशन जारी किये जाने व मानसिक उत्पीड़न हेतु क्षतिपूर्ति रु) ,00,000/ दिलाये जाने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र व कस्टमर लेजर की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु) 4 विपक्षी द्वारा जारी कस्टमर लेजर 24.02.2022 रु0 33,07,253/
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्डीगण द्वारा अपील संख्या6 /“2048 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग प्राएलि० में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु दायर किया है। शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि का भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण की भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किये जो निरस्त किये जा चुके है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के ता BQ 2 अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए वचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी को ओ.सी प्राप्त हो चुका है और विपक्षी शिकायतकर्ता को कब्जा देने के लिए तैयार है। उभयपक्ष के तकों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किया गया :- 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 2. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ?
निस्तारण प्रश्न संख्या -: प्रश्न संख्या-॥ इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी की ओर से लिखित जवाब में यह उल्लेख किया गया है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश व कोविड-49 महामारी के कारण निर्माण कार्य बाधित रहा। पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र दिनांकित 45.02 2044 के WER 7.2 में विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर की परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है। फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के wee 54 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- “” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारां पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिशोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा |” —_—_ss 3 माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04--44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:--
‘With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके after उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 3029 7985 4% पारित आदेश दिनांक o9—i2-20:9 4 निम्नलिखित निर्देश दिये a “In the affidavit dated 05.2.2029, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
#42, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (20i8) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQ! category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-tt-20:9 से दिनांक i4-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशदिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च 4 —_— =a
न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04--44-2049 से दिनांक 09--42--2049) एवं 33 दिन(66<2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक साय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य ax प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कूल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) & प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-4 Prana किया जाता है।
निस्तारण प्रश्न संख्या 2 -: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य आवंटन पत्र दिनांक 45.02.2004 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 2047 तक 5 od प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने भिन्न भिन्न पीठों में वाद दायर किये है जो निरस्त हो चुके हैं परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। इसके अतिरिक्त विपक्षी की ओर से यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी को ओःसी प्राप्त हो चुका है परन्तु विपक्षी की ओर से ओ.सी की प्रति दाखिल नहीं की गयी है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को उभयपक्षों द्वारा हस्ताक्षारित आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा नवम्बर 2047 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। इस प्रकार विपक्षी की परियोजना करीब 6 वर्ष से अधिक विलम्बित है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है।
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील to 6649-50 ,// 2048 "gree लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है Pe "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4G) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent ~ Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits . . . " of her own delay in taking possession. — Su उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा | जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्राललि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- i Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete
or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व So के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2oi6 के अधीन दिनांक 47.40.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय /पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) बाल 7
परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(i) + प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +I% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of
receiving the termination notice यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+infesra की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(:४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 Penta किया जाता है | शिकायतकर्ता द्वारा जो क्षतिपूर्ति (compensation) दिलाये जाने सम्बंधी याचना की गयी है। इस सम्बंध में क्षतिपूर्ति (compensation) के प्रकरण पर सुनवाई का क्षेत्राधिकार रेश अधिनियम की धारा 77 के अन्तर्गत न्यायानिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) को है। अत: पीठ द्वारा इस सम्बंध में आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश l. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र / अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं जा >< “>> 8 को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं।
विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.42.2047 से ओ.सी / सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा घनराशि BO 33,07,253,/ (रु0 तैतिस लाख सात हजार दो सौ तिरपन) पर MCLR+] प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 4 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 73029/7985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा 2(za)(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा AIMCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी | इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 9 व करा
विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा Wot | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। —— क.... न. 34.9: 2024 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 30