Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Omkar Prasad Singh v. APV Realty Limited
Complaint No. NCR144/02/126244/2025
- Decision date
- 2026-05-21
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित : डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य | क्रम | शिकायत संख्या ककायतकर्ता | यूनिट न0 | जमा धनराशि vo | आवंटन की | अनुबंधानुसार | वांछित अनुतोष सं0 | तिथि कब्जा दिये जाने की तिथि T. एटरा4402/26244/2025 | ओमकार एज563 | wo 24,54,647/ | 03.2.205 | 3.2.208 व | यूनिट का प्रसाद सिंह व 06 माह अर्थात | कब्जा व ऋचा कुमारी जून 20i9 विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एपीवी रिएलटी लिमिटेड शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Ajnara Homes (Phase-2 Tower N & 0) में यूनिट संख्या N-I503 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Go 24,54,644/— का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या Vt-503 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत Go 49,26,270/थी। विपक्षी द्वारा अनुबंध के अनुसार 32.2.20i8 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना ar) विपक्षी द्वारा बिना ओ.सी/सी.सी के मांग पत्र ईमेल के माध्यम से प्रेषित किया गया है। विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किये जाने हेतु सूचित किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् eH —_—s_S क्रम | आज | दिनांक भुगतान की गई धनराशि संख्या (रु0) ' शिकायतकर्ता-ओमकार विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या .5453 23.40.2045 रु0 ,00,000 / रसीद संख्या .55626 6.04.206 रु0 9,63,7:3 / रसीद संख्या 55725 20.04.2046 %O -624/ रसीद संख्या ..53048 30.44.2045 रु० 2,45,000/ रसीद संख्या .53047 30.44.2046 रु0 4,75,307 / कुल योग : BO 24,54,644 / विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या va—t503 आवंटित की गई थी जिसके सापेक्ष दिनांक 03.42.20i5 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अनुबंध के अनुसार दिसम्बर 2048 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता की मूल शिकायत यह प्रतीत होती है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा, पंजीकृत नहीं किया जा रहा है। विपक्षी का कहना है कि पेंमेंट प्लान के अनुसार मांग पत्र संविदात्मक और व्यावसायिक रूप से है जो शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को कब्जा के समय भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि परियोजना भौतिक रूप से सभी महत्वपूर्ण पहलुओं से पूर्ण, रहने योग्य और कब्जा के लिए उपयुक्त है। विपक्षी को टॉवरू--एन से सम्बन्धित वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा यूपीरेरा कार्यालय आदेश दिनांक 46.09.204 9 के क्रम में यह कहा गया है कि कब्जे की प्रमाण पत्र की प्रकिया प्रशासनिक देरी के
कारण आवंटियों को नुकसान हो रहा है। यदि विपक्षी द्वारा चार प्रमाण पत्र के साथ ओ.सी /सी.सी हेतु आवेदन प्रस्तुत करता है तो सक्षम प्राधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह आवेदन की कम समय सीमा में जांच कर कामियों की सूचना विपक्षी को प्रदान करें और निर्धारित अवधि के भीतर कामियों की सूचना नहीं wey fon) जाती है तो आवेदन को कब्जे,/पंजीकरण को सक्षम करने के सीमित उददेश्य wy] ae लिए स्वीकृत / are माना जाता है। ताकि आवंटियों को प्राधिकारी की ओर से होने वाली देरी से कोई नुकसान न हो। इस प्रकार विपक्षी द्वारा परियोजना को डीम्ड की श्रेणी में माने जाने का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी के अभिलेखों के अनुसार शिकायतकर्ता ने कुल राशि का एक हिस्सा का ही भुगतान किया है और पेमेंट प्लान के अनुसार अवशेष देय धनराशि का 2 ——S भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण में कोई निरस्तीकरण कार्यवाही शुरु नहीं की गयी है। शिकायतकर्ता अवशेष देय धनराशि का भुगतान करें और कब्जा प्राप्त कर सकता है। विपक्षी द्वारा इस बात से इन्कार किया गया है कि कोई अवैध या अनुबंध से इतर धनराशि की मांग की गयी है। सभी मांगें अनुबंध के अनुसार की गयी है। शिकायतकर्ता किसी प्रकार के जुर्माने /वापसी is प्रतिशत ब्याज पाने का हकदार नहीं है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर निरस्त किये जाने व शिकायतकर्ता को सभी बकाया राशि और कब्जे सम्बन्धित शुल्क निश्चित समय के अन्दर भुगताने करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षो के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते है :-
, क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या विपक्षी की परियोजना डीम्ड की श्रेणी में है अथवा नहीं? 3. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 4. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न Heart :- प्रश्न संख्या-4 इस तथ्य पर विरचित है कि gar wT आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं | होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 / 2024 “मैसर्स ee प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स प्रा0 लि0 बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य“ में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- ७54, From the scheme of the Act 20I6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are 3 aa affected. At the same time, it will apply after getting the on-
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- एशराग्र4गर/4273 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न Be निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी की परियोजना डीम्ड की. श्रेणी में है अथवा नहीं?
