Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Chetan Ogra v. ATS Realty Private Limited
Complaint No. NCR144/02/90663/2022
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2023-12-07
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-2 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या do यूनिट न0 l. NCR44/02/90660/2022 जूही Foret =| 4493 | Bo 38,6,209 / 2. NCR44/02/90663/2022 3. NCR44/02/90665/2022 4- NCR44/02/90667/2022 L | पवन आय कुमार सिंह 4094 4224 पत्रावली पर आवंटन की | कब्जा वांछित उपलब्ध रसीद के तिथि की तिथि अनुतोष अनुसार जमा धनराशि Go 07.02.204 | 42 माह +3 माह | यूनिट का कब्जा व अनुग्रह अवधि विलम्बित अर्थात नवम्बर अवधि का ब्याज दिलाये am जाने का BO 33,25,424 / रु0 30,78,000 / अनुग्रह अवधि अर्थात अप्रैल 2048 अनुरोध किय गया है। 0808 | रु0 39,09,488/ | 74.07.20:4 | 42 माह +3 माह का कब्जा व विलम्बित अवधि oT ब्याज दिलारे जाने का अनुरोध किय गया है। 43.02.2044 28.06.2048 42 माह +3 माह अनुग्रह अवधि अर्थात नवम्बर 2047 34 209 एटीएस रिएलटी प्रा.लि. बनाम ॥॥ 7 oe यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज fear जाने का अनुरोध किय गया है। यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज fear जाने का अनुरोध किर गया है। शिकायतकर्ता जूही मुंजाल के साथ 03 अन्य शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध वाद योजित किया गया है। इन सभी शिकायतों के तथ्य और साक्ष्य एक समान हैं। यह सभी शिकायतें एक ही परियोजना ATS ALLURE से सम्बन्धित है। अतः एक ही निर्णय से इनका निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या- NCRI44/02/90660/2022 जूही मुंजाल की पत्रावली अग्रणी वाद रहेगा।
प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी के विरुद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना ATS ALLURE में vac तालिका में अंकित यूनिट बुक कराई गई, जिसके सापेक्ष तालिका में अंकित धनराशि विपक्षी को भुगतान किया गया। शिकायतकर्तागण का कहना है कि विपक्षी द्वारा परियोजना पूर्ण कर तालिका में अंकित तिथि तक यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक नहीं दिया गया, जिस कारण शिकायतकर्तागण द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा 34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्तागण द्वारा अपने कथन के समर्थन में आवंटन पत्र, स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट व रसीद की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्तागण द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम |... | कस्टमर लेजर दिनांक भुगतान की गई धनराशि | संख्या (रु0) ——E———— नन्न+--- 4 शिकायतकर्ता- जूही मुंजाल री BO 38,6,209 / P| [Romer es | ओगरा 44.05.208 रु0 39,09,488 / 3 |शिकायतकर्ता-पवन arf य 24.02.2022 BO 33,25,24 / be शिकायतकर्ता-आशुतोष कुमार Re | शिकायतकर्तो-आशुतोष कुमार सिंह | स्सीदों का विवरण | का विवरण् 00273 /48-39 20.06.2048 रु0 2,58,000 / 00070 /48—9 30.05.208 रु0 7,00,000 / AH 00377 / 8—-79 33.ग.208 BO 25,30,36 / |i 00378 / 48—9 3.फ.208 रु० 4,89,539 / कुल य 30,78,000 / 2 ee oe
विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति दाखिल करते हुए यह अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता ने यह आरोप लगाया है कि विपक्षी ने अनुबंधात्मक दायित्व (Contractual Obligation) का उल्लंघन किया है जिस कारण इसका निस्तारण किये जाने का क्षेत्राधिकार सिविल कोर्ट का है। इस प्रकार वाद को निरस्त किया जाए। शिकायतकर्ता द्वारा लगाये गये आरोप का निस्तारण करने का क्षेत्राधिकार प्राधिकरण को नहीं है, जिसके समर्थन में हरियाणा अपीलीय न्यायालय चण्ड़ीगण द्वारा अपील संख्या6 /20i8 समीर महावर बनाम एमजी हाउसिंग mofo में पारित निर्णय का संदर्भ अंकित किया है। वर्तमान प्रकरण शिकायतकर्ता ने गलत तथ्यों पर विपक्षी को परेशान किये जाने हेतु वाद दायर किया है। शिकायतकर्ता समय से धनराशि भी भुगतान नहीं किया है। शिकायतकर्ता ने प्राधिकरण के भिन्न-भिन्न पीठों में वाद दायर किया जो निरस्त किया जा चुका है। विपक्षी शिकायतकर्ता को समय अवधि के अन्दर यूनिट का कब्जा दिये जाने के लिए बचनबद्ध था परन्तु फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना में निर्माण कार्य बाधित हुआ है। यह कहना गलत है कि विपक्षी की ओर से विलम्ब किया गया है बल्कि शिकायतकर्ता की ओर से समय से धनराशि भुगतान नहीं किया गया है। यह भी उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा समय से धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। परियोजना पूर्ण है शिकायतकर्ता आकर कब्जा प्राप्त कर सकता है। विपक्षी द्वारा अपने लिखित आपत्ति के समर्थन में अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 व अन्य प्रपत्रों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न प्रश्न विचरित किये जाते हैं :-
4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलमिबत हुई है? 2. क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या-4 प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। 3 — Sa विपक्षी की ओर से लिखित आपत्ति में यह उल्लेख किया गया है कि एन.जी. Aq HAS-i9 महामारी के कारण निर्माण कार्य बंद था, जिस कारण परियोजना विलम्बित हुई है। उक्त के संदर्भ में यह उल्लेख करना आवश्यक है कि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-940,//2047 “बिक्रम चटर्जी एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य“ के निर्णय के पृष्ठ संख्या-234 एवं TER 440 में फोर्स मैज्योर को निम्नवत् परिभाषित किया है:- "Force majeure shall mean a case of war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature." उपरोक्त फोर्स मैज्योर के परिभाषा से यह स्पष्ट है कि फोर्स मैज्योर वह स्थिति है, जिसमें युद्ध, बाढ़, सूखा, आग, तूफान, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदा आई हो, प्रश्नगत प्रकरण में afasi9 महामारी के अतिरिक्त अन्य ऐसी कोई परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है जिस कारण विपक्षी इस आधार पर लाभ पाने का अधिकारी नहीं है।
