Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Jolly Gupta and Vishal Jain v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/02/117564/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-07-31
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर। आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) निर्णय एवं आदेश अन्तर्गत aRi—3i सपठित धारा-37 पीठासीन अधिकारी :- श्री टी वैंकटेश, सदस्य wel. शिकायत संख्या | Reed यूनिट सं. कुल मूल्य | जमा धनराशि हु एटारा44/0307763/2024 | सोनिया ग्रोवर एवं मनीष | DI/KG/I439 | 7,42,925/— | 7,23,404 /- ग्रोवर 2. | NCRI44/02/I7592/2024 | राम देव पटेल एवं चेतना | DI/KG/2020 | 8,55,00/— | 8,32,588 /- पटेल 3. | टारा44/02/07599/2024 | अंकित गुप्ता एवं अंकिता | 07#706/205 | 22,9,200 /- | 20,68,639 /— गुप्ता || पटाराबब/02760/2024 शरद कुमार एवं नेहा. | ण/एह6/744 | ,58,050/— | ,48,34/— श्रीवास्तव 5. | पटारा44/0207607/2024 | सीमा साही एवं विनीत | DI/KG/I730 | 8,3,675/— | 8,22,642 /- साही | a पटारा44/02/762/2024 देवभानु भूटानी ए77८67229 | 34,25,800 /- | 34,03,59 /- 7. सटारा44/03/7930/2024 अभिजीत घोषाल फछाण्टठ/डा7 | 23,56,900 /- | ,86,889 /— 8. | एटारा44/02/7635/2024 निरोतम पाल चौधरी DT/KG/809 | 8,03,l00/— | 47,8,236 /- 9. | फटारा44॥03/8606/2024 | पै ब q प्रा. लि. | "/ट67827 | 77,23,575/- | 7,03,543 /- 0. | रटारा44/02/7532/2024 सुरभि पाल DT/KG/2038 | 77,74,300 /- | 7,7i,872/- ॥. | सरटारा44/2/7564/2024 | जॉली गुप्ता एवं विशाल | 07/66/90 | 8,55,I00/— | 8,32,588 /— जैन Page &9/ ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड
शिकायतकर्ता सोनिया ग्रोवर एवं मनीष ग्रोवर के साथ 46 अन्य शिकायतकर्तागणों द्वारा विपक्षी के विरुद्ध योजित की गयी है। इन सभी शिकायतों के तथ्य समान हैं और एक समान साक्ष्य हैं। यह सभी शिकायतें विपक्षी की एक ही परियोजना THE DOWNTOWN से सम्बन्धित हैं। अतः एक ही निर्णय से प्रश्नगत शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है। शिकायत संख्या-- ॥२८२44/03//7763/2024 सोनिया ग्रोवर एवं मनीष ग्रोवर अग्रणी वाद रहेगा। suged सारणी में अंकित सभी शिकायतें शिकायतकर्तागणों द्वारा प्रश्नगत यूनिट्स कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने के अनुतोष हेतु विपक्षी के विरुद्ध भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत शिकायतें योजित की गयी हैं। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता (सोनिया ग्रोवर एवं मनीष ग्रोवर) का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या- DIVKG/439 में दिनांक 45.04.2045 को बुक किया गया था, जिसकी कुल कीमत 7,42,925/- रुपये के सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों Page 2 In. i2. | पटारा44/0207566/2024 | शोएब सलाम एवं तजीन | DI/VKG/2304 | 32,30,220/— | 3,00,000 /- फ्रोज 3. | NCR44/04/I909/2024 पंकज मेहता छाशर6ढ/73 | 8,22,750/— | 8,3,37 /- 4. | टारा44/05020282/2024 ओंकार सिंह एवं छाशट6ठ॥9297 | 7,82,375/— | 47,64,95 /- जसविनदर सिंह 45. | टार44/02/7525/2024 | परवेज अकरम सिद्दीकी | DT/KG/704 | 43,3,845 /- | 40,2,234 /- 6. | फ्टारा44/02/7528/2024 | Wo अकरम सिद्दीकी | DI/KG/704 | 26,3,880 /- | 25,79,666 /- A 7. | फ्टारा44॥02/7530/2024 मोहम्मद शिबली DT/KG/705 | 67,26,850 /- | 64,07,805 /- बनाम
के आधार पर 7,23,40/- रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना में विलम्ब है तथा परियोजना का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, जबकि विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर एग्रीमेंट में उल्लेखित समय-सीमा में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा अभी तक समक्ष विकास प्राधिकरण से सभी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए ओ.सी/सी.सी भी प्राप्त नहीं किया गया है एवं शिकायतकर्ता की बिना किसी गलती के प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि उनके द्वारा 95 प्रतिशत से अधिक धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष मनमाने ढंग से अवैध मांगे उठायी जा रही है, जिसका Geos उभयपक्ष के मध्य हस्ताक्षरित अनुबन्ध पत्र में नहीं किया गया था, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में आर.टी.आई दिनांक 03.03.2025, यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 04.03.2025, प्रत्युत्तर पत्र दिनांकित 05.42.2024, विपक्षी द्वारा प्रेषित मांग पत्र, खाता विवरण, आवंटन /अनुबन्ध पत्र दिनांकित 75.04.20:5, आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं।
