Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Pooja v. Futureworld Greenhomes Pvt. Ltd
Complaint No. NCR144/02/117514/2024
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- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
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Judgment text
उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर पीठ-3 भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम 2046 की धारा-34 के अन्तर्गत पारित आदेश उपस्थित : डा० दीपक स्वरूप सक्सेना, सदस्य क्रम शिकायत संख्या गिरे यूनिट न0 | जमा धनराशि wo | बिल्डर बायर | अनुबंधानुसार वांछित ¥o एग्रीमेंट की | कब्जा दिये अनुतोष तिथि जाने की | तिथि : . | NCRI44/02/754/2024 | पूजा Jazz-02 | 80 30,26,47/ | 24.0.20i7 | 36 माह जमा एवं तथा 06 धनराशि विनोद कुमार माह अनुग्रह | वापस अवधि के | दिलाये जाने साथ अर्थात | का अनुरोध जुलाई किया गया 2020 है। \ बनाम फ्यूचरवर्ल्ड ग्रीन्स होम्स प्रा.लि. शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरूद्ध परियोजना विलम्बित होने के कारण जमा धनराशि दिलाये जाने हेतु यह«शिकायत संस्थित Sharh है।
संक्षेप में शिकायतकर्ता:का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना RHYTHM COUNTTY (PHASE RC-I).. में यूनिट संख्या Jazz-02 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को धनराशि wo 30,26,47/- का भुगतान किया गया। शिकायतक़र्ता द्वारा लिखित कथन दाखिल करते हुए यह उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा परियोजना RHYTHM COUNTTY को अनुबंध की तिथि 24.04.2020 से 36 माह में पूर्ण किया जाना था। शिकयतकर्ता द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट संख्या 402 टॉवर जॉज में आवंटित की गयी थी जिसके सम्बन्ध में दिनांक 24.04.2047 को अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ | आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु0 42,65,800 / थी | शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट के सापेक्ष बैंक से Go 27,25,000,/ लोन स्वीकृत कराया गया। इस लोन के सम्बन्ध में त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र दिनांक 24.0:.207 को निष्पादित हुआ। इसके उपरांत शिकायतकर्ता द्वारा wa से wo 4,06,000/ar विपक्षी को भुगतान किया गया है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि मय ब्याज वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ता द्वारा अपने शिकायत के समर्थन में लिखित कथन, अनुबंध पत्र, त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र, व रसीदों की छायाप्रतियाँ दाखिल की गयी। शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी .को भुगतान की गई धनराशि के सम्बन्ध में उपलब्ध करायी गयी रसीदों व साक्ष्यों का विवरण निम्नवत् है:- क्रम विवरण दिनांक भुगतान की गई धनराशि ° [संख्या (रु0) हे विपक्षी द्वारा जारी रसीद संख्या 0779 02.03.2047 रु०0 2,50,000/ रसीद संख्या 0780 20.02.2047 रु०0 ,45,000 / रसीद संख्या 0627 74.44.206 ®O 4,000/ बैंक द्वारा जारी लोन fered 34.04.2047 रु0 26,26,950/ कुल योग : BO 30,32,950/
शिकाय द्वारा रेरा पोर्टल पर विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि रु0 30,26,447 /sifa की गयी है परन्तु विपक्षी द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध करायी गयी wie /»साक्ष्यों के अनुसार शिकायत्रकर्ता द्वारा विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि wo 30,32,950/ प्रदर्शित हो रहा है। ऐसी स्थिति में जब शिकायतकर्ता द्वारा WI पोर्टल पर अंकित sae व रसीदों के अनुसार धनराशि में भिन्नता है तब शिकायतकर्ता द्वारा जो धनराशि रेरा पोर्टल पर अंकित की गयी है उसी पर आदेश पारित किया जाना न्यायोचित होगा। विपक्षी के अधिवक्ता ferini2i2.2024 को पीठ के समक्ष उपस्थित हुए। विपक्षी को प्रकरण में लिखित जवाब दाखिल किये जाने हेतु पर्याप्त अवसर दिये गये परन्तु विपक्षी द्वारा प्रकरण में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया गया जिस कारण पीठ द्वारा दिनांक 03.42.2025 को विपक्षी का लिखित जवाब दाखिल करने का अवसर समाप्त कर दिया गया। विपक्षी की ओर से प्रकरण में लिखित बहस दाखिल की गयी है जो पत्रावली पर उपलब्ध है। विपक्षी द्वारा दाखिल लिखित बहस में यह उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता यूनिट संख्या 405 के समर्थन में अभिलेखीय साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा है। जबकि शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट संख्या 402 संवेंशन प्लान 40 —_— 2
: 80: 40 के अन्तर्गत बुक करायी गयी थी जिसमें से 40 प्रतिशत धनराशि बुकिंग के समय भुगतान किया जाना था, 80 प्रतिशत धनराशि बैंक से लोन के माध्यम से भुगतान किया जाना था तथा to प्रतिशत धनराशि व अन्य चार्जेज कब्जा के समय भुगतान किया जाना था। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि आवंटित यूनिट की कुल कीमत रु०0 42,65,800,/ थी। शिकायतकर्ता यूनिट धनराशि रु0 27,08,976 ,/ का भुगतान किया गया है परन्तु शिकायतकर्ता द्वारा wo 30,26,447/ar दावा किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायत पृष्ठ पर अंकित धनराशि sik weal के अनुसार धनराशि में wo 3,7,444// का अंतर है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा Re सी-8428 / 2023 अर्चना त्यागी बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.06.2023 को आवंटित यूनिट को निरस्त किये जाने का अनुरोध पत्र प्रेषित किया.गया जिसमें>अवशेष देय धनराशि का भुगतान न कर पाने का कारण अतिरिक्त-<लोन्न न हो-पान्नां दंर्शायां गया है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा GUN रुल्स 7.5 Gr Seca किया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उभयपक्षों के मध्य. दिनांक 240%20:7 को. त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार शिकायतकर्ता के पक्ष में धनराशि Go 23,02,975,/ का लोन डिस्बर्सड हुआ। त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज-44 के अनुसार शिकायतकर्ता को मासिक किश्त भुगतान किया जाना था परन्तु वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा मासिक किश्त बैंक को भुगतान करने में डिफाल्ट किया गया जिस कारण से बैंक द्वारा दिनांक 3.04.2026 को शिकायतकर्ता द्वारा fore पेमेंट किये जाने के कारण यूनिट निरस्त कर खाता संख्या 9850506 को एनपीए घोषित कर दिया गया। विपक्षी त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज 44 व 45 के अनुसार सम्बन्धित बैंक को यूनिट के सापेक्ष लोन धनराशि वापस करने को तैयार है। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट के सापेक्ष ia माह के लोन की धनराशि पर रु0 3,47,.444/ Weve के तौर पर बैंक को भुगतान की गयी है।
PUSS > ' बैंक ऑ & 2s, विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय की =a नजीर यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया है \ ey) बनाम राजस्थान रेरा व अन्य (2022 5८८ ONLINE sc 4885) में पारित आदेश का संदर्भ अंकित किया गया है जिसमें यह उल्लिखित है कि रेरा अधिनियम आने से पूर्व के वह विवाद जिनमें उधारकर्ता और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के बीच हुए विवाद के चलते सम्बन्धित प्रापर्टी को बंधक (Mortgage) बनाया गया हो रेरा अधिनियम लागू नहीं होगा जब तक कि यह सिद्ध न हो जाए कि ऐसा गिरवी रखना या ऐसा लेन-देन कपटपूर्ण या मिलीभगत से किया गया है। विपक्षी द्वारा फॉरफीट किये जाने के सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अपील संख्या 7588 / 2042 सतीश बत्रा बनाम सुधीर रावल व श्री हनुमान कॉटन मिल्स व अन्य बनाम टाटा एयरक्राफ्ट लिमिटेड में पारित आदेशों का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा शिकायत संख्या एनसीआर444 / 40 // 83450 / 2024 मीनाक्षी सिंह बनाम एआर लैण्डक्राफ्ट का उल्लेख किया गया है। अतः विपक्षी द्वारा त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज 44 व 45 के अनुसार व बैंक लेटर दिनांकित 43.04.2026 के क्रम में लोन सेटल किये जाने के सम्बन्ध में अनुमति दिये जाने व अर्नेस्ट मनी जब्त किये जाने का अनुमति<«दिये जाने-का अनुरोध किया गया है। उभयपक्षों के अभिवचन्नों के आधार पर निम्न प्रश्न विरचित किये गये हैं :- 4. क्या रेरा आने से पूर्व HS sss IS दायरे में नहीं आते हैं ? व क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं होगें ? 2. क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं?
3. क्या शिकायतकर्ता की जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? निस्तारण प्रश्न eT eT इस तथ्य पर विरचित है कि क्या रेरा आने से पूर्व के अनुबन्ध रेरा के दायरे,में नहीं आते है तथा क्या पक्षकारों के मध्य रेरा लागू होने से पूर्व अनुबन्ध निष्पादित किये जाने पर रेरा के प्राविधान लागू नहीं इस सम्बन्ध में माननीय सर्वोच्च. न्यायालय द्वारा सिविल अपील संख्या-6745--6749 /202 “मैसर्स न्यूटेक प्रोमोटर्स एंड डेवलपर्स wo feo बनाम उ0प्र0 राज्य व अन्य” में दिया गया आब्जर्वेशन महत्वपूर्ण है, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है कि :- "54, From the scheme of the Act 206, its application is retroactive in character and it can safely be observed that the projects already completed or to which the completion certificate has been granted are not under its fold and therefore, vested or accrued rights, if any, in no manner are affected. At the same time, it will apply after getting the on-going projects and future projects registered under Section 3 to prospectively follow the mandate of the Act 206." उपरोक्त विधि व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि रेरा अधिनियम लागू होने से पूर्व
जो भी अनुबन्ध हस्ताक्षरित हुए या अधिनियम लागू होने से पूर्व की परियोजनाओं, जहाँ पर पूर्णता प्रमाण पत्र सम्प्रवर्तक द्वारा-प्राप्त नहीं किया गया है, वहाँ पर अधिनियम का प्रवर्तन पूर्वव्यापी, प्रभाव रहेगा | sea 'रेरा अधिनियम में स्पष्ट है कि “ऑन गोईंग” परियोजनायें निश्चित रूप से रेराँ अधिनियम की परिधि में आते हैं। उपरोक्त माननीय उच्च न्यायालय के आर्ब्जेवेशन से यह भी स्पष्ट है कि यद्यपि रेरा पंजीकरण से पूर्व प्रोमोटर"एवं"आवंटी" के" मध्य*अनुबन्ध"निष्पादित हुए हैं, परन्तु यदि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराया जाता है, तो रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। विपक्षी द्वारा yeaa परियोजना को रेरा में पंजीकृत कराया गया है, जिसका पंजीकरण संख्या- UPRERAPRI732i है। अतः वर्णित तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि विपक्षी की परियोजना वर्तमान में “ऑनगोईंग प्रोजेक्ट” की श्रेणी में आती है। ऐसी दशा में रेरा के सभी प्राविधान लागू होगें। तद्नुसार प्रश्न Wea निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-2 प्रश्न संख्या 2 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की आवंटित यूनिट निरस्त किया जाना वैधानिक है अथवा नहीं? इसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। विपक्षी द्वारा लिखित बहस में उल्लिखित किया गया है कि शिकायतकर्ता
प्रेषित किया गया जिसमें अवशेष देय धनराशि का भुगतान न कर पाने का कारण अतिरिक्त लोन न हो पाने का दर्शाया गया है। इस सम्बन्ध में विपक्षी द्वारा यूपीरेरा wR 7.5 का उल्लेख किया गया। विपक्षी द्वारा उल्लिखित किया गया है कि उभयपक्षों के मध्य दिनांक 24.04.2047 को त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र निष्पादित हुआ जिसके अनुसार शिकायतकर्ता के पक्ष में धनराशि रु० 23,02,975,/का लोन डिस्बर्सड हुआ। त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज-44 के अनुसार शिकायतकर्ता को मासिक किश्त भुगतान किया जाना था परन्तु वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा मासिक किश्त बैंक को भुगतान करने में डिफाल्ट किया गया जिस कारण से बैंक द्वारा दिनांक 43.04.2026 को शिकायतकर्ता द्वारा डिफाल्ट पेमेंट किये जाने के कारण यूनिट निरस्त कर खाता संख्या 9850506 को एनपीए घोषित कर लोन के सापेक्ष देय धनराशि wo 32,77,9:8/ की मांग की गयी है। विपक्षी त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज 44 व 45 के अनुसार सम्बन्धित बैंक को यूनिट के सापेक्ष लोन धनराशि वापस करने को तैयार है। विपक्षी द्वारा यह. भी उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट MMe 48..माह-रु० .3;47,444 / प्री.ईएमआई का भुगतान किया गया है।
पत्रावली पर उपलब्ध. Wal का "अवलोकन किया। पत्रावली पर उपलब्ध प्रपत्रों के अवलोकन से यह विदित है कि शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.06.2023 को विपक्षी कम्पनी को यूनिट निरस्तीकरण हेतु पत्र प्रेषित किया गया। शिकायतकर्ता द्वारा अपने पत्र में उल्लिखित किया गया है कि वह यूनिट के सापेक्ष लिये गये लोन की धनराशि का भुगतान करने में असमर्थ है तथा शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी से उनकी यूनिट किसी अन्य व्यक्ति को विक्रय करने हेतु अनुरोध किया गया। विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता के अनुरोध पर शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त करते हुए यूनिट के सापेक्ष जमा धनराशि वापस किये जाने का कोई साक्ष्य पत्रावली पर दाखिल नहीं किया गया है। वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा अपने पत्र दिनांकित 05.06.2023 में यह स्पष्ट किया गया है कि वह यूनिट के सापेक्ष लिये गये लोन की धनराशि वापस करने में असमर्थ है जिस कारण से वह स्वयं अपनी यूनिट सरेंडर कर रहे है। जब शिकायतकर्ता स्वयं अपनी यूनिट सरेंडर कर चुके है 6 आला ला. तब विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्त किये जाने के बिन्दु की वैधानिकता / अवैधानिकता पर विचार किये जाने का कोई आधार नहीं रह जाता है। Taq प्रश्न संख्या 2 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण प्रश्न संख्या-3 प्रश्न संख्या 3 इस आशय का विरचित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को जमा धनराशि वापस दिलायी जा सकती है ? यदि हाँ तो ब्याज दर क्या होगी? शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि वापस दिलाये जाने का अनुरोध किया गया
है। विपक्षी द्वारा तर्क प्रस्तुत किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं यूनिट निरस्त करायी गयी है जिस कारण विपक्षी द्वारा Ga रुल्स 7.5 का उल्लेख किया गया है कि जिसमें शिकायतकर्ता द्वारा यूनिट निरस्त कराये जाने पर विपक्षी भुगतान की गयी बुकिंग धनराशि को जब्त करने का हकदार होगा। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा त्रिपक्षीय अनुबंध va दिनांकित, 24.0.207 के क्लाज 44 का उल्लेख किया गया .है। विपक्षी:द्वारा लिखित dea में यह भी उल्लिखित किया गया है कि विपक्षी द्वारा यूनिट a ates माह लोन धनराशि पर Go 3,47,44/ प्रीईएमआई का भुगतान किया गया. है, इस. सम्बन्ध. में विपक्षी द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यूनियन बैंक ऑफ इण्डिया बनाम राजस्थान रेरा व अन्य (2022 50८ ONLINE 5० i885) में पारित आदेश का उल्लेख किया गया है जिसमें यह उल्लिखित है कि रेरा उन मामलों में जहां पर उधारकर्ता और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों के बीच हुए लेन-देन पर लागू नहीं होगा। विपक्षी द्वारा किये गये इस तर्क के सम्बन्ध में यह स्पष्ट किया जाता है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उक्त न्याय नजीर के क्लाज-36 (५) में यह स्पष्ट किया गया है कि आवंटी द्वारा बैंक के विरूद्ध योजित वाद को भी सुनने का अधिकार है। यदि बैंक द्वारा सरफेसी अधिनियम की धारा 43(4) के तहत आवंटी के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है तथा आदेश के बिन्दु-3 में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि गृहक्रेता द्वारा अपने हितों की रक्षा a के लिए रेरा प्राधिकरण के समक्ष वाद योजित किया जाता है तो क्लाज-36 (४) i 2) &)! उस पर भी लागू होगा। उपरोक्त न्याय नजीर से स्पष्ट है कि यदि गृहक्रेता द्वारा Cw) 4 7 =a
अपने हितों की रक्षा हेतु रेरा प्राधिकरण के समक्ष वाद योजित किया जाता है तो उक्त वाद को सुनने का क्षेत्राधिकार रेरा प्राधिकरण को प्राप्त है।
पत्रावली पर उपलब्ध त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज ॥4 के अनुसार शिकायतकर्ता को मूलधन व ब्याज मासिक किश्त के रूप में भुगतान किया जाना था। त्रिपक्षीय अनुबंध पत्र के क्लाज-44 में यह भी उल्लिखित है कि यदि शिकायतकर्ता विपक्षी की परियोजना से बाहर आना चाहते है या विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता का आवंटन निरस्त किया जाता है तो विपक्षी /डेवलपर्स का यह दायित्व है कि वह लोन की धनराशि बैंक को वापस करेंगे और यदि उनके द्वारा यूनिट निरस्तीकरण हेतु कोई कटौती की जाती है तो वह शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि में से की जाएगी। वर्तमान प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं दिनांक os. 06.2023 को विपक्षी डेवलपर्स को पत्र के माध्यम से अनुरोध किया गया है कि वह लोन की धनराशि का भुगतान करने में असमर्थ है जिस कारण से वह यूनिट सरेंडर कर रहे है और शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी को प्रश्नगत यूनिट किसी अन्य को विक्रय किये जाने का cea भी अपने- पत्र में अंकित किया गया है। यदि शिकायतकर्ता अपने दायित्वों'का निर्वहन करने में असमर्थ रहते है तो इस सम्बन्ध में उभयपक्ष के मध्य निष्पादित. अनुबंध पत्र दिनांकित .24.04.2047 के क्लाज-॥ में यह उल्लिखित किया गया है कि ” That in the event of failure of the flat Alottee(sO to perform his/her obligations or to fulfill all the terms and conditions set out in this Agreement, the flat Allottee(s) hereby authorizes the Developer to forfeit 0% out of the amounts paid by him/her, the earnest money/booking amount as aforementioned together... “' उपरोक्त से स्पष्ट है कि यदि शिकायतकर्ता अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ रहता है तो विपक्षी का यह अधिकार है कि वह शिकायतकर्ता द्वारा जमा की गयी धनराशि में से 40 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी की कटौती कर सकता है। ह
उपरोक्त वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अनुबंध के अनुसार यूनिट की बेसिक कीमत bo 39,22,000,/ का 40 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी की कटौती SS करते हुए शिकायतकर्ता को अवशेष धनराशि मय ब्याज विपक्षी से वापस दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। जहां तक शिकायकतकर्ता को मय ब्याज धनराशि वापस किये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रालि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "Section 8()(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as
the apartment is handed over to him is not unreasonable." अत: उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि रेरा के प्राविधानों के अन्तर्गत प्रमोटर व क्रेता के बीच किये wa अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, wife vated द्वारा उक्त धनराशि का उपभोग किया गया है। जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न .है, राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 2046 के अधीन दिनांक 77.:0.20i8 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 2048 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें दिये गये विक्रय,/पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर 9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण (Events of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर 9.20) में प्रमोटर के डिफाल्टर होने की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- "The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate)’on home loan of State Bank of India +!% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:" 9 =
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी wee 9.30) में निर्धारित है। अतः उक्त प्राविधानों के आधार पर शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि का 40 प्रतिशत कटौती उपरांत अवशेष धनराशि मय ब्याज MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से धनराशि प्राप्त करने का अधिकारी है। यहां यह भी स्पष्ट किया जाता है शिकायतकर्ता द्वारा दिनांक 05.06.2023 को प्रार्थनापत्र विपक्षी को प्रेषित कर यूनिट निरस्त किये जाने तथा अन्य आवंटी को विक्रय किये जाने का अनुरोध किया गया है जिस कारण से शिकायतकर्ता दिनांक 05.06.2023 से जमा धनराशि में से उपरोक्तानुसार कटौती उपरांत अवशेष देय धनराशि पर विलम्बित अवधि का ब्याज प्राप्त करने का अधिकारी है। तदानुसार प्रश्न संख्या-3 निस्तारित किया जाता है। उपरोक्त प्रश्न का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किया जाता हैं :- आदेश 4... विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि«व॒ह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 PS अन्दर»यूनिट की:बेसिक मूल्य रु० 39,22,000 / पर 40 प्रतिशत अर्नेस्ट मनी कटौती किये जाने के उपरांत अवशेष बची धनराशि पर यूनिट निरस्तीकरण के सम्बन्ध में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र दिनांक 05.06.2023 से भुगतान किये जानें"की तिथि तक मय McLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से वापस भुगतान कंरना सुनिश्चित करें। 2. इस आदेश का vera भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। 3. विपक्षी द्वारा यदि इस आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है तो शिकायतकर्ता रेरा प्राधिकरण के माध्यम से आदेश का क्रियान्वयन करा सकेंगे। 4. आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। PAS (= A ala (ei ee 6 wea \% Woo. 202G शरद © (डा०दीपक स्वरूप सक्सेना) a} vI
सदस्य उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण गौतमबुद्धनगर 0