Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority
Rajesh Kumar v. Granite Hill Properties Private Limited
Complaint No. NCR144/02/117506/2024
Verified by Puneet Jain, Editor
- Decision date
- 2025-12-10
- Text availability
- Machine-read (OCR) text, unverified
- Bench
- Bench 2 Gautam Budh Nagar
- Counsel
- Puneet Jain (for the respondent)
Source: UP RERA order
Connected provisions and cases
No further provision or case links are recorded.
Judgment text
|| भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, गौतमबुद्धनगर | आदेश अन्तर्गत धारा-34, पीठ-2 (पूर्व पीठ-4) पीठासीन अधिकारी:- श्री टी. वेंकटेश, सदस्य शिकायत संख्या:- ॥२८7२44/02/7506/2024 राजेश कुमार बनाम मैसर्स ग्रेनाइट हिल प्रॉपर्टीज प्रा. लि. प्रस्तुत शिकायत प्रार्थना पत्र शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी के विरुद्ध yer यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने हेतु संस्थित किया गया है। संक्षेप में अग्रणी शिकायतकर्ता का कथन है कि उनके द्वारा विपक्षी की परियोजना THE DOWNTOWN में दिनांक 44.0.2044 को यूनिट संख्या- DIVKG/25 बुक करायी गयी थी। यूनिट का कुल मूल्य ,6I,925/— रुपये था, जिसके सापेक्ष उनके द्वारा समय-समय पर किश्तों के आधार पर 4,5,907/— रुपये का भुगतान विपक्षी को किया गया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा Vat यूनिट का कब्जा 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही अभी तक परियोजना से सम्बन्धित आवश्यक चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र व ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है, जबकि उनके द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 955% धनराशि का भुगतान किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण अधिनियम की धारा-34 के अन्तर्गत विपक्षी के विरुद्ध यह शिकायत विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने हेतु दर्ज करायी गयी है।
शिकायतकर्ता की ओर से अपने कथन के समर्थन में फ्लैट आवंटन अनुबन्ध दिनांकित 44.0.2044, पेमेन्ट प्लान, मांग पत्र दिनांक 30.42.2023, 48.04.2024, 22.04.2024, अनुस्मारक पत्र दिनांक 49.04.2024, 48.02.2024, विपक्षी को भुगतान की गयी धनराशि का खाता विवरण, विपक्षी को प्रेषित ई-मेल, प्रत्युत्तर आदि अभिलेखों की छायाप्रतियां दाखिल की गयी हैं। ए986 4
| | शिकायत के सम्बन्ध में विपक्षी की ओर से लिखित उत्तर प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के cfd¥-KAPITAL GRAND में आवंटन पत्र दिनांक 44.40.2044 के माध्यम से यूनिट PI-DTVKG/I25 बुक करायी गयी थी, जिसके सापेक्ष उभयपक्षों के मध्य निष्पादित आवंटन / अनुबन्ध पत्र के प्रस्तर-26 के अनुसार 6 माह की अनुग्रह अवधि सहित दिनांक 44.04.2020 तक शिकायतकर्ता को उक्त यूनिट का कब्जा प्रदान किया जाना था। विपक्षी द्वारा यह भी प्रस्तुत किया गया है कि उनके द्वारा अनुबन्ध दिनांकित 44.0.20:4 की सहमत शर्तों के अनुसार शिकायतकर्ता को इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए दिनांक 27.42.2023 को मांग पत्र कम कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किया गया था, जिसके अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जाः प्राप्त किया जाना था। विपक्षी द्वारा परियोजना की भूमि के कब्जे के सम्बन्ध में नोएडा विकास प्राधिकरण के विरुद्ध विवादों में रही और मा. एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध तथा किसानों द्वारा किये गये आंदोलन के कारण भी परियोजना विलम्बित हुई। विपक्षी को नोएडा विकास प्राधिरण के विरुद्ध किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसका तात्पर्य है कि सम्बन्धित प्राधिकरण द्वारा विपक्षी को उक्त भूमि के आवंटन से पहले किसानों का बकाया नहीं चुकाया गया, परन्तु कोई समाधान न मिलने पर विपक्षी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के war Re याचिका संख्या-4547 /20i8 योजित की गयी, जिसमें विपक्षी द्वारा अनुरोध किया गया कि नोएडा विकास प्राधिकरण परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण किये जाने हेतु परियोजना की आवंटित भूमि का पूर्ण कब्जा उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा परियोजना की भूमि के सम्बन्ध में दिनांक 08.07.2044 को लीज डीड निष्पादित की गयी तथा नोएडा विकास प्राधिकरण की “शून्य अवधि” नीति के तहत विपक्षी द्वारा दिनांक 49.04.208 को आवेदन किया गया था। इसके पश्चात् माननीय उच्च न्यायालय द्वारा vat Re याचिका में सुनवाई करते हुए दिनांक 02.08.2048 को विपक्षी द्वारा किये गये आवेदन पर विचार करते हुए आदेश पारित किया गया। नोएडा विकास प्राधिकरण ने माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश को दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 46.03.2020 को कार्यालय आदेश जारी करते हुए विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि तथा 29.40.2043 से दिनांक 49.08.2045 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट दिये जाने हेतु आदेश दिये गये थे। इसलिए मा. उच्च * न्यायालय तथा नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेशों के आधार पर #/ विपक्षी, दिनांक 44.08.2043 से 28.0.203 तक और दिनांक 29.40.2043 से >/49.08.2045 तक की अवधि के लिए शून्य अवधि का लाभ पाने का अधिकारी
Page 2 a | नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 07.08.2020 के माध्यम से इसे दोहराया गया है, जिसका पत्र संख्या-नोएडा / वाणिज्य / 2020 / 802 है, जिसमें विपक्षी को दिनांक 44.08.2043 से दिनांक t9.08.20:5 तक शून्य अवधि तथा 29.0.20:3 से दिनांक 79.08.20I5 तक की अवधि के लिए दण्डात्मक ब्याज में छूट प्रदान की गयी है, जिसकी प्रति अनुलग्नक-सी के रूप में संलग्न है। इसके अतिरिक्त विपक्षी द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2047 के उपरान्त विभिन्न अवधियों में माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध एवं कोविड-49 के कारण बाधित रहा है। उपरोक्त कथनों के आधार पर विपक्षी द्वारा दिनांक 4.08.20i3 से दिनांक 49.08.2045 तक शून्य अवधि एवं माननीय एन.जी.टी द्वारा लगाये गये प्रतिबंध हेतु 446 दिन की छूट दिये जाने का अनुरोध किया गया है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर यूनिट का कब्जा प्राप्त करने हेतु निर्देशित किये जाने का अनुरोध किया गया है।
विपक्षी द्वारा अपने कथन के समर्थन में लिखित उत्तर, लिखित बहस, इंटीरियर और फिनिशिंग कार्य के लिए शिकायतकर्ता को प्रेषित मांग पत्र व कब्जा प्रस्ताव-पत्र दिनांकित 23.04.2024, शिकायतकर्ता को प्रेषित ई-मेल दिनांक 23.04.2024, 76,02.2024, 04.04.2024, माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 02.02.208, नोएडा विकास प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 6.03.2020, मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “सतीश बत्रा बनाम सुधीर wae" में पारित आदेश दिनांक 48:40.2042, रेरा प्राधिकरण द्वारा पारित आदेश दिनांक 06.06.2020 एवं 48.08.2024 की प्रति, रेरा प्राधिकरण की पीठ-+4ए द्वारा पारित आदेश दिनांक 76.2.2020, रेरा प्राधिकरण की पीठ-03 द्वारा पारित आदेश दिनांक 24.04.2024, की छायाप्रतियां दाखिल की गयी है। विपक्षी की ओर से लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर-6 में 2" फ्लोर पर आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 44.:0.2004 के माध्यम से CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट we-i25 बुक करायी गयी थी। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। शिकायतकर्ता द्वारा गलत सूचना प्रदान की गयी है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण को आवेदन नहीं किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 22.40.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा vat यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को अपनी ह/ अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु विभिन्न दिनांक 23.04.2024, | 3-2 - 6.02.2024, 04.04.2024 को ई-मेल के माध्यम से अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये
Page 3 (५० गये, परन्तु शिकायत्रकर्ता अपनी अवशेष देय धनराशि का a करने में विफल रहा है। शिकायतकर्ता एक डिफॉल्टर है तथा उनके द्वारा सहमत भुगतान योजना अर्थात CLP प्लान के अन्तर्गत अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 40.02.2025 को यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ करते हुए नोटिस जारी किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता से उक्त नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 05 दिनों के भीतर अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भुगतान न करने पर विपक्षी, बुक की गयी यूनिट को निरस्त करने के लिए बाध्य होगा। शिकायतकर्ता द्वारा अनुपालन न करने पर विपक्षी द्वारा विधिवत दिनांक 05.03.2025 को निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जे हेतु मांगा गया अनुतोष स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में की गयी चूक के कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.03.2025 के माध्यम से vat यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उक्त यूनिट को आवंटन अनुबन्ध के सहमत नियमों एवं शर्तों व उ.प्र. Rr नियम, 20i8 के नियम-9.3 के अनुसार निरस्त किया गया है और शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आता है। आवंटन अनुबन्ध दिनांक 28.04.2004 H पृष्ठ संख्या-43 के प्रस्तर-59 के अनुसार आवंटियों द्वारा भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट की स्थिति में विपक्षी कंपनी, यूनिट की कुल कीमत का 5% धनराशि जब्त कर सकती है, जिस कारण विपक्षी, शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त करते हुए
5% धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “सतीश बत्रा बनाम सुधीर wae", जिसकी सिविल अपील संख्या-7588 /20:2 है, में स्पष्ट रूप से कहा कि अर्नेस्ट मनी एक प्रारम्भिक भुगतान की धनराशि है, जोकि अनुबन्ध को निभाये जाने के लिए दी जाती है अर्थात अनुबन्ध के उल्लंघन पर विक्रेता अनुबन्ध के WAR के अनुसार अर्नेस्ट मनी /अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी है, साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश “श्री हनुमान कॉटन flea एवं अन्य बनाम टाटा एयर क्राफ्ट लिमिटेड” (4970 SCRG) 27 ) में मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि यदि धनराशि के लेन-देन में क्रेता द्वारा डिफॉल्ट किया जाता है तो विक्रेता अर्नेस्ट मनी /अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने AGB का अधिकारी होगा। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन | न किया गया है और विभिन्न अनुस्मारकों के बावजूद भी शिकायतकर्ता द्वारा आज if satan) है| तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिस कारण ४ “>/ विपक्षी अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार यूनिट के कुल मूल्य का 5% धनराशि = Page 4
| कर, शेष a बिता किए: छाए को वापस चारने eee बिना किसी ब्याज के वापस करने का अधिकारी है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 20i6 की धारा-2(6) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में न आने के कारण प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने व आवंटन अनुबन्ध के अनुसार 5% धनराशि जब्त कर शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने हेतु स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है।
शिकायतकर्ता द्वारा अपने कथन के समर्थन में प्रत्युत्तर दाखिल करते हुए कहा गया है कि विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 44.0.2044 के अनुसार उक्त यूनिट का कब्जा 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में sat यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जिस कारण विपक्षी द्वारा wr अधिनियम, 2048 की धारा-48 का उल्लंघन किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से अनुचित धनराशि जैसे-लीज te, फायर फाइटिंग चार्जेर्स, सी.आर.एफ., 2 वर्ष का मेन््टेनेंस चार्जेस, किसान प्रतिकर आदि «की मांग की जा रही है। विपक्षी द्वारा यूनिट को निरस्त करने की धमकी दी जा रही है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा की जा रही सभी अवैध मांगों को वापस लेने व यूनिट को निरस्त किये जाने की रोक लगाये जाने तथा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही भुगतान करने की मांग किये जाने एवं विलम्बित -अवधि -के- ब्याज सहित यूनिट का भौतिक कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। उभयपक्ष के तर्कों को सुना गया व पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन किया गया, जिसके आधार पर निम्न बिन्दु विचरित किया गया हैं :- 4. क्या शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का भुगतान किया गया है अथवा नहीं और क्या विपक्षी द्वारा किये गये यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया वैधानिक है ?
2. कया शिकायतकर्ता को प्रश्नगत यूनिट का कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की क्या दर होगी ? निस्तारण बिन्दु संख्या- 04 निस्तारण बिन्दु संख्या-04, इस आशय से विचरित किया गया है कि an शिकायतकर्ता द्वारा पेमेन्ट प्लान के अनुसार अपनी देय धनराशि का SS oe 5 a | | की प्रक्रिया वैधानिक है ? यह वाद बिन्दु विपक्षी के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार विपक्षी पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि विपक्षी द्वारा बिल्डर बायर एग्रीमेन्ट दिनांक 44.40.2044 के अनुसार vad यूनिट का कब्जा 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ प्रदान किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में var यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जिस कारण विपक्षी द्वारा रेश अधिनियम, 20:8 की धारा-48 का उल्लंघन किया गया है। इसके अतिरिक्त यह भी कहा गया है कि विपक्षी द्वारा अभी तक सक्षम विकास प्राधिकरण से परियोजना का ओ.सी./सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता से अनुचित धनराशि जैसे-लीज ec, फायर फाइटिंग चार्जेस, सी.आर.एफ., 2 वर्ष or Acta चार्जेस, किसान प्रतिकर आदि की मांग की जा ves | विपक्षी द्वारा यूनिट को निरस्त करने की धमकी दी जा रही है। अतः शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए विलम्बित अवधि के ब्याज सहित यूनिट का कब्जा दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। इस पर विपक्षी द्वारा लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए यह कथन किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के टॉवर--<6 H i2" फ्लोर पर आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 44.0.2004 के माध्यम से CLP
प्लान के अन्तर्गत यूनिट Peni25 बुक करायी गयी थी। विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। शिकायतकर्ता द्वारा गलत सूचना प्रदान की गयी है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी./सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण को आवेदन नहीं किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 22.0.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु विभिन्न दिनांक 23.0.2024, 46.02.2024, 04.04.2024 को ई-मेल के माध्यम से अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने में विफल रहा है। शिकायतकर्ता एक डिफॉल्टर है तथा उनके द्वारा सहमत भुगतान योजना अर्थात CLP प्लान के अन्तर्गत अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 40.02.2025 को यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ करते हुए नोटिस जारी किया गया, जिसमें डनिक, शिकायतकर्ता से vat नोटिस प्राप्त होने की तिथि से 05 दिनों के भीतर #) अवशेष देय धनराशि. का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भुगतान न करने पर विपक्षी, बुक की गयी Page 6
|. को निरस्त करने के लिए बाध्य होगा। Preece et SE न... द्वारा अनुपालन न करने पर विपक्षी द्वारा विधिवत दिनांक 05.03.2025 को निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जे हेतु. मांगा गया अनुतोष स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में की गयी चूक के कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.03.2025 के माध्यम से vat यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। Vad यूनिट को आवंटन अनुबन्ध के सहमत नियमों एवं शर्तों व उ.प्र. रेरा नियम, 2048 के नियम-9.3 के अनुसार निरस्त किया गया है और शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आता है। आवंटन अनुबन्ध दिनांक 28.04.2044 के पृष्ठ संख्या-43 के प्रस्तर-59 के अनुसार आवंटियों द्वारा भुगतान किये जाने में डिफॉल्ट की स्थिति में विपक्षी कंपनी, यूनिट की कुल कीमत का 5% धनराशि जब्त कर सकती है, जिस कारण विपक्षी, शिकायतकर्ता की यूनिट का आवंटन निरस्त करते हुए 5% धनराशि जब्त करने का अधिकारी है। विपक्षी द्वारा यह भी कहा गया है कि उपर्युक्त तथ्यों के आधार पर मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “सतीश बत्रा बनाम सुधीर wae", जिसकी सिविल अपील संख्या-7588 / 2042 है, में स्पष्ट रूप से कहा कि अर्नेस्ट मनी एक प्रारम्भिक भुगतान की धनराशि है, जोकि अनुबन्ध को Par जाने के लिए दी जाती है अर्थात अनुबन्ध के उल्लंघन पर विक्रेता अनुबन्ध के प्रस्तर के अनुसार अर्नेस्ट मनी /अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी है, साथ ही यह भी उल्लेख किया गया है कि मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश “श्री हनुमान कॉटन fret एवं अन्य बनाम टाटा एयर क्राफ्ट लिमिटेड” (4970 SCR) 27) 4 मा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कहा गया है कि यदि धनराशि के लेन-देन में क्रेता द्वारा डिफॉल्ट किया जाता है तो विक्रेता अर्नेस्ट मनी /अग्रिम अदा की गयी धनराशि को जब्त करने का अधिकारी होगा। शिकायतकर्ता द्वारा आवंटन अनुबन्ध की शर्तों का उल्लंघन किया गया है और विभिन्न अनुस्मारकों के बावजूद भी शिक़ायतकर्ता द्वारा आज तक अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जिस कारण विपक्षी अनुबन्ध की शर्तों के अनुसार यूनिट के कुल मूल्य का 5% धनराशि जब्त कर, शेष धनराशि बिना किसी ब्याज के वापस करने का अधिकारी है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(9) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में न आने के कारण प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने व आवंटन अनुबन्ध के अनुसार 5% धनराशि जब्त कर शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये जाने हेतु स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है।
भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय /पदट्टा के लिए करार) | 3.४ नियमावली, 2048 की धारा-9.2 एवं धारा-9.3 निम्नलिखित sects है :- i =__ = धारा-9.3 : Rennes case.of Default by 4 under the conditions listed above a non defaulting Allottee is entitled to the following: i. Stop making further payments to Promoter as demanded by the Promoter. If the Allottee stops making payments, the Promoter shall correct the situation by completing the construction milestones and only thereafter the Allottee be required to make the next payment without any interest; or ii. The Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lénding Rate) on home loan of State Bank of India न4%6 unless provided otherwise under the Rules. within Jorty-five days of receiving the termination notice: Provided that where an Allottee does not intend to withdraw from the Project or terminate the Agreement, he shall be paid,.by the Promoter, interest at the rate prescribed in the Rules, for every month of delay till the handing over of the possession of the [Apartment/Plot], which shall be paid by the Promoter to the Allottee within forty-five days of it becoming due." "The Allottee shall be considered under a condition of Default, on the occurrence of the following events:
i. In case the Allottee fails to make payments for 2 (two) - consecutive demands made by the Promoter as per the Payment Plan annexed hereto, despite having been issued notice in that regard the Allottee shall be liable to pay interest to the promoter on the unpaid amount at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +7% unless provided otherwise under the Rules. The Promoter must not be in default to take this benefit; ii. In case of Default by Allottee under the condition listed above continues for a period beyond 3 (three) consecutive months after notice from the Promoter in this regard, the Promoter may cancel the allotment of the [Apartment/Plot] in favour of the Allottee and refund the a paid to him by the Allottee by deducting the booking amount and the interest liabilities and this Agreement shall thereupon stand terminated. The Promoter must not be in default to take this benefit; Provided that the Promoter shall intimate the Allottee about such termination at least thirty days prior to such termination."
आवंटन अनुबन्ध पत्र के नियम एवं शर्तों से यह we है कि शिकायततकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कस्ट्रक्शन fies ree प्लान के अनुसार किया जाना था, जिसमें बुकिंग पर कुल बिक्री मूल्य का to प्रतिशत धनराशि, द्वितीय किश्त बुकिंग के 45 दिन के भीतर i0 प्रतिशत धनराशि, तृतीय किश्त खुदाई ,/राफ्ट रखे जाने के समय 0 प्रतिशत धनराशि, चतुर्थ किश्त बेसमेन्ट सलैब के समय to प्रतिशत धनराशि, पंचम किश्त द्वितीय फ्लोर vets के समय io प्रतिशत धनराशि, छठवीं किश्त सातवें फ्लोर wa के समय to प्रतिशत धनराशि, सातवीं किश्त बारहवें फ्लोर eta के समय 40 प्रतिशत धनराशि, आठवीं feet stored फ्लोर wha के समय ॥0 प्रतिशत धनराशि, नौवीं किश्त तेईसवें फ्लोर स्लैब के समय 40 प्रतिशत धनराशि, दसवीं feet अन्तिम फ्लोर eta के समय 05 प्रतिशत धनराशि, ग्यारहवीं / अंतिम किश्त-कब्जा ऑफर किये जाने के समय 05 प्रतिशत धनराशि अदा की जानी थी। इसी के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा प्रश्नगत यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान किया जाना था।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन से विदित है कि प्रश्नगत प्रकरण में यूनिट का कुल बिक्री मूल्य ,6i,925//— रुपये था, जिसके सापेक्ष शिकायतकर्ता द्वारा i,5,907/— रुपये की धनराशि का भुगतान विपक्षी को किया गया, जोकि लगभग 99 प्रतिशत से अधिक है और उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध / आवंटन पत्र दिनांकित 74.0.2044 के अनुसार विपक्षी द्वारा परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर आवंटन अनुबन्ध की तिथि से 05 वर्ष एवं 6 माह की aque अवधि के साथ अर्थात दिनांक 43.04.2020 तक परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर कब्जा दिया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित समयावधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर यूनिट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया है, जबकि शिकायतकर्ता द्वारा विपक्षी की मांग पर धनराशि का भुगतान समयानुसार किया गया तथा विपक्षी द्वारा शिकायतकर्ता को यूनिट निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.03.2025 को प्रेषित किया गया था, जोकि अनुबन्धानुसार यूनिट का कब्जा दिये जाने की समयावधि के 05 वर्ष बाद प्रेषित 2 >)|किया गया है। Page 9 इसके अतिरिक्त यह भी स्पष्ट है कि उभयपक्षों मध्य सहमत कंस्ट्रक्शन लिंक्ड We प्लान के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा 05% धनराशि का _ विपक्षी ERT कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित किये जाने के समय किया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक शिकायतकर्ता को कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्रेषित नहीं किया गया है और शिकायतकर्ता द्वारा उक्त यूनिट के सापेक्ष अपनी देय धनराशि का भुगतान कंस्ट्रक्शन fees पेमेन्ट प्लान के अनुसार समय-समय पर किया गया है तथा शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा प्रस्ताव-पत्र प्राप्त होने के समय विपक्षी को भुगतान की जाने वाली देय धनराशि 04% से भी कम है।
वर्णित परिस्थिति में यह स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा किये गये शिकायतकर्ता की यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया अवैधानिक /अपूर्ण है। रेरा अधिनियम की aris के अन्तर्गत पक्षकारों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार परियोजना पूर्ण किये जाने में हुए विलम्ब की स्थिति में शिकायतकर्ता जमा धनराशि मय ब्याज प्राप्त कर सकता है अथवा यदि शिकायतकर्ता अपनी यूनिट का कब्जा लेने के इच्छुक हैं, तो वह अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान कर कब्जा प्राप्त करें। तद्नुसार बिन्दु संख्या-04 निस्तारित किया जाता है। निस्तारण बिन्दु संख्या-02 निस्तारण बिन्दु संख्या-02/ इस आशय से विचरित किया गया है कि क्या शिकायतकर्ता को कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाये ? यदि हाँ तो ब्याज की दर क्या होगी ? यह वाद बिन्दु शिकायतकर्ता के अभिकथनों पर विचरित किया गया है, जिसे साबित करने का भार शिकायतकर्ता पर है। शिकायतकर्ता द्वारा कथन किया गया है कि कि उभयपक्षों के मध्य निष्पादित अनुबन्ध के अनुसार विपक्षी द्वारा wat यूनिट का कब्जा 05 वर्ष एवं 06 माह की अनुग्रह अवधि के साथ उपलब्ध कराया जाना था, परन्तु विपक्षी द्वारा अभी तक उक्त यूनिट का कब्जा उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही अभी तक परियोजना से सम्बन्धित आवश्यक चारों अनापत्ति प्रमाण-पत्र व ओ. सी. / सी.सी. प्राप्त नहीं किया गया है, जबकि उनके द्वारा यूनिट के कुल बिक्री मूल्य का 95% धनराशि का भुगतान किये जाने के बावजूद भी विपक्षी द्वारा अनुचित धनराशि की मांग की जा रही है। उपर्युक्त वर्णित तथ्यों एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विपक्षी द्वारा की जा रही सभी अवैध मांगों को वापस लेने तथा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही Page 0
|. पर विपक्षी द्वारा लिखित बहस प्रस्तुत करते हुए यह डा किया गया है कि शिकायतकर्ता द्वारा परियोजना THE DOWNTOWN के ciax-KG में 2" फ्लोर पर आवंटन अनुबन्ध पत्र दिनांक 44.0.2044 के माध्यम से CLP प्लान के अन्तर्गत यूनिट wen-i25 बुक करायी गयी eft) विपक्षी कंपनी के पास उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार शिकायतकर्ता द्वारा भुगतान की गयी धनराशि स्वीकार की जाती है। शिकायतकर्ता द्वारा गलत सूचना प्रदान की गयी है कि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. /सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण को आवेदन नहीं किया गया है, जबकि विपक्षी द्वारा परियोजना के ओ.सी. / सी.सी. हेतु सक्षम विकास प्राधिकरण के समक्ष दिनांक 22.40.2024 को आवेदन किया जा चुका है। विपक्षी द्वारा vat यूनिट के सापेक्ष शिकायतकर्ता को अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने हेतु विभिन्न दिनांक 23.04.2024, 46.02.2024, 04.04.2024 को ई-मेल के माध्यम से अनुस्मारक पत्र प्रेषित किये गये, परन्तु शिकायतकर्ता अपनी अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने में विफल रहा है। शिकायतकर्ता एक डिफॉल्टर है तथा उनके द्वारा सहमत भुगतान योजना अर्थात CLP प्लान के अन्तर्गत अपनी अवैशेष देय धनराशि का भुगतान न करने के कारण विपक्षी द्वारा दिनांक 40.02.2025 को यूनिट निरस्तीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ करते हुए नोटिस जारी किया गया, जिसमें शिकायतकर्ता से var नोटिस प्राप्त होने की तिथि. से 05 दिनों के भीतर अवशेष देय धनराशि का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। यह भी स्पष्ट रूप से कहा गया था कि भुगतान न करने पर विपक्षी, बुक की गयी यूनिट को निरस्त करने के लिए बाध्य होगा। शिकायतकर्ता द्वारा अनुपालन न करने पर विपक्षी द्वारा विधिवत दिनांक 05.03.2025 को निरस्तीकरण पत्र जारी किया गया, जिस कारण शिकायतकर्ता द्वारा कब्जे हेतु मांगा गया अनुतोष स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है, क्योंकि शिकायतकर्ता द्वारा अपनी देय धनराशि के भुगतान में की गयी चूक के कारण विपक्षी द्वारा निरस्तीकरण पत्र दिनांक 05.03.2025 के माध्यम से var यूनिट का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। उक्त यूनिट को आवंटन अनुबन्ध के सहमत नियमों एवं शर्तों व उ.प्र. Rr नियम, 2048 के नियम-9.3 के अनुसार निरस्त किया गया है और शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(0) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में नहीं आता है। उपर्युक्त तथ्यों एवं वर्णित परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए शिकायतकर्ता रेरा अधिनियम, 2046 की aad) के अन्तर्गत आवंटी की श्रेणी में न आने के कारण प्रश्नगत शिकायत खारिज किये जाने व आवंटन अनुबन्ध के अनुसार 5% धनराशि जब्त कर शेष धनराशि शिकायतकर्ता को वापस किये
Ky Ss \ - जाने हेतु स्वतंत्रता प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। ee as | है में wi we रेरा एक्ट की धारा is (॥) में प्राविधान है कि :- Page ] he 2 RADY छः g AM गौतमबुद्धगगर / BD ५2 cS Section 48 (l) “If the promoter fails to complete or is unable to give possession of an apartment, plot or building,- (a) in accordance with the terms of the agreement for sale or, as the case may be, duly completed by the date specified therein; or (b) due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under this Act or for any other reason, he shall be liable on demand to the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice to any other remedy available, to return the amount received by him in respect of that apartment, plot, building, as the case may be, with interest at such rate as may be prescribed in this behalf including compensation in the manner as provided under this Act: Provided that where an allottee does not intend to withdraw from the project, he shall be paid, by the promoter, interest for every month of delay, till the handing over of the possession, at such rate as may be prescribed.
इस प्रकार क्रेता को यह अधिकार है कि यदि उन्हें एग्रीमेंट के अनुरूप कब्जा नहीं मिलता है तो वह अपनी जमा धनराशि -को ब्याज सहित वापस माँग सकते हैं अथवा प्रत्येक माह के विलम्ब हेतु ब्याज प्राप्त करते हुए परियोजना में बने रहें, परन्तु प्रश्नगत प्रकरण में शिकायतकर्ता द्वारा कब्जा एवं विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का अनुरोध किया गया है। भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2046 की eet—s4(4)(b) में स्पष्ट रूप से vectra है कि प्रोमोटर का यह दायित्व होगा कि वह परियोजना का ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त कर, उसे आवंटी को उपलब्ध करायें। उ.प्र. भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) (विक्रय,/पट्टा के लिए करार अनुबन्ध) नियमावली, 2048 के प्रस्तर-7.2 में कब्जा ऑफर किये जाने के सम्बन्ध में यह उललेखित है कि परियोजना का ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने के उपरान्त ही प्रमोटर, शिकायतकर्ता (आवंटी) को लिखित में यूनिट का कब्जा ऑफर करेंगे। पत्रावली पर शिकायतकर्ता द्वारा फ्लैट आवंटन/अनुबन्ध पत्र दिनांकित 44.:0.204 की छायाप्रति दाखिल की गयी है, जो उभयपक्षों के मध्य निष्पादित है, जिसके पृष्ठ संख्या-09 के प्रस्तर-26 में उल्लेख किया गया है कि विपक्षी द्वारा आवंटन »/अनुबन्ध पत्र निष्पादित किये जाने की तिथि से 05 वर्ष एवं 06 Page 2 = की अनुग्रह अवधि में परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर शिकायतकर्ता को उनकी यूनिट का कब्जा उपलब्ध करा दिया जाएगा, ऐसे में उपरोक्तानुसार शिकायतकर्ता दिनांक 43.04.2020 तक यूनिट का कब्जा aA का अधिकारी था, परन्तु विपक्षी द्वारा निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं दिया गया है।
जहां तक किस अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाये जाने का प्रश्न है, तो इस सम्बंध में सिविल अपील संख्या-6649-50 /20:8 “सुपरटेक लिमिटेड बनाम रजनी गोयल“ में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :- "the period of Interest should close on April 206 when the Full Occupancy Certificate was obtained as per the admission of the Respondent — Purchaser herself in Para 4(j) of the Consumer Complaint, wherein she has admitted that the Appellant - Builder had obtained the Completion Certificate as late as April 20l6. The Respondent — Purchaser could not have any further grievance after April 20l6 with respect to delay in handing over possession. The Respondent — Purchaser ought not to be allowed to reap the benefits of her own delay in taking possession." उपरोक्त विधि व्यवस्था के अनुसार ओ.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता विलम्ब ब्याज पाने का अधिकारी होगा। यह भी स्पष्ट है कि विपक्षी द्वारा परियोजना को अनुबन्धानुसार पूर्ण नहीं किया गया है, ऐसी दशा में शिकायतकर्ता को दिनांक 44.04.2020 से ओ.सी. /सी.सी. प्राप्त होने अथवा कब्जा ऑफर किये ar की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। इस सम्बन्ध में उल्लेखनीय है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के “नीलकमल Raced सबअर्बन प्रा.लि. आदि बनाम यूनियन ऑफ इंडिया“ की याचिका में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अभिनिर्धारित किया गया है कि :-
"Section 8(])(b) lays down that if the promoter fails to complete or is unable to give possession of an aprtment due to discontinuance of his business as a developer on account of suspension or revocation of the registration under the Act or for any other reason, he is liable on Page 3 ८#- = the allottees, in case the allottee wishes to withdraw from the project, without prejudice in this behalf including compensation. If the allottee does not intent to withdraw from the project he shall be paid by the promoter interest for every month's delay till handing over of the possession,. The requirement to pay interest is not a penalty as the payment of interest is compensatory in nature in the light of the delay suffered by the allottee who has paid for his apartment but has not received possession of it. The obligation imposed on the promoter to pay interest till such time as the apartment is handed over to him is not unreasonable." अतः उपरोक्त निर्णय के आलोक में यह स्पष्ट है कि उ.प्र. रेरा के प्राविधानों के seta प्रमोटर व क्रेता के बीच किये गये अनुबंध के अनुरूप विलम्ब तथा मूल धनराशि पर ब्याज देय होगा, क्योंकि प्रमोटर्स द्वारा vat धनराशि का उपभोग किया गया है। रेरा एक्ट की धारा 2(za) F प्राविधान है कि :- (za) "interest" means the rates of interest payable by the promoter or the allottee, as the case may be. Explanation.—For the purpose of this clause—
(i) the rate of interest chargeable from the allottee by the promoter, in case of default, shall be equal to the rate of interest which the promoter shall be liable to pay the allottee, in case of default; (ii) the interest payable by the promoter to the allottee shall be from the date the promoter received the amount or any part thereof till the date the amount or part thereof and interest thereon is refunded, and the interest payable by the allottee to the promoter shall be from the date the allottee defaults in payment to the promoter till the date it is paid; जहां तक देय ब्याज दर का प्रश्न है, तो राज्य सरकार द्वारा भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास) अधिनियम 20I6 के अधीन दिनांक 47.40.2048 को भू-सम्पदा (विनियमन और विकास) (विक्रय /पट्टा के लिए करार) नियमावली 20i8 अधिसूचित की गयी हैं। इसमें संलग्नक के रूप में दिये गये विक्रय / पट्टा विलेख के प्रारूप के प्रस्तर-9 में प्रमोटर्स के डिफाल्ट प्रकरण vents of default) परिभाषित है, जिसमें प्रस्तर-9.2(7) में प्रमोटर के डिफाल्टर की स्थिति में आवंटी हेतु प्राविधानित है कि:- Page 4 es Allottee shall have the option of terminating the Agreement in which case the Promoter shall be liable to refund the entire money paid by the Allottee under any head whatsoever towards the purchase of the apartment, along with interest at the rate equal to MCLR (Marginal Cost of Lending Rate) on home loan of State Bank of India +% unless provided otherwise under the Rules. within forty-five days of receiving the termination notice:"'
यही दर आवंटियों के द्वारा डिफॉल्ट की स्थिति में भी प्रस्तर 9.30) में निर्धारित है। उक्त प्राविधान को दृष्टिगत रखते हुए आवंटी को MCLR+I प्रतिशत की ब्याज दर पर विलम्बित अवधि का ब्याज दिलाया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि शिकायतकर्ता की कोई देय धनराशि में विलम्ब है, तो विपक्षी भी ॥४0.४+ प्रतिशत की दर से ही ब्याज प्राप्त सकता है, जिसे माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा Re याचिका संख्या- सी: 9420 / 2020, “Habitech Infrastructure Ltd. Versus State Of U.P. & Ors.” में भी उचित एवं विधिपूर्ण मानां गया है। ऐसे में उ.प्र. राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की गयी भू-सम्पदा (विनियमन एवं विकास), (विक्रय // पट्टा के लिए करार) नियमावली, 2048 के अन्तर्गत निर्धारित की गयी वार्षिक ब्याज दर MCLR+ प्रतिशत, जो कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की अधिकतम ब्याज दर से | प्रतिशत ज्यादा है, उचित एवं सही है। इसके अतिरिक्त दिनांक i7.40.20I8 को उ.प्र. शासन आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-3 की अधिसूचना संख्या-4740 / 8-3-48-65 विविध, 46 के द्वारा मॉडल एग्रीमेन्ट के प्रस्तर-7 में फोर्स मैज्योर के सम्बन्ध में निम्न उल्लेख किया गया है :- 7. POSSESSION OF THE APARTMENT/PLOT:
"7. Schedule for possession of the said [Apartment/Plot] - The Promoter agrees and understands that timely delivery of possession of the [Apartment/Plot] to the Allottee and the Common Areas to ee हक association of Allottees or the competent authority, as the case may be, is the essence of the Agreement. The Promoter assures to hand over possession of the [Apartment/Plot] along with ready and complete Common Areas with all specifications, amenities and facilities of the Project in place on , unless there is delay or Page 5 कर due to war, flood, drought, fire, cyclone, earthquake or any other calamity caused by nature affecting the regular development of the real estate project ("Force Majeure"). If, however, the completion of the Project is delayed due to the Force Majeure conditions then the Allottee agrees that the Promoter shall be entitled to the extension of time for delivery of possession of the [Apartment/Plot]:" इसी क्रम में समस्त सुसंगत तथ्यों के बाद उ.प्र. wer अथॉरिटी द्वारा दिनांक 06.06.2020 को कोविड-49 (Corona Virus Disease) के प्रभाव के कारण सभी परियोजनाओं को पूर्ण करने हेतु दिनांक 25.03.2020 से 6 माह की अवधि अर्थात् दिनांक 25.09.2020 तक की अवधि दे दी गयी है और यह अवधि फोर्स मैज्योर की अवधि मानी जायेगी। इसको दृष्टिगत रखते हुए दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रमोटर द्वारा आवंटियों को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। तद्नुसार बिन्दु संख्या-02 faa किया जाता है।
उपरोक्त बिन्दुओं का निस्तारण करते हुए निम्न आदेश पारित किये जाते हैं :- आदेश 4. विपक्षी को आदेशित किया जाता है कि वह आदेश पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों के अन्दर शिकायतकर्ता की यूनिट को पुनर्स्थापित करते हुए, आवंटन »अनुबन्ध पत्र के अनुसार समस्त सुविधाओं को-पूर्ण कराकर, Wee प्लान के अनुरूप संशोधित मांग पत्र जारी कर, शिकायतकर्ता से अवशेष देय धनराशि प्राप्त करते हुए, ओ.सी. / सी.सी. सहित प्रश्नगत यूनिट का भौतिक कब्जा देना सुनिश्चित करें और शिकायतकर्ता से ea very शुल्क प्राप्त कर, शिकायतकर्ता के पक्ष में नियमानुसार रजिस्ट्री निष्पादित कराना सुनिश्चित करें | 2... विपक्षी, शिकायतकर्ता को दिनांक 44.04.2020 से ओ.सी. / सी.सी. प्राप्त होने की तिथि अथवा विधिक कब्जा ऑफर पत्र प्रेषित किये जाने की तिथि, जो भी बाद में हो, की अवधि तक शिकायतकर्ता द्वारा जमा धनराशि पर MCLR+ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से विलम्बित अवधि का ब्याज अदा करना सुनिश्चित करें। aifas—i9 के दृष्टिगत दिनांक 25.03.2020 से दिनांक 25.09.2020 तक परियोजना में हुए विलम्ब हेतु कोई ब्याज प्रम्मोटर द्वारा शिकायतकर्ता को नहीं दिया जाएगा और न ही शिकायतकर्ता से कोई विलम्ब ब्याज लिया जायेगा। Page 6
= को यह भी निर्देशित किया जाता है कि रेरा अधिनियम, 2046 की धारा-2(४४)() के अनुसार यदि रेरा लागू होने के बाद कोई ब्याज दर आवंटी के डिफॉल्ट से प्रोमोटर द्वारा लिया जाता है, तो उसी दर से ब्याज प्रोमोटर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने पर भी आवंटी को दिया जायेगा। अतः विलम्बित भुगतान पर शिकायतकर्ता द्वारा भी MCLR+ प्रतिशत की ब्याज दर से ब्याज देय होगा। यदि इससे अधिक दर से कोई धनराशि रेरा लागू होने के बाद आवंटी से विलम्ब हेतु ली गयी है, तो विलम्बित अवधि हेतु ब्याज की धनराशि की भी उसी दर से गणना की जायेगी। विपक्षी को यह भी आदेशित किया जाता है कि वह शिकायतकर्ता को wed यूनिट का कब्जा प्रदान करते समय सभी चार्जेस आवंटन अनुबन्ध पत्र के अनुरूप ही अधिरोपित करेंगे। इस आदेश का उल्लघंन भू-सम्पदा (विनियमन तथा विकास) अधिनियम, 2046 की धारा-38, 40(2) एवं 63 तथा अन्य सुसंगत प्राविधानों के अन्तर्गत दंडनीय होगा। शिकायतकर्ता को यह निर्देशित किया जाता है कि यदि विपक्षी द्वारा 45 दिनों के अन्दर उपर्युक्त आदेश का अनुपालन नहीं किया जाता है, तो शिकायतकर्ता “रेरा पोर्टल” के माध्यम से आदेश के क्रियान्वयन हेतु अनुरोध अपलोड कर, उसकी भौतिक प्रति रेरा क्षेत्रीय कार्यालय, ग्रेटर नोएडा में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। आदेश पोर्टल पर अपलोड किया जाए। Tee पत्रावली दाखिल-दफ्तर हो। ०७०१ टी. वेंकटेश (सदस्य) उ.प्र. भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण रह SEE RE SS A OSE I Page 7