विपक्षी की ओर से जवाब दाखिल करते हुए कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी प्रश्नगत परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या- DIVNKG/439 आवंटित की गयी थी, जिसके सापेक्ष आवंटन पत्र दिनांक 45.04.2045 को निष्पादित किया गया था तथा आवंटन पत्र के. प्रस्तर-26 के अनुसार अनुग्रह अवधि के साथ प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिनांक 5.2.2079 तक उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा आवंटन/अनुबन्ध पत्र की नियम एवं शर्तों के अनुरूप शिकायतकर्ता को दिनांक 09.42.2023 को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष मांग पत्र प्रेषित किया गया, जिसकी प्रति उनके द्वारा प्रतिवाद पत्र के साथ संलग्न की गयी है। इसके अतिरिक्त विपक्षी का कहना है कि उनकी प्रश्ननगत परियोजना का निर्माण कार्य एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये अतिकमण के कारण विलम्बित हुई है, जिसके लिए विपक्षी द्वारा नोएडा प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका dem-45:7/20:8 योजित किया गया, Page 3 Ch
जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी एवं प्राधिकरण के मध्य भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.20 को लीज़ निष्पादित किया था। नोएडा प्राधिकरण की शून्य अवधि निति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.2048 को आवेदन किया गया था। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा vat Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.208 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। साथ ही विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.205 तक शून्य अवधि साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु 6 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि वह शिकायतकर्ता vera यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कर प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में नोएडा प्राधिकरण को प्रेषित पत्र की प्रति, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.02.208, प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 46.03.2020 की प्रति, रेरा कार्यालय आदेश दिनांक 06.06.2020 की प्रति, पीठ-4 ए द्वारा पारित आदेश आदि की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। दूसरी ओर शिकायतकर्ता द्वारा अपना प्रत्युत्तर पत्र दिनांकित 05.42.2024 दाखिल करते हुए अंकित किया,गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या- DIKG/I439 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांकित 45.04.2045 को बिल्डर बायर wie का निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत 47,42,925//- रुपये है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा टी.डी. एस को छोड़कर 47,24,404,//- रूपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जोकि प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत का 95 प्रतिशत से अधिक है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र में अंकित किया गया है कि शून्य अवधि का आदेश 44.08.2043 से 28.40.203 तक था और दंडात्मक ब्याज में छूट केवल Page 4 —
29.40.2043 से 49.08.2045 तक की अवधि के लिए प्रदान की गयी थी एवं विपक्षी दुर्भावना पूर्ण इरादें से इस तथ्य से भी स्पष्ट है कि नोएडा विकास प्राधिकरण के 76.03.2020 के आदेश के निर्देशों के बाद भी, विपक्षी ने नोएडा विकास प्राधिकरण के समक्ष कोई हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया है, जिसकी पुष्टि नोएडा प्राधिकरण के पत्र दिनांक 07.08.2020 से की जा सकती है, जिसे विपक्षी अपने प्रतिवाद पत्र के साथ अनुलग्नक के रूप में संलग्न भी किया गया है। यदि किसी विशिष्ट आदेश में पारित निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो यह कानून का एक स्थापित प्रावधान है। विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना में अत्यधिक विलंब के कारण उनके द्वारा शून्य अवधि का लाभ एवं अप्रत्याशित घटना के दावे पर विचार किए बिना आदेश पारित करने से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शून्य अवधि के संबंध में किया गया दावा झूठा एवं तुच्छ दोनों ही है तथा विपक्षी माननीय प्राधिकरण को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज शीघ्र दिलाये जाने, विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से कोई भी अवैध शुल्क या ब्याज न प्राप्त किये जाने का अनुरोध माननीय पीठ से किया गया है। उभयपक्ष के cet को सुना व पत्रावली का अवलोकन किया। पक्षकारों के अभिवचनों के आधार पर निम्नलिखित बिन्दु विचारणीय किये गये हैं :- 4... क्या शिकायतकर्ता को विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जा सकता है ? यदि हां तो ब्याज दर क्या होगी ? निस्तारण बिन्दु सं0-॥
निस्तारण बिन्दु dem-or इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? रह वाद बिन्दु शिकासत्कर्ता के अभिकथनों करे आधार पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता का कहना है कि विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना में विलम्ब है तथा परियोजना का निर्माण कार्य धीमी गति से चल रहा है, जबकि विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर एग्रीमेंट में उल्लेखित समय-सीमा में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि विपक्षी द्वारा अभी तक समक्ष विकास प्राधिकरण से सभी अनापत्ति Page 5 c= प्रमाण पत्र प्राप्त करते हुए ओ.सी/सी.सी भी प्राप्त नहीं किया गया है एवं शिकायतकर्ता की बिना किसी गलती के प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है, जबकि उनके द्वारा 95 प्रतिशत से अधिक धनराशि का भुगतान किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष मनमाने ढंग से अवैध मांगे उठायी जा रही है, जिसका उल्लेख उभयपक्ष के मध्य हस्ताक्षरित अनुबन्ध पत्र में नहीं किया गया था।
इसके अतिरिक्त शिकायतकर्ता द्वारा अपना प्रत्युत्तर पत्र दिनांकित 05.42.2024 दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि उनके द्वारा विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या- DVKG/I439 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्ष के मध्य दिनांकित t5,0420:5 को बिल्डर बायर एग्रीमेंट का निष्पादित किया गया था, जिसके अनुसार प्रश्नगत यूनिट की कुल कीमत १7,42,925,“- रुपये है, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा टी.डी.एस को छोड़कर 7,2,404,/- रूपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया है, जोकि vera यूनिट की कुल कीमत का 95 प्रतिशत से अधिक है। विपक्षी द्वारा अपने प्रतिवाद पत्र में अंकित किया गया है कि शून्य अवधि का आदेश 44.08.203 से 28.0.2043 तक था और दंडात्मक ब्याज में छूट केवल 29.0.2043 से 49.08.2045 तक की अवधि के लिए प्रदान की गयी थी एवं विपक्षी दुर्भावना पूर्ण इरादें से इस तथ्य से भी स्पष्ट है कि नोएडा विकास प्राधिकरण के 46.03.2020 के आदेश के निर्देशों के बाद भी, विपक्षी ने नोएडा विकास प्राधिकरण के समक्ष कोई हलफनामा प्रस्तुत नहीं किया है, जिसकी पुष्टि नोएडा प्राधिकरण के पत्र दिनांक 07.08.2020 से की जा सकती है, जिसे विपक्षी अपने प्रतिवाद पत्र के साथ अनुलग्नक के रूप में संलग्न भी किया गया है। यदि किसी विशिष्ट आदेश में पारित निर्देशों का पालन नहीं किया जाता है, तो यह कानून का एक स्थापित प्रावधान है। विपक्षी की प्रश्नगत परियोजना में अत्यधिक विलंब के कारण उनके द्वारा शून्य अवधि का लाभ एवं अप्रत्याशित घटना के दावे पर विचार किए बिना आदेश पारित करने से यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा शून्य अवधि के संबंध में किया गया दावा झूठा एवं तुच्छ दोनों ही है तथा विपक्षी माननीय प्राधिकरण को गुमराह करने का प्रयास कर रहा है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा बुक करायी गयी प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज शीघ्र दिलाये जाने, विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से कोई भी अवैध शुल्क या ब्याज न प्राप्त किये जाने का अनुरोध माननीय पीठ से किया गया है।
जिस पर विपक्षी द्वारा अपना प्रतिवाद पत्र दाखिल करते हुए अंकित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा उनकी प्रश्नगत परियोजना THE DOWNTOWN में यूनिट संख्या- DIVKG/439 आवंटित की गयी थी, जिसके Page 6 &
सापेक्ष आवंटन पत्र दिनांक 45.04.20i5 को निष्पादित किया गया था तथा आवंटन पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार अनुग्रह अवधि के साथ प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिनांक 45.42.2049 तक उपलब्ध कराया जाना था। विपक्षी द्वारा आवंटन »अनुबन्ध पत्र की नियम एवं शर्तों के अनुरूप शिकायतकर्ता को दिनांक 09.42.2023 को प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष मांग पत्र प्रेषित किया गया, जिसकी प्रति उनके द्वारा प्रतिवाद पत्र के साथ संलग्न की गयी है। इसके अतिरिक्त विपक्षी का कहना है कि उनकी प्रश्गनगत परियोजना का निर्माण कार्य एन.जी. टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये अतिकमण के कारण विलम्बित हुई है, जिसके लिए विपक्षी द्वारा नोएडा प्राधिकरण को पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के समक्ष Re याचिका संख्या-4547 /2048 योजित किया गया, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। विपक्षी एवं प्राधिकरण के मध्य भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को लीज़ निष्पादित किया था। नोएडा प्राधिकरण की शून्य अवधि निति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.07.20:8 को आवेदन किया गया था। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.2048 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार कर॒ते हुए आदेश पारित किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। प्राधिकरण द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 76.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.20:3 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक दबण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। साथ ही विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08. 2045 तक शून्य अवांधे साथ ही माननीय एन.जी.टी द्वारा लगायें गये प्रतिबंध ag tte दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि वह शिकायतकर्ता प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कर प्रश्नगत यूनिट का कब्जा प्राप्त कर सकते है। यह स्पष्ट है कि विपक्षी एवं शिकायतकर्ता के मध्य आवंटन / अनुबन्ध पत्र दिनांकित 45.04.205 को निष्पादित किया गया था, जिसके कब्जे वाले प्रस्तर-26 के अनुसार प्रश्नगत यूनिट का कब्जा 5 वर्ष एवं 6 माह की aque अवधि के साथ 45.40.2020 तक यूनिट का कब्जा उपलब्ध कराया जाना था।
