Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Alankar Kumar v. APV Realty Limited
Complaint No. NCR144/02/125886/2025
- Decision date
- 2026-05-26
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित : Slo दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 | जमा धनराशि vo | आवंटन की | अनुबंधानुसार | वांछित अनुतोष tio तिथि कब्जा दिये जाने की तिथि _| T. | NCRI44/02/I25886/2025 | अलंकार N-2502 | रु0 2,46,848/ | 04.2.205 | 3.2.208 व | यूनिट का कुमार व 06 माह अर्थात | कब्जा व शिवांगी जून 2049 विलम्बित शिवम अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम एपीवी रिएलटी लिमिटेड शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का>कंथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना Ajnara Homes (Phase-2 Tower N & 0) 4 यूनिट संख्या N-i502 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता. द्वारा विपक्षी को धनराशि Go 24,46,848 //-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या एन-4502 बुक करायी गयी थी। आवंटित यूनिट की कुल कीमत wo 43,73,422/ थी। विपक्षी द्वारा अनुबंध के अनुसार 34.42.20i8 तथा 06 माह aque अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा बिना ओ.सी/सी.सी के मांग पत्र ईमेल के माध्यम से प्रेषित किया गया है। विपक्षी द्वारा यूनिट निरस्त किये जाने हेतु सूचित किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन पत्र व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी है। विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् हैः- CSE क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई घनराशि संख्या (रु0) 4 विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या .57754 23.40.2045 रु० ,00,000 / रसीद संख्या ..55627 6.04.206 BO 7,8,02/ स्टेटमेंट ऑफ एकाउंट 49.05.2026 BO 3,28,827/ कुल योग : YO 22,46,848 / विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया कि शिकायतकर्ता को यूनिट संख्या wa-502 आवंटित की गई थी जिसके सापेक्ष
दिनांक 04.42.2045 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ है। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अनुबंध के अनुसार दिसम्बर 20:8 तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता की मूल शिकायत यह प्रतीत होती है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा/पंजीकृत नहीं किया जा रहा है। विपक्षी का कहना है कि पेंमेंट प्लान के अनुसार मांग पत्र संविदात्मक और व्यावसायिक रूप से है जो शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को कब्जा के समय भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि परियोजना भौतिक रूप से सभी महत्वपूर्ण पहलुओं'से पूर्ण, रहने योग्य और कब्जा के लिए उपयुक्त है। विपक्षी ol caw -से «सम्बन्धित वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो चुका है। विपक्षी द्वारा यूपीरेरा कार्यालय आदेश दिनांक 46.09.2049 के क्रम में यह कहा गया है.कि. gal की. प्रमाण पत्र..की..प्रकिया प्रशासनिक देरी के कारण आवंटियों को नुकसान हो रहा है। यदि विपक्षी द्वारा चार प्रमाण पत्र के साथ ओ.सी / MAM हेतु आवेदन प्रस्तुत करता है तो सक्षम प्राधिकारी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह आवेदन की कम समय सीमा में जांच कर कामियों की सूचना विपक्षी को प्रदान करें और निर्धारित अवधि के भीतर कामियों की सूचना नहीं दी जाती है तो आवेदन को कब्जे /पंजीकरण को सक्षम करने के सीमित उददेश्य के लिए स्वीकृत /मान्य माना जाता है। ताकि आवंटियों को प्राधिकारी की ओर से होने वाली देरी से कोई नुकसान न हो। इस प्रकार विपक्षी द्वारा परियोजना को डीम्ड की श्रेणी में माने जाने का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी के अभिलेखों के अनुसार शिकायतकर्ता ने कुल राशि का एक हिस्सा का ही भुगतान किया है और पेमेंट प्लान के अनुसार अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया है कि विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण में कोई निरस्तीकरण कार्यवाही शुरु नहीं की गयी है।
2 =>. शिकायतकर्ता अवशेष देय धनराशि का भुगतान करें और कब्जा प्राप्त कर सकता है। विपक्षी द्वारा इस बात से इन्कार किया गया है कि कोई अवैध या अनुबंध से इतर धनराशि की मांग की गयी है। सभी मांगें अनुबंध के अनुसार की गयी है। शिकायतकर्ता किसी प्रकार के जुर्माने,/ वापसी i8 प्रतिशत ब्याज पाने का हकदार नहीं है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान शिकायत उपरोक्त वर्णित तथ्यों के आधार पर निरस्त किये जाने व शिकायतकर्ता को सभी बकाया राशि और कब्जे सम्बन्धित शुल्क निश्चित समय के अन्दर भुगताने करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षो के तर्कों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते है :- 4. क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते हैं ? तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट निरस्त किया, जाना वैधानिक है अथवा नहीं? 3. क्या विपक्षी की परियोजना'डीम्ड की श्रेणी में है अथवा नहीं? 4. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 5. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं-विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होंगी ? निस्तारण प्रश्न We :- प्रश्न eT इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745-6749 ,// 2024 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स yo feo बनाम
उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54. From the scheme of the Act 20I6, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on- a going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206."
उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी प्रभाव रहेगा। यह भी रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेरा अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर एवं आवंटी के मध्य अनुबन्ध निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- एशराग्रर&शर०4273 है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान.लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न We निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 -:_ प्रश्न संख्या 2 इंस आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नही? विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह ce प्रस्तुत किया गया कि विपक्षी द्वारा दिनांक 2.0.2022 को शिकायतकर्ता को Go 22,29,27.72/का भुगतान किये जाने अनुस्मरण पत्र व मांग पत्र प्रेषित किये गये परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया। तत्पश्चात विपक्षी द्वारा दिनांक 2440. 2025 को शिकायतकर्ता द्वारा देय धनराशि का भुगतान न किये जाने के कारण अनुबंधानुसार यूनिट निरस्त कर दी गयी।
तत्पश्चात शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी द्वारा दिनांक 24.:0.2025 को निरस्त की गयी यूनिट को पुर्नस्थापित किये जाने हेतु प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। पत्रावली के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी द्वारा दिनांक 24.40.2025 को प्रश्नगत यूनिट निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किया गया जिसमें विपक्षी द्वारा ब्याज सहित धनराशि GO 32,63,352/ की मांग की गयी। ब्ब्नन्-श्श्र.. 4 पत्रावली पर उपलब्ध आवंटन पत्र दिनांक 04.:220i5 के अवलोकन से विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा werd यूनिट पेमेंट प्लान 50 : 50 के अन्तर्गत बुक करायी गयी थी जिसमें बुकिंग के समय bo 4,43,647/ तथा बुकिंग की तिथि से 45 दिन के उपरांत Go 6,54,470/ का भुगतान किया जाना था तथा शेष देय धनराशि GO 24,40,987 ,/ का पजेशन के समय भुगतान किया जाना था। पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित है कि प्रश्नगत यूनिट की बेसिक प्राइस BO 42,09,075 / है जिसके सापेक्ष शिकायतर्ता द्वारा पेमेंट प्लान के अनुसार बुकिंग के समय तथा बुकिंग की तिथि के उपरांत से 45 दिन में Ga vo 24,46,848 // का भुगतान किया गया है और शेष देय धनराशि Go 24,40,987/ का पजेशन के समय भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा ओसीसी.सी के साथ कब्जा प्रस्ताव भेजे जाने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि विपक्षी द्वारा ओसी/सी.सी के साथ कब्जा का प्रस्ताव मय मांग पत्र प्रेषित किया गया और शिकायतकर्ता द्वाराल््मांग पत्र की अनदेखी की गयी हो। अतः विपक्षी द्वारा उठाया Tangs तर्क"किःशिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि की अदायगी नहीं की जा रही है, संधारणीय नहीं है।
इसके अतिरिक्त सामान्यतः यदि शिकायतकर्ता द्वारा समय से देय धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता हैं तो विपक्षी की जिम्मेंदारी बनती है कि वह vat के सम्बन्ध में भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,पदट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 की धारा 9.2 एवं धारा 9.3 के अनुसार कार्यवाही करें। धारा 9.2 एवं धारा 9.3 में यह प्राविधानित है कि :- धारा 9.2 In case of Default by Promoter under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +4% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice: 5 —_—=—
Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid, by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due. धारा 9.3 The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events: I In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) -consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +2% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit;
ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the money paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination.