कोविड-49 HER के सम्बंध में vouo रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06. 2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तदनुसार प्रश्न संख्या-4 Peake किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्तागण को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? अग्रणी शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त vad यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य a 4 आवंटन पत्र दिनांक 07.02.2044 को निष्पादित हुआ। आवंटन पत्र के अनुसार यूनिट का कब्जा 42 माह तथा 3 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात नवम्बर 2047 तक प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी का कहना है कि फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित हुई है। विपक्षी का यह भी कथन है कि शिकायतकर्ता ने fra fist पीठों में वाद दायर किया है जो निरस्त हो चुका है परन्तु विपक्षी द्वारा इस सम्बंध में पीठ द्वारा पारित ऐसे किसी आदेश की प्रति दाखिल नहीं की गई है। वहीं दूसरी ओर विपक्षी का यह भी तर्क है कि परियोजना पूर्ण है और विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है।
पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र के अनुसार अग्रणी शिकायतकर्ता को नवम्बर .2047 तक यूनिट का कब्जा प्राप्त होना था तथा अन्य var शेष शिकायतकर्तागण को तालिका में अंकित तिथि तक कब्जा प्राप्त होना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध विपक्षी को यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण से प्राप्त अधिभोग प्रमाण पत्र दिनांक 30.03.2022 में यह अंकित है कि प्राधिकरण द्वारा ae एटीएस रियल्टी ग्रालि को yeas Wen पी-7. टी.एस-०02 सेक्टर 22 डी ys में जो UF माउच्च न्यायालय के स्थयनादेश से ग्रभावित है अथवा जो श्ूयि wer के पक्ष में पूर्ण,/विधिक रूप से हस्ताक्षारित नहीं है; उस पर PAT जारी नहीं किया जा रहा है परन्तु विपक्षी द्वारा अप्रैल 2022 में प्रस्तुत लिखित आपत्ति के अंतिम प्रस्तर में यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी को अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त है और शिकायतकर्ता धनराशि भुगतान करके कब्जा प्राप्त कर सकता है। उपरोक्त तथ्य से स्पष्ट है कि वर्तमान प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा निर्गत कोई err Gtay) आदेश नहीं है तथा विपक्षी अपने जवाब में उल्लिखित कर रहे है कि परियोजना कब्जे के लिए तैयार है और शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा ले सकता है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 6 चर्षों से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है।
जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,//208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल/"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि — "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If
the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be 6 paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि wed द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय /पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement
in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.3(i) 4 निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+i9feera की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस 7 पर विपक्षी भी MCLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। अतः उक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्तागण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने के अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-2 Peake किया जाता है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है। आदेश . विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को आवंटित यूनिट अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर 34 जनवरी 2024 तक A/a सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री करायें।
2. विपक्षी, अग्रणी शिकायतकर्ता को दिनांक 02.2.20:7 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि wo 38,46,209/ (रु० अड्तीस लाख सौलह हजार दो सौ नौ)पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। उक्त तालिका में अंकित क्रम संख्या 2 से 4 तक शिकायतकर्तागण के प्रकरणों में आवंटन पत्र,/अनुबन्ध के अनुरूप तालिका में अंकित कब्जा दिये जाने की तिथि के उपरांत से प्रत्येक शिकायतकर्ता के सम्मुख अंकित धनराशि पर उपरोकतानुसार ब्याज की गणना की जायेगी। 3. विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20I6 की धारा 2(००)()के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा —=s 8 डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी |/0,7२+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश की एक-एक प्रति सम्बन्धित पत्रावलियों पर रखी जाये।
इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 206 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्तागण रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ee een SGy2. 2023 (डा०दीपक स्वरूप WRN) सदस्य उ0प्र0 भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर