Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Shri Krishna Mishra v. Yamuna Builtech Private Limited
Complaint No. NCR144/02/117680/2024
- Decision date
- 2026-05-02
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 1 Gautam Budh Nagar
Source: UP RERA order
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Judgment text
E-Court उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण क्षेत्रीय कार्यालय, एच-469, गामा-2, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर-204308. सुनवाई पीठ-04 (पूर्व में पीठ--04-ए) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत धारा-34 सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी: श्री संजय आर. भूसरेड्डी, मा. अध्यक्ष शिकायत संख्या: NCRI44/02/I7680/2024 श्री कृष्णा मिश्रा एवं परीक्षित मिश्रा बनाम यमुना बिल्डटेक प्रा. लि. निर्णय शिकायतकर्ता का परिवाद अन्तिम बहस हेतु वीडियो washer के माध्यम से दिनांक 29-40-2025 को प्रस्तुत किया गया। पुकार पर शिकायतकर्ता wa उपस्थित हुए तथा विपक्षी की ओर से विद्वान अधिवक्ता सुश्री आशु चौधरी उपस्थित हुए। इस पर पीठ द्वारा उभय पक्षों के तर्कों को विस्तार से सुनने के उपरान्त, पत्रावली आदेश हेतु दिनांक 29-40-2025 को ही सुरक्षित की गयी। प्रस्तुत मूल प्रार्थना-पत्र में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के अनुतोष की प्रार्थना के साथ विपक्षी के विरूद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायत योजित की 9 गई है। संक्षेप में शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा दिनांक 07-7:-2020 को विपक्षी की परियोजना "Migsun Vilaasa" गौतमबुद्धनगर में यूनिट संख्या: Sun-04-707 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत &72,8,730/- है और शिकायतकर्ता द्वारा रू.74,84,730,//- की धनराशि का भुगतान किया गया है। शिकायतकर्ता का यह भी कहना Page | of 4 E-Court है कि विपक्षी द्वारा एन.ओ.सी. जारी नहीं किया जा रहा है और ब्याज के रूप मे अतिरिक्त धनराशि की माँग की जा रही है।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा विस्तृत लिखित शिकायत-पत्र तिथि रहित तथा अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 08-02-2025 दाखिल करते हुए मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति की है और विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में किये गये समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए कहा गया है कि उभय पक्षों द्वारा दिनांक o7—t—2020 को निष्पादित अनुबन्ध-पत्र के अनुसार पेमेन्ट प्लान 20:30 का था, जिसके अन्तर्गत शिकायतकर्ता द्वारा समयानुसार अधिकांश धनराशि का भुगतान कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि विपक्षी ने अनुबन्ध के अनुसार आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराये, जिसके कारण शिकायतकर्ता, प्रक्रिया पूर्ण नहीं कर सके। इसके बाद भी विपक्षी द्वारा विलम्ब के आधार पर शिकायतकर्ता से अनुचित ब्याज लगभग ¥.6,82,60/— की माँग की जा रही है। विपक्षी कम्पनी द्वारा शिकायतकर्ता को सूचित किया गया कि शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर युक्त अनुबन्ध-पत्र खो गया है, जिसके क्रम में शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट, दिनांक 25-42-2022 को थाने में दर्ज कराई, जिसकी प्रति संलग्न है, तदोपरान्त विपक्षी द्वारा अनुबन्ध-पत्र शिकायतकर्ता को दिनांक 20-02-2023 को प्रेषित किया गया, जिस पर विपक्षी को को शिकायतकर्ता ने रु.52,22,963 // -- की धनराशि का भुगतान किया। शिकायतकर्ता ने अपनी समस्त जमा धनराशि का भुगतान समय पर एवं पेमेन्ट प्लान के अनुसार किया है। शिकायतकर्ता को आश्वासित स्कीम का लाभ विपक्षी द्वारा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा gerd यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा विपक्षी द्वारा अविधिक रूप से अधिरोपित शुल्क को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में स्वागत पत्र, दिनांक i2-4-2020 की प्रति, आवंटन-पत्र / अनुबन्ध, दिनांक 23-4:-2020 की प्रति, जमा धनराशि की wile, रेन्टल स्कीम लेटर, स्कीम कन्फर्मेशन लेटर, ई-मेल संवाद, प्रथम सूचना रिपोर्ट, दिनांक 25--2-2022 की प्रति, कस्टमर Gor, आदि अभिलेखों छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। प्रकरण में विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 33-04-2025 दाखिल करते हुए कहा गया कि प्रश्नगत शिकायत पोषणीय न होने के कारण खारिज किये जाने योग्य है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत शिकायत में उठाये गये दावे असत्य एवं मनगढंत है। शिकायतकर्ता द्वारा “डाउन We प्लान” के अनतर्गत उनकी परियोजना "Migsun Vilaasa" में यूनिट संख्या: 5घ्ा-0-0707 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत लागू कर सहित &7I,8,730/— थी। उक्त यूनिट के सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य आवंटन-पत्र / अनुबन्ध, दिनांक 23-7-2020 को निष्पादित एवं हस्ताक्षरित कराया गया, Page 2 of l4 E-Court | प्रस्तर-4(0) के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, 40 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड सहित अर्थात् सितम्बर, 2024 तक समस्त देय धनराशि का भुगतान किये जाने के अधीन दिया जाना था। प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत है, जिस कारण रेरा पंजीयन नं.: UPRERAPRJI66I2 है |
परियोजना में दिल्ली-एन.सी.आर. में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से विभिन्न अवसरों पर निर्माण गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, क्योंकि दिल्ली-एन.सी.आर. में किसानों द्वारा ss जलाये जाने, निर्माण कार्य, उद्योग आदि के कारण प्रदूषण बढ़ गया था और केवल दिनांक 44-02-2020 तक पूरी तरह बहाल होने के बाद मा. सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “Cat मेहता बनाम भारत सरकार” के साथ कई अन्य हस्तक्षेप प्रार्थना-पत्र के माध्यम से प्रतिबन्ध हटा दिया गया। परियोजना में जब एक बार निर्माण कार्य प्रभावित हो जाता है अथवा बन्द हो जाता है, तो निर्माण कार्य को समान गति प्राप्त करने में आमतौर पर 02 से 03 माह लग जाते हैं, क्योंकि यह सब निर्माण सामग्री, लोहा, श्रम बलों आदि की उपलब्धता जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, इसलिए स्थल पर कोई कार्य नहीं हुआ। वर्ष, 20:9-2020 में दिनांक 26-0-2049 से दिनांक 30-40-2049 तक 05 दिन, दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 44-02—-2020 तक 402 दिन की अवधि सम्मिलित है। कोविड-49 के कारण भी प्रश्नगत परियोजना विलम्बित हुई है। उपर्युक्त कारण विपक्षी के नियंत्रण के बाहर थे और यह फोर्स मैज्योर के अन्तर्गत आते है। इसलिए विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के मद में लाभ दिये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा रेरा कार्यालय आदेश, दिनांक i6-09-209 के अनुसार चारों एन.ओ.सी. यथा फायर एन.ओ.सी., लिफ्ट एन.ओ.सी., इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. dear eRe एन.ओ.सी. सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त की जा चुकी हैं और उक्त एन.ओ.सी. के साथ प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र, दिनांक 33-40-2022 के माध्यम से आवेदन किया गया और शिकायतकर्ता को Ss ओ.सी./ सी.सी. के आधार पर ऑफर ऑफ फिट आऊट पत्र, दिनांक 07-42-2022 को माँग-पत्र के साथ प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त पत्रों के अनुपालन में अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त नहीं किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा डाउन पेमेन्ट प्लान के अन्तर्गत 40 प्रतिशत धनराशि का भुगतान बुकिंग के समय तथा 90 प्रतिशत धनराशि का भुगतान ऑफर ऑफ पोजेशन के समय किया जाना था, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को माँग-पत्र प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा io माह के विलम्ब के बाद अवशेष धनराशि का भुगतान किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता, विलम्ब ब्याज %6,82,640/— का भुगतान करने हेतु उत्तरदायी हैं, जिसका भुगतान आज तक शिकायतकर्ता द्वारा नहीं किया Page 3 of l4 E-Court
= है। विपक्षी द्वारा vem परियोजना के सम्बन्ध में ओसो ea, दिनांक 24-04-2024 को प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख किया गया है और उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करते हुए, कब्जे की औपचारिकतायें पूर्ण कर, werd यूनिट का कब्जा तथा रजिस्ट्री की कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में कस्टमर लेजर, ओ.सी. / सी.सी., दिनांक 24-04-2024 की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी हैं। मैंने उभय पक्षों के cof ar विस्तार से सुना तथा पत्रावली पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य एवं अभिलेखों का eRe परिशीलन किया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दुओं पर विचार किया:- a क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई? यदि हाँ तो प्रभाव? 2... कया शिकायततकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 बिन्दु संख्या: 00, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या Force Majeure Events होने के कारण विपक्षी की परियोजना विलम्बित हुई है? यदि हाँ तो प्रभाव? यह बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है।
प्रकरण में विपक्षी द्वारा कहा गया है कि परियोजना में दिल्ली-एन.सी.आर. में पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश से विभिन्न अवसरों पर निर्माण गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, क्योंकि दिल्ली-एन.सी.आर. में किसानों द्वारा ds जलाये जाने, निर्माण कार्य, उद्योग आदि के कारण प्रदूषण बढ़ गया था और केवल दिनांक 44-02-2020 तक पूरी तरह बहाल होने & बाद मा. सर्वोच्च न्यायालय ने सिविल अपील संख्या: 43029 / 4985, “एम सी मेहता बनाम भारत सरकार” के साथ कई अन्य हस्तक्षेप प्रार्थना-पत्र के माध्यम से प्रतिबन्ध हटा दिया गया। परियोजना में जब एक बार निर्माण कार्य प्रभावित हो जाता है अथवा बन्द हो जाता है, तो निर्माण कार्य को समान गति प्राप्त करने में आमतौर पर 02 से 03 माह लग जाते हैं, क्योंकि यह सब निर्माण सामग्री, लोहा, श्रम बलों आदि की उपलब्धता जैसे विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, इसलिए स्थल पर कोई कार्य नहीं हुआ। वर्ष, 2079-2020 # दिनांक 26-40-2049 से दिनांक 30-40-2049 तक 05 दिन, दिनांक 04-44-2049 से दिनांक 44--02-2020 तक 402 दिन की अवधि सम्मिलित है। AAS-i9 के कारण भी Page 4 of 4 E-Court = परियोजना विलम्बित हुई है। उपर्युक्त कारण विपक्षी के नियंत्रण के बाहर थे और यह फोर्स मैज्योर के अन्तर्गत आते है। इसलिए विपक्षी द्वारा फोर्स मैज्योर के मद में लाभ दिये जाने का अनुरोध किया गया है। मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या: 3029 / 4985, “४.८. Mehta Versus Union of India” में पारित आदेश, दिनांक 04-44-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:-
“With respect to demolition and construction activities we direct that no demolition and construction activities take place in Delhi and NCR region. In case it is found that such activity is done, the local administration as well as the municipal authorities including the Zonal Commissioners, Deputy Zonal Commissioners shall be personally held responsible for all such activities. They have to act in furtherance of the Court’s order and to ensure that no such activity takes place.” इसके अतिरिक्त उपर्युक्त सिविल अपील संख्या: 43029,/985 में पारित आदेश दिनांक 09-42-2049 में निम्नलिखित निर्देश दिये है:- “In the affidavit dated 05. /2, 2079, the Central Pollution Control Board (CPCB) has stated as under: -
#42, That it is respectfully submitted that it is normally experienced that in month of December depending upon Climatic Condition the AQI category varies. As a matter of fact, last year (2076) 8 days in the month of December were in severe AQI category. Presently the situation not being severe, CPCB is of considered opinion that partial ban could be in place of construction activities in as much as no construction should be permitted during night time (6.00 pm to 6.00 am). The ban imposed could be partially lifted by permitting activities during day time (6.00 am to 6.00 pm), subject to the criteria stipulated in GRAP, wherein strict emforcement of rules for dust control in construction activities and closure of non-compliant sites is mandated in moderate to poor AQI category and further a bank on construction activities may be imposed by EPCA if Ambient AIR quality levels persist in severe+/emergency category for 48 hours or more. "” Hence, the ban is relaxed in terms of the recommendations made by Central Pollution Control Board (CPCB), as quoted above. However, conditions for raising construction be scrupulously followed.” पर्यावरणीय आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा (दिनांक 04-44-2049 से दिनांक
44-02--2020 तक) की अवधि के लिए निर्माण कार्य पर रोक लगायी गयी है, जिसमें मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश, दिनांक 09-42-209 में पूर्ण प्रतिबन्ध को हटाते हुए, आंशिक प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 35 दिन (दिनांक 04--4-2049 से दिनांक 09--42--2049) एवं 33 दिन (6652) (दिनांक 40-42-2049 से दिनांक 44-02--2020 तक साँय 06 बजे से सुबह 06 बजे तक) की अवधि के लिए निर्माण Page 5 of 4 E-Court = पर प्रतिबन्ध लगाया गया। इन तथ्यों के आलोक में यह स्पष्ट है कि उक्त अवधि विपक्षी के नियन्त्रण से बाहर थी तथा इसके लिए विपक्षी को उत्तरदायी ठहराना न््यायोचित नहीं होगा। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना उचित होगा कि उपर्युक्त वर्णित दोनों अवधियों के लिए परियोजना को पूर्ण होने में हुए विलम्ब के लिए विपक्षी जिम्मेदार नहीं है। अतः: इस अवधि में कूुल-35 दिन +33 दिन अर्थात् 68 दिन निर्माण कार्य प्रभावित रहने के कारण, विपक्षी इसका लाभ पाने का अधिकारी है तथा 68 दिन की अवधि के लिए ब्याज की गणना नहीं की जायेगी। इसके अतिरिक्त समस्त सुसंगत तथ्यों पर विचारोपरान्त उ.प्र. Rr अथॉरिटी द्वारा दिनांक o6—o6—2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु, दिनाक 25-03-2020 से 06 माह की अतिरिक्त अवधि अर्थात् दिनांक 25-09-2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अतिरिक्त अवधि फोर्स मैज्योर इवेन्ट्स के कारण मानी जायेगी। अतः उपर्युक्त के दृष्टिगत दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
तद्नुसार बिन्दु संख्या: 04 Pena किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या: 02 बिन्दु संख्या: 02, इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है? प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अवगत कराया गया है कि विपक्षी द्वारा एन.ओ.सी. जारी नहीं किया जा रहा है और ब्याज के रूप मे अतिरिक्त धनराशि की मांग की जा रही है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा विस्तृत लिखित शिकायत-पत्र तिथि रहित तथा अपना प्रत्युत्तर, दिनांक 08-02--2025 दाखिल करते हुए मूल शिकायत में किये गये तथ्यों की पुनरावृत्ति की है और विपक्षी द्वारा दाखिल आपत्ति-पत्र में किये गये समस्त तथ्यों एवं अभिकथनों का पूर्ण रूप से खण्डन करते हुए कहा गया है कि उभय पक्षों द्वारा दिनांक o7—:-2020 को निष्पादित अनुबन्ध-पत्र के अनुसार पेमेन्ट प्लान 20:80 का था, जिसके अन्तर्गत शिकायतकर्ता द्वारा समयानुसार अधिकांश धनराशि का भुगतान कर दिया गया। शिकायतकर्ता द्वारा कहा गया कि विपक्षी ने अनुबन्ध के अनुसार आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराये, जिसके कारण शिकायतकर्ता, प्रक्रिया पूर्ण नहीं कर सके। इसके Page 6 of 4
भी विपक्षी द्वारा विलम्ब के आधार पर शिकायतकर्ता से अनुचित ब्याज लगभग %6,82,640/— की माँग की जा रही है। विपक्षी कम्पनी द्वारा शिकायतकर्ता को सूचित किया गया कि शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर युक्त अनुबन्ध-पत्र खो गया है, जिसके क्रम में शिकायतकर्ता द्वारा प्रथम सूचना रिपोर्ट, दिनांक 25-42-2022 को थाने में दर्ज कराई, जिसकी प्रति संलग्न है, तदोपरान्त विपक्षी द्वारा अनुबन्ध-पत्र शिकायतकर्ता को दिनांक 20-02-2023 को प्रेषित किया गया, जिस पर विपक्षी को को शिकायतकर्ता ने ¥.52,22,963/— की धनराशि का भुगतान fear) शिकायतकर्ता ने अपनी समस्त जमा धनराशि का भुगतान समय पर एवं Ve प्लान के अनुसार किया है। शिकायतकर्ता को आश्वासित स्कीम का लाभ विपक्षी द्वारा नहीं दिया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्ननत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने तथा विपक्षी द्वारा अविधिक रूप से अधिरोपित शुल्क को निरस्त किये जाने का अनुरोध किया गया है।
इस पर विपक्षी की ओर से अपना लिखित आपत्ति-पत्र, दिनांक 34-04-2025 दाखिल करते हुए कहा गया कि प्रश्नगत शिकायत पोषणीय न होने के कारण खारिज किये जाने योग्य है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा yea शिकायत में उठाये गये दावे असत्य एवं मनगढंत है। शिकायतकर्ता द्वारा “डाउन पेमेन्ट प्लान” के अन्तर्गत उनकी परियोजना "Migsun Vilaasa" में यूनिट संख्या: Sun-0-0707 बुक करायी गयी थी, जिसकी कुल कीमत लागू कर सहित B.77,8,730/— थी। उक्त यूनिट के सम्बन्ध में पक्षकारों के मध्य आवंटन-पत्र / अनुबन्ध, दिनांक 23-7-2020 को निष्पादित एवं हस्ताक्षरित कराया गया, जिसके Rad) के अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा, 40 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड सहित अर्थात् सितम्बर, 2024 तक समस्त देय धनराशि का भुगतान किये जाने के अधीन दिया जाना था। प्रश्नगत परियोजना रेरा में पंजीकृत है, जिस कारण रेरा पंजीयन नं.: UPRERAPRII662 है|
विपक्षी का यह भी कहना है कि उनके द्वारा रेरा कार्यालय आदेश, दिनांक i6-09-209 के अनुसार चारों एन.ओ.सी. यथा फायर एन.ओ.सी., लिफ्ट एन.ओ.सी., इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. तथा स्ट्रक्चरल एन.ओ.सी. सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त की जा चुकी हैं और उक्त एन.ओ.सी. के साथ प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र, दिनांक 3:-0-2022 के माध्यम से आवेदन किया गया और शिकायतकर्ता को डीम्ड ओ.सी.,/ सी.सी. के आधार पर ऑफर ऑफ फिट आऊट पत्र, दिनांक 07-42-2022 को माँग-पत्र के साथ प्रेषित किया गया, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा उक्त पत्रों के अनुपालन में अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान कर, नो-ड्यूज सर्टिफिकेट प्राप्त करते हुए, प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा प्राप्त नहीं किया जा रहा है। शिकायतकर्ता द्वारा sted Tre प्लान के अन्तर्गत io प्रतिशत धनराशि का भुगतान बुकिंग के समय तथा ७० प्रतिशत धनराशि का भुगतान ऑफर ऑफ पोजेशन के समय किया जाना था, जिसके अनुसार विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को मॉँग-पत्र प्रेषित Page 7 of 4 E-Court
= गये, परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा io माह के विलम्ब के बाद अवशेष घनराशि का भुगतान किया गया है, जिस कारण शिकायतकर्ता, विलम्ब ब्याज Ge926I0/— का भुगतान करने हेतु उत्तरदायी हैं, जिसका भुगतान आज तक शिकायतकर्ता द्वारा नहीं किया गया है। विपक्षी द्वारा प्रश्नगंत परियोजना के सम्बन्ध में ith dah, दिनांक 24-04-2024 को प्राप्त किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में विभिन्न तथ्यों एवं अभिकथनों का उल्लेख किया गया है और उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष धनराशि का भुगतान करते हुए, कब्जे की औपचारिकतायें पूर्ण कर, wera यूनिट का कब्जा तथा रजिस्ट्री की कार्यवाही किये जाने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है। भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की aer—t9a(t) ¥ प्राविधान है किः- "Section 46. Return of Amount and Compensation- (4) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building: - (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason,
he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed." इस प्रकार आवंटी को यह अधिकार है कि यदि उन्हें We के अनुरूप कब्जा नही मिलता है, तो वह अपनी जमा धनराशि को ब्याज सहित वापिस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज तथा रजिस्ट्री निष्पादित कराये जाने का अनुरोध किया गया है। प्रकरण में पत्रावली पर उपलब्ध उभय पक्षों के मध्य निष्पादित एवं हस्ताक्षरित आवंटन-पत्र / अनुबन्ध, दिनांक 23-:-2020 & WeR-4(a) के अवलोकन से यह विदित है कि विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा, अनुबन्ध की तिथि Page 8 of 4 E-Court से 40 माह + 06 माह ग्रेस पीरियड सहित अर्थात् दिनांक 23-09-2024 तक दिया जाना था।
प्रकरण में विपक्षी / प्रमोटर द्वारा यह तर्क, कथन प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा रेरा कार्यालय आदेश, दिनांक 46--09--2049 के अनुसार चारों एन.ओ.सी. यथा फायर एन.ओ.सी., लिफ्ट एन.ओ.सी., इलेक्ट्रिकल एन.ओ.सी. तथा स्ट्रक्चरल एन.ओ.सी. सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त की जा चुकी हैं और vat एन.ओ.सी. के साथ प्रश्नगत परियोजना के सम्बन्ध में सक्षम प्राधिकरण के समक्ष ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु आवेदन-पत्र, दिनांक 3i-0-2022 के माध्यम से आवेदन किया गया और शिकायतकर्ता को डीम्ड ओ.सी./ सी.सी. के आधार पर ऑफर ऑफ फिट आऊट पत्र, दिनांक 07-42--2022 को मॉँग-पत्र के साथ प्रेषित किया गया, परन्तु विपक्षी /प्रमोटर द्वारा उपर्युक्त अपने तर्क /कथन के समर्थन में कोई प्रमाणीय साक्ष्य यथा ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने हेतु प्रस्तुत आवेदन-पत्र एवं ऑफर ऑफ फिट आऊट पत्र को रेरा Gree पेज पर अपलोड एवं भौतिक प्रतियाँ उपलब्ध नहीं करायी गयी है। अतः साक्ष्यों के अभाव में विपक्षी का उपर्युक्त तर्क // कथन स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है। चूंकि विपक्षी द्वारा प्रश्नगत परियोजना,टावर के सम्बन्ध में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण से ओ.सी. / सी.सी., दिनांक 24-04-2024 को प्राप्त किया जा चुका है, परन्तु oad ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त करने के बाद, विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को कोई विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किया गया हो, ऐसा कोई साक्ष्य पत्रावली पर उपलब्ध नहीं है। इस सम्बन्ध में सिविल अपील संख्या: 6649-50 / 2048, “M/s. Supertech Ltd. Versus Rajni Goyal” में मा. उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि:-
"the period of Interest should close on April 2076 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant —Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 2076. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 2046 with respect to delay in handing over possession. The Respondent - Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपर्युक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि के लिए शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी है। अतः समस्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों के आलोक में शिकायतकर्ता को विपक्षी दिनांक 23-09-2024 में 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक 04-42-2024 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि 24-04-2024 अथवा ओ.सी./ Miah. सहित पुनः विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये Page 9 of 4 E-Court जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि के लिए विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना उचित होगा। जहाँ तक ब्याज देयता का प्रश्न है, मा. बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा “Neelkamal Realtors Suburban Pyt. Ltd. Versus Union of India & Ors.” में अभिनिर्धारित किया गया है किः-
"Section 78(7)(0) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable. The interest is merely compensation for use of money." अतः उपर्युक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर एवं आवंटी के बीच किये गये अनुबन्ध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहाँ तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 20:6 के अधीन दिनांक 42-40-2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 अधिसूचित की गयी हैं, जिसमें देय ब्याज दर भारतीय स्टेट बैंक द्वारा निर्धारित #८7#+7 प्रतिशत निर्धारित की गयी है, जिसे मा. उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा रिट याचिका संख्या: सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित व विधिपूर्ण माना गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय / पट्टा के लिए करार) नियमावली, 20:8 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर McLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से ofa ज्यादा है, उचित एवं सही है। तदनुसार बिन्दु संख्या: 02 निस्तारित किया जाता है। Page 0 of 4 = अतिरिक्त विपक्षी / प्रमोटर को जो धनराशि शिकायतकर्ता को अदा की जानी है, उसमें से आयकर अधिनियम का आधार लेकर टी.डी.एस. की कटौती नहीं कर सकता है, क्योंकि उक्त धनराशि को डिक्रिटल (0८०७००/ धनराशि के रूप में रेरा द्वारा शिकायतकर्ता के हक में प्रदान किया गया है। इस सम्बन्ध में मा. उच्च न्यायालय, हिमाचल प्रदेश द्वारा सीआर्ई टी. बनाम हिमाचल प्रदेश आवास विकास परिषद 2077 SCC OnLine HP 5204 के मामले में निम्नवत् आदेश पारित किये गये:- “The following interesting questions arise for decision in the present case:
2. Whether, on the facts and in the circumstances of the case, the hon'ble Tribunal was right in holding that the interest paid or credited by the Housing Board to its allottees (payees) was of capital nature and thus not subject to deduction of tax at source when as per law it is the recipient (payee) who can decide if a particular receipt (interest in this case) is of revenue or capital in nature ?" 9. While taking this view we are relying upon the judgment of the apex court in Bikram Singh v. Land Acquisition Collector (7997) 224 ITR 55 (SC). In the case before the apex court, the question was whether the interest paid to the persons whose land had been compulsorily acquired under sections 28 and 37 of the Land Acquisition Act was a revenue receipt or a capital receipt. The apex court held that though it was termed as interest on delayed payment, it was actually a revenue receipt and, therefore, the provisions of section 7944 of the Income tax Act would have no application. It would be pertinent to mention that the National Consumer Disputes Redressal Commission in Revision Petition No. 2244 of 7999 titled as Ghaziabad Development Authority v. Dr. N. K.Gupta (2002) 258 ITR 337 (NCDRC) under similar situation held that when the State Commission directed payment of interest to the allottees for delayed completion of flats the same did not fall within the purview of section 7944 of the Income-tax Act.
408, In the present case, the allottees had not given the money to the Board by way of deposit nor had the Board borrowed the amount from the allottees. The amount was paid under a self-financing scheme for construction of the flat and the interest was paid on account of damages suffered by the claimant for delay in completion of the flats. 4. In view of the above discussion, we answer both the questions in favour of the assessee and against the Revenue. The appeal is accordingly dismissed with no order as to costs.” इसी प्रकार मा. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग द्वारा भी एस्टेट ऑफीसर ग्रेटर merch क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण व अन्य बनाम यौरव YEAH, 2020 SCC OnLine NCDRC 278 के मामले में समान न्यायिक सिद्धान्त प्रतिपादित किया गया है। Page I] of 4 E-Court = वर्णित दोनों मामलों में प्रतिपादित न्यायिक सिद्धान्त को पुनः मा.. उच्च ह बम्बई द्वारा भी साईनाथ राजकुमार सरोड़े व अन्य बनाम स्टेट ऑफ महाराष्ट्र व अन्य 202/ SCC OnLine Bom 2798 के मामले में दोहराया गया है। निर्णय के सुसंगत प्रस्तर निम्नवत् हैः-
28. Coming to the admitted facts of the present case we hold that the amounts payable being in effect a refund of the amounts paid by the petitioners to Respondents 4 to 7, along with compensatory interest thereon, such a relationship does not spell out a debtor-creditor relationship nor is the payment made by Respondents 4 to 7 to the petitioners one in discharge of any pre-existing obligation, so as to attract Section 2(28-A) of the IT Act. We are in respectful agreement with the judgment of the Kerala High Court in Beacon Projects (P) Ltd. vy. CIT [Beacon Projects (P) Ltd. v. CIT, 2075 SCC OnLine Ker 78597/ which takes the same view, in facts similar to those that we are dealing with in the present matter. 29. In view of the above, we hold that the compliance of Respondents 4 to 7 with the schedule of payments under the consent terms dated 4-3-2027 and our order dated 4-3-2027, is to be made without making any deduction of tax at source. Respondents 4 to 7 are directed to pay to the petitioners the balance sum of Rs 5,05,989 deducted from the 5th instalment which became due on 20-7-2027, in compliance with the consent terms, within a period of one week from today. उपर्युक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते है:- आदेश
\. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता की यूनिट की समस्त सुविधाओं को आवंटन-पत्र / अनुबन्ध के अनुसार पूर्ण कराकर ओ.सी. / सी.सी. सहित भौतिक कब्जा उपलब्ध कराते हुए, शिकायतकर्ता से देय wey Yow प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 23-09-2024 में 68 दिन (निस्तारण बिन्दु संख्या: 04 के अनुसार) जोड़ने के उपरान्त, अर्थात् दिनांक 04-42--2024 से ओ.सी./ सी.सी. प्राप्त किये जाने की तिथि 24--04--2024 अथवा ओ.सी. / सी.सी. सहित पुनः विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो तक की अवधि के लिए, शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर ,#८7#+7 प्रतिशत की दर से विलम्ब ब्याज की धनराशि अदा करना सुनिश्चित करें| ब्याज की यह धनराशि अंतिम Page 2 of 4 E-Court ee की धनराशि में समायोजित की जायेगी। ब्याज की धनराशि देय धनराशि से अधिक होने पर शिकायतकर्ता को वापस की जायेगी। = के कारण “फोर्स मैज्योर” पीरियड के दृष्टिगत, दिनांक 25-03-2020 से दिनांक 25-09-2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु ब्याज प्रोमोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा।
विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 20:6 की धारा-2(७४)0) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज | प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी #27#+7 प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। | विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा दिये जाते समय सभी चार्जेज /धनराशि आवंटन-पत्र / अनुबन्ध में उल्लिखित सहमत पेमेन्ट प्लान/शर्तों के अनुसार ही प्राप्त करना सुनिश्चित करेंगे | विपक्षी आदेश अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर आदेश का अनुपालन करना सुनिश्चित करें। प्रकरण में शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी आवंटन-पत्र/अनुबन्ध, दिनांक 23-44-2020 के अवलोकन से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा उक्त आवंटन-पत्र / अनुबन्ध, उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या: 4740 //8-3—8-65 fafa /t6, दिनांक 47-70-20:8 @ प्रारूप पर निष्पादित, हस्ताक्षरित एवं पंजीकृत नहीं कराया गया है। अतः विपक्षी (प्रमोटर) द्वारा रेरा अधिनियम की a3 d प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है, जिसके लिए रेरा अधिनियम, 20i6 की aor के अधीन शास्ति का प्राविधान किया गया है। अतः सचिव, उ.प्र. रेरा विपक्षी (alex) के विरूद्ध प्रश्नगत शिकायत में शास्ति अधिरोपित करने की कार्यवाही हेतु, प्रकरण को प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करें ।
इस आदेश की प्रति सचिव, उ.प्र. रेरा को अग्रेतर कार्यवाई हेतु प्रेषित की जाये। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दण्डनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि 45 दिनों के अन्दर विपक्षी द्वारा उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में 4 Page 3 of 4 2 4 E-Court शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेगें। Il. VaR अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करेंगे। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाये। तदनुसार पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। दिनांक: 02-05-2026. (संजय आर, ; अध्यक्ष, उ.प्र. रेरा Page 4 of 4