Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Sameer Sharma v. Intellect Projects Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/02/124569/2025
- Decision date
- 2026-05-02
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 3 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित:- डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या | | यूनिट न0 | जमा धनराशि bo | आवंटन पत्र | अनुबंधानुसार वांछित सं0 मै की तिथि कब्जा दिये अनुतोष जाने की तिथि ; . | NCRI44/02/I24569/2025 | समीर शर्मा | डी-602 | Bo 39,47,395/ | 22.07.2074 | 30 माह तथा | यूनिट का 06 माह कब्जा व अनुग्रह अवधि | विलम्बित के साथ अवधि का अर्थात ब्याज जनवरी 20:7 | दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। बनाम इन्टलेक्ट प्रोजेक्टस, प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा "विपक्षी के विरूंद्ध-यूनिट ar कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु यह शिकायत संस्थित की गयी है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना VICTORYONE CENTRAL) afer wear Se02" gH करायी गयी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि Go 39,7,395 //-का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा निर्धारित अवधि 22.04.2047 में दिये जाने का आश्वासन दिया गया था। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को पेमेंट प्लान के अनुसार यूनिट के सापेक्ष धनराशि vo 39,77,395,/ का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी की परियोजना 93 माह विलम्बित है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा विपक्षी की परियोजना से सम्बन्धित भूमि निरस्त कर दी गयी थी। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त सूचना के आधार पर ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा विपक्षी से हुए आवंटन पत्र को निरस्त कर दिया गया है जिस कारण यह प्रश्न नहीं उठता है कि विपक्षी को ओ.सीसी.सी प्राप्त होगा। इससे स्पष्ट है कि के == 2 विपक्षी की परियोजना में निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, आवंटन पत्र, आरटीआई रिपोर्ट प्रतिउत्तर व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गई धनराशि का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि | संख्या (रु0) | विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 3448 24.05.2045 रु0 ,3,66 / रसीद संख्या 3447 24.05.2045 BO 4/3,647 /
रसीद संख्या 3354 22.04.205 BO 2,65,05 / रसीद संख्या 2969 05.02.2045 BO 2.65,05 / रसीद संख्या 2620 28.44.2044 BO 2,65,404 / रसीद संख्या 2423 30.40.2044 BO 2,65,404 / रसीद संख्या 2323 24.09.2044 BO 2,65,04 / रसीद संख्या 2424 08.08.2044 BO 2,92,330 / रसीद संख्या 4880 22.05.2044 BO 2,36,404 / रसीद संख्या 4370 47.04.2044 रु0 3,78,722 / रसीद संख्या 00903 04.09.2043 80 3,78,77 / रसीद PAT 00724 29.05.2043 BO 3,78,746 / रसीद संख्या 00649 02.05.2043 BO 3,78,694 / रसीद संख्या 25.04.204 रु0 3,2,027 / कल योग : | 80 39,7,395/ विपक्षी द्वारा लिखित जवाब दाखिल करते हुए उल्लिखित किया गया है'कि शिकायतकर्ता द्वारा अकारण व तथ्यों को छिपाते हुए शिकायत संस्थित की गयी है जिस कारण शिकायत निरस्त होने योग्य है क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 08. 44.2022 को शिकायत संख्या एनसीआर444 /4 /404994 / 2022 समीर शर्मा बनाम इन्टलेक्ट प्रोजेक्टस orf. afer की गयी थी जिस पर पीठ द्वारा दिनांक 29.0.2025 को आदेश पारित किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा तथ्यों को छिपाया गया है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एस.पी चेंगलवाराया नायडू बनाम जगन्नाथ व अन्य में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। इसी क्रम में नेशनल कमीशन द्वारा टाटा मोर्टस बनाम बाबा हजूर महाराज में पारित आदेश का भी उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया
है कि शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर44 /44 / 404994 / 2022 समीर शर्मा बनाम इन्टेलेक्ट प्रोजेक्ट प्रालि. योजित की गयी थी जिसमें पीठ द्वारा दिनांक 29.04.2025 को आदेश पारित किया गया जिस कारण शिकायत पोषणीय न होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है। शिकायतकर्ता द्वारा वर्तमान प्रकरण यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि के ब्याज हेतु योजित की गयी है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गंया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना विक्ट्रीवन Wea में यूनिट संख्या डी-602 बुक करायी गयी थी जिसके सम्बन्ध में उभयपक्षों के मध्य दिनांक 22.04.2044 में आवंटन पत्र निष्पादित हुआ। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के अनुसार 30 माह तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ यूनिट का कब्जा दिया जाना था। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के Foret 45(ए) व 45(सी) का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा परियोजना विलम्बित होने का कारण दर्शाया गया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय व एनजीटी के आदेश से समय समय पर निर्माण कार्य प्रतिबंधित रहा। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा एनजीटी व माननीय उच्च्तम न््यायाल द्वारा आदेशों का उल्लेख fears | विपक्षी द्वारा यंह. उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता आवंटन पत्र के अनुसार देय धनराशि का भुगतान करने में असफल रहा है। इस Wea विपक्षी. द्वारा रेग अधिनियम की धारा 496) व 9(7) का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा वर्तमान प्रकरण को भ्रामक व निराधार होने के कारण निरस्त किया जाए तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय, एनजीटी व अपीलीय अधिकरण के आदेशों के क्रम में विपक्षी को विलम्ब ब्याज के भुगतान से छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के लिखित जवाब पर प्रतिउत्तर दाखिल करते हुए विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब के प्रत्येक प्रस्तर का खण्डन करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की परियोजना में यूनिट संख्या डी-602 बुक करायी गयी थी जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा रु0 39,7,395 // का भुगतान किया गया है। विपक्षी निर्धारित अवधि 22.04.2047 में यूनिट का कब्जा देने में असफल रहा है। विपक्षी यूनिट का कब्जा, विलम्बित अवधि के ब्याज व रजिस्ट्री कराने में असफल रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि आरटीआई रिपोर्ट के अनुसार विपक्षी सम्बन्धित प्राधिकरण से 3 SS
ओ.सी /सी.सी प्राप्त करने में असफल रहा है। विपक्षी की परियोजना तकनीकी wee निरीक्षण आख्या के अनुसार पूर्ण नहीं है। अतः शिकायततकर्ता द्वारा ओ. सी /सी.के साथ यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपफक्षों के तर्कों को सुना गया। उभयपक्षों के अभिवचनों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये जाते हैं :- 4. क्या प्रश्नगत शिकायत पोषणीय है अथवा नही है? 2. क्या परियोजना फोर्स मैज्योर के कारण विलम्बित हुई है? 3. क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण प्रश्न संख्या — प्रश्न संख्या ge आशय का विरचित किया गया है कि क्या प्रश्नगत शिकायत पोषणीय है अथवा नहीं? विपक्षी की ओर से यह तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायत पोषणीय नहीं है क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर444 /44 / 40994 / 2022 समीर शर्मा बनाम इन्टेलेक्ट-प्रोजेक्ट-प्रालि. योजित की गयी थी जिसमें पीठ द्वारा दिनांक 29.04.2025 को आदेश पारित किया गया जिस कारण शिकायत पोषणीय न होने के कारण निरस्त किये जाने योग्य है। + पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों का अवलोकन किया गया। शिकायत संख्या
एनीसआर(44 / 44 / 404994 / 2022 में पीठ द्वारा दिनांक 29.04.2025 को पारित आदेश का अवलोकन किया गया जिससे यह विदित है कि var शिकायत जमा धनराशि मय ब्याज दिलाये जाने हेतु योजित की गयी थी परन्तु माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील नम्बर 5785 ,/2049 ईरियो ग्रेस Racca प्रा.लि. बनाम अभिषेक wat एवं आदि में पारित आदेश में यह उल्लिखित है कि विपक्षी की परियोजना पूर्ण होने के उपरांत ओ.सी प्राप्त हो गया हो तो आवंटी कब्जा लेने के लिए obligated है। उक्त प्रकरण में विपक्षी को दिनांक 44.06.2048 को आंशिक अधिभोग प्रमाण पत्र जारी था तथा विपक्षी द्वारा दिनांक 25.06.2048 को कब्जा प्रस्ताव भी जारी किया जा चुका था जिस कारण माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता की उक्त शिकायत में अंकित 4 <= Rees अनुतोष को निरस्त किया गया था और अब शिकायतकर्ता की प्रश्नगत शिकायत कब्जा व विलम्बित अवधि के ब्याज दिलाये जाने हेतु है। अतः उपरोक्त वर्णित तथ्यों के कारण शिकायतकर्ता की शिकायत पोषणीय है। तद्नुसार वाद प्रश्न संख्या-4 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 2-: प्रश्न संख्या-2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या परियोजना फोर्स मैज्योर इवेन्टस होने के कारण विलम्बित हुई? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विरचित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा परियाजना विलम्बित होने का कारण माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्माण कार्य पर लगायी गयी रोक के आदेश, एनजीटी द्वारा जारी आदेश व कोविड-49 महामारी को बताया गया है। शिकायतकर्ता ने यूनिट का कब्जा व विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है।