उक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्तता द्वारा यूनिटे*के सापेक्ष बकाया धनराशि का भुगतान न किये जाने पर मांग पत्र, अनुस्मरण पत्र तथा प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किये जाने का प्राविधात्त है परन्तु gerd शिकायत में विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्त किये जाने हेतु अनुस्मरण पत्र व प्री-निरस्तीकरण पत्र प्रेषित किये जाने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया जो उपरोक्त विधि व्यवस्था के विपरीत है। इसके अतिरिक्त उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार यदि विपक्षी द्वारा वैधानिक रूप से शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त की जाती है तो विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को उनके द्वारा यूनिट के सापेक्ष जमा की गयी धनराशि वापस किये जाने का प्राविधान है जोकि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को वापस नहीं की गयी। यहां यह भी स्पष्ट किया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है कि विपक्षी द्वारा अनुबंधानुसार शिकायतकर्ता को परियोजना पूर्ण कर यूनिट का कब्जा जून 2049 में उपलब्ध कराया जाना था परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि विपक्षी के पक्ष पर शिकायतकर्ता को समय सीमा के अन्दर यूनिट का कब्जा न दिये जाने का दोष है। ब्््“>ऊघ 6 उपरोक्त प्राविधानों में यह स्पष्ट उल्लिखित है कि यदि प्रमोटर स्वयं दोषी है तो वह उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त नहीं कर सकता है और न ही उपरोक्त प्राविधानों के अनुसार लाभ ले सकता है।
इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में तर्क दिया गया है कि निरस्तीकरण की कार्य प्रारम्भ नहीं की गयी है और शिकायतकर्ता अवशेष देय धनराशि का भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकता है। उक्त के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा दिनांक 09.04.2026 को सुनवाई के दौरान यह भी तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त नहीं की गयी है। जबकि उपरोक्त के होते हुए भी विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण के विचाराधीन रहने के दौरान यूनिट को निरस्त किया जाना किसी भी रूप में विधि सम्मत् नहीं है। अतः उक्त तथ्यों के आधार पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की प्रश्नगत यूनिट को दिनांक 24.0.2025 को निरस्त किया, जाना वैधानिक नहीं है। तद्नुसार प्रश्न संख्या 2 Prater किया जाता है| निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी की परियोजना. डीम्ड की श्रेणी में है अथवा नहीं? विपक्षी की ओर से दाखिल लिंखिंत॑ जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा वांछित अनापत्त्ति प्रमाण पत्र प्राप्त होने के उपरांत सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी हेतु आवेदन किया जा चुका है जिस कारण रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 46.09.209 & mA में विपक्षी की परियोजना डीम्ड की श्रेणी में है क्योंकि रेरा कार्यालय आदेश के अनुसार यदि ओ.सी हेतु आवेदन किये जाने के उपरांत प्राधिकरण द्वारा आपत्ति नहीं लगायी जाती है तो परियोजना को Ses की श्रेणी में माना जाएगा।
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से विदित है कि विपक्षी को विद्युत सुरक्षा प्रमाण पत्र व स्ट्रक्चरल प्रमाण पत्र प्राप्त है और विपक्षी द्वारा दो प्रमाण पत्रों के साथ दिनांक i 25.06.20i9 को ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है जिसका साक्ष्य पत्रावली पर fg: Ca) उपलब्ध है। यहां यह उल्लेखनीय है कि रेरा एस.ओ.पी के अनुसार विपक्षी 7 04 वांछित अनापत्ति प्रमाण पत्र के साथ ओ.सी हेतु आवेदन किये जाने का है परन्तु वर्तमान प्रकरण पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार विपक्षी द्वारा 02 प्रमाण पत्रों के आधार पर ही ओ.सी हेतु आवेदन किया गया है जो रेरा प्राविधानों के विपरीत है। vat के अतिरिक्त ऐसी स्थिति में wae द्वारा जारी कार्यालय आदेश दिनांकित 29.05.2024 में उल्लिखित प्राविधानों के अनुसार अधिभोग प्रमाण पत्र हेतु आवेदन किये जाने के उपरांत यदि प्राधिकरण द्वारा निर्धारित समय अवधि के अन्दर अधिभोग प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाता है तो विपक्षी द्वारा सक्षम प्राधिकरण को परियोजना में कब्जा दिये जाने के सम्बन्ध में समय अवधि समाप्त होने के उपरांत सूचना प्रेषित करे परन्तु विपक्षी सक्षम प्राधिकरण को अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु कोई अनुस्मरण प्रेषित किये जाने का साक्ष्य पत्रावित नहीं किया गया है जिस कारण रेरा प्राधिकरण द्वारा जारी एस.ओ.पी दिनांकित 29.05.2024 के क्रम में विपक्षी की परियोजना डीम्ड की श्रेणी Aaa जाना न्यायोचित नहीं होगा। तद्नुसार प्रश्न संख्या 03 निस्तारित किया जाताः है। निस्तारण प्रश्न संख्या 4-: प्रश्न संख्या-4 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई?
फोर्स मैज्योर के अधीन कब्जा उपलब्ध कराये जाने में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024 के प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :-- * प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा |” माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 /4985, “M.C. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04--44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as 8 —————SS well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029 /985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये हैः- “In the affidavit dated 05.2.209, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"42. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed. ”