SS Page 7 ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 45.40.2020 तक कब्जा पाने का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा उक्त निर्धारित अवधि में प्रश्नगत यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है। यह भी स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा दिये जाने में विलम्ब किया गया है और ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 76.0.2020 से ओ.सी. /सी.सी.. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर विलम्बित अवधि का ब्याज पाने का अधिकारी है। ॥ जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील Wo 6649-50 ,/ 208 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 40) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant — Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20I6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 206 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा।
इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल रियलटर्स सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- Page 8 "Section 8(l)(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ0प्र0 रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व' क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है।
जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20i6 के अधीन दिनांक ॥7.40.2048 को भू-सम्पदा (fafa और विकास) (विक्रय पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्ररतर 9 गें प्रगोटर्रा के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.2Gi) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the (— Page 9 apartment, along with interest at the rate | equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +l% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"' यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को McLee प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। तद्नुसार बिन्दु संख्या-02 Peake किया जाता है। उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश
4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिन के अन्दर शिकायतकर्तागण की यूनिट्स को आवंटन पत्र/अनुबन्ध के अनुसार समस्त सुविधाओं को पूर्ण कराकर ओ.सी. / MM. सहित कब्जा देना सुनिश्चित करें और देय स्टाम्प शुल्क प्राप्त कर नियमानुसार रजिस्ट्री कराएं। 2. विपक्षी, शिकायतकर्ता (सोनिया ग्रोवर एवं मनीष ग्रोवर) को दिनांक 46.40.2020 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, तक की अवधि पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। फोर्स मैज्योर पीरियड को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब की अवधि एवं विलम्ब हेतु ब्याज की गणना नहीं की जाएगी एवं न ही शिकायतकर्ता से किसी अतिदेय (overdues) धनराशि के लिए इस अवधि का ब्याज लिया जाएगा। अन्य शिकायतकर्तागण के प्रकरण में अनुबन्ध पत्र के अनुरूप उपरोक्तानुसार गणना की 'जायेगी | 3. ह विपक्षी को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(29)()) के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से Page 0 (20% ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित अवधि के भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+] प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा।
4... विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्तागण को प्रश्नगत यूनिट्स का कब्जा देते हुए समय प्रो-रेटा आधार पर सभी चार्जेज़ wie फॉर सेल ,/अनुबन्ध के अनुरूप “चार्टेड अकाउण्टेंट” से प्रमाणित कराकर शिकायतकर्तागण को विभिन्न wel में माँगी गयी धनराशि की स्थिति we करें एवं तदनुसार vat धनराशि का समायोजन विलम्ब ब्याज की धनराशि में करना सुनिश्चित करें। 5. इस आदेश की एक-एक, प्रति सम्बंधित पत्रावलियों पर रखी जाए एवं + इस आदेश में प्रतिपादित fram के अनुरूप धनराशि व ब्याज की प्रत्येक मामले में गणना की जाएगी। 6. इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। 7. शिकायतकर्तागण को यह भी निर्देशित किया जाता है कि यदि आदेश पोर्टल पर अपलोड होने के 45 दिन के अन्दर विपक्षी द्वारा उपरोक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो ऐसी स्थिति में शिकायतकर्तागण “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन कराये जाने हेतु अनुरोध अपलोड कर, भौतिक प्रति रेरा रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टलपर अपलोड किया जाये। तदनुसार पत्रावली दाखिल दफ्तर हो। 4 _Begefoi)os टी० वेंकटेश (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण EE Page i