फोर्स मैज्योर के अधीन Hoar sree “कराये जाने, में हुए विलम्ब के सम्बन्ध में एस ओ पी दिनांकित 08.08.2024. प्रस्तर 5.4 में यह प्राविधानित किया गया है कि :- ” प्रमोटर द्वारा बायर बिल्डर एग्रीमेंट में कब्जा देने की आश्वासित तिथि (Promised Date) से (फोर्स मैज्योर, माननीय एन.जी.टी, माननीय उच्च न्यायालय अथवा माननीय उच्चतम न्यायालय. द्वारा पारित आदेश के कारण बाधित अवधि को घटाते हुए) पूर्णता प्रमाण पत्र अथवा अधिभोग प्रमाण पत्र प्राप्त होने अथवा ऑफर ऑफ पजेशन की तिथि (जो भी बाद में हो ) को विलम्ब की अवधि माना जाएगा।”' माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 43029 / 985, “M.C. Mehta Versus Union of India” 4 पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” 5 Ss इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029//4985 में पारित आदेश दिनांक 09-42--2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “in the affidavit dated 05.2.2029, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under:-
"2. That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (208) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, i conditions for raising construction be scrupulously followed.”
माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक o4-7:-20i9 से दिनांक 44-02-2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा“पारित आदेश;दिनांक 09-42-2049 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04-44-209 से दिनांक 09-42-2049) एवं 33 fes(66+2) (दिनांक 40-4252049"से“दिनांक*4450252020 तक साँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। अतः यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनो अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है और इस अवधि में कुल-35 दिन+ 33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है। इसके अतिरिक्त कोविड-49 महामारी के सम्बंध में उ0प्र0 रेरा अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनाक 25.03.2020 से 6 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त 6 Sa अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्टस् के कारण मानी जायेगी। इसको gerd रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
उपरोक्त तथ्यों व माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को दृष्टिगत Tae हुये 68 दिन के अतिरिक्त विपक्षी कोविड-49 के कारण फोर्स मैज्योर का लाभ पाने का अधिकारी है। TEAR प्रश्न संख्या-2 Peake किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या 3-: प्रश्न संख्या-3 इस आशय का विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी? शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी द्वारा संचालित परियोजना में यूनिट बुक करायी गयी थी, जिसके उपरान्त उक्त यूनिट के सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांक 22.04.2004 को आवंटन पत्र निष्पादित हुंआ। विपक्षी द्वारा आवंटन पत्र के अनुसार 30 माह तथा 06 Ae अनुग्रह अवधि के -साथे५22.04.2047 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था Ug. set तक शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा प्राप्त नहीं हुआ है। विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित जवाब में फोर्स मैज्योर के कारण परियोजना विलम्बित होने का उल्लेख किया गया है। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि शिकायतकर्तागण व विपक्षी के मध्य क्रमशः दिनांक 22.04.2004 को आवंटन पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को 30 माह तथा 06 माह अनुग्रह अवधि के साथ अर्थात 22.0:.20:7 में यूनिट का कब्जा दिया जाना था परन्तु अभी तक विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराये जाने का कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है।
पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह भी विदित है कि विपक्षी को यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा दिनांक ॥4.06.2048 को जारी अधिभोग प्रमाण पत्र की प्रति, ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा 48.03. 2049 को फ्लेट्स की त्रिपक्षीय सब लीज डीड कराये जाने की अनुमति की प्रति व 7 बच्चा हब, विपक्षी द्वारा दिनांक 43.06.208 को जारी ऑफर ऑफ पजेशन की प्रतियां पत्रावली पर उपलब्ध है। - उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा यूनिट का कब्जा दिये जाने में विलम्ब किया गया है। चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के अनुरोध किये गये है जिस कारण शिकायतकर्ता को यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित होगा। जहाँ तक किस अवधि तक का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील tio 6649-50 ,/ 2048 "सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल''में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 206. The Respondent — Purchaser:could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession... The Respondent’— Purchaser, ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession. "
उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी./सी.सी. . अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो-भी -बाद-में हो लक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, माननीय बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“के वाद में अभिनिर्धारित किया गया है कि —- "Section 8(I)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. " अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व केता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 206 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विकय,/पटटा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विकय,/पटटा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर o2(ii) 4 प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है किः- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the ७. apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.3() में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को ४८,ए+ [प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई धनराशि अतिदेय है, तो उस पर विपक्षी भी McLR+H प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त कर सकता है। रेरा की धारा-2(2४)0)में भी यही ब्याज की परिभाषा दी गयी है। उपरोक्त तथ्यों एवं नजीरों के आधार पर शिकायतकर्ता यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। तद्नुसार प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। है।
उपरोक्त प्रश्नों का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता आदेश विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के भीतर शिकायतकर्ता से अवशेष धनराशि प्राप्त कर, शिकायतकर्ता की यूनिट आवंटन पत्र/अनुबंध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी /सी.सी सहित यूनिट का कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। विपक्षी शिकायतकर्ता को दिनांक 04.02.2047 से दिनांक 30.04.20i7 तक अनुबंधानुसार ब्याज का भुगतान करना सुनिश्चित करें। उसके उपरांत विपक्षी दिनांक 04.05.2047 से ओ.सी /सी.सी अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि जो भी बाद में हो तक शिकायतकर्तागण द्वारा जमा धनराशि रु0 39,7,395,/ पर MCLR+ प्रतिशत ब्यांज..अदा करना सुनिश्चित करें। ब्याज की यह धनराशि-अंतिम भुगतान की-जाने वाली धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की/धनराशि/देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की .जायेंगी।. ब्याज...की. धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर नियमानुसार शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। निस्तारण प्रश्न संख्या 2 के अनुसार फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए (माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या 43029,//985 के अनुसार ) 68 दिन तथा दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। साथ ही यदि शिकायतकर्ता का कोई अतिदेय (Over Dues) है, तो उस पर भी इस अवधि का ब्याज देय न होगा।.
विपक्षी को यह निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2006 की धारा 2(००)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान 0 —___—_=—_ पर शिकायतकर्ता द्वारा भी ॥टाए+१ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। . इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन 45 दिन में नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का कियान्वयन करा सकेगें। ह आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। er 359. 04, 290285 (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) संदस्य उ.प्र:भू>सम्पदा«विनियाम॒क प्राधिकरंण गौतमबुद्धनगर व4 *