माननीय सर्वोच्च peared द्वारा (दिनांक 04-7:-20i9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्मण<कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय..द्वारा पारित आंदेश,दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनाक 04-4 4-209 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 fea(66+2) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02-2020 तक Ha 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि var अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों @ लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा aap दिनांक. 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण hele परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त | अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत रखते हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी aifas—i9 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 5-: प्रश्न संख्या-5 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त var यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 04.:2.20i5 को आवंटन पत्र निष्पादित्॒. हुआ जिसके अनुसार यूनिट का कब्जा 30.42.20i8 तथा 06 माह अनुग्रह अवधिःके साथ अर्थात जून 2049 में प्राप्त होना था परन्तु अभी तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा लिखित जवाब में यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी की परियोजना तैयार है शिकायतकर्ता अनुबंधानुसारँ देय sak का भुगतान करके यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते है। vat के अतिरिक्त विपक्षी द्वारा दिनांक 09.04.2026 को सुनवाई के दौरान यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त नहीं की गयी है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अनुबंधानुसार यूनिट का कब्जा जून 2049 में दिया जाना था परन्तु शिकायतकर्ता को अभी तक यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी की ओर से परियोजना के सापेक्ष ओ.सी प्राप्त होने का कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया गया है।
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में 07 वर्ष से अधिक का विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है जिस 0 ee कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील wo 6649-50 /20:8 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल"'में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 20I6 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206, The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. " उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज tan का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि“बनाम, यूनियन ऑफ इंडिया”के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि ४-
Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as.a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the ,allottees;.in. case. the» allottee»wishes»to»withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व Gat के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.0.208 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,पटटा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय ,/पटटा ar =
परिभाषित है, जिसमें were o2(ii) ¥ प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice? यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ॥४८॥९+]प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तद्नुसार-प्रश्न संख्या-05 निस्तारित किया जाता है। है। उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता आदेश
विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को आवंटित यूनिट को Greta करते हुए तथा शिकायतकर्ता से यूनिट के सापेक्ष अवशेष देय धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं | विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.07.2049 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि BO 24,46,848,/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि अंतिम भुगतान की जाने वाली धनराशि में 2 ee
समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 04 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029/985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा। विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 20:6 की धारा 2(2a\(i) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को*दिया, जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा Aci प्रतिशत की ब्याज दर से. ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु chart Spat विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा why | आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। ©) (डा०दीपक स्वरूप WR) सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 43