विपक्षी की ओर से दाखिल लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने के उपरांत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है जिस कारण रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 46.09.2049 के क्रम में विपक्षी की परियोजना डीम्ड की श्रेणी में है क्योंकि रेरा कार्यालय आदेश के अनुसार यदि sitet हेतु आवेदन किये जाने के उपरांत ~~) > प्राधिकरण द्वारा आपत्ति नहीं लगायी जाती है तो परियोजना को SS की श्रेणी में | eo माना जाएगा। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी को विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र व YR प्रमाण पत्र प्राप्त है और विपक्षी द्वारा दो प्रमाण पत्रों के साथ दिनांक 26.06.209 को ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है जिसका साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध है। यहां यह उल्लेखनीय है कि रेरा एसओ.पी के अनुसार विपक्षी 4 —sS 04 वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ ओ.सी हेतु आवेदन किये जाने का है परन्तु वर्तमान प्रकरण पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार विपक्षी द्वारा 02 प्रमाण पत्रों के आधार पर ही ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है जो रेरा प्राविधानों के विपरीत है। उक्त के अतिरिक्त ऐसी स्थिति में उ.प्ररेरा द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 29.05.2024 में उल्लिखित प्राविधानों के अनुसार अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किये जाने के उपरांत यदि प्राधिकरण द्वारा निर्धारित समय अवधि के अन्दर
अधिभोग प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता है तो विपक्षी द्वारा सक्षम प्राधिकरण को परियोजना में कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में समय अवधि समाप्त होने के उपरांत सूचना प्रेषित करे परन्तु विपक्षी सक्षम प्राधिकरण को अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु कोई अनुस्मरण प्रेषित किये जाने का साक्ष्य पत्रावित नहीं किया गया है जिस कारण रेरा प्राधिकरण द्वारा जारी एस.ओ.पी दिनांकित 29.05.2024 के क्रम में विपक्षी की परियोजना Ses की श्रेणी में माना जाना न्यायोचित नहीं होगा। तदनुसार प्रश्न संख्या 02 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है » प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर wie में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised 0202) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।" माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 3029 / 4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04—44-209 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:-
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as 5 SS बट: well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: i3029/7985 F पारित आदेश दिनांक 09-72-20:9 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05,2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"22. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am), The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on Construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more, "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, Conditions for raising construction be scrupulously followed,”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04—74-20:9 से दिनांक t4-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण arf पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश,दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 09--2--2049) एवं 33 दिन(66+2) (दिनांक t0-42-209 से दिनांक 44-02-2020 तक dia 06 बजे से Ke is 2) सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। BAY ४५ 6, तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी ४७ 5 Se 2 तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न्यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त wifts—r9 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.032020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त 6
अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी wifas—9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-03 Frente किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 4-: प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 03.2205 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 30.2.20I8 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात जून 2049 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी की परियोजना तैयार है शिकायतकर्ता अनुबंधानुसार देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते है। उक्त के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा दिनांक 09.04.2026 को सुनवाई के दौरान यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त नहीं की गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा
शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा जून 20I9 में दिया जाना था परन्तु शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से परियोजना के सापेक्ष ओसी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 67 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस 7 ना ननकः कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है | इस सम्बन्ध में सिविल अपील सं0 6849-50 /208 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है fr "the period of Interest should close on April 20l6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent - Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20I6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार site / Ma. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Heron रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section | 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is EEX unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his ५०४ business as a developer on account of Suspension or revocation of the iG registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in. case. the allottee. wishes. to. withdraw from the project, without prejudice in this behalf’ including compensation. If the allottee does Not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the po: The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received Possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till Such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable, " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 77.4020I8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय »#पटटा के लिए करार) नियमावली 208 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये flea /veer विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में uted के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) 8 ———d परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. w ithin forty-five days यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ध८ा,२+।प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी MCLRH प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तदनुसार प्रश्न संख्या-04 Preah किया जाता है।
उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता है। आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। > विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.209 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा घनराशि BO 24,54,644/ पर ४2,₹+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय 9 ———s
धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 03 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 73029 // 4985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2006 की धारा 2(28)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी ॥टा,९++ प्रतिशत की ब्याज दर से. ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। 4... इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 5. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। 6. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। Lo (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर